Chapter 1: दहन और ज्वाला: चीजों का जलना
ज्वलन ताप, दहन की तीन शर्तें, मोमबत्ती की ज्वाला के तीन क्षेत्र और आग पर नियंत्रण — पुस्तक के क्रियाकलापों सहित।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Science • Book: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
दहन और ज्वाला: चीजों का जलना — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Vigyan-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 8) | अध्याय 1 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है और ये नोट्स पाठ्यपुस्तक का स्थान नहीं लेते।

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मोमबत्ती की ज्वाला का सरलीकृत चित्र — लेबल चित्र पर ही छपे हैं। यह एक सामान्य शिक्षण चित्र है, प्रयोगशाला की वास्तविक तस्वीर नहीं।

जलती मोमबत्ती का सामान्य चित्र — आग और ज्वाला को समझने के लिए।
अध्याय का सार
आग हमारे रोज़ के जीवन में हर जगह है — खाना बनाने से लेकर रोशनी तक। पर कोई चीज़ जलती क्यों है, और कोई क्यों नहीं जलती? इस अध्याय में यही समझाया गया है: जलने के लिए तीन शर्तें, मोमबत्ती की ज्वाला की बनावट, और आग लगने पर उसे कैसे रोका जाए।
1. जलने से पहले क्या होता है — ज्वलन ताप
दो पत्थरों को कसकर रगड़ने पर चिंगारी निकलती है, और धूप में हैंड-लेंस से सूरज की रोशनी कागज़ पर केंद्रित करने पर कागज़ गरम होकर जलने लगता है। दोनों में एक ही बात है — चीज़ को गरम किया गया। किसी चीज़ को जलाने के लिए उसे गरम करके एक निश्चित तापमान तक पहुँचाना पड़ता है। वह न्यूनतम तापमान जिस पर पहुँचने के बाद कोई पदार्थ जलना शुरू कर देता है, उस पदार्थ का ज्वलन ताप कहलाता है। जब तक पदार्थ का तापमान इससे कम रहेगा, वह नहीं जलेगा। अलग-अलग पदार्थों का ज्वलन ताप अलग-अलग होता है और यह पदार्थ की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर करता है — पेट्रोल का ज्वलन ताप केरोसीन से कम होता है। इसीलिए माचिस की तीली अपने आप नहीं जल जाती, पर कागज़ आसानी से जल जाता है और लकड़ी का टुकड़ा उतनी आसानी से नहीं।
गर्मियों में बहुत अधिक गर्मी पड़ने पर सूखी घास आग पकड़ लेती है और पूरा जंगल आग की लपट में आ सकता है — इसे दावानल कहते हैं। जिसका ज्वलन ताप कम होता है, वह आसानी से आग पकड़ लेता है; कभी-कभी माचिस की तीली स्टोव के बर्नर के बगल में, ज्वाला से दूर रखे रहने पर भी आग पकड़ लेती है। सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस का ज्वलन ताप इतना कम है कि वह कमरे के तापमान पर ही जल उठता है — इसीलिए उसे हाथ से नहीं छूते और पानी के अंदर रखना पड़ता है।
2. दहन के लिए तीन चीज़ें ज़रूरी हैं
जलती मोमबत्ती के ऊपर बड़ा-सा जार या बोतल रखने पर मोमबत्ती कुछ देर बाद बुझ जाती है, और ज्वाला के बुझने से ठीक पहले जार हटा लेने पर ज्वाला फिर पहले जैसी हो जाती है। इससे पता चलता है कि दहन के लिए हवा का होना आवश्यक है — हवा में मौजूद ऑक्सीजन गैस जलने में सहायक होती है। कागज़ की कटोरी में पानी गरम करने वाले क्रियाकलाप में खाली कटोरी जल जाती है, पर पानी भरी कटोरी नहीं जलती, क्योंकि कटोरी से ऊष्मा का संचरण जल में होता रहता है और कागज़ ज्वलन ताप तक पहुँच ही नहीं पाता।
