Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Chapter 13: वर्णमात्रा-परिचयः — Grammar section

Original notes — ready CBSE (NCERT, English Medium) • Class 7 • Sanskrit • Book: Deepakam — Part 2

Print se browser se PDF save kar sakte hain. Yeh textbook PDF nahi hai.

Deepakam — Part 2 • Chapter 13

मात्रा का विज्ञान — ह्रस्व 1, दीर्घ 2, प्लुत 3, व्यञ्जन आधी; और शब्दों की मात्रा-गणना

वर्णमात्रा-परिचयः — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Deepakam — Part 2 (CBSE, Class 7)  |  Chapter 13  |  Medium: Sanskrit (सरल Hindi व्याख्या सहित)

यह अध्याय व्याकरण-विभाग का है। इसमें पुस्तक के पाठ की कथा नहीं, बल्कि व्याकरण-विषय को EG के अपने शब्दों में समझाया गया है।

Labelled diagram for वर्णमात्रा-परिचयः

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मात्राओं का अभ्यास कराता श्यामपट्ट। व्याकरण-विषय की सामान्य तस्वीर है, पुस्तक का दृश्य नहीं।

Illustration for वर्णमात्रा-परिचयः

लिखने का अभ्यास करते बच्चे। पाठ के विषय की सामान्य तस्वीर।

यह परिशिष्ट क्यों है?

पिछली कक्षा के वर्णमाला-पाठ में स्वरों की दो मात्राएँ ही दिखाई गई थीं — ह्रस्व और दीर्घ। इस परिशिष्ट में स्वरों की तीसरी मात्रा भी बताई गई है — प्लुत। साथ ही यह भी बताया गया है कि व्यञ्जनों की मात्रा कितनी होती है, और किसी भी शब्द की कुल मात्रा कैसे गिनी जाती है।

स्वरों की तीन मात्राएँ और व्यञ्जन की आधी मात्रा

वर्ण-भेदमात्राअर्थ
ह्रस्व स्वर1 मात्रा (एकमात्र)कम समय में बोला जाने वाला स्वर — जैसे अ, इ, उ
दीर्घ स्वर2 मात्रा (द्विमात्र)दुगुने समय में बोला जाने वाला स्वर — जैसे आ, ई, ऊ
प्लुत स्वर3 मात्रा (त्रिमात्र)तीन गुने समय में बोला जाने वाला स्वर — दूर से पुकारने या गाने में
व्यञ्जन½ मात्रा (अर्धमात्र)हर व्यञ्जन नित्य आधी मात्रा का ही होता है

संस्कृत में कुल 22 स्वर होते हैं (ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत — तीनों भेदों को मिलाकर)। याज्ञवल्क्य-शिक्षा का प्रसिद्ध नियम इसी को सूत्र में कहता है — एक मात्रा वाला ह्रस्व, दो मात्रा वाला दीर्घ, तीन मात्रा वाला प्लुत, और व्यञ्जन आधी मात्रा वाला होता है। ध्यान रहे: ये तीन मात्राएँ केवल स्वरों में होती हैं, व्यञ्जनों में नहीं; व्यञ्जनों की एक ही मात्रा है — आधी।

प्लुत स्वर कब प्रयुक्त होता है?

प्लुत स्वरों का प्रयोग प्रायः दो सन्दर्भों में अधिक होता है — (1) दूर से किसी को पुकारने में, और (2) गाने/स्तुति में स्वर को खींचकर बोलने में। पहले पाठों में सरलता के लिए केवल दो मात्राएँ दिखाई गई थीं; वस्तुतः संस्कृत के सभी स्वरों का प्लुत उपभेद भी होता है।

प्रकृति में मात्राएँ — पक्षियों की ध्वनियाँ

पाणिनीय-शिक्षा का प्रसिद्ध उदाहरण पक्षियों की ध्वनियों से मात्राएँ समझाता है — भाव अपने शब्दों में:

पक्षी/पशुध्वनि का कालकिसके समान
चाष (नीलकण्ठ) पक्षी1 मात्राह्रस्व स्वर के समान
वायस (काक) पक्षी2 मात्रादीर्घ स्वर के समान
शिखी (मयूर) पक्षी3 मात्राप्लुत स्वर के समान
नकुल (नेवला) पशु½ मात्राव्यञ्जन के समान

मात्रा-गणना-क्रीडा — शब्द की कुल मात्रा कैसे गिनें?

