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बिहार बोर्ड (BSEB) • कक्षा 8 • हिंदी • मल्हार • एनईपी मिरर (हिंदी)

मत बाँधो

कवयित्री: महादेवी वर्मा — इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो।

यह पृष्ठ NCERT की NEP पुस्तक के Educational Galaxy नोट्स का हिंदी संस्करण है, जो बिहार बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। बिहार बोर्ड द्वारा इस पुस्तक को निर्धारित किए जाने का दावा नहीं किया जाता।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Hindi • पुस्तक: मल्हार — एनईपी मिरर (हिंदी)

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मत बाँधो — EG के अपने शब्दों में सार

पुस्तक: मल्हार (बिहार बोर्ड हिंदी संस्करण, कक्षा 8)  |  अध्याय 7  |  कवयित्री: महादेवी वर्मा  |  माध्यम: हिंदी

लेबल वाला चित्र: मत बाँधो

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): खुला पिंजरा और आकाश में उड़ते पक्षी। स्वतंत्रता के भाव की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।

चित्र: मत बाँधो

पेड़ों और खेतों के ऊपर उड़ते पक्षी। मुक्त आकाश की सामान्य तस्वीर।

कविता का सार

कविता का आह्वान सीधा है — इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो। सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। कवयित्री उदाहरणों से समझाती हैं कि सपने सौरभ, बीज, धुएँ और अग्नि से भिन्न हैं। सौरभ उड़कर नभ में जाता है, फिर वह लौटकर कहाँ आता है? बीज धूल में गिर जाता है, तो वह नभ में कब उड़ पाता है? अग्नि सदा धरती पर जलती है और धूम गगन में मँडराता है। सपनों में दोनों ही गतियाँ हैं — वे उड़कर आँखों में आते हैं। इसलिए न तो उनका आरोहण रोको, न उनका अवरोहण बाँधो। आरोहण यानी ऊपर उठना और अवरोहण यानी नीचे उतरना — सपने दोनों ही करते हैं और दोनों ही ज़रूरी हैं।

मुक्त गगन में विचरण कर सपने तारों में फिर मिल जाएँगे, मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर भू पर आएँगे। तब स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलाएगा — यानी सपने जब आकाश से समृद्ध होकर धरती पर लौटते हैं, तो धरती को ही स्वर्ग बनाना सिखा देते हैं। इसीलिए कवयित्री कहती हैं — नभ तक जाने से मत रोको, धरती से इसको मत बाँधो। कविता की टेक अंत में फिर दोहराई जाती है — इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो।

कवयित्री के बारे में

हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा (1907–1987) का जन्म फ़र्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र से ही कविता लिखना आरंभ कर दिया था। बच्चों के लिए उन्होंने 'बारहमासा', 'आज खरीदेंगे हम ज्वाला', 'अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी' जैसी अनेक कविताएँ लिखी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भावपूर्ण गद्य — मेरा परिवार, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ तथा पथ के साथी — भी रचना की। उनके द्वारा लिखे गए चरित्र पाठकों को याद रह जाने वाले होते हैं। नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत और दीपशिखा उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। बहुमुखी प्रतिभा संपन्न महादेवी वर्मा एक चित्रकार भी थीं।

मुख्य शब्द

  • गति — चलने की दिशा और वेग; सपनों की गति यानी उनका उठना-उतरना।
  • सौरभ — सुगंध।
  • नभ / गगन — आकाश।
  • आरोहण — ऊपर उठना, चढ़ना।
  • अवरोहण — नीचे उतरना।
  • विचरण — घूमना-फिरना।
  • दीप्ति — चमक, आभा।
  • शिल्प — कला, कारीगरी, हुनर; यहाँ स्वर्ग बनाने की कला के अर्थ में।

