दो बैलों की कथा
लेखक: प्रेमचंद — झूरी के बैल हीरा और मोती की मित्रता, विद्रोह और घर वापसी की कहानी।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 9 • Hindi • Book: Ganga • गद्य खंड
यह पृष्ठ NCERT की NEP पुस्तक के Educational Galaxy नोट्स का हिंदी संस्करण है, जो बिहार बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। बिहार बोर्ड द्वारा इस पुस्तक को निर्धारित किए जाने का दावा नहीं किया जाता।
दो बैलों की कथा — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Ganga (BSEB, कक्षा 9) | अध्याय 1 | लेखक: प्रेमचंद | माध्यम: Hindi

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): दो मित्र बैल हरे खेत में एक साथ — मित्रता और साथ का सामान्य चित्र, पुस्तक का दृश्य नहीं।

गाँव की सड़क पर बैलगाड़ी — ग्रामीण जीवन की सामान्य तस्वीर।
कहानी का सार
झूरी के दो बैल थे — हीरा और मोती। दोनों पछाईं जाति के, देखने में सुंदर और आपस में अभिन्न मित्र थे। वे एक-दूसरे को चाटकर अपना प्रेम प्रकट करते, नाँद में साथ ही मुँह डालते और साथ ही बैठते। हल या गाड़ी में जोते जाने पर दोनों की चेष्टा होती कि ज़्यादा-से-ज़्यादा बोझ मेरी ही गर्दन पर रहे। झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था; उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।
झूरी की स्त्री के कहने पर दोनों बैल ससुराल भेज दिए गए — गया के घर। वहाँ उन्हें भरपेट भोजन न मिला, डंडे पड़े और अपमान सहना पड़ा। एक छोटी बच्ची ने उन्हें एक रोटी दी और उनका दुख समझा। मटर के खेत में चरते समय मोती पकड़ा गया तो हीरा भी वापस आ गया; दोनों काँजीहौस में बंद कर दिए गए। वहाँ कैद पशुओं की दुर्दशा देखकर दोनों में विद्रोह की ज्वाला भड़क उठी। उन्होंने दीवार गिराकर दूसरे जानवरों को भगा दिया, जिससे नौ-दस प्राणियों की जान बच गई।
काँजीहौस के मालिक ने एक सप्ताह बाद जानवरों को कसाई के हाथों बेच दिया। एक दढ़ियल आदमी हीरा-मोती को ले जाने लगा। चलते-चलते उन्हें परिचित राह मिली और वे दौड़ते हुए झूरी के द्वार पर आ खड़े हुए। झूरी खुशी से फूल उठा; दढ़ियल ने ज़ोर-ज़बरदस्ती की तो मोती ने सींग चलाकर उसे दूर तक खदेड़ दिया। मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए। कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' से लेखक ने उन्हें मनुष्य जैसी चेतना दी है — हीरा कहता है कि गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए, मोती कहता है कि बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे। दोनों का अपना तर्क है, पर मित्रता दोनों में एक-सी है।
स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़
कहानी जिस समय लिखी गई, भारत पर अंग्रेज़ों का दमनकारी शासन था। हीरा-मोती का संघर्ष भारतीय जनता के संघर्ष का प्रतीक बन जाता है — "मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा", "जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ" और "हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता" जैसे वाक्य दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की उपेक्षा से जुड़ते हैं। काँजीहौस से जानवरों को भगाना और "इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई" — यह बलिदान और परोपकार का भाव भी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से मिलता है।
लेखक के बारे में
प्रेमचंद (1880–1936) हिंदी के महान कथाकार हैं। उनकी कहानियों में किसान जीवन, पशु-मनुष्य का भावनात्मक संबंध और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध विद्रोह बार-बार आता है। 'दो बैलों की कथा' में पशुओं को मनुष्य जैसी चेतना देकर उन्होंने मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संदेश दिया है।
मुख्य शब्द
- मूक-भाषा — बिना बोले, संकेतों और चेष्टाओं से मन की बात समझना और समझाना।
- काँजीहौस (काइन हाउस) — वह बाड़ा जिसमें दूसरों का खेत खाने वाले या अनाथ पशु बंद किए जाते और कुछ दंड लेकर छोड़े या नीलाम किए जाते हैं।
- नाँद — मिट्टी का बड़ा और चौड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा-पानी दिया जाता है।
- पगहा / पगहिया — ढोर बाँधने की रस्सी।
- कनखी — आँख की कोर, तिरछी निगाह से देखना, आँख का इशारा।
- उन्मत्त — मतवाला, खुशी से बेसुध।
- नीलाम — बोली बोलकर बेचना; सबसे अधिक दाम बोलने वाले के हाथ माल बेचने की रीति।
याद रखें
- हीरा और मोती झूरी के बैल हैं; दोनों पछाईं जाति के और अभिन्न मित्र हैं।
- गया के घर अपमान और मार सहकर भी उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया — "पाँव न उठाने की कसम खा ली थी"।
- काँजीहौस में दीवार गिराकर उन्होंने नौ-दस जानवरों की जान बचाई।
- घर लौटने पर मोती ने दढ़ियल को सींग से खदेड़ा; मालकिन ने दोनों के माथे चूम लिए।
