Chapter 16: धातु और अधातु
धातु और अधातु के भौतिक गुण — चमक, ठोस अवस्था, आघातवर्ध्यता, तन्यता, ऊष्मा व विद्युत चालकता, ध्वनिकता; अपवाद और उपधातु; रासायनिक गुण — ऑक्सीजन, जल, अम्ल, क्षार से अभिक्रिया; विस्थापन अभिक्रियाएँ और उपयोगिता।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Science • Book: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
धातु और अधातु — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 8) | अध्याय 16 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): धातुओं के गुणों से जुड़ा शिक्षण चित्र — लेबल चित्र पर ही छपे हैं।

धातु और अधातु से जुड़ा सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
आप अपने आस-पास बहुत से पदार्थों को देखते हैं — ये प्रायः धातु या अधातु होते हैं। असल में धातुओं का व्यवहार बहुत सालों से होता आ रहा है। शुरू में मनुष्य ने जो औज़ार बनाए वे पत्थर, लकड़ी या फिर जानवरों की हड्डियों के बने होते थे। धातु की खोज होने पर औज़ार बनाने में बड़ी तरक्की हुई। ताँबे या लोहे के बने औज़ार पत्थर या लकड़ी की तुलना में कहीं अधिक मज़बूत होते थे। धातुओं की दूसरी खास बात यह थी कि उसे आग में गर्म करके किसी भी रूप में ढाला जा सकता था। सोना, ताँबा, चाँदी, शीशा, टिन, लोहा, पारा क्रमशः सात प्राचीनतम प्राप्त धातुएँ हैं जिन्हें आप लोक व्यवहार में देखते होंगे, इसी कारण धातुकर्म (Metallurgy) व्यवहारत विज्ञान की सबसे पुरानी पद्धति है। धातु की खोज के बाद तो नए-नए प्रकार के औज़ार बनने लगे। इसी तरह हथौड़ी भी लोहे की बनी।
क्रियाकलाप-1: एक कील लें और इसे अपने अँगूठे की सहायता से लकड़ी के पट्टी में गाड़िए। (1) क्या आप ऐसा कर पाए? हाँ / नहीं। (2) अब एक कील लेकर किसी पत्थर की मदद से पट्टी में गाड़ने की कोशिश कीजिए। क्या आप ऐसा कर पाए? हाँ / नहीं। (3) एक छोटे पत्थर को लकड़ी की डंडी के एक सिरे से कसकर बाँधिए और इसकी सहायता से उस पट्टी में गाड़कर देखिए। क्या पत्थर की इस हथौड़ी से कील ठोकना और आसान हुआ? हाँ / नहीं। पत्थर की इस हथौड़ी का बार-बार उपयोग करने पर या ज़ोर से पटकने पर इससे लगे पत्थर के टूटने का डर है। इसके लिए आप क्या सुझाव दे सकते हैं? (4) क्या पत्थर के स्थान पर किसी और पदार्थ का उपयोग किया जा सकता है जिससे हथौड़ी अधिक मज़बूत हो? हाँ / नहीं। चित्र-16.1: पत्थर की हथौड़ी से कील ठोकने का प्रयास।
1. धातु और अधातु के भौतिक गुण
(क) चमक
सबसे पुराना धातु सोना है जिसका आविष्कार 6000 ई. पूर्व हुआ था। कुछ धातुएँ जैसे सोना, चाँदी, ताँबा अपने मौलिक अवस्था में पाई जाती हैं। इनमें अपने-अपने रंग लिए खास चमक होती है। एल्युमिनियम, जिंक, मैग्नेशियम तथा चाँदी का रंग सफ़ेद है। सोना का रंग पीला है, ताँबा का रंग लाल भूरा है। एक लम्बे समय के लिए अगर इन्हें छोड़ दिया जाए तो वे हवा के अवयव जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड से अभिक्रिया कर ऑक्साइड, कार्बोनेट, सल्फ़ाइड इत्यादि बनाते हैं जिसकी पहली परत धातुओं की सतह पर जम जाती है जिससे धातुओं की सतह धुँधली हो जाती है। परन्तु इसे साफ़ करने पर चमक लौट आती है।
क्या कुछ ऐसे पदार्थ हैं, जिसमें चमक नहीं होती या घिसने पर भी चमक नहीं आती है? प्रायः धातुओं में चमक होती है। अधातु पदार्थ में चमक नहीं होती है, पर इस आधार पर धातु एवं अधातु में विभेद करना आसान नहीं है। कई ऐसे पदार्थ हैं जिसे घिसने-चिकनाने से चमकने लगता है। आप देखते हैं कि फ़र्श पर बिछा हुआ टाइल्स, संगमरमर की चिकनी दीवारें, घिसा हुआ कुछ पत्थर चमकने लगता है। इसका यह अर्थ नहीं कि वह धातु है। क्या दर्पण को धातु कहेंगे? ये चमकनेवाली चीज़ें कई पदार्थों के मिलने से बनी होती हैं, परन्तु धातु या अधातु भी तत्व ही हैं। कई धात्विक पदार्थ मिलकर मिश्र धातु (Alloy) बनाते हैं, जिसका अपना एक रंग एवं चमक होती है। धातु एवं अधातु को समझने के लिए इनके कई गुणों को परखना होगा, जिसके आधार पर दोनों के बीच विभेद करना आसान हो सकेगा।
(ख) ठोस अवस्था
कुछ पदार्थ जैसे आयरन, कॉपर, एल्युमिनियम, मैग्नेशियम, लिथियम, सोडियम, पोटैशियम आदि को देखें तो हम पाते हैं कि मरकरी (पारा) को छोड़कर सभी धातुएँ सामान्य तापक्रम पर ठोस अवस्था में पाया जाता है।
(ग) पीटने पर फैलना — आघातवर्ध्यता
आपने अपने आस-पास लोहार को फावड़ा, बेलचा, कुल्हाड़ी आदि बनाते देखा होगा। ये लोहे के टुकड़े को पीट-पीटकर बनाए गए हैं। क्या लकड़ी के तख्ते को पीटकर ऐसा आकार दिया जा सकता है? आप पाएँगे नहीं।
क्रियाकलाप-2 (तालिका): पदार्थ | आकार में परिवर्तन (चपटा हो गया / टुकड़े हो गए) — एल्युमिनियम का तार, लोहे का कील, कोयले का टुकड़ा (और खाली पंक्तियाँ — स्वयं भरें)। आप देखते हैं कि लोहे की कील और एल्युमिनियम का तार पीटने पर शीट में बदल गया अर्थात् पीटने पर उसके आकार में वृद्धि हो गई किन्तु उसके टुकड़े-टुकड़े नहीं हुए। धातु का यह एक विशेष गुण है, जिसे हम आघातवर्ध्यता कहते हैं। क्या मिट्टी या आटे की लोई को पीटने से उसके आकार में वृद्धि होती है? आटे की लोई से रोटी बनते आपने देखा है? इससे आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? मिट्टी एवं लोई को धूप में सुखाइए और पीटिए। इनको पीटने पर यह चूर-चूर हो जाता है। धातु और अधातु पदार्थ में यह अन्तर है कि धातु आघातवर्ध्य होता है। इससे शीट बनाया जा सकता है तथा तार खींचे जा सकते हैं। परन्तु अधातु में यह गुण नहीं है, क्योंकि इसे पीटने पर चूर हो जाता है। सभी धातुएँ एक समान आघातवर्ध्य नहीं होतीं।
