Chapter 10: ईर्ष्या: तू न गई मेरे मन से
ईर्ष्या के स्वभाव और उससे बचने के उपाय को समझें — दूसरों की सफलता से प्रेरणा लें, जलन नहीं।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 8 • Hindi • Book: Kislay Bhag-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
ईर्ष्या: तू न गई मेरे मन से — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Kislay Bhag-3 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 8) | अध्याय 10 | प्रकार: निबंध | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): कक्षा में बैठे विद्यार्थी — मन के भावों का एक सामान्य चित्र। यह एक सामान्य चित्र है, किताब का दृश्य नहीं।

साथ पढ़ते और मदद करते दो दोस्त — प्रेरणा का एक सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
ईर्ष्या: तू न गई मेरे मन से एक विचारपूर्ण निबंध है। इसमें बताया गया है कि ईर्ष्या मन का एक ऐसा भाव है जो दूसरों की सफलता देखकर जलन पैदा करता है। ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति न खुद सुखी रहता है, न दूसरों को सुखी देख पाता है।
निबंध का संदेश है कि ईर्ष्या को पहचानना और उस पर काबू पाना ज़रूरी है। दूसरों की सफलता से जलने के बजाय उससे प्रेरणा लेना चाहिए और अपनी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए। यही मन की शांति का रास्ता है।
What you should learn — तुम्हें क्या सीखना चाहिए
ईर्ष्या के स्वभाव और उससे बचने के उपाय को समझें — दूसरों की सफलता से प्रेरणा लें, जलन नहीं।
Key Terms — मुख्य शब्द
- ईर्ष्या — दूसरों की सफलता देखकर जलन का भाव।
- निबंध — किसी विषय पर विचारपूर्ण लेख।
- प्रेरणा — दूसरों से सीखकर आगे बढ़ने की भावना।
- मन की शांति — भीतर का सुकून।
- आत्मचिंतन — अपने मन और व्यवहार पर सोचना।
Remember — याद रखें
- ईर्ष्या दूसरों की सफलता देखकर पैदा होती है।
- ईर्ष्यालु व्यक्ति खुद भी सुखी नहीं रहता।
- ईर्ष्या से बचने का उपाय है आत्मचिंतन।
- दूसरों की सफलता से प्रेरणा लेनी चाहिए, जलन नहीं।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: केवल ईर्ष्या की बुराई लिख देना। परीक्षा में यह भी लिखें कि ईर्ष्या से बचने का उपाय क्या है — प्रेरणा लेना और अपनी मेहनत पर ध्यान देना — तभी उत्तर पूरा होगा।
Chart / Table: ईर्ष्या और उसका उपाय
| विषय | विवरण |
|---|---|
| ईर्ष्या क्या है | दूसरों की सफलता पर जलन |
| परिणाम | मन की अशांति |
| पहचान | अपने मन को देखना |
| उपाय | प्रेरणा लेना |
| लक्ष्य | अपनी मेहनत पर ध्यान |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- ईर्ष्या किसे कहते हैं?
संकेत: दूसरों की सफलता से जोड़कर सोचें। - ईर्ष्यालु व्यक्ति सुखी क्यों नहीं रहता?
संकेत: मन की अशांति से जोड़कर सोचें। - दूसरों की सफलता से प्रेरणा कैसे ली जा सकती है?
संकेत: सीखने से जोड़कर सोचें। - अपने जीवन का एक अनुभव लिखें जब आपने किसी की सफलता से प्रेरणा ली।
संकेत: अपने अनुभव से जोड़कर लिखें। - आत्मचिंतन का ईर्ष्या से बचने में क्या काम है?
संकेत: अपने मन को देखने से जोड़कर सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- ईर्ष्या किसे कहते हैं?
ईर्ष्या मन का वह भाव है जो दूसरों की सफलता, गुण या सुख देखकर जलन पैदा करता है। ईर्ष्यालु व्यक्ति दूसरों की खुशी में खुश नहीं हो पाता। - ईर्ष्या मनुष्य को कैसे नुकसान पहुँचाती है?
ईर्ष्या मन की शांति छीन लेती है। ईर्ष्यालु व्यक्ति हर समय दूसरों से तुलना करता है, इसलिए न खुद सुखी रहता है, न दूसरों को सुखी देख पाता है। - ईर्ष्या से बचने का उपाय क्या है?
ईर्ष्या से बचने का उपाय है आत्मचिंतन — अपने मन को पहचानना, दूसरों की सफलता से प्रेरणा लेना और अपनी मेहनत पर ध्यान देना। - प्रेरणा और ईर्ष्या में क्या अंतर है?
प्रेरणा में दूसरों की सफलता से सीखकर आगे बढ़ने की भावना होती है, जबकि ईर्ष्या में दूसरों की सफलता पर जलन होती है। प्रेरणा आगे बढ़ाती है, ईर्ष्या रोकती है। - इस निबंध से हमें क्या सीख मिलती है?
हमें यह सीख मिलती है कि ईर्ष्या को पहचानें, उस पर काबू पाएँ और दूसरों की सफलता से जलने के बजाय उससे प्रेरणा लें।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
- ईर्ष्या दूसरों की सफलता देखकर पैदा होती है।
- ईर्ष्यालु व्यक्ति खुद भी सुखी नहीं रहता।
- ईर्ष्या से बचने का उपाय है आत्मचिंतन।
- दूसरों की सफलता से प्रेरणा लेनी चाहिए, जलन नहीं।

