Chapter 15: गीत
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 7 • Hindi • Book: Durva Bhag-2 (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
कवि फूलों, गीतों और विद्या की खेती करना चाहता है — ताकि इसी जन्म में, इसी जीवन में, हमको-तुमको मान मिले।
गीत — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Durva Bhag-2 (BSEB, कक्षा 7) | अध्याय 15 | लेखक/कवि: (पाठ में कवि का नाम नहीं दिया गया है) | माध्यम: Hindi
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Diagram (labels are printed on the image): गाते बच्चे — गीत के आनंद की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का चित्र नहीं।

वाद्य यंत्र। संगीत की सामान्य तस्वीर, पुस्तक का दृश्य नहीं।
लेखक/कवि परिचय
यह कविता एक गीत है — आशा और समानता का गीत। कवि चाहता है कि सबको मान (सम्मान) मिले, सबको ज्ञान मिले, और सबको जीवन मिले।
कविता में कवि बार-बार मान मिलने की बात करता है — ‘इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा।’
सार — अपने शब्दों में
कवि फूलों, गीतों और विद्या की खेती करना चाहता है। फूलों की खेती का अर्थ है सुंदरता और खुशी फैलाना, गीतों की खेती का अर्थ है संगीत और आनंद फैलाना, और विद्या की खेती का अर्थ है ज्ञान फैलाना।
कवि को इस बात पर पूरा भरोसा है कि एक दिन सबको मान मिलेगा — ‘इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा।’ इसमें ‘हमको-तुमको’ का अर्थ है सबको — किसी को भी मान से वंचित नहीं रखा जाएगा।
कविता में कुछ सुंदर पंक्तियाँ हैं — ‘दीप बुझे हैं जिन आँखों के, उन आँखों को ज्ञान मिलेगा’ — यानी जिनकी आँखों में ज्ञान का दीप बुझ गया है, उन्हें फिर से ज्ञान मिलेगा। ‘क्लेश जहाँ है, फूल खिलेगा’ — यानी जहाँ दुख है, वहाँ भी खुशी आएगी। ‘हमको तुमको प्रान मिलेगा’ — यानी सबको जीवन मिलेगा, सबको जीने का अधिकार मिलेगा।
कवि बार-बार मान मिलने की बात इसलिए करता है, क्योंकि मान मिलने से जीवन बदल जाता है — जिस व्यक्ति को सम्मान मिलता है, वह आत्मविश्वास से भर जाता है, वह अपने काम को और अच्छा करता है, और समाज में उसकी जगह बन जाती है।
कविता का संदेश यह है कि हर व्यक्ति को मान-सम्मान मिलना चाहिए — चाहे वह गरीब हो या अमीर, छोटा हो या बड़ा। समानता ही इस गीत का मूल भाव है।
मुख्य शब्द
- मान — आदर, सम्मान।
- क्लेश — पीड़ा।
- त्राण — भय के कारण से मुक्ति।
- प्रान — प्राण।
- नर्तन — नृत्य, नाच।
- ज्ञान — जानकारी, जानना।
भाषा-बिंदु
- मान-सम्मान: ‘मान’ शब्द में ‘अनु’ और ‘अप’ उपसर्ग लगाकर बने हैं — अनुमान, अपमान। इसी प्रकार ‘मान’ शब्द में कुछ दूसरे उपसर्ग लगाकर नये शब्द बनाओ — जैसे सम्मान (सम्+मान), अभिमान (अभि+मान), स्वाभिमान (स्व+अभिमान)।
- रिक्त स्थान पूरे करो: नमूना — ‘वह मोर सा नाचता है’। इसी तरह: लक्की…की तरह गरजता है; सलमा…की तरह दौड़ती है; मेघाश्री की आवाज़ … की तरह मीठी है; मनीष के कान … की तरह तेज़ है। (उत्तर: लक्की शेर की तरह गरजता है; सलमा हिरणी की तरह दौड़ती है; मेघाश्री की आवाज़ कोयल की तरह मीठी है; मनीष के कान खरगोश की तरह तेज़ हैं।)
अभ्यास (Practice — पहले खुद कोशिश करो)
- कवि फूलों, गीतों और विद्या की खेती क्यों करना चाहता है?
संकेत: सोचो — सुंदरता, आनंद, ज्ञान। - “इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा” — इसमें किसे मान मिलने की बात कही गई है?
संकेत: सोचो — हमको-तुमको = सबको। - कविता की कुछ पंक्तियाँ छाँटकर लिखो जिनसे पता लगता है कि कवि को इस बात पर पूरा भरोसा है कि एक दिन सबको मान मिलेगा।
संकेत: सोचो — मान मिलेगा, ज्ञान मिलेगा। - कविता में कवि बार-बार मान मिलने की बात करता है — मान मिलने से हमारे-तुम्हारे जीवन में क्या बदलाव आएगा?