(घ) ऊष्मा चालक — ऊष्मा सुचालकता
आप गर्म वस्तुओं को कैसे पकड़ते हैं? जैसे रसोई में चाय बनाते वक्त या प्रेशर कुकर के हत्थे को जिसमें प्लास्टिक या लकड़ी लगी हो तो हाथ नहीं जलता है। हत्था से लगे कुकर की हॅण्डिल को किसी तरह छू जाने से काफ़ी गर्मी महसूस होती है। चूल्हे पर चढ़े डेकची/तसला इत्यादि का किनारा छूने पर गर्म लगता है। कुछ ऐसे पदार्थ हैं जिसे गर्म किए जाने पर दूसरा सिरा गर्म नहीं होता है। जलती हुई लकड़ी का दूसरा सिरा गर्म नहीं होता है।
क्रियाकलाप-3: एक बरतन में पानी लीजिए और उसे गर्म कीजिए। उसमें लोहे का छड़, एल्युमिनियम या स्टील का बड़ा चम्मच, रोटी बनाने वाला बेलन इत्यादि डालिए। डाले गए सभी चीज़ों की लम्बाई लगभग बराबर होनी चाहिए। थोड़ी देर के बाद आप उसके ऊपरी सिरों को छुएँ। आप क्या महसूस करते हैं? आप देखेंगे कि लोहे या एल्युमिनियम, स्टील इत्यादि के बने चम्मच का सिरा गर्म हो जाता है किन्तु लकड़ी के चीज़ों का सिरा गर्म नहीं होता है। चित्र-16.2: गर्म पानी में रखी छड़ें/चम्मच।
क्रियाकलाप-4: एक एल्युमिनियम या लोहे का छड़ लीजिए। छड़ की जगह-जगह पर मोम की सहायता से पिन को चिपका दीजिए। उसके बाद छड़ के एक सिरे को लैंप से सटा दीजिए। कुछ देर के बाद हम पाते हैं कि गर्म सिरे की ओर से मोम बारी-बारी से पिघलने लगती है और एक-एक करके पिन गिरता चला जाता है। इस क्रियाकलाप से यह स्पष्ट होता है कि ऊष्मा लैंपवाले सिरे में दूसरी ओर बढ़ती चली जाती है। पदार्थ के ऐसे गुण को ऊष्मा सुचालकता कहते हैं। चित्र-16.3: मोम से चिपकी पिनों वाली छड़ (अ और ब — गर्म सिरे से मोम पिघलना)। अब आप कुछ दूसरे पदार्थ की छड़ लें और इसी प्रक्रिया से इनके सिरे को गर्म कीजिए। क्या इसमें ऐसा कुछ हुआ या दूसरा सिरा गर्म हुआ तथा गर्म सिरे के साथ क्या हुआ। अवलोकन कीजिए। यदि ऐसे पदार्थ एल्युमिनियम एवं लोहे जैसा गुण दर्शाता है तो वह धातु की श्रेणी में आयेगा। यदि ऐसा गुण नहीं है तो वह अधातु है। धातुओं की ऊष्मीय चालकता के कारण उनका उपयोग भोजन बनाने के बरतन बनाने में होता है। चाँदी और कॉपर ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं जबकि लेड (शीशा) एवं पारा (मरकरी) ऊष्मा के सबसे कम चालक हैं।
तालिका (स्वयं भरें): पदार्थ | खुला सिरा गर्म हुआ हाँ/नहीं | धातु/अधातु — इस तालिका को क्रियाकलाप-4 के प्रयोग से भरिए।
(ङ) विद्युत चालक
किसी पदार्थ की विद्युत चालकता की जाँच के लिए ऊपर दिए गए उपकरण को लेते हैं। चित्र-16.4: बैटरी, बल्ब और A–B सिरों वाला परिपथ — बाईं ओर साधारण परिपथ, दाईं ओर A–B के बीच चाबी (धातु) लगी हुई। जिस धातु की विद्युत चालकता की जाँच करनी होती है उसे उपकरण के A तथा B के बीच क्लिप से फँसा देते हैं। यदि बल्ब जल उठता है तो सुचालक और अगर नहीं जलता है तो विद्युत का कुचालक। धातु विद्युत के सुचालक होते हैं जबकि अधातु विद्युत के कुचालक।
उपर्युक्त क्रियाकलाप के आधार पर आप स्वयं पता कीजिए कि कौन पदार्थ धातु और कौन पदार्थ अधातु है तथा इसे तालिकाबद्ध कीजिए। अब आप उपर्युक्त दिए गए चित्र के अनुसार शिक्षक की सहायता लेकर अन्य पदार्थों के साथ प्रयोग कीजिए तथा दी गई तालिका में धातु एवं अधातु को वर्गीकृत कीजिए।
हम घरों में जो विद्युत का तार का उपयोग करते हैं, उस पर पोलिविनाइल क्लोराइड अथवा रबड़ की परत जैसी कवर चढ़ी होती है क्योंकि पोलिविनाइल क्लोराइड या रबड़ विद्युत का कुचालक होता है। हमें आयरन, कॉपर, एल्युमिनियम के तार आसानी से बाज़ार में मिलते हैं। धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता ही तन्यता कहलाती है। सोना और चाँदी सबसे अधिक तन्य धातु हैं। अतः सभी धातुएँ एक समान तन्य नहीं होतीं।
(च) ध्वनिकता
आप अपने विद्यालय की घंटी बजते सुने होंगे, घंटी लोहे की प्लेट या धातु के बने होते हैं। सिक्के को ज़मीन पर गिरते देखा होगा या नहीं तो गिराकर देखें। कुछ धातुओं को कठोर सतह पर टकराने पर एक प्रकार की आवाज़ उत्पन्न होती है इसी कारण इसे ध्वनिक या (SONOROUS) कहा जाता है क्योंकि इसकी आवाज़ कुछ क्षण तक सुनाई देती है। कोयले का टुकड़ा ज़मीन पर गिराकर और धातु का प्लेट ज़मीन पर गिराकर, दोनों से उत्पन्न ध्वनि के अन्तर को ध्यान दीजिए।
सोना एक कोमल, सुनहले रंग का कीमती धातु है। इसका मुख्य उपयोग आभूषण बनाने में होता है। सोने की शुद्धता को कैरेट (carat) में मापते हैं। शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। आभूषण बनाते समय शुद्ध सोना में कम कीमती धातु ताँबा या चाँदी थोड़ी-सी मिला दी जाती है, जिससे वह कुछ कठोर बन जाता है। ये 22 कैरेट के होते हैं जिसका अर्थ हुआ 22 भाग सोना और 2 भाग ताँबा या चाँदी की मिलावट है। 24 कैरेट को 18 कैरेट में बदलने के लिए 18 भाग सोना में 6 भाग ताँबा या चाँदी मिश्रित कर देते हैं।
