Chapter 10: समवायो हि दुर्जयः
एकता की शक्ति — मिलकर रहने वाला समूह अजेय होता है, चाहे उसके सदस्य कितने ही छोटे क्यों न हों।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Sanskrit • Book: Ruchira Bhag-2 (NCERT) NCERT-verified (ghsk110)
समवायो हि दुर्जयः — EG के अपने notes, सरल हिन्दी में
Book: Ruchira Bhag-2 (NCERT) | Chapter 10 | Medium: Hindi
सत्यापन नोट: यह पाठ NCERT की रुचिरा भाग-2 के अध्याय 10 (ghsk110) के आधार पर जाँचा गया है। यहाँ पुस्तक की पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों नहीं दी गई हैं — भाव और अर्थ EG के अपने शब्दों में, हिन्दी में समझाए गए हैं। ये Educational Galaxy के अपने मूल notes हैं, पाठ्यपुस्तक नहीं, और यहाँ कोई आधिकारिक textbook PDF नहीं दिया जाता है।

Diagram (labels चित्र पर ही छपे हैं): वृक्ष पर चटका का घोंसला और हाथी — कथा की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

चटका, कठफोड़वा, मक्खी और मेंढक — एकता की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
पाठ का सार
पुराने समय में एक वृक्ष पर एक चटका (गौरैया) रहती थी। समय बीतने पर उसकी सन्तान हुई। एक दिन एक प्रमत्त (मतवाला) हाथी उस वृक्ष के नीचे आया और उसने अपनी सूँड़ से उसकी शाखा तोड़ दी।
चटका का घोंसला पृथ्वी पर गिर गया और उसके अण्डे टूट गए। चटका विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर काष्ठकूट नाम का कठफोड़वा दुःख से उससे पूछने आया कि हे भद्रे, तुम क्यों विलाप कर रही हो?
चटका ने कहा कि दुष्ट हाथी ने मेरी सन्तान नष्ट कर दी है — उसी हाथी के वध से ही मेरा दुःख दूर होगा। तब काष्ठकूट उसे वीणावादिनी मक्षिका (मक्खी) के पास ले गया। उन दोनों की बात सुनकर मक्षिका ने कहा कि मेरी भी एक मित्र मण्डूक (मेंढक) मेघनाद है। शीघ्र ही तुम उसे भी बुला लो, फिर जो उचित होगा, वह करेंगे।
चार छोटे मित्रों की योजना
चारों ने मिलकर एक योजना बनाई। मक्षिका हाथी के कान के पास गूँजकर उसे व्याकुल करेगी, जिससे वह आँखें बन्द कर लेगा। तभी काष्ठकूट उसकी आँखें फोड़ देगा।
अन्धा और प्यास से व्याकुल हाथी जल की खोज में भटकेगा। तब मण्डूक गड्ढे के पास से टर्राएगा, जिसे हाथी जलाशय समझ बैठेगा। वह गड्ढे की ओर बढ़ेगा और उसी में गिरकर मर जाएगा।
योजना वैसी ही सफल हुई — हाथी गड्ढे में गिरा और मर गया। इस प्रकार कई निर्बल प्राणियों के समूह ने एक बड़े बलवान शत्रु को जीत लिया। यही शीर्षक का अर्थ है — समवाय (समूह) सचमुच दुर्जय (जीतने में कठिन) होता है।
पाठ की नीति यह है कि अनेक निर्बलों का समूह भी अजेय होता है। एकता में वह शक्ति है, जो अकेले बड़े-से-बड़े बलवान में भी नहीं होती।
मुख्य शब्द (Key Terms)
- समवायः — समूह, संगठन।
- दुर्जयः — जीतने में कठिन, अजेय।
- चटका — गौरैया।
- काष्ठकूटः — कठफोड़वा।
- मक्षिका — मक्खी।
- मण्डूकः — मेंढक (यहाँ: मेघनाद)।
- प्रमत्तः गजः — मतवाला हाथी।
