Chapter 13: समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन
समुदाय ही आपदा का पहला जवाब है — केन्द्रीय भूमिका, तीन अंग, छह गुण, नौ प्राथमिक क्रियाकलापें और ग्रामीण समिति। स्रोत-नोट: यह अध्याय BSTBPC के अध्याय-12 स्लॉट से मिली फ़ाइल से पढ़ा गया है (पुस्तक पृष्ठ 175–184) — विवरण पहले खंड में पढ़ें।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 9 • Geography • Book: Bharat Bhumi evam Log (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bharat Bhumi evam Log (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 9) | अध्याय 13 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): प्रशिक्षण, निकासी मार्ग और आपातकालीन किट — समुदाय आधारित प्रबंधन का एक सामान्य चित्र। यह किताब का चित्र नहीं है।

मॉक ड्रिल में बच्चों को सुरक्षित जगह ले जाते स्वयंसेवक — एक सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
स्रोत के बारे में — पहले यह पढ़ें
यह अध्याय BSTBPC के अध्याय-12 स्लॉट से मिली फ़ाइल से पढ़ा गया है। पुस्तक-सूची में अध्याय-13 का कोई अलग स्लॉट नहीं है और अध्याय-13 के अनुमानित पैटर्न-URL से केवल एक HTML त्रुटि-पृष्ठ मिला था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। अध्याय-12 के स्लॉट से मिली फ़ाइल का पहला पृष्ठ स्वयं 'अध्याय-13 समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन' शीर्षक से शुरू होता है — इसलिए BSTBPC का अध्याय-12 स्लॉट पुस्तक के अध्याय-13 की सामग्री देता है।
इसी कारण इस अध्याय की सामग्री को अध्याय-12 की सामग्री नहीं कहा जा सकता, और अध्याय-12 (सामान्य आपदाएँ: निवारण एवं नियंत्रण) का अपना पाठ इस स्रोत से प्राप्त नहीं हुआ है — वह पृष्ठ अलग कारण से अधूरा है। इस अध्याय के पुस्तक पृष्ठ फ़ुटर से सत्यापित हैं: 175–184 (10 पृष्ठ)।
समुदाय क्या है — परिचय
गाँव में आग लगने पर गाँव के लोग मिलजुलकर उसका सामना करते हैं। आगजनी, डकैती और जंगली जानवरों के हमले का सामना अनादि काल से मिलजुलकर किया जाता रहा है। मेल-जोल से ही समुदाय का जन्म होता है — समुदाय भावनात्मक लगाव से उत्पन्न वह समूह है, जहाँ लोग एक साथ सुख-दुख का सामना करते हैं।
भारत की संस्कृति का सबसे बड़ा आधार सामुदायिकता है। ग्राम सभा की बैठक में विचार का सबसे बड़ा विषय मिल-जुलकर गाँव की समस्याओं का समाधान और विकास होता है।
भारत में परम्परागत रूप से सामुदायिक आपदा प्रबंधन का समाज रहा है — परिवार में शिशु का जन्म, नये घर में प्रवेश, विवाह से लेकर मृत्यु, आगजनी, आँधी, ओला-पात जैसी सुख-दुख की घटनाओं का सामना समाज के लोग मिलजुलकर करते रहे हैं। सिंधु घाटी सभ्यता और महाभारत काल से लेकर वर्तमान संयुक्त परिवार की प्रथा तक यही परम्परा चली आ रही है।
शहरी क्षेत्रों में एकल परिवार बढ़ रहे हैं, पर बिजली, पानी, सड़क और सफाई के लिए मुहल्ले भर के लोग मिलजुलकर आवाज उठाते हैं — यही सामुदायिक अभिव्यक्ति है। मुहल्लों में होली, ईद और दशहरा के समय शांति हेतु कमिटी का गठन भी सामुदायिक प्रबंधन का ही अंग है।
आपदा प्रबंधन में समुदाय की केन्द्रीय भूमिका
चित्र 13.1 — आपदा से निपटने की तैयारी में मशगूल राजस्थान के एक गाँव की ग्राम सभा। आपदा का रूप कोई भी क्यों न हो, उसका विनाशकारी प्रभाव जान-माल पर पड़ता ही है। आपदा का पहला झटका मनुष्य को लगता है और मनुष्य ही आपदा को पहला झटका भी देता है।
बच्चों, क्या तुम जानते हो कि — 1. कोई भी आपदा सूचना देकर नहीं आती है; अधिकतर परिस्थितियों में इसका पूर्वानुमान किया जाता है। 2. आपदा आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से असमान परिवारों में कोई भेदभाव नहीं करती है। 3. आपदा प्रबंधन के लिए समुदाय का सहयोग अनिवार्य है। 4. आपदाओं से निपटने के लिए समुचित तैयारी की आवश्यकता है; तैयारी के अभाव में यह बड़े हादसे या दुर्घटना का रूप ले सकता है।
जब समुदाय आपदा को न्यून करने का सामुदायिक प्रयास प्रारम्भ करता है, तब आपदा से होने वाली वास्तविक हानि का सही अनुमान समुदाय ही लगा सकता है। आपदा प्रबंधन के लिए जो भी आकस्मिक सुविधाएँ उपलब्ध करायी जाती हैं, उनके वितरण में और प्रत्येक परिवार तक उनके लाभ को पहुँचाने में समुदाय की केंद्रीय भूमिका होती है।