क्रियाकलाप-5 (तालिका, स्वयं भरें): अब आप धातु एवं अधातु पदार्थों के गुण से परिचित हो चुके हैं। अपने आस-पास के पदार्थों के गुणों के आधार पर अवलोकन एवं प्रयोग कर दी गई तालिका में वर्गीकृत कीजिए — गुण | धातु | अधातु।
ऐसे पदार्थ जो ठोस, चमकीले, आघातवर्ध्य, तन्य, ध्वनि उत्पन्न करने वाले, ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं वे धातु कहलाते हैं। अब आप अधातु के बारे में क्या कहेंगे? ठोस अवस्था में कार्बन, गंधक, फॉस्फोरस, आयोडिन हैं। द्रव अवस्था में ब्रोमीन होता है। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन, हीलियम, आर्गन इत्यादि गैस अवस्था में पाये जाते हैं।
आइए, दी गई तालिका के अनुसार अब कुछ धातुओं/अधातुओं के भौतिक गुणों को देखा जाए —
| पदार्थ | संकेत | सतह का प्रकार | कठोरता | आघातवर्ध्यता | तन्यता | चालकता ऊष्मा/विद्युत | ध्वनिक |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. कोल (कार्बन) | C | खुरदरा | मध्यम | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
| 2. सल्फर | S | खुरदरा | मुलायम | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
| 3. आयोडिन | I | खुरदरा | मुलायम | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
| 4–7. | खाली पंक्तियाँ — अपने आस-पास के पदार्थों से भरिए। | ||||||
2. धातु और अधातु में कुछ अपवाद भी होते हैं
- सभी धातुएँ तन्य होती हैं, अपवाद — बिस्मथ (Bi)।
- सभी धातुएँ ठोस होती हैं, अपवाद — मरकरी या पारा (Hg)।
- आयरन, कॉपर, एल्युमिनियम इत्यादि अत्यन्त कठोर हैं परन्तु लिथियम, सोडियम, पोटैशियम मुलायम होते हैं। इन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
- लेड (शीशा) एवं पारा (मरकरी) धातु होते हुए भी ऊष्मा के सबसे कम चालक हैं।
- कुछ तत्व ऐसे होते हैं जिनमें धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं। जैसे — बोरॉन (B), सिलिकन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटिमनी (Sb), टेल्युरियम (Te) एवं पोलोनियम (Po)।
- सभी अधातुएँ विद्युत की कुचालक हैं, अपवाद — ग्रेफाइट अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक है।
- हीरा अधातु है, फिर भी वह सबसे ज्यादा चमकनेवाला पदार्थ है।
3. धातुओं और अधातुओं के रासायनिक गुण
A. ऑक्सीजन से अभिक्रिया
आपने पिछली कक्षा में पढ़ा होगा और देखा भी होगा कि खुरपी, कुल्हाड़ी, कैंची, लोहे का गीला तावा कुछ समय तक नम वायु में खुला छोड़ देने पर उनमें जंग लग जाती है। जंग एक अलग पदार्थ है जो लोहे से भिन्न है।
क्रियाकलाप-6: 1. आइए लोहा ऑक्सीजन और जल की अभिक्रिया के परिणामस्वरूप जंग की प्रकृति की जाँच करें। आप अपने आस-पास से जंग लगी हुई वस्तु ला सकते हैं। जंग का रंग भूरा होता है, जिसे चाकू से खरोच कर कागज़ में जमा कीजिए। जंग के खुरचन को काँच की गिलास में लीजिए तथा उसमें थोड़ा जल मिलाइए जिससे घोल बन जाता है। जंग का विलयन क्षारीय होता है क्योंकि लाल लिटमस पत्र डालने पर इसका रंग नीला हो जाता है जो इसके क्षारीय होने का सूचक है। लोहे में लगा जंग वास्तव में लोहे का ऑक्साइड है। जब हवा में नमी रहती है तो हवा में उपस्थित ऑक्सीजन लोहे की बनी चीज़ों के ऊपरी परत के साथ प्रतिक्रिया करती है तथा नया पदार्थ लौह ऑक्साइड बनाता है।
लोहा + जल (नमी) + ऑक्सीजन → लौह का ऑक्साइड
2. एक लड़की कॉपर की बाला पहनी हुई थी। उसके ऊपर एक हल्की हरी परत जम गई जबकि नये में वह लाल-भूरे रंग (जो कि ताँबा का अपना रंग है) का था, तो क्या ताँबा में भी जंग लगता है — हाँ। कॉपर के बरतन को लम्बे समय तक नम वायु में खुला रखने पर एक हल्की हरी परत जम जाती है जो कि कॉपर हाइड्रॉक्साइड और कॉपर कार्बोनेट का मिश्रण होता है।
कॉपर + जल + ऑक्सीजन + कार्बनडाइऑक्साइड → कॉपर हाइड्रॉक्साइड + कॉपर कार्बोनेट
मैग्नेशियम रिबन के दहन के फलस्वरूप प्राप्त राख को जल में घोलने पर, लाल लिटमस पत्र डालने पर नीला हो जाता है जो कि क्षारीय होने का सूचक है।
मैग्नेशियम + ऑक्सीजन → मैग्नेशियम ऑक्साइड (उजला पाउडर)
मैग्नेशियम ऑक्साइड + जल → मैग्नेशियम हाइड्रॉक्साइड (विलयन) — लाल लिटमस नीला हो जाता है।
इस प्रकार लोहा, ताँबा, मैग्नेशियम इत्यादि धातु के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं अर्थात् धातु के ऑक्साइड में क्षारीय गुण होते हैं।
क्रियाकलाप-7 (अधातु के सन्दर्भ में): चारकोल का एक टुकड़ा लीजिए और इसे एक गैस जार में रखकर जलाइए और गैस जार ढँक दीजिए। बाद में गैस जार का ढक्कन खोलकर इसमें जल डाल दीजिए। इस विलयन को वाच ग्लास में रखकर नीले लिटमस पत्र ले जाएँगे तो नीले लिटमस पत्र का रंग लाल हो जाता है — यह इसके अम्लीय प्रकृति को दर्शाता है।
चारकोल + ऑक्सीजन + कार्बनडाइऑक्साइड (हवा से)
कार्बनडाइऑक्साइड + जल → कार्बनिक अम्ल
यह बताता है कि अधातु के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
जल के साथ अभिक्रिया