- सन्ततिः — सन्तान।
- तृषार्तः — प्यास से पीड़ित।
- गर्तः — गड्ढा।
याद रखें (Remember)
- पात्र: चटका, काष्ठकूट (कठफोड़वा), मक्षिका, मण्डूक मेघनाद, प्रमत्त हाथी।
- संकट: हाथी ने शाखा तोड़ी, घोंसला गिरा, अण्डे टूटे।
- योजना: मक्षिका की गूँज → काष्ठकूट द्वारा आँखें फोड़ना → मण्डूक की टर्राहट → गड्ढे में गिरकर हाथी की मृत्यु।
- नीति: अनेक निर्बलों का समूह भी अजेय होता है।
- व्याकरण: भविष्यत् (लृट्) की रूप-तालिका, ‘स्म’ से भूतकाल, उचित पद-चयन।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: योजना के क्रम को उलट देना। परीक्षा में क्रम पूछा जाता है — पहले मक्षिका की गूँज, फिर आँखें फोड़ना, फिर मण्डूक की आवाज़, तब गड्ढे में गिरना। क्रम बदलने पर उत्तर गलत माना जाता है।
NCERT अभ्यास में किस तरह के प्रश्न आते हैं
NCERT के अभ्यास में ये प्रकार आते हैं — एक शब्द में उत्तर, रेखांकित पदों पर प्रश्न-रचना, मञ्जूषा से क्रियापद चुनकर रिक्त स्थान भरना, एक वाक्य में उत्तर, उदाहरण के अनुसार रिक्त स्थान भरना (पुरुष-वचन तालिका), ‘स्म’ जोड़कर भूतकाल की क्रिया बनाना और कोष्ठक से उचित पद चुनकर वाक्य-पूर्ति।
तालिका: पाठ के मुख्य बिंदु
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पाठ का प्रकार | कथा (नीति-कथा) |
| पात्र | चटका, काष्ठकूट, मक्षिका, मण्डूक मेघनाद, हाथी |
| संकट | हाथी ने शाखा तोड़ी; घोंसला गिरा, अण्डे टूटे |
| योजना | गूँज → आँखें फोड़ना → टर्राहट → गड्ढे में गिरना |
| नीति | समवायो हि दुर्जयः — समूह अजेय होता है |
अभ्यास (Practice set — स्वयं कीजिए)
- वृक्ष पर कौन रहती थी और उसकी क्या हानि हुई?
Hint: सोचें — चटका, शाखा, घोंसला, अण्डे। - चटका का विलाप सुनकर कौन आया और उसने क्या पूछा?
Hint: सोचें — काष्ठकूट का प्रश्न। - मक्षिका ने कौन-सा मित्र बताया और क्यों?
Hint: सोचें — मण्डूक मेघनाद। - चारों मित्रों की योजना क्रम से लिखिए।
Hint: सोचें — गूँज, आँखें, टर्राहट, गड्ढा। - इस कथा की नीति अपने शब्दों में लिखिए।
Hint: सोचें — निर्बलों का समूह और बलवान शत्रु।
प्रश्न और उत्तर (Questions with Answers)
- कथा का सार अपने शब्दों में लिखिए।
एक वृक्ष पर चटका रहती थी। एक मतवाले हाथी ने शाखा तोड़ दी, घोंसला गिर गया और अण्डे टूट गए। चटका के विलाप पर काष्ठकूट आया और उसे मक्षिका के पास ले गया; मक्षिका ने अपने मित्र मण्डूक मेघनाद को भी बुलाया। चारों ने योजना बनाई — मक्षिका की गूँज से हाथी आँखें बन्द करेगा, काष्ठकूट उसकी आँखें फोड़ देगा, प्यासा हाथी मण्डूक की टर्राहट को जलाशय समझकर गड्ढे की ओर बढ़ेगा और गिरकर मर जाएगा। योजना सफल हुई और हाथी मर गया। इस प्रकार निर्बलों के समूह ने बलवान को जीत लिया। - वृक्ष के नीचे कौन आया था और उसने क्या किया?
एक प्रमत्त (मतवाला) हाथी वृक्ष के नीचे आया और उसने अपनी सूँड़ से उसकी शाखा तोड़ दी, जिससे चटका का घोंसला गिर गया। - काष्ठकूट चटका को किसके पास ले गया?