साधारणतया जलना एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें तीन चीज़ों की आवश्यकता है — (1) ज्वलनशील पदार्थ का होना, (2) ज्वलन ताप तक पहुँचने का उपाय, (3) हवा की ज़रूरत। यही कारण है कि लकड़ी वाले चूल्हे में कुछ खाली स्थान छोड़ा जाता है, केरोसीन वाले स्टोव में छिद्राकार लोहे का गोल वलयाकार रचना होती है जिससे नीचे से हवा प्रवेश करे, और गैस स्टोव के बर्नर में कई छोटे-छोटे छेद होते हैं — सब हवा पहुँचाने के लिए। बरसात में माचिस की तीली और लकड़ी आसानी से नहीं जलते, क्योंकि ठंड में वातावरण का ताप कम होता है और नमी ज़्यादा होती है; गीले गोइठे-लकड़ी को केरोसीन डालकर जलाया जाता है।
3. माचिस की कहानी
पुराने समय में चकमक पत्थरों को आपस में रगड़ने से निकलने वाली चिंगारी से आग जलाई जाती थी। माचिस बनाने का प्रयास सबसे पहले सन् 1680 में हुआ — राबर्ट बॉयल ने कागज़ के टुकड़ों पर सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस लगाकर उसे सल्फ़र लगे कागज़ पर रखा तो कागज़ ने आग पकड़ ली। पर सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस बहुत कम तापमान पर आग पकड़ लेता है, इसलिए वह माचिस काफ़ी खतरनाक थी। आज की माचिस की शुरुआत 1845 में लाल फ़ॉस्फ़ोरस के आविष्कार के बाद हुई — लाल फ़ॉस्फ़ोरस अपने आप आग नहीं पकड़ता, बल्कि रगड़ने पर ही जलता है। घरों की माचिस की डिब्बी में तीलियों पर लगा रसायन पोटैशियम क्लोरेट होता है और डिब्बी पर लाल फ़ॉस्फ़ोरस और सल्फ़र लगा होता है। तीली डिब्बी पर रगड़ने से आसानी से जल उठती है पर अपने आप नहीं जलती, इसलिए खतरनाक भी नहीं होती। लाल फ़ॉस्फ़ोरस इस्तेमाल करके पहली बार सेफ्टी माचिस कार्ल लुन्डस्ट्राम ने 1855 में स्वीडन में बनाई थी।
4. मोमबत्ती का इतिहास — फैराडे की मोमबत्ती
माइकल फैराडे महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने 1860 में लोगों को मोमबत्ती का इतिहास बताया। मोम एक ईंधन है, यानी ऊर्जा का एक रूप, और एक हाइड्रोकार्बन है जो हाइड्रोजन और कार्बन से मिलकर बनी होती है; यह मधुमक्खी के छत्ते से भी निकाली जाती है। बत्ती चारों ओर मोम से घिरी होती है। बत्ती जलने पर आस-पास नीचे वाली मोम पिघलने लगती है, पिघली मोम धागे की सहायता से ऊपर चढ़ती है और गर्म होकर हाइड्रोजन और कार्बन देती है। हाइड्रोजन सुनहरी ज्वाला के साथ जलकर जलवाष्प बनाता है और कार्बन को भी जलाता है — कार्बन का कुछ भाग बच भी जाता है जो ज्वाला के बाहरी भाग में जलता है। इस तरह मोमबत्ती प्रकाश और ऊष्मा देती है। 50 मिली के बीकर में बर्फ़ डालकर नीचे मोमबत्ती जलाने पर बीकर के नीचे जलवाष्प का उपस्थित होना यह प्रमाणित करता है कि जलने पर जलवाष्प बनता है; निकलने वाली गैस को चूना-पानी के अंदर बहाने पर उसका दूधिया हो जाना कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मौजूदगी दर्शाता है।