विधि: शब्द को वर्णों में तोड़ो; प्रत्येक हलन्त व्यञ्जन ½, ह्रस्व स्वर 1, दीर्घ स्वर 2, विसर्ग (:) ½ गिनो; सब जोड़ दो। स्वर-युक्त व्यञ्जन में भी यही नियम है — जैसे ‘का’ = क् (½) + आ (2) = 2½।

शब्दवर्ण-विभाजनकुल मात्रा
रामःर् + आ + म् + अ + : 4½ मात्राएँ
सीतास् + ई + त् + आ5 मात्राएँ
हनूमान्ह् + अ + न् + ऊ + म् + आ + न्7 मात्राएँ
भरतःभ् + अ + र् + अ + त् + अ + :5 मात्राएँ
कौसल्याक् + औ + स् + अ + ल् + य् + आ7 मात्राएँ (संयुक्त व्यञ्जन सहित)
लक्ष्मणःल् + अ + क् + ष् + म् + अ + ण् + अ + :6 मात्राएँ

मात्रा-गणना की जाँच स्वयं करो: ‘रामः’ में र् (½) + आ (2) + म् (½) + अ (1) + : (½) = 4½। ‘सीता’ में स् (½) + ई (2) + त् (½) + आ (2) = 5। यही विधि हर शब्द पर लागू होती है — संयुक्त व्यञ्जनों में भी प्रत्येक हलन्त वर्ण आधी मात्रा का गिना जाता है।

मुख्य शब्द

  • वर्णः — अक्षर, ध्वनि का लिखित रूप।
  • मात्रा — स्वर के उच्चारण-काल की माप; व्यञ्जन के साथ मिलने पर स्वर का चिह्न-रूप भी मात्रा कहलाता है।
  • ह्रस्वः — एक मात्रा वाला स्वर।
  • दीर्घः — दो मात्रा वाला स्वर।
  • प्लुतः — तीन मात्रा वाला स्वर।
  • अर्धमात्रिकम् — आधी मात्रा वाला (व्यञ्जन)।
  • स्वरः — स्वयं बोला जाने वाला वर्ण (अ, आ, इ, ई…)।
  • व्यञ्जनम् — स्वर की सहायता से बोला जाने वाला वर्ण (क्, ख्, ग्…)।
  • स्पर्शाः / अन्तःस्थाः / ऊष्माणः — व्यञ्जनों के भेद (पहले पाठ से)।
  • अयोगवाहौ — अनुस्वार और विसर्ग।
सामान्य गलती

‘इ’ की मात्रा (ि) को बाद में लगाना — याद रखो, ‘इ’ की मात्रा व्यञ्जन से पहले लिखी जाती है, परन्तु बोली बाद में जाती है (जैसे ‘कि’ = क् + इ)। और ‘अ’ की मात्रा छिपी होती है — ‘क’ में ‘अ’ पहले से मिला हुआ माना जाता है, इसलिए ‘क’ = क् + अ।

परीक्षा टिप

मात्रा-गणना में विसर्ग (:) को ½ गिनना न भूलो — ‘रामः’ और ‘भरतः’ की गणना में वही ½ अन्तर बनाता है।

Recap — एक नज़र में
  • ह्रस्व 1, दीर्घ 2, प्लुत 3 मात्राएँ; व्यञ्जन सदा ½।
  • कुल स्वर: 22 (तीनों भेद मिलाकर)। तीन मात्राएँ केवल स्वरों में।
  • प्लुत: दूर से पुकारने और गाने में।
  • चाष 1, वायस 2, शिखी 3, नकुल ½।
  • गणना: रामः 4½, सीता 5, हनूमान् 7, भरतः 5, लक्ष्मणः 6।

अभ्यास — स्वयं करके देखो

  1. मात्रा किसे कहते हैं?
    Hint: स्वर के चिह्न-रूप की बात सोचो।
  2. 'अ' की मात्रा क्यों नहीं दिखती?
    Hint: छिपी मात्रा की बात सोचो।
  3. 'इ' की मात्रा कहाँ लगती है?
    Hint: पहले या बाद में — ध्यान से सोचो।
  4. 'का' और 'कि' में क्या अंतर है?
    Hint: मात्रा के स्थान से सोचो।
  5. गलत मात्रा से क्या हानि होती है?
    Hint: उच्चारण और अर्थ की बात सोचो।

