Chapter 8: अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि
‘मैं भी विद्यालय जाऊँगी’ — हर बच्चे की शिक्षा मौलिक अधिकार है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Sanskrit • Book: Ruchira Bhag-2 (NCERT) NCERT-verified (ghsk108)
अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि — EG के अपने notes, सरल हिन्दी में
Book: Ruchira Bhag-2 (NCERT) | Chapter 8 | Medium: Hindi
सत्यापन नोट: यह पाठ NCERT की रुचिरा भाग-2 के अध्याय 8 (ghsk108) के आधार पर जाँचा गया है। यहाँ पुस्तक की पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों नहीं दी गई हैं — भाव और अर्थ EG के अपने शब्दों में, हिन्दी में समझाए गए हैं। ये Educational Galaxy के अपने मूल notes हैं, पाठ्यपुस्तक नहीं, और यहाँ कोई आधिकारिक textbook PDF नहीं दिया जाता है।

Diagram (labels चित्र पर ही छपे हैं): विद्यालय जाती बच्ची — सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

दो पड़ोसिनों की बातचीत। सामान्य चित्र, पुस्तक का दृश्य नहीं।
पाठ का सार
मालिनी और गिरिजा दो पड़ोसिनें हैं। एक दिन मालिनी गिरिजा से पूछती है कि तुम्हारा पुत्र मातुल (मामा) के घर कब जा रहा है और क्या तुम किसी अन्य महिला-कर्मचारी को जानती हो। गिरिजा कहती है कि आज प्रातः ही उसकी सहायिका (सेविका) से बात हुई है और कल प्रातः ही वह उससे बात करेगी।
अगले दिन प्रातः छह बजे मालिनी के घर की घण्टी बजती है। मालिनी द्वार खोलती है और देखती है कि गिरिजा की सेविका दर्शना के साथ एक आठ वर्ष की बालिका खड़ी है। दर्शना कहती है कि वह गिरिजा जी से पूछकर आई है और अपनी पुत्री के लिए अवकाश माँगने आई है।
मालिनी को आश्चर्य होता है कि इतनी छोटी आयु की बालिका क्या काम करेगी — यह तो उसके अध्ययन और खेलने की आयु है। तब दर्शना अपनी विवशता बताती है।
दर्शना की विवशता
दर्शना बताती है कि वह एक ही घर का पूरा काम करती है, क्योंकि वह परिवार अब विदेश चला गया है। काम के अभाव में वह दूसरे घरों का काम भी सँभालती है, जिससे उसके जैसे लोगों का घर चलता है और धन की व्यवस्था होती है।
मालिनी कहती है कि यह सब तो ठीक है, पर क्या तुम नहीं जानतीं कि शिक्षा सभी बालक-बालिकाओं का मौलिक अधिकार है? दर्शना उत्तर देती है कि उनके जैसे लोगों के लिए मौलिक अधिकार केवल सुनने की बात है — क्योंकि व्यवस्था के लिए वह प्रतिदिन पाँच-छह घरों का काम करती है।
उसके पति कोई काम नहीं करते, इसलिए वह और उसकी पुत्री मिलकर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। महँगाई के इस समय में मूलभूत आवश्यकताओं के लिए ही धन पर्याप्त नहीं होता, तो विद्यालय का शुल्क, गणवेश और पुस्तकें कहाँ से लाएँ?
पाठ का सन्देश
मालिनी समझाती है कि आजकल विद्यार्थियों को विद्यालय में बहुत कुछ निःशुल्क मिलता है — शुल्क, पुस्तकें और अन्य सुविधाएँ। शिक्षा का अधिकार अब सबका है, केवल साधन-सम्पन्नों का नहीं।
यह पाठ ‘सब पढ़ें, आगे बढ़ें’ की भावना से विकसित किया गया है। प्रारम्भ में शिक्षा केवल साधन-सम्पन्नों का अधिकार थी, अब वह मौलिक अधिकार बन गई है। पाठ का शीर्षक ही दर्शना की पुत्री की आकांक्षा है — ‘मैं भी विद्यालय जाऊँगी’।
पाठ यह भी दिखाता है कि आर्थिक दृष्टि से दुर्बल परिवारों में छोटे-छोटे बालक चाय की दुकानों और दूसरे घरों में काम करने के लिए नियुक्त कर लिए जाते हैं, जिससे वे शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित रह जाते हैं। इसी भावना को जगाना इस संवादात्मक पाठ का उद्देश्य है।
मुख्य शब्द (Key Terms)
- मौलिक अधिकारः — संविधान से प्राप्त मूल अधिकार।
- निःशुल्कम् — बिना शुल्क के, मुफ़्त।
- गृहसेविका — घर में काम करने वाली महिला।
- भरण-पोषणम् — पालन-पोषण, गुज़ारा।
- महर्घता — महँगाई।
- गणवेशः — विद्यालय की वर्दी।
- प्रतिवेशिनी — पड़ोसिन।
- सहायिका — सहायता करने वाली, सेविका।
- करतलवादनम् — ताली बजाना।
- अध्ययनम् — पढ़ाई।
याद रखें (Remember)
- पात्र: मालिनी, गिरिजा (पड़ोसिनें), दर्शना (गिरिजा की सेविका), दर्शना की 8 वर्ष की पुत्री।
- दर्शना प्रतिदिन 5–6 घरों का काम करती है; उसके पति कोई काम नहीं करते।
- समस्या: महँगाई में मूलभूत आवश्यकताओं के लिए ही धन पर्याप्त नहीं — शुल्क, गणवेश, पुस्तकें कहाँ से आएँ?
