Chapter 8: अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन
मुग़ल साम्राज्य के कमज़ोर होने पर अवध, बंगाल, हैदराबाद, मराठा, सिख और जाट राज्य कैसे बने।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Social Science • Book: Hamare Atit-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
अठारहवीं शताब्दी में नए राजनीतिक गठन — EG's own notes, in simple Hindi
Book: Hamare Atit-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali) | Chapter 8 | Medium: Hindi
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Diagram (labels are printed on the image): अठारहवीं शताब्दी के नए राज्य — अवध, बंगाल, हैदराबाद, मराठा, सिख, जाट। सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

नए राज्यों की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
इस अध्याय के बारे में
औरंगज़ेब की मृत्यु (1707) के बाद मुग़ल साम्राज्य तेज़ी से कमज़ोर हुआ। उसके उत्तराधिकारी कमज़ोर थे, दरबार में ईरानी और तूरानी दलों की गुटबाज़ी बढ़ गई, जागीरों की कमी हुई और दूर के प्रांतों पर नियंत्रण ढीला पड़ गया। 1739 में नादिर शाह ने दिल्ली पर आक्रमण करके शहर को लूटा और मयूर सिंहासन तथा कोहिनूर ले गया। 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराया। इन घटनाओं ने दिखा दिया कि मुग़ल साम्राज्य अब पहले जैसा शक्तिशाली नहीं रहा।
इस कमज़ोरी से तीन तरह के नए राज्य बने। पहले प्रकार के राज्य पुराने मुग़ल प्रांत थे, जो स्वतंत्र हो गए — अवध, बंगाल और हैदराबाद। अवध में सआदत खाँ (बुरहान-उल-मुल्क) ने 1722 में अपना शासन स्थापित किया; बंगाल में मुर्शिद कुली खाँ ने 1717 में स्वतंत्र शासन शुरू किया; हैदराबाद में निज़ाम-उल-मुल्क आसफ़ जाह ने 1724 में अपना राज्य बनाया। इन शासकों ने मुग़ल बादशाह को औपचारिक रूप से मानते हुए भी अपने क्षेत्र का शासन, कर और सेना अपने हाथ में ले ली।
दूसरे प्रकार के राज्य वतन जागीरों से बने — वे क्षेत्र जो राजपूत राजाओं की पुश्तैनी जागीरें थीं। आमेर/जयपुर के सवाई राजा जयसिंह ने जयपुर शहर बसाया और खगोल-विज्ञान में रुचि ली (जंतर-मंतर), तथा जोधपुर (मारवाड़) के अजीत सिंह ने भी अपनी स्वतंत्रता बढ़ाई। तीसरे प्रकार के राज्य विद्रोह और संघर्ष से बने — मराठा, सिख और जाट राज्य।
मराठा राज्य की नींव शिवाजी ने रखी थी, लेकिन अठारहवीं शताब्दी में पेशवाओं (विशेषकर बाजीराव प्रथम) के नेतृत्व में मराठों का विस्तार दिल्ली, मालवा और गुजरात तक हुआ। बाद में मराठा सरदारों ने अपने-अपने राज्य बनाए — सिंधिया (ग्वालियर), होल्कर (इंदौर), गायकवाड़ (बड़ौदा) और भोंसले (नागपुर)। मराठे चौथ (उपज का एक-चौथाई) और सरदेशमुखी (दसवाँ भाग) नाम के कर वसूलते थे, जिससे उनकी सेना चलती थी। सिखों में गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 में खालसा की स्थापना की थी; बंदा बहादुर के बाद मिस्लों (सिख जत्थों) ने पंजाब में शक्ति बढ़ाई, और बाद में रणजीत सिंह ने उन्हें एकजुट किया। जाटों ने भरतपुर में अपना राज्य बनाया — चूड़ामन, बदन सिंह और सूरजमल जैसे नेताओं ने जाट शक्ति को बढ़ाया।