समुदाय ही आपदा के पूर्वानुमान की जानकारी देता है और समुदाय के लोग ही सबसे पहले आपदा का सामना करते हैं। आपदा में मकान जल सकते हैं, घरें गिर सकती हैं, बाढ़ आ सकता है — किंतु समुदाय नहीं टूटता है। समुदाय सुख-दुख का साथी होता है और भारत जैसे ग्रामीण देश में आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समुदाय की होती है। प्रशासनिक प्रबंधन कार्य और स्वयंसेवी संस्थाओं का प्रबंधन कार्य भी सामुदायिक नेतृत्व के माध्यम से ही सफलतापूर्वक सम्भव होता है।
आपदा प्रबंधन के सामुदायिक घटक — तीन अंग
आपदा प्रबंधन एक महत्वपूर्ण सामुदायिक कार्य है। आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख अंग होते हैं और तीनों ही अंगों की सफलता में समुदाय की सहभागिता होती है — (1) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण; (2) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ; (3) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य। इन तीनों ही कार्यों में परिवार, ग्राम सभा, आसपास कार्यरत स्वयंसेवी संस्था और निकटतम विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आपदा का पूर्वानुमान प्रशासन और समुदाय, दोनों को लगता है। संभव है कि कभी-कभी मानवीय आपदा घटित ही न हो, लेकिन प्रबंधन की तैयारी आवश्यक है। जैसे — प्रत्येक गर्मी ऋतु में आगजनी एक निश्चित आपदा है; इसकी जानकारी सभी को होती है। इसी प्रकार तपती गर्मी की ऋतु और वर्षा ऋतु में साँप, बिच्छू के दंश से मरने वालों की संख्या अधिक होना भी एक प्रकार का सामुदायिक आपदा है।
इन आपदाओं के पूर्वानुमान और उसकी सूचना से बड़े स्तर पर जान-माल को बचाया जा सकता है। आग की संभावना को देखते हुए अग्निशामक को पूर्व ही सूचना दी जा सकती है। आग लगते ही समुदाय के लोग सबसे पहले उन लोगों को घर से निकलने में लग जाते हैं जो आग लगने के समय घर के अंदर फँसे हुए हैं। इसी प्रकार खेत-खलिहान में बीड़ी, सिगरेट के टुकड़े से कभी-कभी आग लग जाती है; इससे फसल जल जाते हैं।
अग्निशमन दस्ता के आने के पूर्व ही समुदाय इसके प्रभाव को कम करने का प्रयास करता है। यह काम दो भागों में होना चाहिए — (1) झुलसे हुए लोगों को एक जगह ले जाकर प्राथमिक उपचार: आगजनी की स्थिति में पंचायत भवन या विद्यालय भवन में ले जाना महत्वपूर्ण है। बच्चों, यहाँ तुम भी मदद कर सकते हो — जले हुए भाग पर पानी डालना और चन्दन के लेप लगाने से जले हुए लोगों को बड़ी राहत मिलती है; जले हुए भाग पर बर्फ के उपयोग से भी राहत मिलती है। टेलीफोन और मोबाईल का प्रयोग करते हुए निकटतम अस्पताल से एम्बुलेंस को मंगाना और घायल या अर्द्ध जले हुए लोगों को अच्छे उपचार के लिए अस्पताल पहुँचाना आवश्यक है (चित्र 13.2: एक एम्बुलेंस — आपदा के क्षण का सहारा)। यदि गाँव में किसी को कार अथवा अन्य ऑटो-मोबाइल हो तो उसका भी उपयोग करना चाहिए। बच्चों, तुम अस्पताल नहीं जा सकते हो, लेकिन तुम मिल-जुलकर उनके परिवार की मदद कर सकते हो; उस परिवार के हमजोली भाई-बहनों के साथ कुछ घंटे बिताने से भावनात्मक राहत का कार्य होता है।
(2) समुदाय के दूसरे समूह के लिए आवश्यक है कि वे आग लगे हुए क्षेत्र पर और कुछ हटकर भी जल छिड़काव करें या खलिहान के फसल को हटाने का कार्य करें। फसल पर गोबर और मिट्टी डालने का कार्य करें — इससे आग का फैलाव कम हो जाता है।
क्या तुम जानते हो कि — आग लगने पर प्राथमिक उपचार के लिए शरीर पर ठंडा पानी डालने के अलावे चंदन का लेप या बरनॉल लगाने से जले भाग में राहत महसूस होती है।
क्रियाकलाप — (1) अपने गाँव/मुहल्ला के परिवार की सूची तैयार करो जहाँ पिछले एक वर्ष में आग लगने से घर और फसल की बर्बादी तथा मवेशी और आदमी की मौत हुई है। (2) अपने गाँव/मुहल्लों के उन परिवारों की सूची बनाओ जहाँ सर्पदंश से किसी की मौत हुई हो। (3) तुम अपने विद्यालय में किस प्रकार आपदा प्रबंधन की व्यवस्था कर सकते हो — अपने प्रधानाध्यापक और शिक्षकों का साक्षात्कार लेकर एक रिपोर्ट तैयार करें।
आपदा प्रबंधन के लिए समुदाय की क्रियाशीलता — छह गुण