- कहानी का मूल भाव: सच्ची मित्रता, स्वाभिमान, विद्रोह और स्वतंत्रता की चाह।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: केवल "दो बैलों की मित्रता" लिख देना। अच्छे उत्तर में नाम और घटनाएँ भी हों — झूरी, गया, छोटी बच्ची की रोटी, साँड से लड़ाई, काँजीहौस, दढ़ियल — और अंत में संदेश: मित्रता के साथ स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष। 'मूक-भाषा' का अर्थ (बिना बोले मन की बात) अलग से पूछा जाता है।
तालिका: घटना और उसका भाव
| घटना | भाव |
|---|---|
| साथ नाँद में मुँह डालना, ज़्यादा बोझ खुद उठाना | निःस्वार्थ मित्रता |
| गया के यहाँ हल में पाँव न उठाना | स्वाभिमान और असहयोग |
| मोती के पकड़े जाने पर हीरा का वापस आना | विपत्ति में साथ न छोड़ना |
| काँजीहौस की दीवार गिराकर जानवरों को भगाना | विद्रोह और परोपकार |
| दढ़ियल को सींग से खदेड़ना, घर वापसी | स्वतंत्रता और अपनापन पाना |
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
संकेत: प्रतिस्पर्धा, एकता-सहयोग, गर्व या विद्रोह — किसमें से? - हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
संकेत: भोजन, रस्सी, बेचे जाने का अपमान या अलग-अलग बाँधना — क्या कारण था? - बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
संकेत: कष्टों से बचना, स्वतंत्रता पाना, अभिमान की रक्षा या अपनापन — किस भाव से? - गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
संकेत: स्वाभिमान के बारे में सोचो। - 'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
संकेत: भारतीय जनता के संघर्ष के बारे में सोचो।
प्रश्न और उत्तर
- दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी — बैलों ने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
क्योंकि वे अपने को बेचा हुआ और अपमानित महसूस कर रहे थे। झूरी के घर उन्हें प्रेम और सम्मान मिलता था; गया के यहाँ मार और रूखा व्यवहार मिला। स्वाभिमानी प्राणी अपमान की स्थिति में सहयोग करने से इनकार कर देता है — यही उनका मौन विरोध था। - "गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी" — बैलों का घर लौट आना साधारण घटना क्यों नहीं है?
क्योंकि बैल बिना बताए रास्ता पहचानकर, काँजीहौस और कसाई के हाथों से बचकर, अपने मालिक के द्वार तक पहुँचे। इसमें उनकी स्मृति, लगाव और स्वतंत्रता की चाह दिखती है। झूरी के मन में स्नेह और गर्व दोनों उमड़े — उसके बैल उसे भूल नहीं पाए थे। वास्तविक जीवन में भी पालतू पशु अपने घर से गहरा लगाव रखते हैं। - "मोती ने मूक-भाषा में कहा — अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" — 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' — कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
जब सहन की सीमा टूट जाती है, तब संघर्ष ही रास्ता बचता है। काँजीहौस में भूखे-प्यासे जानवरों की दुर्दशा देखकर हीरा-मोती ने दीवार गिरा दी; साँड से लड़ाई में उन्होंने जान हथेली पर लेकर मुकाबला किया; दढ़ियल के सामने मोती ने सींग चलाया। अन्याय सहते रहना भी अन्याय में भागीदारी बन जाता है — इसलिए समय पर संघर्ष आवश्यक है। - "जब पेट भर गया और दोनों ने आज़ादी का अनुभव किया..." — हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
दोनों भावनाएँ जुड़ी हैं, पर अपनापन प्रधान है। मटर खाकर वे स्वतंत्र तो हुए, पर उनकी असली मंज़िल झूरी का घर था — जहाँ प्रेम, सम्मान और अपनापन था। वे भागकर कहीं और नहीं गए, अपने द्वार पर आकर रुके। स्वतंत्रता का अर्थ उनके लिए मनमानी नहीं, अपने घर और अपने आदमी के पास लौटना था। - "उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए" — कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
छोटी लड़की ने गया के घर में, जहाँ बैलों को मार पड़ रही थी, उन्हें रोटी देकर दया दिखाई और भागने में मदद की ("खोले देती हूँ, चुपके से भाग जाओ")। मालकिन (झूरी की स्त्री) ने पहले उन्हें ससुराल भेजने में भूमिका निभाई थी, पर लौटने पर स्नेह से उनके माथे चूम लिए — पश्चाताप और अपनापन दोनों। एक का प्रेम संकट के समय का सहारा था, दूसरी का प्रेम वापसी की स्वीकृति।
विस्तार — और गहराई से
- "बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था" — हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे, यह किन-किन घटनाओं से सिद्ध होता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
(1) साथ नाँद में मुँह डालना और साथ बैठना; (2) हल-गाड़ी में ज़्यादा बोझ खुद उठाने की चेष्टा; (3) मोती के पकड़े जाने पर हीरा का वापस आना; (4) काँजीहौस में एक-दूसरे का साथ न छोड़ना; (5) घर वापसी पर एक साथ दौड़ना। - हीरा और मोती में गिरे हुए बैरी को लेकर मतभेद था — आप किसके साथ हैं और क्यों?