मैग्नेशियम के एक टुकड़े को लीजिए इसे बालूपत्र (sand paper) से पूरी तरह साफ़ कर लें। साफ़ किए हुए मैग्नेशियम के टुकड़े को थोड़ा जल से भरे परखनली में रखकर गर्म कीजिए। आपने देखा कि मैग्नेशियम जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस बनाती है जो कि पॉप ध्वनि के साथ जल उठता है।
मैग्नेशियम + जल —ताप→ मैग्नेशियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस (विलयन)
इस तरह हम समझ सकते हैं कि कुछ धातु जल के साथ अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। परन्तु सभी धातु जल के साथ अलग-अलग तरीके से अभिक्रिया करती हैं। सोडियम और पोटैशियम जल के साथ आसानी से अभिक्रिया करते हैं। मैग्नेशियम ठंडे पानी से अभिक्रिया नहीं करता परन्तु यह उबलते हुए पानी से जल्दी से अभिक्रिया करता है। जस्ता और लोहा वाष्प से अभिक्रिया करते हैं। अधातु जल से अभिक्रिया नहीं करती है। इसी कारण कुछ अधातुओं को जल में रखा जाता है। फॉस्फोरस को पानी में रखते हैं जिससे यह हवा से अभिक्रिया नहीं कर पाए क्योंकि यह हवा से अभिक्रिया करता है और आग पकड़ लेता है।
अम्ल के साथ अभिक्रिया
क्रियाकलाप-8: कुछ लोहे की कीलों को लीजिए इन्हें बालू पत्र (sand paper) से पूरा साफ़ कर लीजिए, इन्हें परखनली में रखें और कुछ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की बूंदों को डालें, एक जलती हुई अँगीठी इसके अंदर ले जाइए — यह धधकते हुए जलता है जो कि यह बताता है कि धातु तनु गंधकाम्ल और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर क्रमशः लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती है।
लोहा (आयरन) + हाइड्रोक्लोरिक (अम्ल) → फेरिक क्लोराइड (लवण) + हाइड्रोजन (गैस)
इस प्रयोग को जिंक चूर्ण के साथ भी कर सकते हैं। लेकिन कुछ धातु जैसे ताँबा और शीशा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया नहीं करते परन्तु वे गंधकाम्ल और नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करते हैं लेकिन हाइड्रोजन गैस नहीं बनाते। कुछ धातु जैसे सोना और प्लैटिनम पर अम्ल का प्रभाव नहीं पड़ता।
कुछ खाद्य पदार्थों को जैसे नींबू, दही, अचार, इमली जिनमें अम्ल होता है उनको धातु के बने पात्र जैसे (लोहा, ताँबा या एल्युमिनियम) में नहीं रखा जाता क्योंकि ये धातु उन अम्लों से अभिक्रिया कर हानिकारक पदार्थ लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। इस प्रकार खाद्य पदार्थ खाने लायक नहीं रह जाता है।
धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
प्रायः अधातु अम्ल से अभिक्रिया नहीं करते लेकिन कुछ अधातु जैसे सल्फर और फॉस्फोरस, सांद्र गंधकाम्ल और नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया तो करते हैं परन्तु हाइड्रोजन गैस नहीं बनाते।
यह रॉयल जल का लैटिन शब्द है। सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल के 3:1 के अनुपात के ताज़ा मिश्रण को ऐक्वारेजिया कहते हैं। यह सोना और प्लैटिनम को भी गला सकता है। अकेले किसी भी अम्ल में यह क्षमता नहीं होती है। जब पुराने एवं मलीन सोने के आभूषण को इस विलयन में डाला जाता है तो वह नए आभूषण की तरह चमकने लगता है लेकिन इसका वज़न बहुत कम हो जाता है अर्थात् वज़न कुछ घट जाता है क्योंकि सोना ऐक्वारेजिया के विलयन में गल जाता है।
क्षार के साथ अभिक्रिया
कुछ धातु सोडियम हाइड्रॉक्साइड और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड जो कि क्षार हैं उनके साथ अभिक्रिया कर लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
टिन + पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (विलयन) → पोटैशियम स्टैनेट + हाइड्रोजन गैस
जस्ता + पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (विलयन) → पोटैशियम जिंकेट + हाइड्रोजन गैस
एक परखनली में सोडियम हाइड्रॉक्साइड की 3–4 टिकियों को जल में घुलाकर ताज़ा विलयन बनाइए। इसमें एक एल्युमिनियम की पन्नी या लोहे की पिन डालिए। एक जलती हुई माचिस की तीली परखनली के मुँह के निकट लाइए। 'पॉप' ध्वनि पहले की ही तरह हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति दर्शाती है। अतः धातु क्षार से अभिक्रिया करते हैं और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। अधातुओं की क्षारों से अभिक्रिया जटिल है जिसे आप उच्च कक्षाओं में पढ़ेंगे।
विस्थापन अभिक्रियाएँ
पिछली कक्षा के अध्याय 5 में आपने कॉपर सल्फेट विलयन और आयरन के बीचवाली अभिक्रिया को देखा। आइए, इस प्रकार की कुछ और अभिक्रियाओं को देखें।
क्रियाकलाप-9: 100 ml के पाँच बीकर लीजिए और इन्हें A, B, C और D चिह्नित कर लीजिए। प्रत्येक बीकर में लगभग 50 ml जल लीजिए। प्रत्येक में नीचे दर्शाए पदार्थों का एक-एक चम्मच डालकर घोल लीजिए। (i) बीकर A: कॉपर सल्फेट + जिंक का टुकड़ा; (ii) बीकर B: कॉपर सल्फेट + लोहे की पिन; (iii) बीकर C: जिंक सल्फेट + ताँबे का चूर्ण; (iv) बीकर D: जिंक सल्फेट + लोहे की कील। बीकरों को बिना छेड़े कुछ समय तक छोड़ दीजिए।
अपने परीक्षण को नोट करें: 1. आप भिन्न बीकरों में क्या परिवर्तन देखते हैं? आपने पढ़ा है कि एक धातु दूसरे धातु को उसके यौगिक के जलीय विलयन से विस्थापित करता है। बीकर A में कॉपर सल्फेट का नीला रंग का क्या हुआ? बीकर के पेंदे पर क्या दिख रहा है?