गाँव स्वयं एक समुदाय होता है, लेकिन यदि वह क्रियाशील नहीं है तो फिर वह आपदा के समय भी दर्शक की भाँति ही रह सकता है। यह कहावत ठीक ही है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता है। एक व्यक्ति सफलतापूर्वक आपदा का सामना नहीं कर सकता, लेकिन जब वे एक से अनेक हो जाते हैं तो उनमें कई अच्छे गुणों का समावेश होने लगता है; ये अच्छे गुण ही उन्हें स्वतः आपदा प्रबंधन के लिए प्रेरित करते हैं।
क्या आप जानते हैं कि — आपदा प्रबंधन के लिए समुदाय में निम्नलिखित अच्छे गुणों का होना जरूरी है — 1. समुदाय के सदस्य सदैव समुदाय के भलाई के विषय में सोचें। 2. समुदाय द्वारा जब सामूहिक कार्य के लिए टीम का गठन हो तो उसे कामचोर लोगों से बचाना चाहिए; उसमें परिश्रमी और साहसी लोग ही आपदा का सामना कर सकते हैं। 3. उसमें जात-पात और धर्म आधारित भेदभाव नहीं होनी चाहिए — जब आपदा अपने प्रकोप में विभेद नहीं करता है तो सबों में यह भावना विकसित होनी चाहिए कि एक जुट होने से ही आपदा का प्रभाव कम हो सकता है।
4. समुदाय के हर व्यक्ति को सजग रहना चाहिए कि वे संभावित आपदा की जानकारी शीघ्र ही एक दूसरे को दें। इस प्रकार की जानकारी देने से कई बार जाति और सांप्रदायिक दंगे रुकते हैं; इससे अफवाह फैलाने वाले नौ-दो ग्यारह हो जाते हैं और मानव जनित आपदा पर सामुदायिक प्रबंधन भारी पड़ जाता है। 5. समुदाय के लोगों में उत्साह, साहस और आवश्यकतानुसार सख्ती के प्रयोग की क्षमता होनी चाहिए। 6. हर व्यक्ति के बहुत सारे निजी कार्य होते हैं, लेकिन सामुदायिक आपदा के सामने निजी कार्य को गौण समझते हुए इसके सामना करने हेतु आगे आना चाहिए।
बच्चों, तुमने यह भी पढ़ा होगा कि भारत की स्वतंत्रता के समय हिंदू-मुस्लिम आपस में लड़ गये थे। यह सामुदायिक प्रबंधन ही था जिससे भाईचारे का पुनः विकास हुआ। महात्मा गाँधी ने नोआखली के दंगों को यह कहकर रोक दिया कि हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई हम सब भाई-भाई हैं।
सामुदायिक प्रबंधन के अंतर्गत प्राथमिक क्रियाकलापें — नौ कार्य
क्या आप जानते हैं — सामुदायिक प्रबंधन के अंतर्गत प्राथमिक क्रियाकलापें निम्नलिखित हैं — 1. सूचना मिलते ही सार्वजनिक केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को आपदा की सूचना देना तथा किसी भी अफवाह का सामुदायिक स्थलों से खंडन करना। 2. गाँव के अल्पसंख्यक धर्म और जाति के लोगों में सद्भावना और आत्मविश्वास बढ़ाना। 3. आपदा की जानकारी प्रशासन तंत्र को देना।
4. निकटतम प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र को सूचना देना। 5. पंचायत के माध्यम से राहत कार्य प्रारंभ करना। 6. राहत कार्य के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आमंत्रित करना। 7. राहत कार्य में गड़बड़ी न हो, इसके लिए समन्वय टीम का गठन करना। 8. प्रभावित लोगों को कम से कम स्वच्छ जल और स्वच्छ भोजन की उपलब्धता की गारंटी करना। 9. आपातकालीन राहत शिविर की व्यवस्था करना।
आपदा प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी को सुनिश्चित करना — पाँच विधियाँ
आपदा प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी को तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब संभावित आपदा की सूचना अधिक से अधिक लोगों को मिले। इसके लिए निम्नलिखित विधियों से ग्राम पंचायत, प्रशासनिक व्यवस्था, स्वयंसेवी संस्था और प्रगतिशील व्यक्ति स्वयं आगे बढ़कर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं —
1) निकटतम विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच यह घोषित करना कि बाढ़ अथवा आँधी की संभावना है, इसलिए घर में लोगों को सचेत कर देना। 2) मंदिर-मस्जिद या गिरजाघर में जाकर प्राकृतिक अथवा मानवजनित संभावित आपदाओं की जानकारी देना — यह जानकारी उस समय उचित होगी जब प्रार्थना के लिए अधिक से अधिक लोग उपस्थित हों। यदि आवश्यक हो तो धर्मस्थल में लगे हुए सार्वजनिक उद्घोषणा के द्वारा भी जानकारी दी जा सकती है।
