Chapter 2: राजा और उनके राज्य
नए राजवंश, सामंत, भूमिदान और चोलों का शासन — सातवीं से बारहवीं शताब्दी की कहानी।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Social Science • Book: Hamare Atit-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
राजा और उनके राज्य — EG's own notes, in simple Hindi
Book: Hamare Atit-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali) | Chapter 2 | Medium: Hindi
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Diagram (labels are printed on the image): चोल प्रशासन की इकाइयाँ — गाँव, सभा और नगरम्। सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

मंदिर और राज्य की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
इस अध्याय के बारे में
सातवीं शताब्दी के बाद भारत में कई नए राजवंश उभरे। उत्तर में गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल जैसे राजवंशों ने बड़े राज्य बनाए, और दक्षिण में चोलों ने एक शक्तिशाली साम्राज्य खड़ा किया। ये राजा केवल युद्धों से नहीं, बल्कि प्रशासन, भूमिदान, सिंचाई और मंदिर-निर्माण से भी अपनी शक्ति बढ़ाते थे।
उस समय की राजनीति में सामंतों की बड़ी भूमिका थी। सामंत वे शक्तिशाली व्यक्ति थे जो राजा के अधीन रहते हुए अपने क्षेत्र का शासन चलाते थे — वे राजा को सैनिक और कर देते थे, और बदले में उन्हें भूमि तथा सम्मान मिलता था। कभी-कभी सामंत इतने शक्तिशाली हो जाते थे कि वे स्वयं राजा बन जाते थे। राजा अपने समर्थकों को भूमि दान में देते थे — ब्राह्मणों को दी गई भूमि ब्रह्मदेय कहलाती थी और मंदिरों को दी गई भूमि देवदान। भूमिदान के साथ अक्सर उस भूमि पर रहने वाले किसानों और कारीगरों पर भी दान पाने वाले का अधिकार हो जाता था, जिससे गाँव की व्यवस्था बदल जाती थी।
चोल साम्राज्य इस काल का सबसे प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय राज्य था। चोलों की राजधानी पहले तंजावुर (तंजौर) थी, और बाद में राजेंद्र प्रथम ने गंगैकोंडचोलपुरम को राजधानी बनाया। चोल राजा राजराज प्रथम ने तंजावुर में बृहदीश्वर मंदिर बनवाया, जो अपनी ऊँची विमान (शिखर) और विशाल नंदी के लिए प्रसिद्ध है। चोलों ने कावेरी नदी के डेल्टा में सिंचाई का विस्तार किया — तालाब, नहरें और बाँध बनवाए, जिससे खेती और राजस्व दोनों बढ़े।
चोल प्रशासन गाँवों तक पहुँचता था। गाँवों में उर (सामान्य ग्राम सभा) और सभा (ब्राह्मणों की सभा) जैसी संस्थाएँ काम करती थीं, जो भूमि, सिंचाई और विवादों का प्रबंध देखती थीं। व्यापारियों के संगठनों को नगरम् कहते थे, जो बाज़ारों और व्यापार का प्रबंध करते थे। राजा के दरबार में ‘मुवेंदवेलन’ (तीन राजाओं की सेवा करने वाला) और ‘अरैयर’ (सरदार) जैसी उपाधियाँ पाने वाले धनी किसान और सरदार भी होते थे, जो राजा को सैनिक और धन देते थे।
लेकिन इस व्यवस्था में सबकी स्थिति एक जैसी नहीं थी। बड़े ज़मींदार और व्यापारी समृद्ध थे, जबकि छोटे किसान और भूमिहीन मज़दूर कठिन जीवन जीते थे। उन्हें कर देना पड़ता था, बेगार करनी पड़ती थी और कई बार अपनी ही भूमि से बेदखल होना पड़ता था। चोल कला भी इसी काल की देन है — पत्थर के मंदिर और कांस्य की मूर्तियाँ (जैसे नटराज) आज भी विश्व प्रसिद्ध हैं। राजाओं की प्रशस्तियाँ (प्रशंसा में लिखे लेख) उनके कार्यों का गुणगान करती थीं, लेकिन इतिहासकार उन्हें सावधानी से पढ़ते हैं, क्योंकि उनमें अतिशयोक्ति भी हो सकती है।
क्या सीखना है (What you should learn)
- नए राजवंशों के नाम और उनके क्षेत्रों के बारे में बताना।
- सामंत व्यवस्था को समझाना — सामंत कौन थे और वे कैसे शक्तिशाली हुए।
- ब्रह्मदेय और देवदान में अंतर करना।
- चोल प्रशासन की इकाइयों (उर, सभा, नगरम्) के बारे में बताना।
- बृहदीश्वर मंदिर और चोल सिंचाई के बारे में बताना।
