Chapter 2: हिमालय की बेटियाँ
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Vasant Bhag-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
नदियाँ हिमालय की बेटियाँ हैं — माँ की गोद जैसी धारा, लोकमाता जैसा सम्मान।
हिमालय की बेटियाँ — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Vasant Bhag-2 (BSEB, कक्षा 7) | अध्याय 2 | लेखक/कवि: नागार्जुन | माध्यम: Hindi
ये Educational Galaxy के अपने मूल notes हैं, पाठ्यपुस्तक नहीं, और यहाँ कोई आधिकारिक textbook PDF नहीं दिया जाता है। चित्र सामान्य तस्वीरें हैं, पुस्तक के चित्र नहीं।

Diagram (labels are printed on the image): हिमालय से बहती नदियाँ — सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

पर्वतों से बहती नदी। प्रकृति की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
लेखक/कवि परिचय
इस लेख के लेखक नागार्जुन हैं। यह लेख हिमालय से निकलनेवाली नदियों के बारे में है — लेखक उन्हें दूर से और पास से, दोनों तरह से देखता है और हर बार उनका नया रूप पाता है।
लेखक नदियों को केवल पानी की धारा नहीं मानता। वह उन्हें माँ, दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह याद करता है, और हिमालय की बेटियों के रूप में देखता है। यही ममता भरी नज़र इस लेख की जान है।
सार — अपने शब्दों में
लेखक को नदियाँ दूर से गंभीर और शांत लगती हैं। उसे याद आता है कि बचपन में वह माँ, दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता था। नदी उसके लिए खेल और स्नेह की जगह थी, डर की नहीं।
फिर एक बार लेखक हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो नदियों का रूप कुछ और ही था। दुबली-पतली गंगा, यमुना और सतलुज पहाड़ों से उतरकर समतल मैदानों में आते ही विशाल हो जाती हैं। पहाड़ की बेटियाँ मैदान में आकर सबको जीवन देती हैं।
नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ बहुत पुरानी है। लेकिन नागार्जुन उन्हें और भी रूपों में देखते हैं — कभी वे संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती हैं, कभी उनकी धारा माँ की गोद जैसी लगती है। काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है, क्योंकि वे सबका पालन करती हैं।
लेख में सिंधु और ब्रह्मपुत्र की विशेषताओं का भी वर्णन है, और हिमालय की यात्रा में लेखक ने जिन-जिन की प्रशंसा की है, वे सब उसकी नज़र में हिमालय की महिमा के हिस्से हैं। लेख 1947 में लिखा गया था — तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं, यह भी सोचने की बात है।
अंत में लेख यह सिखाता है कि नदियों को देखना केवल भूगोल पढ़ना नहीं है। उन्हें ममता भरी आँखों से देखना, उनकी सुरक्षा के बारे में सोचना और उनसे मिलनेवाले लाभों को समझना भी ज़रूरी है।
मुख्य शब्द
- संभ्रांत — सभ्य, शालीन, प्रतिष्ठित।
- लोकमाता — लोक की माता — सबका पालन करनेवाली (काका कालेलकर का प्रयोग)।
- समतल — बराबर, चौरस — पहाड़ के बाद का मैदानी भाग।
- धारा — नदी का बहता हुआ पानी।
- ममता — माँ जैसा स्नेह।
- देवात्मा — देवताओं की आत्मा वाला — कालिदास ने हिमालय को यह कहा है (पाठ में पूछा गया है)।
भाषा-बिंदु
- तुलनात्मक प्रयोग: लेखक ने अनेक तुलनाएँ की हैं, जैसे ‘संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं’ और ‘माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।’ तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट और सुंदर बनता है। अन्य पाठों से पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाओ।
- नामों के अन्य रूप: सतलुज, रोपड़, झेलम, चिनाब, अजमेर, बनारस के पुराने/अन्य रूप क्रमशः शतद्रुम, रूपपुर, वितस्ता, विपाशा, अजयमेरु, वाराणसी हैं। नदी और नगर के नाम समय के साथ बदलते रहे हैं।
- ‘ही’ का नकारात्मक अर्थ: ‘उनके ख़याल में शायद ही…’ में ‘ही’ न होने का भाव देता है। ‘महात्मा गांधी को कौन नहीं जानता?’ जैसे नकारात्मक प्रश्नवाचक भी ‘नहीं’ के अर्थ में नहीं होते — वे ज़ोर देकर हाँ कहते हैं।
- विशेषण-विशेष्य का मिलान: संभ्रांत—महिला, चंचल—नदियाँ, समतल—आँगन, घना—जंगल, मूसलाधार—वर्षा। विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है।
- द्वंद्व समास: ‘राजा-रानी’ द्वंद्व समास है (राजा और रानी)। पाठ में आए द्वंद्व समासों को खोजकर वर्णमाला क्रम (शब्दकोश-शैली) में लिखो।
- उल्टा शब्द: ‘नदी’ को उल्टा लिखने से ‘दीन’ होता है, जिसका अर्थ है गरीब। पाँच ऐसे शब्द लिखो जो उल्टा लिखने पर सार्थक बनें, और प्रत्येक के आगे संज्ञा का नाम भी लिखो, जैसे नदी—दीन (भाववाचक संज्ञा)।
अभ्यास (Practice — पहले खुद कोशिश करो)
- लेखक नागार्जुन नदियों को और किन रूपों में देखते हैं?
