Chapter 13: लालनगीतम्
प्रातःकाल का गीत — सूर्योदय से लेकर पशु-पक्षियों तक, प्रकृति की मधुर झाँकी।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Sanskrit • Book: Ruchira Bhag-2 (NCERT) NCERT-verified (ghsk113)
लालनगीतम् — EG के अपने notes, सरल हिन्दी में
Book: Ruchira Bhag-2 (NCERT) | Chapter 13 | Medium: Hindi
सत्यापन नोट: यह पाठ NCERT की रुचिरा भाग-2 के अध्याय 13 (ghsk113) के आधार पर जाँचा गया है। यहाँ पुस्तक की पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों नहीं दी गई हैं — भाव और अर्थ EG के अपने शब्दों में, हिन्दी में समझाए गए हैं। ये Educational Galaxy के अपने मूल notes हैं, पाठ्यपुस्तक नहीं, और यहाँ कोई आधिकारिक textbook PDF नहीं दिया जाता है।

Diagram (labels चित्र पर ही छपे हैं): सूर्योदय पर खिलते कमल और पक्षी — प्रातःकाल की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

नदी में तैरती नाव और हरे वृक्ष। सामान्य चित्र, पुस्तक का दृश्य नहीं।
पाठ का सार
लालनगीतम् एक प्रातःकालीन गीत है। इसमें सूर्योदय के समय प्रकृति का वर्णन है — सूर्य के उदित होते ही धरती मुस्कराती है, पक्षी कूजते हैं और कमल खिलते हैं।
गीत आगे कहता है कि नदी मन्द-मन्द बहती है और उसके जल में नाव तैरती है। पुष्प-पुष्प में नाना रंग हैं और उन पर रंग-बिरंगी तितलियाँ उड़ती हैं। वृक्ष-वृक्ष में नूतन पत्ते हैं, जो विविध वर्णों से चित्र की तरह शोभित होते हैं।
फिर गीत पशुओं की ओर मुड़ता है — धेनु (गाय) प्रातःकाल दुग्ध देती है, जो शुद्ध, स्वच्छ, मधुर और स्निग्ध होता है। गहन वन में व्याघ्र गर्जता है और ऊँचे स्वर में सिंह दहाड़ता है। हरिण नव घास खाता है और चारों ओर सविलास देखता है। उष्ट्र (ऊँट) मन्द-मन्द चलता है और अपनी पीठ पर प्रचुर भार वहन करता है।
गीत का भाव
यह गीत केवल प्रकृति-वर्णन नहीं है — यह प्रातःकाल की सजीवता का अनुभव है। सूर्य, धरती, पक्षी, कमल, नदी, पुष्प, तितली, वृक्ष, गाय, व्याघ्र, सिंह, हरिण और ऊँट — सब अपने-अपने काम में लगे हैं। प्रकृति में कोई आलस्य नहीं है, सब क्रियाशील हैं।
गीत की भाषा सरल और संगीतात्मक है — एक-एक पंक्ति में एक चित्र बनता है। इसीलिए इस पाठ का अभ्यास गायन से शुरू होता है: पहले गीत को सस्वर गाइए, फिर उसके चित्रों को समझिए।
परीक्षा में इस पाठ से प्रायः ये पूछा जाता है — कौन मुस्कराता है, क्या खिलता है, व्याघ्र कहाँ गर्जता है, हरिण क्या खाता है, ऊँट कैसे चलता है और पीठ पर क्या वहन करता है। नीचे का विस्तार इन्हीं प्रश्नों का अभ्यास कराता है।
मुख्य शब्द (Key Terms)
- लालनगीतम् — लालन (दुलार) का गीत, प्रातःकालीन गीत।
- विहसति — मुस्कराती है।
- विकसति — खिलता है।
- चित्रपतङ्गाः — रंग-बिरंगी तितलियाँ।
- नूतनपत्रम् — नया पत्ता।
- धेनुः — गाय।
- स्निग्धम् — चिकना, कोमल, स्नेहयुक्त।
- विपिनम् — वन, जंगल।
- नर्दति — दहाड़ता है।
- नवघासम् — नई घास।
- उष्ट्रः — ऊँट।
- प्रचुरम् भारम् — भारी भार।
याद रखें (Remember)
- सूर्य उदित → धरती मुस्कराती है, पक्षी कूजते हैं, कमल खिलते हैं।