- किसानों और भूमिहीन मज़दूरों की दशा समझाना।
चोल मंदिर आर्थिक और सामाजिक केंद्र भी थे। मंदिरों के पास भूमि, धन और कारीगर होते थे; वे सिंचाई, शिक्षा और रोज़गार का प्रबंध भी करते थे। इसलिए मंदिरों को देखकर उस समय की अर्थव्यवस्था भी समझी जा सकती है।
प्रशस्तियाँ राजाओं की प्रशंसा में लिखी जाती थीं, इसलिए उनमें बढ़ा-चढ़ाकर बातें भी होती हैं। इतिहासकार प्रशस्ति को अन्य स्रोतों (जैसे भूमिदान के लेख, सिक्के) से मिलाकर ही निष्कर्ष निकालते हैं।
मुख्य शब्द (Key Terms)
- सामंत — राजा के अधीन क्षेत्र का शासक; राजा को सैनिक और कर देता था।
- ब्रह्मदेय — ब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि।
- देवदान — मंदिरों को दान में दी गई भूमि।
- प्रशस्ति — राजा की प्रशंसा में लिखा गया लेख।
- उर — गाँव की सामान्य सभा।
- सभा — ब्राह्मणों की सभा, जो गाँव का प्रबंध देखती थी।
- नगरम् — व्यापारियों का संगठन; बाज़ार और व्यापार का प्रबंध करता था।
- मुवेंदवेलन — चोल दरबार की एक उपाधि; धनी किसानों/सरदारों को दी जाती थी।
- बृहदीश्वर मंदिर — राजराज प्रथम द्वारा तंजावुर में बनवाया गया प्रसिद्ध मंदिर।
याद रखें (Remember)
- नए राजवंश: गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट, पाल (उत्तर); चोल (दक्षिण)।
- सामंत = अधीन शासक; कभी-कभी स्वयं राजा बन जाते थे।
- ब्रह्मदेय (ब्राह्मणों को) बनाम देवदान (मंदिरों को)।
- चोल: तंजावुर → गंगैकोंडचोलपुरम; बृहदीश्वर मंदिर — राजराज प्रथम।
- ग्राम प्रशासन: उर, सभा; व्यापार: नगरम्। सिंचाई: तालाब, नहरें।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती (Exam Tip / Common Mistake)
सामान्य गलती: ब्रह्मदेय और देवदान को एक ही समझना, या उर/सभा/नगरम् को मिला देना। याद रखें — ब्रह्मदेय = ब्राह्मण, देवदान = देवता/मंदिर; उर = सामान्य ग्राम सभा, सभा = ब्राह्मण सभा, नगरम् = व्यापारी संगठन।
Chart / Table: चोल प्रशासन
| इकाई | कौन | काम |
|---|---|---|
| उर | गाँव के सामान्य लोग | गाँव का प्रबंध, सिंचाई, विवाद |
| सभा | ब्राह्मण सदस्य | ब्रह्मदेय गाँवों का प्रबंध |
| नगरम् | व्यापारी | बाज़ार और व्यापार का प्रबंध |
अभ्यास (Practice set — try it yourself)
- सामंत कौन थे? वे कभी-कभी राजा कैसे बन जाते थे?
Hint: सोचें — अधीन शासक और बढ़ती शक्ति। - ब्रह्मदेय और देवदान में अंतर दो वाक्यों में लिखिए।
Hint: सोचें — किसे दान दिया गया। - चोलों की राजधानियों के नाम क्रम से लिखिए।
Hint: सोचें — पहले तंजावुर, फिर नई राजधानी। - बृहदीश्वर मंदिर किसने बनवाया और वह क्यों प्रसिद्ध है?
Hint: सोचें — राजराज प्रथम और ऊँचा शिखर। - चोल काल में किसानों और भूमिहीन मज़दूरों की दशा कैसी थी?
Hint: सोचें — कर, बेगार और बेदखली।
प्रश्न और उत्तर (Questions with Answers)
- सामंत कौन थे?
सामंत वे शक्तिशाली व्यक्ति थे जो राजा के अधीन अपने क्षेत्र का शासन चलाते थे। वे राजा को सैनिक और कर देते थे और बदले में भूमि तथा सम्मान पाते थे। जब उनकी शक्ति बढ़ जाती थी, तो वे कभी-कभी स्वयं राजा बन जाते थे। - ब्रह्मदेय और देवदान क्या थे?
ब्रह्मदेय ब्राह्मणों को दान में दी गई भूमि थी और देवदान मंदिरों को दान में दी गई भूमि थी। इन दानों से गाँव की व्यवस्था बदल जाती थी, क्योंकि दान पाने वाले को उस भूमि के किसानों और करों पर अधिकार मिल जाता था। - चोल मंदिरों के बारे में लिखिए।
चोल मंदिर पत्थर के विशाल मंदिर थे, जैसे तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर (राजराज प्रथम द्वारा निर्मित)। ये मंदिर पूजा के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक केंद्र भी थे — उनके पास भूमि, धन और कारीगर होते थे, और वे सिंचाई तथा रोज़गार का प्रबंध भी करते थे। - चोल प्रशासन में उर, सभा और नगरम् क्या थे?