संकेत: सोचो — माँ की गोद, संभ्रांत महिला, हिमालय की बेटियाँ। - काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?
संकेत: सोचो — माँ क्या करती है? नदी क्या करती है? - सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
संकेत: सोचो — पाठ में इन दोनों नदियों का अलग वर्णन क्यों है? - ‘ही’ के नकारात्मक अर्थ का एक उदाहरण वाक्य में प्रयोग करके लिखो।
संकेत: सोचो — ‘शायद ही’ का क्या अर्थ निकलता है? - नदी—दीन की तरह उल्टा लिखने पर सार्थक बननेवाले तीन शब्द लिखो।
संकेत: सोचो — कौन-से शब्द उल्टे भी शब्द बनते हैं?
प्रश्न और उत्तर (Important Questions with Answers)
- नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफ़ी पुरानी है, लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
नागार्जुन नदियों को माँ के रूप के साथ-साथ संभ्रांत महिला की भाँति भी देखते हैं, और उनकी धारा उन्हें माँ, दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह लगती है। दूर से वे गंभीर और शांत लगती हैं, और हिमालय के कंधे से देखने पर वे हिमालय की बेटियों जैसी लगती हैं। - सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
लेख में सिंधु और ब्रह्मपुत्र को हिमालय से निकलनेवाली बड़ी और महत्त्वपूर्ण नदियों के रूप में दिखाया गया है। उनकी धारा, उनका वेग और मैदानों में उनका विशाल रूप ही उनकी विशेषता है — पहाड़ की दुबली-पतली धारा मैदान में आकर विशाल नदी बन जाती है। - काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?
क्योंकि नदियाँ सबका पालन करती हैं। जैसे माँ अपने बच्चों को अन्न, जल और जीवन देती है, वैसे ही नदियाँ खेतों को पानी, धरती को उपजाऊ मिट्टी और लोगों को जीवन देती हैं। इसलिए वे केवल नदियाँ नहीं, लोक की माता हैं। - हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन-किन की प्रशंसा की है?