याद रखें

  • कविता का मुख्य भाव है — सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।
  • कविता सपनों की स्वतंत्रता की बात करती है — प्रेम, शिक्षा या अधिकारों की नहीं।
  • सपनों के 'पंख' होने की कल्पना इसलिए की गई है कि सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं।
  • 'स्वर्ग' यहाँ वह स्थान है जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो और सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों।
  • सपनों में दोनों गतियाँ हैं — आरोहण भी और अवरोहण भी; दोनों को मत रोको, मत बाँधो।
  • कविता की रचना की विशेषताएँ: शब्द-चित्रों की लड़ी (सौरभ, बीज, अग्नि के उदाहरणों से), विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग (आरोहण-अवरोहण), प्रश्न-शैली और संबोधन का प्रयोग।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: इस कविता को पिंजरे में बंद पक्षी की कविता समझ लेना। चित्र में पिंजरा है, पर कविता सपनों की स्वतंत्रता की है — पंख सपनों के हैं, पक्षी के नहीं। दूसरी गलती: केवल आरोहण को महत्त्व देना — कविता में अवरोहण भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि सपने धरती पर लौटकर ही धरती को स्वर्ग बनाना सिखाते हैं।

तालिका: उदाहरण और सपनों की भिन्नता

उदाहरणक्या होता हैसपने कैसे भिन्न हैं
सौरभउड़कर नभ में जाता है, लौटकर नहीं आतासपने उड़कर आँखों में आते हैं — लौटते भी हैं
बीजधूल में गिर जाता है, नभ में नहीं उड़ पातासपने धूल में नहीं गिरते; उनकी गति बनी रहती है
अग्निसदा धरती पर जलती हैसपनों में धरती और आकाश दोनों की गति है
धूमगगन में मँडराता हैसपने गगन में विचरण करके भू पर भी आते हैं

अभ्यास — स्वयं करके देखो

  1. इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हो?
    संकेत: सपने मात्र कल्पनाएँ हैं, सपनों को भूल जाना चाहिए, सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए या सपने देखना अच्छी बात है — कौन-सा?
  2. 'मत बाँधो' कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
    संकेत: प्रेम, शिक्षा, सपने या अधिकार — किसकी?
  3. 'इन सपनों के पंख न काटो' — सपनों के 'पंख' होने की कल्पना क्यों की गई है?
    संकेत: सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं, सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं, पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं या पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं — कौन-सा?
  4. 'स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प' — यहाँ 'स्वर्ग' से आप क्या समझते हैं?
    संकेत: जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो, जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो, जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो या जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों — कौन-सा?
  5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?
    संकेत: वह बहुत तेज़ी से उड़ सकता है, वह और गहरा हो सकता है, उसकी उड़ान रुक सकती है या वह बढ़कर पौधा बन सकता है — कविता के प्रश्न के अनुसार कौन-सा?

प्रश्न और उत्तर

  1. 'सौरभ उड़ जाता है नभ में, फिर वह लौट कहाँ आता है? बीज धूल में गिर जाता जो, वह नभ में कब उड़ पाता है?' — इन पंक्तियों का क्या अर्थ समझ में आया?
    सौरभ एक बार उड़कर आकाश में चला जाता है तो लौटकर नहीं आता; बीज एक बार धूल में गिर जाए तो आकाश में नहीं उड़ पाता। दोनों की गति एकतरफ़ा है। सपने इनसे भिन्न हैं — उनकी गति दोनों ओर है, वे उठते भी हैं और लौटते भी हैं। इसीलिए उनकी गति को बाँधना नहीं चाहिए।
  2. कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
    क्योंकि सपने तभी सार्थक होते हैं जब वे स्वतंत्र रहें। बँधे हुए सपने न ऊपर उठ सकते हैं, न धरती पर लौटकर कुछ सिखा सकते हैं। गति बनी रहेगी तभी सपने मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर भू पर आएँगे और धरती को स्वर्ग बनाना सिखाएँगे।
  3. कविता में 'आरोहण' और 'अवरोहण' दोनों के महत्त्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने आरोहण और अवरोहण को कब-कब सार्थक होते देखा है।
    आरोहण सार्थक होता है जब कोई सपना ऊँचा उठता है — जैसे किसी विद्यार्थी का मन किसी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ता है। अवरोहण सार्थक होता है जब वह सपना धरती पर लौटकर काम में बदलता है — जैसे लक्ष्य के लिए रोज़ की मेहनत, अभ्यास और अनुशासन। बिना आरोहण के सपना छोटा रह जाता है और बिना अवरोहण के वह केवल कल्पना रह जाता है।
  4. 'सपनों में दोनों ही गति हैं, उड़कर आँखों में आता है' — क्या आप सहमत हैं कि सपने 'आँखों में लौटकर' वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।
    हाँ, क्योंकि सपने पहले आँखों में (कल्पना में) आते हैं और फिर प्रयास से वास्तविकता बनते हैं। जैसे, कोई बच्चा पहले मन में चित्र बनाता है कि वह अच्छा गायक बनेगा, फिर रोज़ रियाज़ करके सच में गाने लगता है — सपना आँखों से जीवन में उतर आता है।
  5. 'इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो!' — आपके विचार से यह सुझाव है, आदेश है, प्रार्थना है या कुछ और? यह बात किससे कही जा रही है?
    यह एक आग्रहपूर्ण सुझाव और प्रार्थना दोनों है — कवयित्री समाज से, बड़ों से और हम सब से कह रही हैं कि बच्चों और युवाओं के सपनों को मत रोको। यह आदेश की कठोरता में नहीं, बल्कि स्नेह और आग्रह के स्वर में कहा गया है, ताकि सपनों की स्वतंत्रता बनी रहे।