यानी कॉपर सल्फेट (विलयन) + जिंक → जिंक सल्फेट (रंग हीन) + कॉपर (लाल भूरा)
आप देखेंगे कि नीला कॉपर सल्फेट का घोल रंगहीन हो गया है। यह जिंक सल्फेट के बनने के कारण हुआ है। जिंक कॉपर सल्फेट से कॉपर को हटाकर रंगहीन जिंक सल्फेट बनाता है तथा कॉपर जिंक सल्फेट से स्वतंत्र होकर लाल-भूरे रंग के रूप में बीकर में जमा हो जाता है।
कॉपर सल्फेट (नीला) + आयरन → आयरन सल्फेट + कॉपर
2. अब आप उपर्युक्त प्रयोग करके अवलोकन कीजिए कि बीकर में क्या परिवर्तन होता है? ध्यान रहे कि कॉपर सल्फेट ज़हरीला होता है। क्या I एवं II में कोई परिवर्तन हो रहा है? बीकर III एवं IV में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है। यानी कॉपर जिंक सल्फेट से जिंक को प्रतिस्थापित करने में सक्षम नहीं है क्योंकि जिंक, आयरन और कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। एक अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकता है परन्तु कम अभिक्रियाशील धातु, अधिक अभिक्रियाशील धातु को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है। इस प्रकार के कई प्रयोग करके देखे गए हैं कि जो धातु दूसरे धातु की तुलना में ज़्यादा क्रियाशील है, तो ऐसी परिस्थिति में ज़्यादा क्रियाशील धातु, कम क्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर देता है। क्या ऐसा नहीं लगता कि कई प्रयोगों के आधार पर एक सिद्धांत का निर्माण किया जा सकता है? अब आप समझ सकते हैं कि बीकर III, IV में विस्थापन अभिक्रियाएँ क्यों सम्पन्न नहीं हुईं — जिंक, आयरन और कॉपर के बीच अधिक अभिक्रियाशील है।
4. उपयोगिता
लोहा, ताँबा और एल्युमिनियम हमारी सभ्यता का एक हिस्सा रहा है। आप अनुमान लगाने में सक्षम होंगे कि क्यों धातुओं का उपयोग मशीन, मोटरगाड़ियाँ, रेलगाड़ी, वायुयान, खाना बनाने के पात्रों में होता है। लोहा (आयरन) का उपयोग हमारे दैनिक जीवन के लिए कई उपयोगी वस्तुओं से लेकर कृषि यंत्रों के बनाने में होता है। एल्युमिनियम का उपयोग बरतन बनाने तथा वायुयान में होता है क्योंकि यह हल्का होता है। ताँबे का इस्तेमाल बिजली के तार एवं विद्युत संयंत्रों में होता है। सोना चाँदी का इस्तेमाल आभूषण निर्माण में और कम्प्यूटर के विद्युत परिपथ में होता है। फ्यूज तार एक मिश्रधातु है जिसमें टिन और लेड को लिया जाता है। इसका गलनांक कम होता है पर प्रतिरोध ज़्यादा। जब उच्च वोल्टेज की विद्युतधारा बहती है, तो इन उच्च वोल्टेज में घर में विद्युत से चलनेवाली मशीनें जैसे पंखा, फ्रीज, टीवी, जल सकती हैं। इस उच्च वोल्टेज पर फ्यूज के तार पहले ही जलकर घर के विद्युत प्रवाह को रोक देता है जिससे घर की सामग्री जलने से बच जाती है।
लोहा धातु, हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन का घटक है जो मानव शरीर में ऑक्सीजन परिवहन करती है। ताँबा तथा जिंक एन्जाइमों में पाया जाता है। आर्सेनिक एक विषैली धातु है। मैग्नेशियम पौधों में होता है। कुछ अधातुएँ जैसे नाइट्रोजन, पोटैशियम एवं फास्फोरस का उपयोग उर्वरक के निर्माण में होता है। फॉस्फोरस माचिस के निर्माण में, आयोडिन कटने-छिलने पर ऐन्टिसेप्टिक के रूप में, सल्फर पटाखों के निर्माण में, ऑक्सीजन श्वसन में, हीरा ज्वेलरी और शीशा कटने में, ग्रेफाइट बैटरी और पेंसिल के बनाने में होता है। इस प्रकार आप अपने आस-पास की चीज़ों को धातु एवं अधातु के रूप में पहचानकर एवं उससे बननेवाली चीज़ों का नाम एवं उपयोगिता के बारे में तालिका में लिखिए।
तालिका (स्वयं भरें): क्र.सं. | धातु | अधातु | वस्तु | उपयोग।
क्रियाकलाप-10 — पता लगाइए: 1. अधातु जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है और सजीव श्वसन में आवश्यक। 2. अधातु जो उर्वरकों में इस्तेमाल होता है। 3. अधातु जो जल शुद्धिकरण में प्रयुक्त होता है। 4. अधातु जिसका बैंगनी रंग का विलयन ऐन्टीबायोटिक के रूप में होता है। 5. अधातु जो पटाखों में प्रयुक्त होते हैं। 6. एक मिश्रधातु जो विद्युत परिपथ में इस्तेमाल होता है।
Key Terms — मुख्य शब्द
- परमाणु (Atom) — पुस्तक के 'नये शब्द' में दिया गया शब्द; इस अध्याय में पदार्थों के मूल कण के रूप में।
- धातु (Metal) — ठोस, चमकीले, आघातवर्ध्य, तन्य, ध्वनि उत्पन्न करने वाले, ऊष्मा और विद्युत के सुचालक पदार्थ।
- अधातु (Non-Metal) — धातु के गुणों से भिन्न पदार्थ; सामान्यतः चमकहीन, पीटने पर चूर होने वाले, ऊष्मा व विद्युत के कुचालक।
- मिश्र धातु (Alloy) — कई धात्विक पदार्थों के मिलने से बनी धातु; अपना एक रंग एवं चमक होती है; जैसे फ्यूज तार (टिन + लेड)।
- आघातवर्ध्यता (Malleability) — पीटने पर धातु का शीट में फैल जाना, टुकड़े-टुकड़े हुए बिना आकार में वृद्धि।
- तन्यता (Ductility) — धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता; सोना और चाँदी सबसे अधिक तन्य।
- चालक (Conductor) — ऊष्मा या विद्युत को आगे बढ़ाने वाला पदार्थ; धातु सामान्यतः सुचालक, अधातु कुचालक।
- कठोरता (Hardness) — पदार्थ के कठोर होने का गुण; आयरन, कॉपर, एल्युमिनियम अत्यन्त कठोर, पर लिथियम, सोडियम, पोटैशियम मुलायम।
- ध्वनिक (Sonorous) — कठोर सतह पर टकराने पर कुछ क्षण तक सुनाई देने वाली आवाज़ उत्पन्न करने वाला गुण।
- उपधातु (Metalloid) — जिन तत्वों में धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं; जैसे बोरॉन, सिलिकन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटिमनी, टेल्युरियम, पोलोनियम।