दीये में तेल से भीगी बत्ती में रूई से तेल सोखकर ऊपर आता रहता है और जलता रहता है — बिल्कुल इसी तरह मोमबत्ती में पिघली हुई मोम ऊपर की ओर चढ़ती है। काँच की नली को लौ के अंदर बत्ती के ठीक ऊपर लगाने पर दूसरी ओर से सफ़ेद धुआँ निकलता है — यही असल में जलता है, यानी मोमबत्ती में मोम की वाष्प जलती है, ठोस मोम नहीं। मोमबत्ती बुझाने पर सफ़ेद धुएँ की लाइन-सी दिखाई देती है; जलती तीली को बत्ती से छुआए बिना धुएँ की इस लाइन के पास लाने पर मोमबत्ती फिर जल उठती है। क्रम यह है — बत्ती के जलने से गर्मी पैदा होती है, तापमान बढ़ता है, ठोस मोम द्रव में और फिर द्रव मोम वाष्प में बदल जाती है, और अंत में मोम की यह वाष्प ऑक्सीजन से क्रिया करती है। लौ के काले भाग में काँच की मुड़ी हुई नली टिकाने पर धुएँ का रंग बताता है कि लौ के इस दूसरे हिस्से में मोम के जलने से बना कार्बन मौजूद होता है।
5. आग गर्म क्यों होती है, और अग्निकाण्ड क्यों होते हैं
जब किसी ईंधन को जलाते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प बनता है। यह एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एक नये पदार्थ का निर्माण होता है; यह नया पदार्थ काफ़ी स्थायी होता है और इस प्रक्रिया में काफ़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसका ऊष्मीय मान बहुत ज़्यादा होता है — अतः आग गर्म होती है। कोयले की खानों में कोयले के स्वतः दहन से कई खतरनाक अग्निकाण्ड होते हैं; जंगल में स्वतः अग्निकाण्ड अधिक गर्मी से, कभी आकाशीय बिजली के गिरने से या कभी-कभी पौधों के आपसी रगड़ से हो सकते हैं; त्योहारों पर जलाए जाने वाले पटाखे भी अग्निकाण्ड का प्रमुख कारण हो सकते हैं। विस्फोट एक तरह के तीव्र दहन का ही उदाहरण है।
6. आग पर नियंत्रण कैसे करें
फायर ब्रिगेड आग पर जल डालती है — जल ज्वलनशील पदार्थ को ठंडा करता है, जिससे आग का फैलाव बंद हो जाता है, और इस प्रक्रिया में बनी जलवाष्प बाहरी वायु की आपूर्ति बंद कर देती है। आग के फैलाव को रोकने के लिए तीन में से किसी एक काम को करना पड़ेगा — (क) दाह्य पदार्थ को हटा देना, (ख) ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद कर देना, (ग) पदार्थ को उसके ज्वलन ताप से नीचे ठंडा कर देना।
आग बुझाने वाले यंत्र को अग्निशामक कहा जाता है; ये दो तरह के होते हैं — एक जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस उच्च दाब पर भरी होती है, और दूसरा जिसमें काँच की एक शीशी में अम्ल और जिस पात्र में काँच की बोतल रखी होती है उसमें सोडियम बाइकार्बोनेट का विलयन रखा होता है। बोतल का मुँह तोड़ने पर अम्ल सोडियम बाइकार्बोनेट से प्रतिक्रिया कर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है जो आग का हवा से सम्पर्क तोड़ देता है। सरकारी आदेश के अनुसार कार्यालय, संस्थान या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में इन्हें रखना अति आवश्यक है। सावधानियाँ: जहाँ बिजली से आग लगी हो वहाँ पानी का उपयोग नहीं किया जाए; जहाँ तेल में आग लगा हो वहाँ भी पानी नहीं डालिए, क्योंकि पानी तेल से भारी होने के चलते नीचे हो जाएगा और आग बुझ नहीं पाएगी। पेट्रोल पंप के नज़दीक बाल्टी में बालू रखा देखते होंगे — वही कारण है। आग लगने पर तुरंत अग्निशमन सेवा (101) को सूचित करें और अपने नज़दीकी अग्निशमन सेवा का सम्पर्क नम्बर अवश्य रखें।