इसी बीच एक नई शक्ति उभर रही थी — अंग्रेज़ों की ईस्ट इंडिया कंपनी। कंपनी पहले व्यापारी थी, लेकिन 1757 में प्लासी की लड़ाई में उसने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराया, 1764 में बक्सर की लड़ाई जीती, और 1765 में बंगाल, बिहार तथा ओडिशा की दीवानी (कर वसूलने का अधिकार) प्राप्त की। इस तरह अठारहवीं शताब्दी के अंत तक भारत की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी थी — मुग़ल साम्राज्य का स्थान नए क्षेत्रीय राज्यों और कंपनी ने ले लिया था।
क्या सीखना है (What you should learn)
- बताना कि औरंगज़ेब के बाद मुग़ल साम्राज्य क्यों कमज़ोर हुआ।
- तीन तरह के नए राज्यों में अंतर करना और उनके उदाहरण देना।
- अवध, बंगाल और हैदराबाद के संस्थापकों के नाम देना।
- मराठा विस्तार और मराठा सरदारों के राज्यों के बारे में बताना।
- सिख मिस्लों और जाट राज्य के बारे में बताना।
- ईस्ट इंडिया कंपनी के उदय (प्लासी, बक्सर, दीवानी) के बारे में बताना।
परीक्षा में नए राज्यों को तीन भागों में बाँटकर लिखें: (1) पुराने मुग़ल प्रांत — अवध, बंगाल, हैदराबाद; (2) वतन जागीरें — जयपुर, जोधपुर; (3) विद्रोह से बने राज्य — मराठा, सिख, जाट। यह वर्गीकरण ही इस अध्याय की कुंजी है।
1757 = प्लासी की लड़ाई (कंपनी बनाम सिराजुद्दौला, बंगाल); 1761 = पानीपत की तीसरी लड़ाई (अब्दाली बनाम मराठा)। दोनों अलग-अलग लड़ाइयाँ, अलग-अलग पक्ष और अलग-अलग परिणाम हैं — वर्ष और पक्ष दोनों सही लिखें।
मुख्य शब्द (Key Terms)
- वतन जागीर — राजपूत राजाओं की पुश्तैनी जागीर, जो पीढ़ियों से उनके पास थी।
- मिस्ल — सिखों के जत्थे/संघ; पंजाब में कई मिस्लों ने शक्ति बढ़ाई।
- चौथ — मराठों द्वारा वसूला जाने वाला कर; उपज का एक-चौथाई भाग।
- सरदेशमुखी — मराठों का एक और कर; उपज का दसवाँ भाग।
- पेशवा — मराठा राज्य का प्रधानमंत्री; अठारहवीं शताब्दी में पेशवाओं के नेतृत्व में मराठा विस्तार हुआ।
- दीवानी — कर वसूलने का अधिकार; 1765 में कंपनी को बंगाल, बिहार, ओडिशा की दीवानी मिली।
- प्लासी की लड़ाई (1757) — कंपनी ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराया।
- बक्सर की लड़ाई (1764) — कंपनी की जीत, जिससे उसका अधिकार और मज़बूत हुआ।
याद रखें (Remember)
- 1707 — औरंगज़ेब की मृत्यु; साम्राज्य कमज़ोर हुआ। 1739 — नादिर शाह का दिल्ली पर आक्रमण।
- पुराने प्रांत: अवध (सआदत खाँ, 1722), बंगाल (मुर्शिद कुली खाँ, 1717), हैदराबाद (आसफ़ जाह, 1724)।
- वतन जागीरें: जयपुर (सवाई जयसिंह), जोधपुर (अजीत सिंह)।
- विद्रोह से: मराठा (सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़, भोंसले), सिख (मिस्ल, रणजीत सिंह), जाट (भरतपुर, सूरजमल)।