3) वैसे परिवारों की सूची बनाना जहाँ अत्यधिक उम्र के वृद्ध, शिशु, गर्भवती महिला, बीमार और विक्षिप्त लोग हों; ऐसे लोगों के विस्थापन हेतु विशेष दल का गठन करना। 4) पंचायत भवन और गाँव के विद्यालय में राहत शिविर के लिए आपातकालीन व्यवस्था करना, जिसमें खान-पान के अतिरिक्त नाव, तैरने वाले जैकेट, चिकित्सक और अभियंताओं की व्यवस्था करना। 5) आगजनी, महामारी, जाति और सांप्रदायिक तनाव और ओलावृष्टि जैसे आपदा में परिवहन की व्यवस्था रखना, जो संबंधित अधिकारी तक मोबाइल अथवा फोन नहीं रहने पर सूचना पहुँचा सके।
ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति का गठन
ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति के गठन का राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय लिया गया है; इससे आपदा के समय राहत और बचाव कार्य सुनियोजित ढंग से चलाया जा सकेगा। आपदा की चेतावनी भी ग्रामीण प्रबंधन समिति अधिक सक्षम रूप से हरेक परिवार को दे सकती है।
इस समिति में पुस्तक के अनुसार नौ सदस्य होते हैं — सूची के पद ये हैं (गिनती-नोट नीचे देखें): 1) विद्यालय के प्रधानाचार्य; 2) गाँव के मुखिया; 3) गाँव के सरपंच; 4) गाँव के दो समर्पित लोग; 5) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का एक डॉक्टर; 6) राष्ट्रीय सुरक्षा सेवा के सदस्य (NSS); 7) ग्राम सेवक; 8) स्वयं सहायता समूह की दो महिलायें।
ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के कार्य (6) — 1) पूर्वानुमान के आधार पर चेतावनी एवं सूचना देना — यह प्रबंधन समिति जिला मुख्यालय से प्राप्त सूचनाओं को तत्काल लोगों तक पहुँचायेगी। 2) राहत शिविर का चयन और प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने का कार्य — इसी के साथ जिला प्रशासन को सूचित करेगा; अगर आगजनी है तो दमकल को सूचित करेगा। 3) राहत कार्य — मुख्य रूप से लोगों को भोजन एवं पेयजल उपलब्ध कराना। 4) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था। 5) सभी को सुरक्षा देना — महिला, बच्चों को विशेष रूप से ध्यान देना। 6) स्वच्छता का ख्याल रखना — स्वच्छता रखने से विभिन्न प्रकार की बीमारी नहीं फैलती है।
सावधानियाँ — पुस्तक की अपनी बातें
स्रोत-विसंगति (सबसे महत्वपूर्ण): यह अध्याय BSTBPC के अध्याय-12 स्लॉट से मिली फ़ाइल से पढ़ा गया है — पुस्तक-सूची में अध्याय-13 का कोई स्लॉट नहीं है और Chap13 पैटर्न-URL HTML त्रुटि-पृष्ठ देता है। पृष्ठ के स्रोत-नोट में यह स्पष्ट लिखा गया है; अध्याय-13 की सामग्री को अध्याय-12 की सामग्री नहीं कहा गया है।
समिति-सदस्य गिनती: पुस्तक में 'नौ सदस्य' लिखा है, पर सूची में 8 पद हैं जिनसे कुल व्यक्ति 1+1+1+2+1+1+1+2 = 10 बनते हैं। पृष्ठ पर सूची जैसी छपी है वैसी + यह गिनती-नोट।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न 4: (ख)(ग)(घ) तीनों ही पृ० 182 की कार्य-सूची में हैं; केवल (क) कार्य नहीं है — प्रश्न की रचना ही एकल-उत्तर वाली नहीं है। पृष्ठ पर प्रश्न + यह नोट; कोई एक विकल्प मनमाने ढंग से 'सही' नहीं चुना गया है।
'राष्ट्रीय सुरक्षा सेवा (NSS)' — पुस्तक में जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है (NSS का सामान्य विस्तार राष्ट्रीय सेवा योजना है, पर पुस्तक का शब्द नहीं बदला गया है)।
Key Terms — मुख्य शब्द
- समुदाय — भावनात्मक लगाव से उत्पन्न समूह, जहाँ लोग एक साथ सुख-दुख का सामना करते हैं; भारत की संस्कृति का सबसे बड़ा आधार सामुदायिकता है।
- सामुदायिक आपदा प्रबंधन — समुदाय के मिलजुलकर किए गए प्रयास से आपदा का सामना करना — पूर्वानुमान, आपदा के समय की गतिविधियाँ, आपदा के बाद के कार्य।
- तीन प्रमुख अंग — (1) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण; (2) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ; (3) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य।
- पूर्वानुमान — आपदा के आने से पहले उसका अनुमान लगाना — अधिकतर परिस्थितियों में आपदा का पूर्वानुमान किया जाता है, हालाँकि वह सूचना देकर नहीं आती।
- प्राथमिक क्रियाकलापें — सामुदायिक प्रबंधन के अंतर्गत नौ कार्य — सूचना देना, अफवाह का खंडन, सद्भावना बढ़ाना, प्रशासन/चिकित्सा केन्द्र को सूचना, पंचायत से राहत, स्वयंसेवी संस्थाएँ, समन्वय टीम, स्वच्छ जल/भोजन की गारंटी, राहत शिविर।
- ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति — राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय से गठित समिति — प्रधानाचार्य, मुखिया, सरपंच, दो समर्पित लोग, एक डॉक्टर, NSS सदस्य, ग्राम सेवक, स्वयं सहायता समूह की दो महिलायें (पुस्तक में 'नौ सदस्य' लिखा है — गिनती-नोट देखें)।
- चित्र 13.1 / 13.2 — 13.1: आपदा से निपटने की तैयारी में मशगूल राजस्थान के एक गाँव की ग्राम सभा। 13.2: एक एम्बुलेंस — आपदा के क्षण का सहारा।
- नोआखली — महात्मा गाँधी ने वहाँ के दंगों को 'हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई हम सब भाई-भाई हैं' कहकर रोका — सामुदायिक प्रबंधन से भाईचारे का पुनः विकास।
- बरनॉल / चन्दन लेप — आग लगने पर प्राथमिक उपचार — शरीर पर ठंडा पानी डालने के अलावे चंदन का लेप या बरनॉल लगाने से जले भाग में राहत।
Remember — याद रखें
- समुदाय सुख-दुख का साथी है — मकान जल सकते हैं, घरें गिर सकती हैं, बाढ़ आ सकता है, किंतु समुदाय नहीं टूटता।
- बच्चों के चार बिंदु: आपदा सूचना देकर नहीं आती (पूर्वानुमान किया जाता है); आपदा भेदभाव नहीं करती; समुदाय का सहयोग अनिवार्य है; तैयारी के अभाव में बड़ा हादसा हो सकता है।
- तीन अंग: (1) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण; (2) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ; (3) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य।
- आगजनी के दो भाग: (1) झुलसे लोगों को एक जगह ले जाकर प्राथमिक उपचार (पंचायत/विद्यालय भवन, पानी/चन्दन लेप/बर्फ, एम्बुलेंस, अस्पताल; परिवार की भावनात्मक मदद); (2) आग लगे क्षेत्र पर और कुछ हटकर जल छिड़काव, फसल हटाना, गोबर-मिट्टी डालना।
- समुदाय के छह अच्छे गुण: भलाई की सोच; कामचोरों से बची परिश्रमी-साहसी टीम; जात-पात/धर्म भेदभाव नहीं; शीघ्र सूचना देना; उत्साह-साहस-सख्ती की क्षमता; निजी कार्य गौण समझकर आगे आना।
- नौ प्राथमिक क्रियाकलापें: सूचना + अफवाह-खंडन, सद्भावना, प्रशासन/चिकित्सा सूचना, पंचायत से राहत, स्वयंसेवी संस्थाएँ, समन्वय टीम, स्वच्छ जल/भोजन की गारंटी, राहत शिविर।
- भागीदारी की पाँच विधियाँ: विद्यालय में घोषणा; धर्मस्थलों में जानकारी; कमजोर वर्गों की सूची + विशेष दल; पंचायत भवन/विद्यालय में राहत शिविर (नाव/जैकेट/चिकित्सक/अभियंता); परिवहन की व्यवस्था।
- समिति के छह कार्य: चेतावनी/सूचना, राहत शिविर का चयन + राहत, भोजन/पेयजल, प्राथमिक उपचार, सभी को सुरक्षा (महिला/बच्चों पर विशेष ध्यान), स्वच्छता।
सबसे बड़ी भूल: तीन अंगों में तीसरा अंग 'आपदा के बाद निश्चिंत रहना' लिखना — सही तीसरा अंग 'आपदा के बाद प्रबंधन कार्य' है; 'निश्चिंत रहना' वस्तुनिष्ठ 1 का गलत विकल्प है। दूसरी भूल: समिति के सदस्यों की गिनती 'नौ' को बिना नोट के लिखना — सूची में 8 पद हैं जिनसे 10 व्यक्ति बनते हैं; पृष्ठ पर गिनती-नोट सहित लिखें। तीसरी भूल: वस्तुनिष्ठ 4 में से कोई एक विकल्प चुनना — (ख)(ग)(घ) तीनों ही समिति के कार्य हैं, केवल (क) नहीं है। चौथी भूल: इस अध्याय के स्रोत को अध्याय-12 का स्रोत बताना — यह अध्याय-12 के स्लॉट से मिली अध्याय-13 की सामग्री है।
Chart / Table: समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन — एक दृष्टि में
| भाग | मुख्य बातें (पुस्तक) |
|---|---|
| तीन प्रमुख अंग | (1) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण; (2) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ; (3) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य |
| समुदाय के छह अच्छे गुण | भलाई की सोच; परिश्रमी-साहसी टीम (कामचोरों से बची); जात-पात/धर्म भेदभाव नहीं; शीघ्र सूचना; उत्साह-साहस-सख्ती; निजी कार्य गौण समझकर आगे आना |
| नौ प्राथमिक क्रियाकलापें | सूचना + अफवाह-खंडन; सद्भावना; प्रशासन/चिकित्सा सूचना; पंचायत से राहत; स्वयंसेवी संस्थाएँ; समन्वय टीम; स्वच्छ जल/भोजन की गारंटी; राहत शिविर |
| भागीदारी की पाँच विधियाँ | विद्यालय में घोषणा; धर्मस्थलों में जानकारी; कमजोर वर्गों की सूची + विशेष दल; पंचायत भवन/विद्यालय में राहत शिविर (नाव/जैकेट/चिकित्सक/अभियंता); परिवहन की व्यवस्था |