- जंग (Rust) — लोहे पर लगा भूरा पदार्थ; वास्तव में लोहे का ऑक्साइड; इसका विलयन क्षारीय (लाल लिटमस नीला)।
- विस्थापन अभिक्रिया (Displacement reaction) — एक अधिक अभिक्रियाशील धातु द्वारा कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के जलीय विलयन से हटाकर उसका स्थान लेना।
- ऐक्वारेजिया (Aqua regia) — रॉयल जल का लैटिन नाम; सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल के 3:1 के ताज़ा मिश्रण; सोना और प्लैटिनम को भी गला सकता है।
Remember — याद रखें
- धातुओं में चमक होती है परन्तु अधातुओं में नहीं।
- धातुओं और अधातुओं का हमारे व्यावहारिक जीवन में व्यापक उपयोग होता है।
- सामान्यतः धातु आघातवर्धनीय, तन्य होती हैं अधातु नहीं होती हैं।
- सामान्यतः धातु ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होती हैं जबकि अधातु नहीं होती हैं।
- दहन करने पर धातु ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर धातु के ऑक्साइड बनाती हैं।
- अधातु जल से अभिक्रिया नहीं करती जबकि धातु जल से अभिक्रिया कर धातु के हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
- कुछ धातु क्षारों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
- अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके धातु यौगिकों के जलीय विलयन में विस्थापित कर देती हैं।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: चमक को ही धातु की पहचान मानना — टाइल्स, संगमरमर की चिकनी दीवारें, घिसा पत्थर और दर्पण भी चमकते हैं, पर धातु नहीं हैं; कई गुणों को एक साथ परखना होगा। दूसरी गलती: सभी धातुओं को एक समान मानना — लेड व पारा ऊष्मा के सबसे कम चालक हैं, बिस्मथ तन्य नहीं, पारा द्रव है, लिथियम-सोडियम-पोटैशियम मुलायम हैं। तीसरी गलती: धातु ऑक्साइड और अधातु ऑक्साइड की प्रकृति उलट देना — धातु ऑक्साइड क्षारीय (लाल लिटमस नीला), अधातु ऑक्साइड अम्लीय (नीला लिटमस लाल)। चौथी गलती: विस्थापन की दिशा उलट देना — कम अभिक्रियाशील धातु अधिक अभिक्रियाशील को नहीं हटा सकती (कॉपर, जिंक सल्फेट से जिंक को विस्थापित नहीं कर सकता)।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- लोहार के उदाहरण से समझाइए कि आघातवर्ध्यता क्या है — लोहे की कील और एल्युमिनियम का तार पीटने पर क्या होता है, और कोयले का टुकड़ा क्यों नहीं?
- क्रियाकलाप-4 (मोम-पिन वाली छड़) से ऊष्मा सुचालकता कैसे सिद्ध होती है? चाँदी-कॉपर सबसे अच्छे और लेड-पारा सबसे कम चालक क्यों कहे गए हैं?
- जंग क्या है और उसका विलयन क्षारीय कैसे सिद्ध होता है? ताँबे पर जमी हल्की हरी परत क्या है?
- धातु ऑक्साइड क्षारीय और अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं — मैग्नेशियम राख और चारकोल के प्रयोगों से समझाइए।
- बीकर A (कॉपर सल्फेट + जिंक) का नीला रंग क्यों गायब हो जाता है, और बीकर C व D में कोई परिवर्तन क्यों नहीं होता?
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- प्रश्न: धातु और अधातु की पहचान के लिए किन भौतिक गुणों को परखा जाता है?
उत्तर: चमक, ठोस अवस्था, पीटने पर फैलना (आघातवर्ध्यता), तार खींचना (तन्यता), ऊष्मा चालकता, विद्युत चालकता और ध्वनिकता। धातु सामान्यतः चमकीले, आघातवर्ध्य, तन्य, ध्वनि उत्पन्न करने वाले तथा ऊष्मा व विद्युत के सुचालक होते हैं; अधातु में ये गुण सामान्यतः नहीं होते। - प्रश्न: चमक के आधार पर धातु-अधातु का विभेद क्यों आसान नहीं है?
उत्तर: क्योंकि घिसने-चिकनाने से कई अधातु-युक्त चीज़ें भी चमकने लगती हैं — फ़र्श के टाइल्स, संगमरमर की चिकनी दीवारें, घिसा पत्थर और दर्पण। ये कई पदार्थों के मिलने से बनी होती हैं, पर धातु नहीं हैं। इसलिए कई गुणों को एक साथ परखना ज़रूरी है। - प्रश्न: धातु के ऑक्साइड क्षारीय और अधातु के ऑक्साइड अम्लीय क्यों कहे जाते हैं?
उत्तर: जंग (लोहे का ऑक्साइड) का विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है — क्षारीय होने का सूचक। मैग्नेशियम राख (मैग्नेशियम ऑक्साइड) का विलयन भी लाल लिटमस को नीला करता है। इसके विपरीत चारकोल जलाने से बना कार्बनडाइऑक्साइड जल में घुलकर कार्बनिक अम्ल बनाता है, जो नीले लिटमस को लाल कर देता है — अम्लीय होने का सूचक। - प्रश्न: धातुएँ जल, अम्ल और क्षार से कैसे अभिक्रिया करती हैं?
उत्तर: जल से: कुछ धातुएँ हाइड्रोजन गैस बनाती हैं — सोडियम-पोटैशियम आसानी से, मैग्नेशियम उबलते पानी से, जस्ता-लोहा वाष्प से; अधातु जल से अभिक्रिया नहीं करती। अम्ल से: धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस (लोहा + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → फेरिक क्लोराइड + हाइड्रोजन); ताँबा-शीशा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से नहीं, पर गंधकाम्ल-नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया करते हैं (बिना हाइड्रोजन); सोना-प्लैटिनम पर अम्ल का प्रभाव नहीं। क्षार से: टिन व जस्ता पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया कर क्रमशः पोटैशियम स्टैनेट व पोटैशियम जिंकेट + हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। - प्रश्न: विस्थापन अभिक्रिया का नियम बीकर प्रयोगों से कैसे सिद्ध होता है?