- कंपनी: प्लासी 1757, बक्सर 1764, दीवानी 1765; पानीपत तीसरी लड़ाई 1761।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती (Exam Tip / Common Mistake)
सामान्य गलती: सभी नए राज्यों को एक ही श्रेणी में लिख देना। परीक्षा में तीनों श्रेणियों के नाम और उनके उदाहरण अलग-अलग लिखें — यही इस अध्याय का मुख्य प्रश्न-प्रकार है। संस्थापकों के नाम और वर्ष (1722, 1717, 1724) भी याद रखें।
Chart / Table: तीन तरह के नए राज्य
| प्रकार | राज्य | संस्थापक/नेता |
|---|---|---|
| पुराने मुग़ल प्रांत | अवध, बंगाल, हैदराबाद | सआदत खाँ; मुर्शिद कुली खाँ; आसफ़ जाह |
| वतन जागीरें | जयपुर, जोधपुर | सवाई जयसिंह; अजीत सिंह |
| विद्रोह से बने | मराठा, सिख, जाट | पेशवा/सरदार; मिस्ल/रणजीत सिंह; सूरजमल |
अभ्यास (Practice set — try it yourself)
- औरंगज़ेब के बाद मुग़ल साम्राज्य कमज़ोर क्यों हुआ? तीन कारण लिखिए।
Hint: सोचें — कमज़ोर उत्तराधिकारी, गुटबाज़ी, जागीरों की कमी। - तीन तरह के नए राज्यों के नाम और एक-एक उदाहरण लिखिए।
Hint: सोचें — प्रांत, वतन जागीर, विद्रोह। - अवध, बंगाल और हैदराबाद के संस्थापकों के नाम लिखिए।
Hint: सोचें — सआदत खाँ, मुर्शिद कुली खाँ, आसफ़ जाह। - मराठा सरदारों के चार राज्यों और उनकी राजधानियों के नाम लिखिए।
Hint: सोचें — ग्वालियर, इंदौर, बड़ौदा, नागपुर। - कंपनी व्यापारी से शासक कैसे बनी? तीन घटनाओं के नाम लिखिए।
Hint: सोचें — प्लासी, बक्सर, दीवानी।
प्रश्न और उत्तर (Questions with Answers)
- औरंगज़ेब के बाद मुग़ल साम्राज्य क्यों कमज़ोर हुआ?
औरंगज़ेब के उत्तराधिकारी कमज़ोर थे, दरबार में ईरानी और तूरानी दलों की गुटबाज़ी बढ़ गई, जागीरों की कमी हुई और दूर के प्रांतों पर नियंत्रण ढीला पड़ गया। 1739 में नादिर शाह के आक्रमण ने साम्राज्य की कमज़ोरी को सबके सामने ला दिया। - तीन तरह के नए राज्यों के बारे में लिखिए।
पहले, पुराने मुग़ल प्रांत जो स्वतंत्र हो गए — अवध, बंगाल, हैदराबाद। दूसरे, वतन जागीरों से बने राज्य — जयपुर, जोधपुर। तीसरे, विद्रोह और संघर्ष से बने राज्य — मराठा, सिख और जाट। - अवध, बंगाल और हैदराबाद के संस्थापक कौन थे?
अवध — सआदत खाँ (बुरहान-उल-मुल्क, 1722); बंगाल — मुर्शिद कुली खाँ (1717); हैदराबाद — निज़ाम-उल-मुल्क आसफ़ जाह (1724)। - मराठा सरदारों के राज्यों के नाम लिखिए।
सिंधिया — ग्वालियर, होल्कर — इंदौर, गायकवाड़ — बड़ौदा, भोंसले — नागपुर। - ईस्ट इंडिया कंपनी शासक कैसे बनी?
कंपनी ने 1757 में प्लासी की लड़ाई में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराया, 1764 में बक्सर की लड़ाई जीती, और 1765 में बंगाल, बिहार तथा ओडिशा की दीवानी प्राप्त की। इस तरह वह व्यापारी से शासक बन गई।
महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)
- चौथ और सरदेशमुखी क्या थे?