- मालिनी का तर्क: शिक्षा सब बालक-बालिकाओं का मौलिक अधिकार है; आज विद्यालय में बहुत कुछ निःशुल्क मिलता है।
- शीर्षक का अर्थ: ‘मैं भी विद्यालय जाऊँगी’ — वंचित बच्ची की आकांक्षा।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: दर्शना और उसकी पुत्री को एक समझ लेना। ध्यान रखें — दर्शना गिरिजा की सेविका है और उसके साथ खड़ी आठ वर्ष की बालिका उसकी पुत्री है। परीक्षा में ‘गिरिजा की गृहसेविका का नाम’ और ‘दर्शना की पुत्री की आयु’ — दोनों अलग-अलग पूछे जाते हैं।
NCERT अभ्यास में किस तरह के प्रश्न आते हैं
NCERT के अभ्यास में ये प्रकार आते हैं — कठिन शब्दों का उच्चारण, एक शब्द में उत्तर, पूर्ण वाक्य में उत्तर, रेखांकित पदों पर प्रश्न-रचना, सन्धि-विच्छेद, समानार्थक और विलोम शब्दों का मेलन तथा विशेषण-विशेष्य का मेलन।
तालिका: पाठ के मुख्य बिंदु
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पाठ का प्रकार | संवादात्मक पाठ (नाटक-सा संवाद) |
| पात्र | मालिनी, गिरिजा, दर्शना, दर्शना की पुत्री (8 वर्ष) |
| समस्या | गरीबी के कारण बच्ची का काम करना, शिक्षा से वंचित रहना |
| मालिनी का तर्क | शिक्षा सबका मौलिक अधिकार है; विद्यालय में बहुत कुछ निःशुल्क है |
| सन्देश | सब पढ़ें, आगे बढ़ें — कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे |
अभ्यास (Practice set — स्वयं कीजिए)
- मालिनी और गिरिजा कौन हैं और उनकी बातचीत किससे शुरू होती है?
Hint: सोचें — पड़ोसिनें और मातुल के घर जाने की बात। - मालिनी के घर की घण्टी कब बजी और द्वार पर कौन था?
Hint: सोचें — अगले दिन प्रातः छह बजे, दर्शना और एक बालिका। - दर्शना ने अपनी विवशता के बारे में क्या बताया?
Hint: सोचें — 5–6 घरों का काम, पति का काम न करना, महँगाई। - मालिनी ने शिक्षा के बारे में क्या समझाया?
Hint: सोचें — मौलिक अधिकार और निःशुल्क सुविधाएँ। - पाठ के शीर्षक का अर्थ अपने शब्दों में समझाइए।
Hint: सोचें — किसकी आकांक्षा है ‘मैं भी विद्यालय जाऊँगी’?
प्रश्न और उत्तर (Questions with Answers)
- पाठ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
मालिनी और गिरिजा पड़ोसिनें हैं। गिरिजा की सेविका दर्शना अपनी आठ वर्ष की पुत्री के साथ मालिनी के घर आती है। मालिनी को आश्चर्य होता है कि इतनी छोटी बच्ची क्या काम करेगी — यह तो पढ़ने-खेलने की आयु है। दर्शना बताती है कि वह प्रतिदिन पाँच-छह घरों का काम करती है, उसके पति कोई काम नहीं करते, और महँगाई में मूलभूत आवश्यकताओं के लिए ही धन पर्याप्त नहीं होता — तो शुल्क, गणवेश और पुस्तकें कहाँ से आएँ? मालिनी समझाती है कि शिक्षा सब बालक-बालिकाओं का मौलिक अधिकार है और आज विद्यालय में बहुत कुछ निःशुल्क मिलता है। पाठ का सन्देश है — सब पढ़ें, आगे बढ़ें; कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। - गिरिजा की गृहसेविका का नाम क्या था?