उत्तर: बीकर A में जिंक, कॉपर सल्फेट से कॉपर को हटाकर रंगहीन जिंक सल्फेट बनाता है और कॉपर लाल-भूरे रूप में जमा हो जाता है; बीकर B में आयरन भी कॉपर को विस्थापित करता है। पर बीकर C (जिंक सल्फेट + ताँबा) व D (जिंक सल्फेट + लोहा) में कोई परिवर्तन नहीं होता, क्योंकि जिंक, आयरन और कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। नियम: अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील को विस्थापित कर सकती है, पर कम अभिक्रियाशील अधिक अभिक्रियाशील को नहीं।
Extension — पुस्तक के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार
- MCQ (i): निम्नलिखित में से किसको पिघलाकर नया रूप दिया जा सकता है? — लोहा (फास्फोरस, सल्फर, हाइड्रोजन नहीं)।
- MCQ (ii): निम्नलिखित में से किसको पीटकर चादरों में परिवर्तित किया जा सकता है? — जिंक (आघातवर्ध्य धातु; फास्फोरस, ऑक्सीजन, सल्फर नहीं)।
- MCQ (iii): निम्नलिखित में से किसको पतले तार में परिवर्तित कर सकते हैं? — सोना (सबसे अधिक तन्य धातुओं में से एक; सल्फर, फास्फोरस, कार्बन नहीं)।
- MCQ (iv): निम्नलिखित में कौनसी धातु मानव रक्त में पायी जाती है? — लोहा (हीमोग्लोबिन का घटक; सोना, ताँबा, चाँदी नहीं)।
- MCQ (v): निम्नलिखित में से किसको पिघलाकर नया रूप दिया जा सकता है? — लोहा (पुस्तक में यह प्रश्न (i) की पुनरावृत्ति है — दोनों का उत्तर एक ही है)।
- रिक्त स्थान (क): सबसे पुराना धातु — सोना (आविष्कार 6000 ई. पूर्व)।
- रिक्त स्थान (ख): एल्युमिनियम की पतली पर्णिकाओं का उपयोग चॉकलेट के लपेटने में होता है।
- रिक्त स्थान (ग): सभी धातुएँ तन्य होती हैं (अपवाद: बिस्मथ)।
- रिक्त स्थान (घ): पारा (मरकरी) एक द्रव धातु है।
- रिक्त स्थान (ङ): ग्रेफाइट एक अधातु है परन्तु विद्युत का सुचालक है।
- सही/गलत (क): सामान्यतया अधातु अम्लों से अभिक्रिया करते हैं — गलत (प्रायः अधातु अम्ल से अभिक्रिया नहीं करते; कुछ अधातु सांद्र गंधकाम्ल-नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया करते हैं, पर हाइड्रोजन गैस नहीं बनाते)।
- सही/गलत (ख): सोडियम बहुत अभिक्रियाशील धातु है — सही (जल के साथ आसानी से अभिक्रिया करता है)।
- सही/गलत (ग): कॉपर, जिंक सल्फेट के विलयन से जिंक विस्थापित करता है — गलत (कॉपर, जिंक से कम अभिक्रियाशील है; बीकर C में कोई परिवर्तन नहीं होता)।
- सही/गलत (घ): लकड़ी ऊष्मा का सुचालक है — गलत (लकड़ी के सिरे गर्म नहीं होते; कुकर के हत्थे में लकड़ी इसलिए लगती है कि हाथ न जले)।
- सही/गलत (ङ): कोयले को खींचकर तार प्राप्त किया जा सकता है — गलत (कोयला/कार्बन अधातु है, तन्य नहीं; पीटने पर चूर हो जाता है)।
- तालिका-कार्य (अभ्यास-4): गुणों के आधार पर धातु-अधातु अंतर — चमक: धातु में होती है, अधातु में नहीं (अपवाद: हीरा अधातु होकर भी सबसे ज्यादा चमकता है); तन्यता: धातु तन्य (अपवाद: बिस्मथ), अधातु नहीं; आघातवर्ध्यता: धातु आघातवर्ध्य, अधातु पीटने पर चूर; कठोरता: आयरन-कॉपर-एल्युमिनियम अत्यन्त कठोर, पर लिथियम-सोडियम-पोटैशियम मुलायम, सल्फर-आयोडिन मुलायम, कोल मध्यम; ऊष्मा चालकता: धातु सुचालक (सर्वोत्तम चाँदी-कॉपर, सबसे कम लेड-पारा), अधातु नहीं; विद्युत चालकता: धातु सुचालक, अधातु कुचालक (अपवाद: ग्रेफाइट)।
- कारण (5क): कॉपर, जिंक को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता — क्योंकि जिंक, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है; कम अभिक्रियाशील धातु अधिक अभिक्रियाशील को विस्थापित नहीं कर सकती (बीकर C में कोई परिवर्तन नहीं होता)।
- कारण (5ख): फॉस्फोरस को पानी में रखते हैं, जबकि सोडियम और पोटैशियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है — फॉस्फोरस हवा से अभिक्रिया करता है और आग पकड़ लेता है, इसलिए पानी में रखने से वह हवा से अभिक्रिया नहीं कर पाता; सोडियम और पोटैशियम जल के साथ आसानी से अभिक्रिया करते हैं, इसलिए उन्हें जल से दूर मिट्टी के तेल में रखा जाता है।
- कारण (5ग): नींबू के अचार को एल्युमिनियम पात्रों में नहीं रखते हैं — नींबू के अचार में अम्ल होता है; एल्युमिनियम धातु उस अम्ल से अभिक्रिया कर हानिकारक लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती है, जिससे खाद्य पदार्थ खाने लायक नहीं रह जाता।
- मिलान (6): सोना — आभूषण; आयरन — मशीनें; एल्युमिनियम — खाद्य सामग्री लपेटना; कार्बन — ईंधन; ताँबा — बिजली के तार; पारा (मरकरी) — थर्मामीटर।
- क्या होता है जब (7क): मैग्नेशियम रिबन के दहन से प्राप्त राख (मैग्नेशियम ऑक्साइड) को जल में घोला जाता है और इसमें लाल लिटमस पत्र डाला जाता है — राख जल में घुलकर मैग्नेशियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारीय विलयन) बनाती है, इसलिए लाल लिटमस नीला हो जाता है।