चौथ मराठों द्वारा वसूला जाने वाला कर था — उपज का एक-चौथाई भाग। सरदेशमुखी भी मराठों का कर था — उपज का दसवाँ भाग। इनसे मराठा सेना चलती थी। - सिख मिस्लें क्या थीं?
मिस्लें सिखों के जत्थे थे, जो पंजाब में अलग-अलग क्षेत्रों में शक्ति रखते थे। बाद में रणजीत सिंह ने इन मिस्लों को एकजुट करके एक बड़ा सिख राज्य बनाया। - जाट राज्य के बारे में लिखिए।
जाटों ने भरतपुर में अपना राज्य बनाया। चूड़ामन, बदन सिंह और सूरजमल जैसे नेताओं ने जाट शक्ति को बढ़ाया और भरतपुर को एक मज़बूत राज्य बनाया। - पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) का क्या परिणाम हुआ?
इस लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराया। इससे मराठा विस्तार को बड़ा झटका लगा और उत्तर भारत की राजनीति में कंपनी के लिए रास्ता और खुल गया। - इस अध्याय का मुख्य संदेश लिखिए।
अठारहवीं शताब्दी में भारत की राजनीति बदल गई — एक केंद्रीय साम्राज्य की जगह कई क्षेत्रीय राज्य आ गए, और उन्हीं के बीच से कंपनी ने धीरे-धीरे अपना शासन बढ़ाया।
अतिरिक्त अभ्यास — NCERT अभ्यास के प्रकार
- रिक्त स्थान भरिए: अवध के संस्थापक ______ थे और हैदराबाद के संस्थापक ______ थे।
सआदत खाँ; आसफ़ जाह। - सही या गलत, कारण सहित: ‘सभी नए राज्य मुग़ल प्रांतों से ही बने थे।’
गलत। कुछ राज्य पुराने प्रांतों से बने, कुछ वतन जागीरों से, और कुछ (मराठा, सिख, जाट) विद्रोह तथा संघर्ष से बने। - मिलान कीजिए: (क) सिंधिया — (i) इंदौर; (ख) होल्कर — (ii) ग्वालियर; (ग) गायकवाड़ — (iii) बड़ौदा।
(क)-(ii), (ख)-(i), (ग)-(iii)। - एक समय-रेखा बनाइए: 1707 → 1717 → 1722 → 1724 → 1739 → 1757 → 1761 → 1764 → 1765।
1707 — औरंगज़ेब की मृत्यु; 1717 — बंगाल; 1722 — अवध; 1724 — हैदराबाद; 1739 — नादिर शाह; 1757 — प्लासी; 1761 — पानीपत तीसरी; 1764 — बक्सर; 1765 — दीवानी। - अपने राज्य (बिहार) के अठारहवीं शताब्दी के इतिहास के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए — बक्सर और दीवानी का ज़िक्र करें।
बक्सर की लड़ाई (1764) बिहार में ही हुई थी, और 1765 की दीवानी में बिहार भी कंपनी के कर-क्षेत्र में आ गया — इस तरह बिहार भारत में कंपनी-शासन के शुरुआती क्षेत्रों में से एक बना।
- 1707 के बाद मुग़ल कमज़ोर; 1739 नादिर शाह; 1761 पानीपत तीसरी।
- तीन प्रकार: पुराने प्रांत (अवध, बंगाल, हैदराबाद), वतन जागीरें (जयपुर, जोधपुर), विद्रोह से (मराठा, सिख, जाट)।
- मराठा सरदार: सिंधिया, होल्कर, गायकवाड़, भोंसले; कर: चौथ, सरदेशमुखी।
- कंपनी: प्लासी 1757, बक्सर 1764, दीवानी 1765।
How to use this page: Read the summary, say the Key Terms in your own words, then try the practice set without looking. Use the Questions with Answers to check yourself afterwards. Ask your teacher or parent to check your answers.