प्रश्न और उत्तर

  1. मात्रा किसे कहते हैं?
    जब कोई स्वर किसी व्यंजन के साथ मिलता है, तो वह अपने स्वतन्त्र रूप को छोड़कर चिह्न का रूप ले लेता है। इसी चिह्न को मात्रा कहते हैं।
  2. 'अ' की मात्रा कैसी होती है?
    'अ' की मात्रा छिपी होती है — वह लिखी नहीं जाती। 'क' में 'अ' पहले से ही मिला हुआ माना जाता है, इसलिए 'क' का अर्थ 'क् + अ' होता है।
  3. 'इ' की मात्रा कहाँ लगती है?
    'इ' की मात्रा (ि) व्यंजन से पहले लिखी जाती है, परन्तु बोली व्यंजन के बाद जाती है। जैसे 'कि' में मात्रा पहले दिखती है, परन्तु पढ़ते समय 'क् + इ' बोलते हैं।
  4. मात्राओं को ठीक से जानना क्यों आवश्यक है?
    क्योंकि गलत मात्रा से शब्द का उच्चारण बदल जाता है और कभी-कभी अर्थ भी बदल जाता है। शुद्ध लेखन और शुद्ध उच्चारण के लिए मात्राओं का ठीक ज्ञान आवश्यक है।
  5. मात्राओं का अभ्यास कैसे करना चाहिए?
    पहले मात्रा पहचानो, फिर मात्रा लगाकर शब्द बनाओ, फिर उन शब्दों को बोलकर और लिखकर अभ्यास करो। लिखने और बोलने — दोनों तरह के अभ्यास से मात्रा पक्की होती है।

अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — NCERT अभ्यास के प्रकारों पर

  1. ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत स्वरों की मात्राएँ कितनी-कितनी होती हैं?
    ह्रस्व स्वर एक मात्रा का, दीर्घ स्वर दो मात्रा का और प्लुत स्वर तीन मात्रा का होता है।
  2. व्यञ्जन की मात्रा कितनी होती है?
    व्यञ्जन नित्य अर्धमात्रिक (आधी मात्रा का) होता है — हर व्यञ्जन की मात्रा ½ ही गिनी जाती है।
  3. संस्कृत में कुल कितने स्वर होते हैं?
    संस्कृत में तीनों भेदों (ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत) को मिलाकर कुल 22 स्वर होते हैं।
  4. प्लुत स्वरों का प्रयोग प्रायः किन दो सन्दर्भों में होता है?
    प्लुत स्वरों का प्रयोग प्रायः दूर से पुकारने में और गाने/स्तुति में स्वर खींचकर बोलने में होता है।
  5. चाष, वायस, शिखी और नकुल की ध्वनियाँ किन मात्राओं के समान हैं?
    चाष (नीलकण्ठ) की ध्वनि एक मात्रा (ह्रस्व) के समान, वायस (काक) की दो मात्रा (दीर्घ) के समान, शिखी (मयूर) की तीन मात्रा (प्लुत) के समान और नकुल की आधी मात्रा (व्यञ्जन) के समान है।
  6. ‘रामः’ की मात्रा-गणना समझाओ।
    रामः = र् (½) + आ (2) + म् (½) + अ (1) + : (½) = 4½ मात्राएँ।
  7. ‘सीता’ और ‘हनूमान्’ की कुल मात्राएँ कितनी हैं?
    ‘सीता’ की कुल 5 मात्राएँ हैं (½+2+½+2) और ‘हनूमान्’ की कुल 7 मात्राएँ हैं (½+1+½+2+½+2+½)।
  8. ‘लक्ष्मणः’ की मात्रा-गणना करो।
    लक्ष्मणः = ल् (½) + अ (1) + क् (½) + ष् (½) + म् (½) + अ (1) + ण् (½) + अ (1) + : (½) = 6 मात्राएँ।
  9. ‘इ’ की मात्रा कहाँ लगती है और ‘अ’ की मात्रा क्यों नहीं दिखती?
    ‘इ’ की मात्रा (ि) व्यञ्जन से पहले लिखी जाती है, परन्तु बोली बाद में जाती है। ‘अ’ की मात्रा छिपी होती है — ‘क’ में ‘अ’ पहले से मिला हुआ माना जाता है, इसलिए वह लिखी नहीं जाती।

परियोजना / कक्षा-कार्य: अपने नाम और पाँच मित्रों के नामों की मात्रा-गणना करो; दूर से पुकारने में प्लुत स्वर का प्रयोग करके तीन वाक्य बोलो और लिखो।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, तालिकाएँ बिना देखे दोहराओ, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

← पिछला: Chapter 12: वीराङ्गना पन्नाधायाअगला: Chapter 14: शब्दरूपाणि →