| ग्रामीण समिति के सदस्य | प्रधानाचार्य, मुखिया, सरपंच, दो समर्पित लोग, एक डॉक्टर, NSS सदस्य, ग्राम सेवक, स्वयं सहायता समूह की दो महिलायें (पुस्तक में 'नौ सदस्य' — गिनती-नोट देखें) |
| ग्रामीण समिति के छह कार्य | चेतावनी/सूचना; राहत शिविर का चयन + राहत; भोजन/पेयजल; प्राथमिक उपचार; सभी को सुरक्षा (महिला/बच्चों पर विशेष ध्यान); स्वच्छता |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- समुदाय किसे कहते हैं? भारत की संस्कृति में सामुदायिकता का क्या स्थान है?
संकेत: भावनात्मक लगाव से उत्पन्न समूह जहाँ लोग एक साथ सुख-दुख का सामना करते हैं; भारत की संस्कृति का सबसे बड़ा आधार सामुदायिकता है; ग्राम सभा की बैठक में सबसे बड़ा विषय मिल-जुलकर गाँव की समस्याओं का समाधान और विकास है। - आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख अंग लिखिए और प्रत्येक में समुदाय की भूमिका बताइए।
संकेत: (1) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण; (2) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ; (3) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य। तीनों में परिवार, ग्राम सभा, स्वयंसेवी संस्था और निकटतम विद्यालय की भूमिका होती है। - अग्निशमन दस्ता आने के पूर्व समुदाय द्वारा कौन-से दो भागों में प्रयास किए जाने चाहिए?
संकेत: (1) झुलसे लोगों को एक जगह ले जाकर प्राथमिक उपचार — पंचायत/विद्यालय भवन, पानी/चन्दन लेप/बर्फ, एम्बुलेंस मंगाना, अस्पताल पहुँचाना, परिवार की भावनात्मक मदद। (2) दूसरे समूह द्वारा आग लगे क्षेत्र पर और कुछ हटकर जल छिड़काव, फसल हटाना, गोबर-मिट्टी डालना। - समुदाय के छह अच्छे गुण लिखिए।
संकेत: भलाई की सोच; परिश्रमी-साहसी टीम (कामचोरों से बची); जात-पात/धर्म भेदभाव नहीं; शीघ्र सूचना देना; उत्साह-साहस-सख्ती की क्षमता; निजी कार्य गौण समझकर आगे आना। - ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य और उसके तीन कार्य लिखिए।
संकेत: सदस्य: प्रधानाचार्य, मुखिया, सरपंच, दो समर्पित लोग, एक डॉक्टर, NSS सदस्य, ग्राम सेवक, स्वयं सहायता समूह की दो महिलायें। कार्य (कोई तीन): चेतावनी/सूचना; राहत शिविर का चयन + राहत; भोजन/पेयजल; प्राथमिक उपचार; सुरक्षा; स्वच्छता।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- आपदा प्रबंधन में समुदाय की केन्द्रीय भूमिका का वर्णन कीजिए।
आपदा का पहला झटका मनुष्य को लगता है और मनुष्य ही आपदा को पहला झटका भी देता है। वास्तविक हानि का सही अनुमान समुदाय ही लगा सकता है; आकस्मिक सुविधाओं के वितरण में और प्रत्येक परिवार तक लाभ पहुँचाने में समुदाय की केंद्रीय भूमिका होती है। समुदाय ही पूर्वानुमान की जानकारी देता है और सबसे पहले सामना करता है। मकान जल सकते हैं, घरें गिर सकती हैं, बाढ़ आ सकता है — किंतु समुदाय नहीं टूटता। भारत जैसे ग्रामीण देश में सबसे बड़ी जिम्मेदारी समुदाय की है; प्रशासनिक और स्वयंसेवी प्रबंधन भी सामुदायिक नेतृत्व से ही सफल होता है। चार बिंदु: आपदा सूचना देकर नहीं आती (पूर्वानुमान किया जाता है); आपदा भेदभाव नहीं करती; समुदाय का सहयोग अनिवार्य है; तैयारी के अभाव में बड़ा हादसा हो सकता है। - आगजनी के समय समुदाय के दो भागों वाले प्रयासों का वर्णन कीजिए।
पहला भाग — झुलसे लोगों को एक जगह ले जाकर प्राथमिक उपचार: पंचायत/विद्यालय भवन में ले जाना; जले भाग पर पानी डालना, चन्दन का लेप, बर्फ का उपयोग; टेलीफोन/मोबाइल से निकटतम अस्पताल से एम्बुलेंस मंगाना और घायल/अर्द्ध जले लोगों को अस्पताल पहुँचाना; कार/ऑटो-मोबाइल का उपयोग; बच्चों द्वारा परिवार की मदद और हमजोली भाई-बहनों के साथ समय बिताकर भावनात्मक राहत। चित्र 13.2: एक एम्बुलेंस — आपदा के क्षण का सहारा। दूसरा भाग — आग लगे क्षेत्र पर और कुछ हटकर जल छिड़काव, खलिहान की फसल हटाना, फसल पर गोबर-मिट्टी डालना — इससे आग का फैलाव कम होता है। प्राथमिक उपचार में ठंडा पानी, चंदन लेप या बरनॉल से राहत मिलती है। - समुदाय में कौन-से अच्छे गुण होने चाहिए? नोआखली का उदाहरण क्या सिखाता है?