काष्ठकूट चटका को मक्षिका के पास ले गया, जिसकी वीणा-जैसी गूँज प्रसिद्ध थी। - मक्षिका का मित्र कौन था?
मक्षिका का मित्र मण्डूक (मेंढक) मेघनाद था। - चटका ने काष्ठकूट से क्या कहा था?
चटका ने कहा था कि दुष्ट हाथी ने उसकी सन्तान नष्ट कर दी है और उसी हाथी के वध से ही उसका दुःख दूर होगा।
विस्तार: NCERT अभ्यास के अनुरूप (Extension)
- एक शब्द में उत्तर: (क) वृक्ष पर कौन रहती थी? (ख) वृक्ष के नीचे कौन आया था? (ग) हाथी ने किससे शाखा तोड़ी? (घ) काष्ठकूट चटका को किसके पास ले गया? (ङ) मक्षिका का मित्र कौन था? उत्तर: चटका; प्रमत्त हाथी; सूँड़ से; मक्षिका के पास; मण्डूक मेघनाद।
- प्रश्न-रचना: इन कथनों के रेखांकित अंशों पर प्रश्न बनाइए — (क) समय बीतने पर चटका की सन्तान हुई। (ख) चटका का घोंसला पृथ्वी पर गिरा। (ग) हाथी के वध से ही मेरा दुःख दूर होगा। (घ) काष्ठकूट चटका के नयनों को फोड़ देगा।
- क्रियापद-पूर्ति: मञ्जूषा — करिष्यामि, गमिष्यति, अनयत्, पतिष्यति, स्फोटयिष्यति, त्रोटयति — (क) काष्ठकूट चटका को हाथी के नयनों ___। (ख) मार्ग में स्थित मैं भी शब्द ___। (ग) प्यास से पीड़ित हाथी जलाशय ___। (घ) हाथी गर्त में ___। (ङ) काष्ठकूट उसे मक्षिका के पास ___। (च) हाथी सूँड़ से वृक्ष की शाखा ___।
- एक वाक्य में उत्तर: (क) चटका का विलाप सुनकर काष्ठकूट ने उससे क्या पूछा? (ख) चटका और काष्ठकूट की बात सुनकर मक्षिका ने क्या कहा? (ग) मेघनाद ने मक्षिका से क्या कहा? (घ) चटका ने काष्ठकूट से क्या कहा?
- पुरुष-वचन तालिका: प्रथम पुरुष: पठिष्यति / पठिष्यतः / पठिष्यन्ति; पतिष्यति — ___ / ___; मरिष्यति — ___ / ___। मध्यम पुरुष: गमिष्यसि / गमिष्यथः / गमिष्यथ; धाविष्यसि — ___ / ___। उत्तम पुरुष: लेखिष्यामि / लेखिष्यावः / लेखिष्यामः; हसिष्यामि — ___ / ___; द्रक्ष्यामि — ___ / ___।
- ‘स्म’ से भूतकाल बनाइए: उदाहरण — अवसत् → वसति स्म। अब बनाइए: अपतत् → पतति स्म; अत्रोटयत् → त्रोटयति स्म; अपृच्छत् → पृच्छति स्म; अवदत् → वदति स्म; अनयत् → नयति स्म।
- उचित पद चुनिए: (क) ___ बालिका मधुरं गायति। (एकम्/एका/एकः) (ख) ___ कृषकाः कृषिकर्माणि कुर्वन्ति। (चत्वारः/चतस्रः/चत्वारि) (ग) ___ पत्राणि सुन्दराणि सन्ति। (ते/ताः/तानि) (घ) धेनवः दुग्धं ___। (ददाति/ददति/ददन्ति) (ङ) वयं संस्कृतम् ___। (अपठम्/अपठन्/अपठाम)
पुनरावलोकन (Recap)
- चटका का संकट: हाथी ने शाखा तोड़ी, अण्डे टूटे।
- सहायक: काष्ठकूट → मक्षिका → मण्डूक मेघनाद।
- योजना: गूँज → आँखें फोड़ना → टर्राहट → गड्ढा → हाथी की मृत्यु।
- नीति: समवायो हि दुर्जयः — समूह अजेय होता है।
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