विस्तार — और गहराई से

  1. कविता की रचना — शब्द-चित्रों की लड़ी।
    सौरभ, बीज और अग्नि वाली पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द-चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है, जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाओ और कक्षा में साझा करो। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान भी करो — जैसे, एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग (आरोहण-अवरोहण), प्रश्न पूछा जाना (वह नभ में कब उड़ पाता है?), संबोधन का प्रयोग (नभ तक जाने से मत रोको, धरती से इसको मत बाँधो!)।
  2. शब्दों की बात — आरोहण और अवरोहण।
    रेखांकित शब्दों पर ध्यान दो — 'आरोहण' यानी ऊपर उठना और 'अवरोहण' यानी नीचे उतरना। कविता में वर्तमान काल में लिखी गई अनेक पंक्तियाँ आई हैं; उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखो।
  3. शब्दकोश से — 'शिल्प' शब्द के अर्थ।
    शब्दकोश के अनुसार 'शिल्प' के अर्थ हैं — हाथ से कोई चीज़ बनाकर तैयार करने का काम (दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे बर्तन बनाना, कपड़े सिलना, गहने गढ़ना आदि); कला संबंधी व्यवसाय; दक्षता या कौशल; निर्माण, सर्जन, सृष्टि या रचना; आकार या आकृति; अनुष्ठान, क्रिया या धार्मिक कृत्य। अब शब्दकोश से 'शिल्प' से जुड़े शब्दों के अर्थ खोजकर लिखो — शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी; शिल्पकला; शिल्पकौशल; शिल्पगृह या शिल्पगेह; शिल्पविद्या; शिल्पशाला या शिल्पालय।
  4. अनुमान और कल्पना से।
    मान लो तुम एक नया संसार बनाना चाहते हो — उसमें क्या-क्या रखना चाहोगे और क्या-क्या नहीं, और क्यों? कविता में शिल्प और कला के महत्त्व की बात आई है — कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं; तुम अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहोगे और उससे तुम्हारा जीवन कैसे सुंदर बनेगा? यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीज़ों की आवश्यकता होगी (संकेत — धूप अर्थात् मेहनत, पानी अर्थात् लगन आदि)? यदि अच्छे सपनों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों से क्या होता होगा और उनसे कैसे बचा जा सकता है?

पाठ्यपुस्तक अभ्यास — क्या-क्या है

दोहराव — इस पाठ से क्या पक्का करें

  • मुख्य भाव: सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए — पंख न काटो, गति मत बाँधो।
  • सपने सौरभ, बीज, धुएँ और अग्नि से भिन्न हैं — उनमें दोनों गतियाँ हैं।
  • आरोहण = ऊपर उठना; अवरोहण = नीचे उतरना; दोनों ज़रूरी हैं।
  • सपने मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर भू पर आते हैं और धरती को स्वर्ग बनाना सिखाते हैं।
  • यह पक्षी की नहीं, सपनों की कविता है — पंख सपनों के हैं।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।