- क्या होता है जब (7ख): बंद शीशी में जलते चारकोल को डालकर पानी डाला जाए और नीला लिटमस पत्र डाला जाता है — शब्द समीकरण: चारकोल + ऑक्सीजन → कार्बनडाइऑक्साइड; कार्बनडाइऑक्साइड + जल → कार्बनिक अम्ल; अम्लीय विलयन होने से नीला लिटमस लाल हो जाता है।
- गोलू का प्रयोग (8): सोडियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन में लोहे की पिनें डालने पर जलती माचिस की तीली पॉप ध्वनि के साथ भभककर जलने लगी — निकली गैस हाइड्रोजन है (धातु + क्षार → लवण + हाइड्रोजन गैस; पॉप ध्वनि हाइड्रोजन की पहचान है)।
- क्रियाकलाप-10 — पता लगाइए: 1. ऑक्सीजन (श्वसन के लिए आवश्यक अधातु); 2. नाइट्रोजन, पोटैशियम एवं फास्फोरस (उर्वरकों के निर्माण में); 3. जल शुद्धिकरण में प्रयुक्त अधातु का नाम अध्याय में नहीं दिया गया है — पता लगाइए (कार्य के रूप में छोड़ दिया गया है, अनुमान से नहीं भरा गया); 4. आयोडिन (कटने-छिलने पर ऐन्टिसेप्टिक के रूप में; पुस्तक में 'ऐन्टीबायोटिक' कहा गया है); 5. सल्फर (पटाखों के निर्माण में); 6. फ्यूज तार — टिन और लेड की मिश्रधातु (विद्युत परिपथ की सुरक्षा में)।
- शुरुआत: पत्थर-लकड़ी-हड्डी के औज़ार → धातु की खोज से मज़बूत औज़ार (ताँबा, लोहा) और आग में गर्म करके किसी भी रूप में ढालना; सात प्राचीनतम धातुएँ: सोना, ताँबा, चाँदी, शीशा, टिन, लोहा, पारा; धातुकर्म (Metallurgy) विज्ञान की सबसे पुरानी पद्धति; सबसे पुराना धातु सोना (6000 ई. पूर्व)।
- भौतिक गुण: चमक (एल्युमिनियम/जिंक/मैग्नेशियम/चाँदी सफ़ेद, सोना पीला, ताँबा लाल भूरा; हवा के अवयवों से ऑक्साइड-कार्बोनेट-सल्फ़ाइड की परत से सतह धुँधली, साफ़ करने पर चमक लौटती है; चमक अकेली पहचान नहीं — टाइल्स, संगमरमर, घिसा पत्थर, दर्पण भी चमकते हैं); ठोस अवस्था (पारा को छोड़कर सभी धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस); आघातवर्ध्यता (पीटने पर शीट, टुकड़े नहीं; अधातु चूर); ऊष्मा सुचालकता (मोम-पिन प्रयोग; सर्वोत्तम चाँदी-कॉपर, सबसे कम लेड-पारा; भोजन के बरतन); विद्युत चालकता (A–B परिपथ, बल्ब जलना = सुचालक; तारों पर PVC/रबड़ का कवर); तन्यता (पतले तार; सर्वाधिक सोना-चाँदी); ध्वनिकता (कठोर सतह पर टकराने पर कुछ क्षण तक सुनाई देने वाली आवाज़)।
- सोना-कैरेट: शुद्ध सोना 24 कैरेट; आभूषण 22 कैरेट = 22 भाग सोना + 2 भाग ताँबा/चाँदी; 18 कैरेट = 18 भाग सोना + 6 भाग ताँबा/चाँदी।
- अपवाद: बिस्मथ तन्य नहीं; पारा द्रव; लिथियम-सोडियम-पोटैशियम मुलायम (चाकू से कटते हैं); लेड-पारा ऊष्मा के सबसे कम चालक; उपधातु (B, Si, Ge, As, Sb, Te, Po) में दोनों गुण; ग्रेफाइट अधातु होकर भी विद्युत सुचालक; हीरा अधातु होकर भी सबसे ज्यादा चमकता है।
- रासायनिक गुण: ऑक्सीजन से — धातु ऑक्साइड क्षारीय (जंग = लोहे का ऑक्साइड, भूरा, विलयन लाल लिटमस को नीला; ताँबे पर हरी परत = कॉपर हाइड्रॉक्साइड + कॉपर कार्बोनेट; मैग्नेशियम ऑक्साइड उजला पाउडर → हाइड्रॉक्साइड), अधातु ऑक्साइड अम्लीय (चारकोल → CO₂ → कार्बनिक अम्ल, नीला लिटमस लाल); जल से — सोडियम-पोटैशियम आसानी से, मैग्नेशियम उबलते पानी से, जस्ता-लोहा वाष्प से, अधातु नहीं (फॉस्फोरस पानी में रखा जाता है क्योंकि हवा से आग पकड़ लेता है); अम्ल से — धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन (लोहा + HCl → फेरिक क्लोराइड + हाइड्रोजन; ताँबा-शीशा तनु HCl से नहीं; सोना-प्लैटिनम पर कोई प्रभाव नहीं; खट्टे खाद्य धातु बर्तन में नहीं); क्षार से — टिन → पोटैशियम स्टैनेट, जस्ता → पोटैशियम जिंकेट + हाइड्रोजन; ऐक्वारेजिया = सांद्र HCl : सांद्र HNO₃ = 3:1, सोना-प्लैटिनम भी गलाता है।
- विस्थापन: अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील को उसके लवण के विलयन से विस्थापित करती है (A: जिंक + कॉपर सल्फेट → रंगहीन जिंक सल्फेट + लाल-भूरा कॉपर; B: आयरन + कॉपर सल्फेट → आयरन सल्फेट + कॉपर; C व D में कोई परिवर्तन नहीं क्योंकि जिंक, आयरन व कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है)।
- उपयोगिता: लोहा — दैनिक वस्तुएँ व कृषि यंत्र, हीमोग्लोबिन का घटक (ऑक्सीजन परिवहन); एल्युमिनियम — बरतन व वायुयान (हल्का); ताँबा — बिजली के तार व विद्युत संयंत्र; सोना-चाँदी — आभूषण व कम्प्यूटर परिपथ; फ्यूज तार (टिन + लेड, कम गलनांक, ज़्यादा प्रतिरोध) उच्च वोल्टेज पर पहले जलकर घर को बचाता है; अधातु — नाइट्रोजन/पोटैशियम/फॉस्फोरस उर्वरक, फॉस्फोरस माचिस, आयोडिन ऐन्टिसेप्टिक, सल्फर पटाखे, ऑक्सीजन श्वसन, हीरा ज्वेलरी व शीशा कटना, ग्रेफाइट बैटरी व पेंसिल।
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