- नदी मन्द बहती है, जल में नाव तैरती है।
- पुष्पों में नाना रंग; उन पर चित्रपतङ्ग (तितलियाँ) उड़ती हैं। वृक्षों में नूतन पत्ते।
- धेनु का दुग्ध: शुद्ध, स्वच्छ, मधुर, स्निग्ध।
- व्याघ्र गहन वन में गर्जता है; सिंह ऊँचे स्वर में दहाड़ता है; हरिण नव घास खाता है; उष्ट्र मन्द चलता है, पीठ पर भारी भार वहता है।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: पशुओं के काम आपस में बदल देना — जैसे सिंह को गर्जता और व्याघ्र को दहाड़ता लिख देना। याद रखें: व्याघ्र गर्जता है (गहन वन में), सिंह नर्दति है (ऊँचे स्वर में दहाड़ता है)। साथ ही ‘कौन मुस्कराता है’ (धरती) और ‘क्या खिलता है’ (कमल) को भी अलग-अलग याद रखें।
NCERT अभ्यास में किस तरह के प्रश्न आते हैं
NCERT के अभ्यास में ये प्रकार आते हैं — गीत का सस्वर गायन, एक शब्द में उत्तर, रेखांकित पदों पर प्रश्न-रचना, मञ्जूषा से समानार्थक शब्द लिखना, विलोम शब्दों का मेलन, उचित/अनुचित कथनों पर ‘आम्’/‘न’, निर्देशानुसार शब्दों का रूप-परिवर्तन (विभक्ति-वचन) और चित्र देखकर मञ्जूषा के शब्दों से वाक्य-रचना।
तालिका: पाठ के मुख्य बिंदु
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पाठ का प्रकार | गीत (प्रातःकालीन वर्णन) |
| सूर्योदय पर | धरती मुस्कराती है, पक्षी कूजते हैं, कमल खिलते हैं |
| नदी | मन्द बहती है; जल में नाव तैरती है |
| पुष्प-वृक्ष | नाना रंग के पुष्प, तितलियाँ; नूतन पत्ते |
| पशु | धेनु-दुग्ध, व्याघ्र-गर्जन, सिंह-नाद, हरिण-घास, उष्ट्र-भार |
| सीख | प्रकृति में सब क्रियाशील हैं; प्रातःकाल सजीवता का समय है |
अभ्यास (Practice set — स्वयं कीजिए)
- सूर्योदय के समय क्या-क्या होता है? तीन बातें लिखिए।
Hint: सोचें — धरती, पक्षी, कमल। - नदी और नाव के बारे में गीत क्या कहता है?
Hint: सोचें — मन्द बहना और तैरना। - पुष्पों और वृक्षों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Hint: सोचें — नाना रंग, तितलियाँ, नूतन पत्ते। - धेनु के दुग्ध की चार विशेषताएँ लिखिए।
Hint: सोचें — शुद्ध, स्वच्छ, मधुर और…? - व्याघ्र, सिंह, हरिण और उष्ट्र — प्रत्येक का काम एक वाक्य में लिखिए।
Hint: सोचें — गर्जन, नाद, घास, भार।
प्रश्न और उत्तर (Questions with Answers)
- पाठ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
लालनगीतम् प्रातःकाल का गीत है। सूर्य के उदित होते ही धरती मुस्कराती है, पक्षी कूजते हैं और कमल खिलते हैं। नदी मन्द-मन्द बहती है और उसके जल में नाव तैरती है। पुष्पों में नाना रंग हैं, उन पर रंग-बिरंगी तितलियाँ उड़ती हैं और वृक्षों में नूतन पत्ते शोभित होते हैं। धेनु प्रातःकाल शुद्ध, स्वच्छ, मधुर और स्निग्ध दुग्ध देती है। गहन वन में व्याघ्र गर्जता है, सिंह ऊँचे स्वर में दहाड़ता है, हरिण नव घास खाता है और उष्ट्र मन्द-मन्द चलकर अपनी पीठ पर भारी भार वहन करता है। इस प्रकार प्रातःकाल प्रकृति पूरी तरह सजीव हो उठती है। - सूर्य के उदित होने पर क्या-क्या होता है?
सूर्य के उदित होने पर धरती मुस्कराती है, पक्षी कूजते हैं और कमल खिलते हैं। - व्याघ्र कहाँ गर्जता है और सिंह कैसे दहाड़ता है?