छह गुण: भलाई की सोच; परिश्रमी-साहसी टीम (कामचोरों से बची); जात-पात/धर्म भेदभाव नहीं (एकजुटता से ही प्रभाव कम होता है); शीघ्र सूचना देना (इससे जाति/सांप्रदायिक दंगे रुकते हैं, अफवाह फैलाने वाले नौ-दो ग्यारह हो जाते हैं); उत्साह-साहस-सख्ती की क्षमता; निजी कार्य गौण समझकर आगे आना। नोआखली: स्वतंत्रता के समय हिंदू-मुस्लिम लड़ गए थे; सामुदायिक प्रबंधन से भाईचारे का पुनः विकास हुआ — महात्मा गाँधी ने दंगों को 'हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई हम सब भाई-भाई हैं' कहकर रोका। - सामुदायिक प्रबंधन की नौ प्राथमिक क्रियाकलापें लिखिए।
1. सूचना मिलते ही सार्वजनिक केंद्रों से अधिक से अधिक लोगों को आपदा की सूचना + अफवाह का सामुदायिक स्थलों से खंडन। 2. गाँव के अल्पसंख्यक धर्म/जाति के लोगों में सद्भावना और आत्मविश्वास बढ़ाना। 3. आपदा की जानकारी प्रशासन तंत्र को देना। 4. निकटतम प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र को सूचना देना। 5. पंचायत के माध्यम से राहत कार्य प्रारंभ करना। 6. राहत के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आमंत्रित करना। 7. गड़बड़ी न हो इसके लिए समन्वय टीम का गठन करना। 8. प्रभावितों को कम से कम स्वच्छ जल और स्वच्छ भोजन की गारंटी करना। 9. आपातकालीन राहत शिविर की व्यवस्था करना। - ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के गठन और कार्यों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
गठन का राष्ट्रीय स्तर पर निर्णय लिया गया है ताकि राहत/बचाव सुनियोजित ढंग से चलाया जा सके और चेतावनी हरेक परिवार तक सक्षम रूप से पहुँचे। सदस्य (पुस्तक में 'नौ सदस्य' लिखा है — गिनती-नोट: सूची में 8 पद हैं जिनसे 10 व्यक्ति बनते हैं): प्रधानाचार्य, मुखिया, सरपंच, दो समर्पित लोग, एक डॉक्टर, NSS सदस्य, ग्राम सेवक, स्वयं सहायता समूह की दो महिलायें। कार्य (6): पूर्वानुमान के आधार पर चेतावनी/सूचना (जिला मुख्यालय की सूचनाएँ तत्काल लोगों तक); राहत शिविर का चयन + राहत पहुँचाना (जिला प्रशासन को सूचना; आगजनी में दमकल को); भोजन/पेयजल; प्राथमिक उपचार; सभी को सुरक्षा (महिला/बच्चों पर विशेष ध्यान); स्वच्छता।
- समुदाय सुख-दुख का साथी है — मकान जल सकते हैं, समुदाय नहीं टूटता; ग्रामीण देश में सबसे बड़ी जिम्मेदारी समुदाय की।
- तीन अंग: पूर्वानुमान/चेतावनी/प्रशिक्षण; आपदा के समय की गतिविधियाँ; आपदा के बाद के कार्य।
- आगजनी: दो भाग — झुलसे लोगों का प्राथमिक उपचार + आग के फैलाव को रोकना (जल छिड़काव, फसल हटाना, गोबर-मिट्टी)।
- छह गुण, नौ प्राथमिक क्रियाकलापें, भागीदारी की पाँच विधियाँ, समिति के छह कार्य।
- अभ्यास: वस्तुनिष्ठ 4 + लघु 3 + दीर्घ 3 = 10 प्रश्न; स्रोत-नोट: अध्याय-12 स्लॉट से मिली अध्याय-13 की सामग्री (पृ० 175–184)।
अभ्यास — किताब के प्रश्न-प्रकार (उत्तर सहित)
नीचे अध्याय के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार दिए गए हैं। पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर दिए गए उत्तरों से मिलान करें।
अभ्यास — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (4)
- 1. आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख अंगों में कौन एक निम्नलिखित में शामिल नहीं है? (क) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण (ख) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ (ग) आपदा के बाद निश्चिंत रहना (घ) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य करना — उत्तर: (ग) आपदा के बाद निश्चिंत रहना।