7. ज्वाला के तीन क्षेत्र
मोमबत्ती की ज्वाला और रसोईगैस के स्टोव की ज्वाला के रंग को ध्यानपूर्वक देखने पर मोमबत्ती की ज्वाला के तीन क्षेत्र दिखते हैं — 1. बाहरी भाग, 2. मध्य भाग, 3. आन्तरिक भाग। बाहरी भाग नीला और अदीप्त होता है; यहाँ पूर्ण दहन होता है क्योंकि यहाँ ऑक्सीजन ज़्यादा उपलब्ध है, और यह सबसे गर्म होता है। मध्य भाग पीला, चमकीला और दीप्त क्षेत्र है; यहाँ कुछ कार्बन के कण भी होते हैं जो गर्म होकर वाष्पित हो जाते हैं और चमकने लगते हैं — यहाँ पूर्ण दहन नहीं होता क्योंकि ऑक्सीजन कम मिल पाता है। आन्तरिक क्षेत्र बत्ती के एकदम नज़दीक होता है; यह काला रंग का होता है क्योंकि कार्बन के कुछ कण बच जाते हैं, और यह सबसे कम गर्म क्षेत्र है।
8. ईंधन, धुआँ और प्रदूषण
ईंधन जलाने से विभिन्न प्रकार की गैसें हवा में मुक्त होती हैं, और इन गैसों का भी हमारे वायुमण्डल को प्रदूषित करने में बहुत बड़ा योगदान है — एक ओर धुएँ से जन-जीवन परेशान है, वहीं वनस्पतियाँ भी इससे बरबाद हो रही हैं। विशेषकर जीवाश्म ईंधन के जलने से नाइट्रोजन और सल्फ़र इत्यादि के विभिन्न ऑक्साइड बनते हैं जो बादलों के साथ अम्ल वर्षा करते हैं। इसलिए चूल्हे में आदर्श ईंधन की विशेषता रखने वाले पदार्थों को ही उपयोग में लाना चाहिए — अच्छा ईंधन वह है जो आसानी से उपलब्ध हो, सस्ता हो, जलने पर अधिक ऊष्मा दे और कम धुआँ तथा कम हानिकारक गैस छोड़े। इसकी विस्तृत जानकारी वायु एवं जल प्रदूषण वाले अध्याय में दी गई है।
ठोस मोम नहीं — मोम की वाष्प जलती है। यही कारण है कि बुझी मोमबत्ती के धुएँ की लाइन के पास जलती तीली लाने पर वह बिना बत्ती छुए फिर जल उठती है। परीक्षा में यही सबसे पूछा जाने वाला तथ्य है।
बिजली से लगी आग और तेल में लगी आग पर पानी डालना खतरनाक है — बिजली वाली आग में करंट का खतरा है, और तेल वाली आग में पानी तेल से भारी होने से नीचे बैठ जाता है, आग फैलती है, बुझती नहीं। इनके लिए अग्निशामक या बालू का प्रयोग करें।
ज्वाला का सबसे गर्म भाग बाहरी नीला क्षेत्र है, भीतरी काला क्षेत्र नहीं। और दहन की तीन शर्तें हमेशा क्रम से लिखें — ज्वलनशील पदार्थ, ज्वलन ताप तक पहुँचने का उपाय, हवा (ऑक्सीजन) की ज़रूरत।
What you should learn — तुम्हें क्या सीखना चाहिए
दहन की शर्तों, ज्वाला के क्षेत्रों और अच्छे ईंधन की पहचान को समझें — साथ ही माचिस और मोमबत्ती के प्रयोगों से यह भी कि ठोस मोम नहीं, उसकी वाष्प जलती है।
Key Terms — मुख्य शब्द
- दहन (Combustion) — ऑक्सीजन की उपस्थिति में ज्वलनशील पदार्थों के जलने पर ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होने की रासायनिक प्रक्रिया।
- ज्वलन ताप — वह सबसे कम तापमान जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ लेता है।
- ज्वलनशील पदार्थ — वे पदार्थ जो लौ पर गर्म करने पर जल जाते हैं, जैसे कागज़ और पेट्रोल।
- अज्वलनशील पदार्थ — वे पदार्थ जो लौ पर गर्म करने पर नहीं जलते हैं।
