Chapter 1: संख्या पद्धति
परिमेय और अपरिमेय संख्याओं की पहचान, संख्या रेखा पर निरूपण और आवर्ती दशमलव का p/q रूप।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 9 • Mathematics • Book: Ganit (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
संख्या पद्धति — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Ganit (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 9) | अध्याय 1 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): संख्या रेखा पर संख्या परिवारों की जगह — लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है।

बाज़ार में तराज़ू पर सामान तौलता दुकानदार — गिनती और माप रोज़मर्रा की संख्याओं से ही चलते हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): संख्या रेखा पर 1/2 (परिमेय) और √2 (अपरिमेय) की जगह।
इस अध्याय के बारे में
संख्या पद्धति का मतलब है — संख्याओं के परिवारों को समझना। प्राकृतिक संख्याएँ गिनती से शुरू होती हैं, पूर्णांक में शून्य और ऋणात्मक संख्याएँ जुड़ जाती हैं, और परिमेय संख्याएँ p/q के रूप में लिखी जाती हैं। इनके बाद अपरिमेय संख्याएँ आती हैं, जैसे √2, जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
संख्या रेखा पर हर वास्तविक संख्या की एक जगह होती है। परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा और परिमेय संख्याएँ मिलती हैं, इसलिए वे रेखा पर घनी होती हैं। दशमलव प्रसार से भी पहचान होती है — परिमेय संख्याओं का दशमलव या तो समाप्त हो जाता है या आवर्ती होता है, जबकि अपरिमेय का न समाप्त होता है, न दोहराता है।
इस अध्याय का काम का कौशल है — किसी संख्या को देखकर बताना कि वह किस परिवार की है, और आवर्ती दशमलव को p/q रूप में बदलना।
क्या सीखना है
परिमेय और अपरिमेय संख्याओं की पहचान, संख्या रेखा पर निरूपण और आवर्ती दशमलव का p/q रूप।
मुख्य शब्द
- प्राकृतिक संख्या (Natural Number) — गिनती की संख्याएँ 1, 2, 3, …।
- पूर्णांक (Integer) — … −2, −1, 0, 1, 2, … — ऋणात्मक, शून्य और धनात्मक संख्याएँ।
- परिमेय संख्या (Rational Number) — p/q रूप वाली संख्या, जहाँ q शून्य न हो।
- अपरिमेय संख्या (Irrational Number) — जिसे p/q के रूप में न लिखा जा सके, जैसे √2 और π।
- वास्तविक संख्या (Real Number) — परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का पूरा परिवार।
याद रखें
- हर परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार या तो सांत होता है या आवर्ती।
- √2, √3, √5 जैसी संख्याएँ अपरिमेय होती हैं।
- दो परिमेय संख्याओं के बीच अनगिनत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- शून्य से भाग कभी परिभाषित नहीं होता।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: √4 को अपरिमेय समझ लेना। √4 = 2 है, जो परिमेय है। पहले वर्गमूल का मान देखें, फिर परिवार तय करें।
Chart / Table: संख्या परिवारों की पहचान
| बिंदु | विवरण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1, 2, 3 | प्राकृतिक | गिनती की संख्याएँ |
| 0, −5, 12 | पूर्णांक | शून्य और ऋणात्मक भी शामिल |
| 3/4, −2/7 | परिमेय | p/q रूप, दशमलव सांत या आवर्ती |
| √2, √7 | अपरिमेय | दशमलव न सांत, न आवर्ती |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- 7/8 का दशमलव प्रसार सांत होगा या आवर्ती?
संकेत: हर के गुणनखंड 2 और 5 देखें। - √9 परिमेय है या अपरिमेय?
संकेत: पहले √9 का मान निकालें। - 0.333… को p/q रूप में लिखें।
संकेत: x = 0.333… मानकर 10x से घटाएँ। - 2/3 और 3/4 के बीच एक परिमेय संख्या बताएँ।
संकेत: हर समान बनाकर बीच की संख्या खोजें। - π परिमेय है या अपरिमेय?
संकेत: 22/7 केवल π का सन्निकट मान है।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- परिमेय संख्या किसे कहते हैं?
जिस संख्या को p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों और q शून्य न हो, वह परिमेय संख्या कहलाती है। जैसे 3/4 और −5/6। - अपरिमेय संख्या का एक उदाहरण सहित अर्थ बताएँ।
जिस संख्या को p/q के रूप में न लिखा जा सके, वह अपरिमेय है। √2 इसका उदाहरण है — इसका दशमलव प्रसार न समाप्त होता है, न दोहराता है। - 0.333… को p/q रूप में बदलें।
मान लें x = 0.333…। तब 10x = 3.333…। घटाने पर 9x = 3, इसलिए x = 3/9 = 1/3। - संख्या रेखा पर √2 कैसे दिखाते हैं?
1 इकाई भुजा वाला वर्ग बनाएँ — इसका विकर्ण √2 लंबाई का होता है। परकार से इस लंबाई को संख्या रेखा पर उतारते हैं, वही बिंदु √2 है। - क्या हर पूर्णांक परिमेय संख्या है?
हाँ। किसी भी पूर्णांक n को n/1 के रूप में लिखा जा सकता है, इसलिए हर पूर्णांक परिमेय संख्या है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
- हर परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार या तो सांत होता है या आवर्ती।
- √2, √3, √5 जैसी संख्याएँ अपरिमेय होती हैं।
- दो परिमेय संख्याओं के बीच अनगिनत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- शून्य से भाग कभी परिभाषित नहीं होता।