हिमालय की यात्रा में लेखक ने हिमालय की बेटियों — गंगा, यमुना, सतलुज जैसी नदियों — की प्रशंसा की है, साथ ही हिमालय के उस रूप की भी, जहाँ से ये नदियाँ निकलती हैं। उसकी प्रशंसा में नदियों के प्रति ममता और हिमालय के प्रति श्रद्धा दोनों झलकती हैं। - नदियों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कार्य हो रहे हैं? अपना सुझाव भी दो।
नदियों को साफ़ रखने, उनके किनारों पर पेड़ लगाने, गंदा पानी न डालने और पानी की बर्बादी रोकने के कार्य हो रहे हैं। मेरा सुझाव है कि हर व्यक्ति नदी को माँ की तरह समझे — उसमें कूड़ा न डाले, उसके किनारे की सफ़ाई में हाथ बँटाए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे।
विस्तार — NCERT की गतिविधियों से
नीचे के प्रश्न NCERT की ‘लेख से’, ‘लेख से आगे’, ‘अनुमान और कल्पना’ तथा ‘भाषा की बात’ गतिविधियों के प्रश्न-प्रकारों को अपने शब्दों में कवर करते हैं।
- लेख से आगे: नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं — उन कविताओं का चयन करके पाठ में दिए नदियों के वर्णन से उनकी तुलना करो।
तुलना इस तरह करो: कविता में नदी कैसी दिखती है (सुंदर, वेगवती, माँ जैसी) और इस लेख में कैसी (ममता भरी, गंभीर, बेटियों जैसी)। समानता यह है कि दोनों में नदी जीवनदायिनी है; अंतर यह है कि लेख में लेखक का अपना अनुभव और यात्रा की यादें भी जुड़ी हैं। - लेख से आगे: गोपालसिंह नेपाली की ‘हिमालय और हम’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ‘हिमालय’ तथा जयशंकर प्रसाद की ‘हिमालय के आँगन में’ पढ़ो और तुलना करो।
तीनों कविताओं में हिमालय ऊँचा, महान और प्रेरणा देनेवाला है। नेपाली की कविता में हिमालय और मनुष्य का रिश्ता है, दिनकर की कविता में हिमालय का तेज है, और प्रसाद की कविता में हिमालय का आँगन — यानी उसका सान्निध्य — है। इस लेख से तुलना करने पर पता चलता है कि कविता में हिमालय प्रतीक है, लेख में अनुभव। - लेख से आगे: यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं?
1947 के बाद नदियों पर बाँध बने, शहर बढ़े, प्रदूषण बढ़ा और कई जगह पानी कम हुआ। साथ ही नदियों की सफ़ाई और संरक्षण के प्रयास भी शुरू हुए। उत्तर में दोनों पक्ष लिखो — बदलाव भी, प्रयास भी। - अनुमान: लेखक ने ममता भरी आँखों से देखकर नदियों को ‘हिमालय की बेटियाँ’ कहा है। तुम उन्हें क्या कहना चाहोगे?
अपना उत्तर अपने शब्दों में लिखो। उदाहरण: ‘धरती की जीवन-रेखाएँ’ — क्योंकि वे जहाँ बहती हैं, वहाँ जीवन पनपता है। कारण भी लिखो, केवल नाम लिखना अधूरा होगा। - अनुमान: नदियों से होनेवाले लाभों के विषय में चर्चा करके बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखो।
निबंध के बिंदु: पीने का पानी, खेती की सिंचाई, बिजली, मछली, परिवहन, पर्यटन, और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्त्व। हर बिंदु पर एक-दो पंक्तियाँ लिखो, कुल बीस पंक्तियाँ हो जाएँगी। - भाषा की बात: निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से वे भी मानो जीवित हो उठती हैं — पाठ से ऐसे और उदाहरण ढूँढो।
पाठ के उदाहरण: ‘हिमालय के कंधे पर चढ़ा’ (हिमालय के कंधे) और ‘नदियों को लोकमाता कहा’। ऐसे प्रयोगों में निर्जीव चीज़ को मनुष्य जैसा बना दिया जाता है, जिससे वर्णन जीवंत लगता है। - भाषा की बात: विशेषण-विशेष्य का सही मिलान करो — संभ्रांत, चंचल, समतल, घना, मूसलाधार।
सही मिलान: संभ्रांत—महिला, चंचल—नदियाँ, समतल—आँगन, घना—जंगल, मूसलाधार—वर्षा।
- लेखक: नागार्जुन; विषय: हिमालय से निकलनेवाली नदियाँ।
- नदियाँ: दूर से गंभीर-शांत; पहाड़ में दुबली-पतली (गंगा, यमुना, सतलुज), मैदान में विशाल।
- लोकमाता: काका कालेलकर का नाम — नदियाँ सबका पालन करती हैं।
- लेख 1947 का है; तब से नदियों में बदलाव आए हैं — प्रदूषण भी, संरक्षण भी।
- भाषा: तुलनाएँ, नामों के अन्य रूप, ‘ही’ का नकारात्मक अर्थ, विशेषण-विशेष्य मिलान, द्वंद्व समास, उल्टा शब्द (नदी—दीन)।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