व्याघ्र गहन वन में गर्जता है और सिंह ऊँचे स्वर में दहाड़ता है। - हरिण क्या खाता है?
हरिण नव घास (नई घास) खाता है। - उष्ट्र कैसे चलता है और क्या वहन करता है?
उष्ट्र मन्द-मन्द (धीरे-धीरे) चलता है और अपनी पीठ पर प्रचुर (भारी) भार वहन करता है।
विस्तार: NCERT अभ्यास के अनुरूप (Extension)
- गीत-गायन: गीत को सस्वर गाइए — पहले धीरे-धीरे, फिर लय के साथ। गाते समय प्रत्येक पंक्ति के चित्र को मन में देखिए (सूर्योदय, कमल, नदी-नाव, तितली, गाय, वन)।
- एक शब्द में उत्तर: (क) कौन मुस्कराता है? (ख) क्या खिलता है? (ग) व्याघ्र कहाँ गर्जता है? (घ) हरिण क्या खाता है? (ङ) कौन मन्द-मन्द चलता है? उत्तर: धरणी; कमलम्; गहने विपिने; नवघासम्; उष्ट्रः।
- प्रश्न-रचना: इन कथनों के रेखांकित अंशों पर प्रश्न बनाइए — (क) नदी के जल में नाव तैरती है। (ख) पुष्पों में चित्रपतङ्ग उड़ते हैं। (ग) उष्ट्र पीठ पर भार वहन करता है। (घ) धावता हुआ अश्व कुछ भी नहीं खाता। (ङ) सूर्य के उदित होने पर धरती मुस्कराती है।
- समानार्थक लिखिए: मञ्जूषा — पृथ्वी, जलम्, वने, मृगः — (क) धरणी → पृथ्वी, (ख) सलिले → जलम्, (ग) विपिने → वने, (घ) हरिणः → मृगः।
- विलोम मिलाइए: मन्दम्, नीचैः, कठोरः, पुरातनम्, अपर्याप्तम् ↔ क्षिप्रम्, उच्चैः, स्निग्धम्, नूतनम्, पर्याप्तम्।
- आम्/न: (क) धावता हुआ अश्व खाता है। (ख) उष्ट्र पीठ पर भार नहीं वहन करता। (ग) सिंह नीचे स्वर में दहाड़ता है। (घ) पुष्पों में चित्रपतङ्ग उड़ते हैं। (ङ) वन में व्याघ्र गर्जता है। (च) हरिण नव घास नहीं खाता। उत्तर: न, न, न, आम्, आम्, न।
- रूप-परिवर्तन: उदाहरण — चित्रपतङ्गाः (प्रथमा, बहुवचन)। अब बदलिए: भल्लूकः (तृतीया, एकवचन) → भल्लूकेन; उष्ट्रः (पञ्चमी, द्विवचन) → उष्ट्राभ्याम्; हरिणः (सप्तमी, बहुवचन) → हरिणेषु; व्याघ्रः (द्वितीया, एकवचन) → व्याघ्रम्; घोटकराजः (सम्बोधन, एकवचन) → हे घोटकराज!।
- चित्र-वाक्य: चित्र देखकर मञ्जूषा के शब्दों से वाक्य बनाइए — खगाः, विकसन्ति, कमलानि, उदेति, क्रीडन्ति, सूर्यः, चित्रपतङ्गाः, कूजन्ति, बालाः। उदाहरण: ‘सूर्ये उदिते कमलानि विकसन्ति, खगाः कूजन्ति।’
पुनरावलोकन (Recap)
- सूर्योदय: धरती मुस्कराती है, पक्षी कूजते हैं, कमल खिलते हैं।
- नदी मन्द बहती है; जल में नाव। पुष्पों में रंग, तितलियाँ; वृक्षों में नूतन पत्ते।
- धेनु-दुग्ध: शुद्ध, स्वच्छ, मधुर, स्निग्ध।
- व्याघ्र: गहन वन में गर्जन; सिंह: ऊँचे स्वर में नाद; हरिण: नव घास; उष्ट्र: मन्द गति, भारी भार।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, फिर मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, अभ्यास बिना देखे कीजिए और अंत में प्रश्न-उत्तर से जाँच कीजिए। उत्तरों की जाँच अपने शिक्षक या अभिभावक से कराएँ।