- 2. प्रत्येक ग्रीष्म ऋतु में कौन सी आपदा लगभग निश्चित है? (क) आगजनी (ख) वायु दुर्घटना (ग) रेल दुर्घटना (घ) सड़क दुर्घटना — उत्तर: (क) आगजनी।
- 3. सामुदायिक प्रबंधन के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन एक प्राथमिक क्रियाकलाप में शामिल नहीं है? (क) निकटतम प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र को सूचित करना (ख) प्रभावित लोगों को स्वच्छ जल और भोजन की उपलब्धता की गारंटी करना (ग) आपदा की जानकारी प्रशासन तंत्र को नहीं देना (घ) आपातकालीन राहत शिविर की व्यवस्था करना — उत्तर: (ग) आपदा की जानकारी प्रशासन तंत्र को नहीं देना।
- 4. ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के प्रमुख कार्य है? (क) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं करना (ख) सभी को सुरक्षा देना (ग) राहत शिविर का चयन एवं राहत पहुँचाने का कार्य करना (घ) स्वच्छता का ख्याल रखना — उत्तर-नोट: (ख)(ग)(घ) तीनों ही पृ० 182 की कार्य-सूची में हैं; केवल (क) कार्य नहीं है — प्रश्न की रचना ही एकल-उत्तर वाली नहीं है; पृष्ठ पर प्रश्न + यह नोट, कोई एक विकल्प मनमाने ढंग से 'सही' नहीं चुना गया है।
अभ्यास — लघु उत्तरीय प्रश्न (3)
- 1. अग्निशमन दस्ता आने के पूर्व समुदाय द्वारा कौन से प्रयास किये जाने चाहिए? — उत्तर: दो भाग — (1) झुलसे लोगों को एक जगह ले जाकर प्राथमिक उपचार (पंचायत/विद्यालय भवन; पानी/चन्दन लेप/बर्फ; एम्बुलेंस मंगाना, अस्पताल पहुँचाना; परिवार की भावनात्मक मदद); (2) दूसरे समूह द्वारा आग लगे क्षेत्र पर और कुछ हटकर जल छिड़काव, खलिहान की फसल हटाना, फसल पर गोबर-मिट्टी डालना।
- 2. ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति के गठन में कौन-कौन से सदस्य शामिल होते हैं? — उत्तर: प्रधानाचार्य, मुखिया, सरपंच, दो समर्पित लोग, एक डॉक्टर, NSS सदस्य, ग्राम सेवक, स्वयं सहायता समूह की दो महिलायें — 'नौ सदस्य' गिनती-नोट सहित (सूची में 8 पद, कुल 10 व्यक्ति)।
- 3. आपदा-प्रबंधन के लिए समुदाय में किन अच्छे गुणों का होना आवश्यक है? — उत्तर: छह गुण — भलाई की सोच; कामचोरों से बची परिश्रमी-साहसी टीम; जात-पात/धर्म भेदभाव नहीं; शीघ्र सूचना देना; उत्साह-साहस-सख्ती की क्षमता; निजी कार्य गौण समझकर आगे आना।
अभ्यास — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3)
- 1. आपदा प्रबंधन में समुदाय की केन्द्रीय भूमिका का वर्णन करें। — संकेत: पहला झटका मनुष्य को, पहला जवाब भी मनुष्य का; वास्तविक हानि का सही अनुमान समुदाय ही लगा सकता है; आकस्मिक सुविधाओं के वितरण में केंद्रीय भूमिका; पूर्वानुमान की जानकारी समुदाय से; सबसे पहले सामना समुदाय करता है; मकान जल सकते हैं, समुदाय नहीं टूटता; ग्रामीण देश में सबसे बड़ी जिम्मेदारी समुदाय की; प्रशासन/स्वयंसेवी कार्य सामुदायिक नेतृत्व से ही सफल।
- 2. ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के कार्यों का विस्तृत वर्णन करें। — संकेत: छह कार्य — चेतावनी/सूचना, राहत शिविर का चयन + राहत, भोजन/पेयजल, प्राथमिक उपचार, सभी को सुरक्षा (महिला/बच्चों पर विशेष ध्यान), स्वच्छता।
- 3. आपदा प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी को कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है? — संकेत: पाँच विधियाँ — विद्यालय में घोषणा; धर्मस्थलों में जानकारी; कमजोर वर्गों की सूची + विशेष दल; पंचायत भवन/विद्यालय में राहत शिविर + नाव/जैकेट/चिकित्सक/अभियंता; परिवहन की व्यवस्था।
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