- ज्वाला — जलती गैस का प्रकाश देने वाला भाग; मोमबत्ती की ज्वाला के तीन क्षेत्र होते हैं।
- दीप्त क्षेत्र (Luminous Zone) — ज्वाला का पीला चमकीला मध्य भाग।
- पूर्ण दहन (Complete Combustion) — पर्याप्त ऑक्सीजन में होने वाला दहन, जैसे बाहरी नीले क्षेत्र में।
- अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion) — कम ऑक्सीजन में होने वाला दहन, जैसे मध्य पीले क्षेत्र में।
- ईंधन — वह पदार्थ जिसके जलने से ऊष्मा ऊर्जा मिलती है।
- जीवाश्म ईंधन (Fossil fuel) — कोयला, पेट्रोल जैसे प्राचीन जैव पदार्थों से बने ईंधन।
- अग्निशामक (Fire Extinguisher) — आग बुझाने वाला यंत्र।
- चूना पानी (Lime Water) — कार्बन डाइऑक्साइड की जाँच के लिए प्रयोग होने वाला विलयन; CO2 से दूधिया हो जाता है।
Remember — याद रखें
- दहन एक रासायनिक अभिक्रिया है — ज्वलनशील पदार्थ और ऑक्सीजन के बीच की अभिक्रिया।
- खाना बनाने से लेकर ट्रांसपोर्ट तक हमें ईंधन की आवश्यकता है।
- दहन के लिए दाह्य पदार्थ, ऑक्सीजन की उपलब्धता और उसे उसके ज्वलन ताप तक पहुँचने की आवश्यकता है।
- वह क्षेत्र जहाँ पदार्थ का पूर्ण दहन होता है, ज्वाला का बाहरी क्षेत्र है।
- ऐसे पदार्थ जो लौ पर गर्म करने पर जल जाते हैं, ज्वलनशील पदार्थ कहलाते हैं।
- जो पदार्थ लौ पर गर्म करने पर नहीं जलते हैं, अज्वलनशील पदार्थ कहलाते हैं।
- वह तापमान जिस पर पहुँचने के बाद कोई पदार्थ जलना शुरू कर देता है, उस पदार्थ का ज्वलन ताप कहलाता है।
- ऑक्सीजन की उपस्थिति में ज्वलनशील पदार्थों के जलने पर ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होने की प्रक्रिया को दहन कहते हैं।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: 'ज्वाला का भीतरी भाग सबसे गरम होता है' लिखना। सही उत्तर है — बाहरी नीला क्षेत्र सबसे गरम होता है, भीतरी गहरा क्षेत्र सबसे ठंडा। दूसरी गलती: 'मोमबत्ती में ठोस मोम जलती है' लिखना — जलती है मोम की वाष्प।
Chart / Table: ज्वाला के क्षेत्र
| विषय | विवरण |
|---|---|
| बाहरी क्षेत्र | नीला, अदीप्त, पूर्ण दहन, सबसे गरम (ऑक्सीजन ज़्यादा) |
| मध्य क्षेत्र | पीला चमकीला, दीप्त, आंशिक दहन (कार्बन कण चमकते हैं) |
| भीतरी क्षेत्र | काला, बत्ती के पास, सबसे कम गरम (कार्बन कण बचे रहते हैं) |
| ज्वलन ताप | आग पकड़ने का न्यूनतम तापमान; हर पदार्थ का अलग |
| ईंधन | ऊष्मा देने वाला पदार्थ; अच्छा ईंधन अधिक ऊष्मा दे, कम धुआँ छोड़े |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- ज्वलन ताप किसे कहते हैं? पेट्रोल और केरोसीन में किसका ज्वलन ताप कम है?
संकेत: न्यूनतम तापमान की परिभाषा और दोनों ईंधनों की तुलना सोचें। - दहन के लिए कौन-सी तीन चीज़ें ज़रूरी हैं? जार वाले क्रियाकलाप से कौन-सी शर्त सिद्ध होती है?
संकेत: ईंधन, तापमान और हवा — जार से हवा रुकती है। - पानी भरी कागज़ की कटोरी लौ पर क्यों नहीं जलती, जबकि खाली कटोरी जल जाती है?
संकेत: ऊष्मा कहाँ जाती है — पानी में संचरण सोचें। - आग में घिरे व्यक्ति को कम्बल में क्यों लपेट दिया जाता है?