उर गाँव की सामान्य सभा थी, सभा ब्राह्मणों की सभा थी जो ब्रह्मदेय गाँवों का प्रबंध देखती थी, और नगरम् व्यापारियों का संगठन था जो बाज़ार और व्यापार का प्रबंध करता था। - चोलों ने सिंचाई के लिए क्या किया?
चोलों ने कावेरी डेल्टा में तालाब, नहरें और बाँध बनवाए। इससे खेती का विस्तार हुआ, उत्पादन बढ़ा और राजस्व भी बढ़ा।
महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)
- ‘मुवेंदवेलन’ किसे कहते थे?
मुवेंदवेलन चोल दरबार की एक उपाधि थी, जो धनी किसानों और सरदारों को दी जाती थी। ये लोग राजा को सैनिक और धन देते थे और दरबार में सम्मान पाते थे। - राजाओं की प्रशस्तियाँ क्यों लिखवाई जाती थीं और इतिहासकार उन्हें कैसे पढ़ते हैं?
प्रशस्तियाँ राजाओं के कार्यों का गुणगान करने और उनकी शक्ति दिखाने के लिए लिखवाई जाती थीं। इतिहासकार उन्हें सावधानी से पढ़ते हैं, क्योंकि उनमें अतिशयोक्ति हो सकती है, और उन्हें अन्य स्रोतों से मिलाकर जाँचते हैं। - चोल कांस्य कला के बारे में लिखिए।
चोल काल में कांस्य की सुंदर मूर्तियाँ बनाई जाती थीं, जैसे नटराज (नृत्य करते शिव) की प्रतिमा। ये मूर्तियाँ मंदिरों में रखी जाती थीं और चोल कला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। - भूमिदान से गाँव की व्यवस्था पर क्या असर पड़ा?
भूमिदान पाने वाले को भूमि के साथ-साथ वहाँ के किसानों और करों पर अधिकार मिल जाता था। इससे किसानों पर नियंत्रण बढ़ा, और कभी-कभी उन्हें बेगार भी करनी पड़ती थी। - चोल साम्राज्य के विस्तार में व्यापार की क्या भूमिका थी?
चोलों का समुद्री व्यापार दूर-दूर तक फैला था — व्यापारी संगठन (नगरम्) और बंदरगाह राज्य को धन देते थे, जिससे सेना, मंदिर और सिंचाई के काम चलते थे।
अतिरिक्त अभ्यास — NCERT अभ्यास के प्रकार
- रिक्त स्थान भरिए: बृहदीश्वर मंदिर ______ ने ______ में बनवाया था।
राजराज प्रथम ने तंजावुर में। - सही या गलत, कारण सहित: ‘सभी सामंत हमेशा राजा के वफ़ादार रहते थे।’
गलत। कई सामंत शक्तिशाली होकर स्वयं राजा बन जाते थे या राजा के विरुद्ध भी खड़े हो जाते थे। - मिलान कीजिए: (क) ब्रह्मदेय — (i) मंदिर; (ख) देवदान — (ii) ब्राह्मण; (ग) नगरम् — (iii) व्यापारी।
(क)-(ii), (ख)-(i), (ग)-(iii)। - एक तालिका बनाइए: चोल काल के तीन वर्ग और उनकी दशा।
धनी किसान/सरदार — सम्मान और शक्ति; सामान्य किसान — कर और मेहनत; भूमिहीन मज़दूर — कठिन जीवन, बेगार। - अपने क्षेत्र के किसी मंदिर या पुरानी इमारत के बारे में पता लगाइए — वह किसकी बनवाई हुई है और वहाँ कौन-से काम होते हैं?
(अपने क्षेत्र के अनुसार उत्तर बदल सकता है; मंदिर के शिलालेख या स्थानीय जानकारी से पता लगाएँ।)
- नए राजवंश: गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट, पाल, चोल।
- सामंत, ब्रह्मदेय (ब्राह्मण), देवदान (मंदिर) — भूमिदान की व्यवस्था।
- चोल: तंजावुर, गंगैकोंडचोलपुरम, बृहदीश्वर मंदिर, तालाब-नहरें।
- उर, सभा, नगरम् — गाँव से बाज़ार तक का प्रशासन।
How to use this page: Read the summary, say the Key Terms in your own words, then try the practice set without looking. Use the Questions with Answers to check yourself afterwards. Ask your teacher or parent to check your answers.