गिरिजा की गृहसेविका का नाम दर्शना था। - दर्शना की पुत्री कितने वर्ष की थी?
दर्शना की पुत्री आठ वर्ष की थी। - आजकल शिक्षा हमारे लिए कैसा अधिकार है?
आजकल शिक्षा हम सबके लिए मौलिक अधिकार है — पहले यह केवल साधन-सम्पन्नों का अधिकार था, अब यह सबका अधिकार बन गया है। - दर्शना कितने घरों का काम करती है और क्यों?
दर्शना प्रतिदिन पाँच-छह घरों का काम करती है, क्योंकि उसके पति कोई काम नहीं करते और परिवार के भरण-पोषण के लिए उसे ही धन जुटाना पड़ता है।
विस्तार: NCERT अभ्यास के अनुरूप (Extension)
- उच्चारण-अभ्यास: इन शब्दों को शुद्ध बोलिए — अग्रिमदिने, षड्वादने, अष्टवर्षदेशीया, अनुग्रह्णातु, भवत्सदृशानाम्, गृहसञ्चालनाय, व्यवस्थायै, महर्घताकाले, औत्सुक्यम्, करतलवादनसहितम्।
- एक शब्द में उत्तर: (क) गिरिजा की गृहसेविका का नाम क्या था? (ख) दर्शना की पुत्री कितने वर्ष की थी? (ग) आजकल शिक्षा हमारा कैसा अधिकार है? (घ) दर्शना की पुत्री कैसे नृत्य करती है? उत्तर: दर्शना; आठ वर्ष; मौलिक अधिकार; करतल-वादन (ताली) के साथ।
- पूर्ण वाक्य में उत्तर: (क) आठ वर्ष की दर्शना की पुत्री क्या करती थी? (ख) दर्शना कितने घरों का काम करती है? (ग) मालिनी अपनी पड़ोसिन से क्या कहती है? (घ) आजकल छात्र विद्यालय में क्या-क्या निःशुल्क पाते हैं?
- प्रश्न-रचना: इन कथनों के रेखांकित अंशों पर प्रश्न बनाइए — (क) मालिनी द्वार खोलती है। (ख) शिक्षा सभी बालकों का मौलिक अधिकार है। (ग) दर्शना आशय से मालिनी को देखती है। (घ) दर्शना और उसकी पुत्री मिलकर परिवार का भरण-पोषण करती हैं।
- सन्धि-विच्छेद पूरा कीजिए: (क) ग्रामं प्रति = ग्रामम् + ___। (ख) कार्यार्थम् = ___ + अर्थम्। (ग) करिष्यत्येषा = करिष्यति + ___। (घ) स्वोपजीविकायै = ___ + उपजीविकायै। (ङ) अप्येवम् = अपि + ___।
- समानार्थक मिलाइए: आशयेन, उल्लासेन, परिवारस्य, अध्ययनस्य, कालः ↔ अभिप्रायेण, प्रसन्नतया, कुटुम्बस्य, पठनेन, समयः।
- विलोम मिलाइए: स्वकीयम्, श्वः, ग्रामम्, समीपस्थम्, पृच्छति ↔ परकीयम्, ह्यः, नगरम्, दूरस्थम्, कथयति।
- विशेषण-विशेष्य जोड़िए: सर्वेषाम् → बालकानाम्; मौलिकः → अधिकारः; एषा → बालिका; सर्वकारीयम् → विद्यालयम्।
पुनरावलोकन (Recap)
- पात्र: मालिनी, गिरिजा, दर्शना, दर्शना की 8 वर्ष की पुत्री।
- दर्शना: प्रतिदिन 5–6 घरों का काम; पति कोई काम नहीं करते।
- बाधा: महँगाई — शुल्क, गणवेश, पुस्तकें जुटाना कठिन।
- उत्तर: शिक्षा मौलिक अधिकार है; विद्यालय में बहुत कुछ निःशुल्क।
- सन्देश: सब पढ़ें, आगे बढ़ें।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, फिर मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, अभ्यास बिना देखे कीजिए और अंत में प्रश्न-उत्तर से जाँच कीजिए। उत्तरों की जाँच अपने शिक्षक या अभिभावक से कराएँ।