संकेत: तीन शर्तों में से कौन-सी रुकती है — ऑक्सीजन की आपूर्ति। - सेफ्टी माचिस अपने आप क्यों नहीं जलती, जबकि पुरानी सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस वाली माचिस खतरनाक थी?
संकेत: लाल बनाम सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस का ज्वलन ताप सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- दहन किसे कहते हैं?
दहन वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें ज्वलनशील पदार्थ ऑक्सीजन से क्रिया करके ऊष्मा और प्रकाश देता है। इसके लिए ज्वलनशील पदार्थ, ऑक्सीजन और ज्वलन ताप तीनों ज़रूरी हैं। - सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस और लाल फ़ॉस्फ़ोरस में क्या अंतर है?
सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस का ज्वलन ताप इतना कम है कि वह कमरे के तापमान पर ही जल उठता है, इसलिए उसे हाथ से नहीं छूते और पानी के अंदर रखते हैं। लाल फ़ॉस्फ़ोरस अपने आप आग नहीं पकड़ता, बल्कि रगड़ने पर ही जलता है — इसीलिए सेफ्टी माचिस सुरक्षित है। - मोमबत्ती में असल में क्या जलता है? प्रयोग से सिद्ध कीजिए।
मोम की वाष्प जलती है, ठोस मोम नहीं। काँच की नली को लौ के अंदर बत्ती के ठीक ऊपर लगाने पर दूसरी ओर से सफ़ेद धुआँ (वाष्प) निकलता है, और बुझी मोमबत्ती के धुएँ की लाइन के पास जलती तीली लाने पर वह बिना बत्ती छुए फिर जल उठती है। - अग्निशामक कितने तरह के होते हैं और वे कैसे काम करते हैं?
दो तरह के — एक में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उच्च दाब पर भरी होती है; दूसरे में काँच की शीशी का अम्ल सोडियम बाइकार्बोनेट के विलयन से प्रतिक्रिया कर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। CO2 आग का हवा से सम्पर्क तोड़ देती है, जिससे आग बुझ जाती है। - अच्छा (आदर्श) ईंधन कैसा होता है? जीवाश्म ईंधन से क्या हानि है?
अच्छा ईंधन आसानी से उपलब्ध, सस्ता, अधिक ऊष्मा देने वाला और कम धुआँ तथा कम हानिकारक गैस छोड़ने वाला होता है। जीवाश्म ईंधन के जलने से नाइट्रोजन और सल्फ़र के ऑक्साइड बनते हैं जो बादलों के साथ अम्ल वर्षा करते हैं और वायु प्रदूषित करते हैं।
Extension — पुस्तक के अभ्यास के प्रश्न-प्रकार
अभ्यास 1–6 (विस्तृत उत्तर):
- आग लगने पर उसे कई बार पानी डालकर बुझाते हैं। पानी डालने से आग कैसे बुझ जाती है? — पानी ज्वलनशील पदार्थ को ठंडा करके उसके तापमान को ज्वलन ताप से नीचे ले आता है, और बनी जलवाष्प बाहरी वायु की आपूर्ति भी बंद कर देती है।
- मोमबत्ती की ज्वाला जब स्थिर हो तो काँच की प्लेट ले जाने पर काला वलय क्यों बनता है? — लौ के भीतरी क्षेत्र में कार्बन के कुछ कण बिना जले बच जाते हैं; स्थिर लौ में ये कण प्लेट पर जमकर काला वलय बना देते हैं।
- अगर किसी दुर्घटना में कोई व्यक्ति आग की चपेट में आ जाए तो उसे बचाने के लिए कम्बल में लपेट दिया जाता है। ऐसा क्यों? — कम्बल आग और हवा के बीच सम्पर्क तोड़ देता है; ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होते ही दहन रुक जाता है।