हीरा कहता है कि गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए (दया और मर्यादा); मोती कहता है कि बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे (पूरी जीत)। दोनों तर्कों में बल है — दया मानवीय गुण है, पर शत्रु को फिर उठने का मौका देना भी खतरनाक हो सकता है। अपना पक्ष कारण सहित लिखो; एकतरफ़ा उत्तर नहीं, तर्क ही अंक दिलाता है। - "बैलों का काँजीहौस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है" — कैसे? बैलों की ओर से आप कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
न्याय इस अर्थ में कि खेत खाने वाले पशु को पकड़कर दंड देना व्यवस्था का नियम था; अन्याय इस अर्थ में कि भूखे-प्यासे जानवरों को बिना चारा-पानी के बंद रखना, फिर कसाई को बेच देना क्रूरता है। बैलों के लिए भोजन-पानी, क्रूरता से रक्षा और निर्दयतापूर्वक बेचने पर रोक जैसे अधिकार माँगे जा सकते हैं। - कहानी की भाषा की विशेषताएँ — चित्रात्मकता, संवादात्मकता, विरोधाभास, व्यंग्य, संघर्ष, अतिशयोक्ति, संदेह/उलझन — प्रत्येक का कहानी से एक उदाहरण लिखिए।
चित्रात्मकता: "दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे, दोनों की पूँछें खड़ी हो गईं" — आँखों के सामने चित्र बन जाता है। संवादात्मकता: "मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।" विरोधाभास: झूरी का स्नेह बनाम उसकी स्त्री का बैलों को द्वार पर देखकर जल उठना। व्यंग्य: भारतवासियों की अफ़्रीका में दुर्दशा पर कटाक्ष। संघर्ष: बैल बनाम साँड। अतिशयोक्ति: झूरी की टिटकार पर दोनों का उड़ने लगना। संदेह: "सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला — समझ ही में न आता, यह कैसा स्वामी है?"
पाठ्यपुस्तक अभ्यास — क्या-क्या है
- मेरे उत्तर मेरे तर्क: छह बहुविकल्पीय प्रश्न — हीरा-मोती का संबंध, नया स्थान न स्वीकारना, घर लौटने का निर्णय, मोती का आक्रोश, मूक-भाषा का प्रयोग, स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ — उत्तर के साथ कारण भी बताना है।
- मेरी समझ मेरे विचार: सात चर्चा-प्रश्न — गया के यहाँ इनकार, घर वापसी का महत्व, संघर्ष की आवश्यकता, स्वतंत्रता बनाम अपनापन, अत्याचार सहना, भाईचारे के प्रमाण, मालकिन बनाम छोटी लड़की।
- मेरी कल्पना मेरे अनुमान: छोटी लड़की होते तो कैसे मदद करते; भय और संकोच पर विचार।
- मेरे अनुभव मेरे विचार: दोस्ती में धौल-धप्पा; हीरा या मोती — किसके साथ; मित्र के साथ विपत्ति का सामना।
- कहानी की पड़ताल: कहानी के तत्व — शीर्षक-लेखक, विषय, क्रिया, परिवेश, चरित्र, परिणाम।
- कहानी का सौंदर्य: चित्रात्मकता, संवादात्मकता, विरोधाभास, व्यंग्य, संघर्ष, अतिशयोक्ति, संदेह/उलझन — उदाहरणों सहित तालिका।
- कहानी का समय और समाज: कहानी के वाक्यों का स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े वाक्यों से मिलान।
- पशुओं के लिए कानून: काँजीहौस-प्रसंग का संवाद पढ़कर न्याय-अन्याय और पशु-अधिकारों पर प्रश्न।
- शब्दार्थ: पाठ के अंत में कठिन शब्दों के अर्थ — चौकस, डील, विग्रह, विनोद, आत्मीयता, नाँद, पगहा, कनखी, प्रतिवाद, ताकीद, तेवर, थान, बरकत, बेतहाशा, व्याकुल, रगेदना, तजरबा, मल्लयुद्ध, ग्रास, मेंड़, काँजीहौस, तृप्ति, दहक, उजड्डपन, आज़माना, चेत, डुगडुगी, उन्मत्त, नीलाम, अख़्तियार।
दोहराव — इस पाठ से क्या पक्का करें
- हीरा-मोती: झूरी के बैल, पछाईं जाति, अभिन्न मित्र।
- गया के घर अपमान → काम से इनकार → काँजीहौस → दीवार गिराकर जानवरों को भगाना → कसाई को बेचा जाना → घर वापसी → दढ़ियल को खदेड़ना।
- मूक-भाषा: बिना बोले मन की बात; हीरा (दया) बनाम मोती (पूरी जीत) का मतभेद।
- कहानी स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष का भी प्रतीक है।
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