- कभी-कभी जंगलों में अपने आप आग लग जाती है। ऐसा कैसे होता होगा? — गर्मियों की अधिक गर्मी से सूखी घास अपने ज्वलन ताप तक पहुँच जाती है (दावानल); कभी आकाशीय बिजली गिरने से या पौधों के आपसी रगड़ से भी आग लग सकती है।
- गोलू ने आधा पेट्रोल और आधा पानी लेकर एक मिश्रण बनाया। उसने एक कपड़े को इस मिश्रण में भिगो दिया। इसके बाद एक माचिस की तीली से इसे जलाया — आग लगी पर कपड़ा नहीं जला। ऐसा कैसे हुआ होगा? — पेट्रोल की वाष्प जली, पर पानी ने कपड़े को उसके ज्वलन ताप तक पहुँचने नहीं दिया; ऊष्मा पानी में चली गई, इसलिए कपड़ा बचा रहा।
- माचिस को जलाने के लिए उसे माचिस की डिब्बी से रगड़ा जाता है, ऐसा क्यों? — रगड़ने से घर्षण की गर्मी पैदा होती है जो तीली को ज्वलन ताप तक पहुँचाती है, और डिब्बी पर लगा लाल फ़ॉस्फ़ोरस रगड़ने पर ही क्रिया करता है।
अभ्यास 9 — रिक्त स्थानों की पूर्ति:
- वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई पदार्थ जलना प्रारंभ करता है, उस पदार्थ का ज्वलन ताप कहलाता है।
- सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस कमरे के ताप पर आग पकड़ लेता है।
- मोम एक हाइड्रोकार्बन है, जो हाइड्रोजन और कार्बन से मिलकर बनी होती है।
अभ्यास 10 — सही (✓) या गलत (×) कारण सहित:
- कागज़ की कटोरी में पानी गर्म करने पर कागज़ जल जाता है। — × गलत। पानी ऊष्मा सोख लेता है, कागज़ ज्वलन ताप तक नहीं पहुँचता, इसलिए नहीं जलता।
- दहन के लिए वायु का होना आवश्यक है। — ✓ सही। जार वाले क्रियाकलाप में हवा रुकते ही मोमबत्ती बुझ जाती है।
- लाल फ़ॉस्फ़ोरस कमरे के ताप पर आग पकड़ लेता है। — × गलत। यह सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस का गुण है; लाल फ़ॉस्फ़ोरस रगड़ने पर ही जलता है।
- चूना-पानी में से CO2 प्रवाहित करने पर वह दूधिया हो जाता है। — ✓ सही। यही CO2 की पहचान है।
- अम्ल और सोडियम बाइकार्बोनेट की प्रतिक्रिया से CO2 बनती है। — ✓ सही। इसी सिद्धांत पर एक तरह का अग्निशामक काम करता है।
- तेल की आग पर पानी डालने से आग बुझ जाती है। — × गलत। पानी तेल से भारी होने से नीचे बैठ जाता है और आग बुझती नहीं, फैल सकती है।
अभ्यास 7 — चित्र बनाइए: मोमबत्ती की ज्वाला के तीनों क्षेत्र (बाहरी नीला, मध्य पीला, भीतरी काला) नामांकित चित्र सहित अपनी उत्तर-पुस्तिका में बनाइए। अभ्यास 8 — चर्चा: घर में आग से होने वाली असावधानियों से बचने के लिए आप क्या-क्या करते हैं — दोस्तों से चर्चा कीजिए (माचिस-गैस का सावधानी से उपयोग, ज्वलनशील चीज़ें आग से दूर, अग्निशमन नंबर का पता)।
- दहन की तीन शर्तें: ज्वलनशील पदार्थ + ज्वलन ताप + हवा (ऑक्सीजन)।
- ज्वलन ताप: न्यूनतम तापमान जिस पर पदार्थ जलना शुरू करे; सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस कमरे के ताप पर ही जलता है।
- मोमबत्ती में ठोस मोम नहीं, मोम की वाष्प जलती है — धुएँ की लाइन से फिर जल उठती है।
- ज्वाला: बाहरी नीला सबसे गर्म (पूर्ण दहन), मध्य पीला (आंशिक), भीतरी काला सबसे ठंडा।
- आग रोकना: ईंधन हटाओ, ऑक्सीजन रोको, या ज्वलन ताप से नीचे ठंडा करो; बिजली/तेल की आग पर पानी नहीं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