संकेत: सोचो — आत्मविश्वास, जगह। - “दीप बुझे हैं जिन आँखों के, उन आँखों को ज्ञान मिलेगा” — इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
संकेत: सोचो — ज्ञान का दीप।
प्रश्न और उत्तर (Important Questions with Answers)
- कवि फूलों, गीतों और विद्या की खेती क्यों करना चाहता है?
क्योंकि फूलों की खेती से सुंदरता और खुशी फैलेगी, गीतों की खेती से संगीत और आनंद फैलेगा, और विद्या की खेती से ज्ञान फैलेगा। कवि चाहता है कि दुनिया में सुंदरता, आनंद और ज्ञान — तीनों फैलें। - “इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा” — इसमें किसे मान मिलने की बात कही गई है?
इसमें ‘हमको-तुमको’ — यानी सबको — मान मिलने की बात कही गई है। किसी को भी मान से वंचित नहीं रखा जाएगा — गरीब हो या अमीर, छोटा हो या बड़ा, सबको मान मिलेगा। - कविता की कुछ पंक्तियाँ छाँटकर लिखो जिनसे पता लगता है कि कवि को इस बात पर पूरा भरोसा है कि एक दिन सबको मान मिलेगा।
पंक्तियाँ: ‘इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा’; ‘दीप बुझे हैं जिन आँखों के, उन आँखों को ज्ञान मिलेगा’; ‘क्लेश जहाँ है, फूल खिलेगा’; ‘हमको तुमको प्रान मिलेगा’। इन पंक्तियों से कवि का पूरा भरोसा झलकता है। - कविता में कवि बार-बार मान मिलने की बात करता है — मान मिलने से हमारे-तुम्हारे जीवन में क्या बदलाव आएगा?
मान मिलने से जीवन में बड़ा बदलाव आएगा — जिस व्यक्ति को सम्मान मिलता है, वह आत्मविश्वास से भर जाता है, वह अपने काम को और अच्छा करता है, समाज में उसकी जगह बन जाती है, और वह दूसरों को भी सम्मान देना सीखता है। - “दीप बुझे हैं जिन आँखों के, उन आँखों को ज्ञान मिलेगा” — इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
अर्थ यह है कि जिन लोगों की आँखों में ज्ञान का दीप बुझ गया है — यानी जो अज्ञानी हैं, जिन्हें पढ़ने-लिखने का अवसर नहीं मिला — उन्हें फिर से ज्ञान मिलेगा। ज्ञान का दीप फिर से जलेगा, और वे भी पढ़-लिख सकेंगे।
विस्तार — NCERT की गतिविधियों से
नीचे के प्रश्न NCERT की ‘अभ्यास’ गतिविधियों के प्रश्न-प्रकारों (कविता से, समझाना, मान-सम्मान, रिक्त स्थान, शब्द-रचना) को अपने शब्दों में कवर करते हैं।
- समझाना: ‘क्लेश जहाँ है, फूल खिलेगा’ — इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
अर्थ यह है कि जहाँ दुख और पीड़ा है, वहाँ भी खुशी आएगी — जैसे सूखी ज़मीन में भी फूल खिल सकता है, वैसे ही दुखी जीवन में भी खुशी आ सकती है। - समझाना: ‘हमको तुमको प्रान मिलेगा’ — इस पंक्ति का क्या अर्थ हो सकता है?
अर्थ यह है कि सबको जीवन मिलेगा — सबको जीने का अधिकार मिलेगा, सबको जीवन की खुशियाँ मिलेंगी। - मान-सम्मान: तुम्हें अपने आस-पास यदि लगे कि किसी को सचमुच में आज भी मान-सम्मान नहीं मिला है और उसको तुम मान-सम्मान दिलाना चाहते हो तो उनके नामों की सूची बनाओ।
अपने आस-पास के ऐसे लोगों की सूची बनाओ जिन्हें मान-सम्मान नहीं मिलता — जैसे सफ़ाई कर्मचारी, मज़दूर, घरेलू कामगार। - मान-सम्मान: अपनी सूची में से किसी एक के बारे में बताओ कि उसे मान-सम्मान कैसे मिल सकता है।
किसी एक व्यक्ति को चुनो और लिखो — जैसे सफ़ाई कर्मचारी को मान-सम्मान देने के लिए उसे धन्यवाद कहो, उसके काम की सराहना करो, उसे बराबरी का दर्जा दो। - रिक्त स्थान पूरे करो: लक्की…की तरह गरजता है; सलमा…की तरह दौड़ती है; मेघाश्री की आवाज़ … की तरह मीठी है; मनीष के कान … की तरह तेज़ है।
लक्की शेर की तरह गरजता है; सलमा हिरणी की तरह दौड़ती है; मेघाश्री की आवाज़ कोयल की तरह मीठी है; मनीष के कान खरगोश की तरह तेज़ हैं। (नमूना: वह मोर सा नाचता है।) - शब्द-रचना: ‘मान’ शब्द में कुछ दूसरे उपसर्ग लगाकर नये शब्द बनाओ (अनुमान, अपमान की तरह)।
सम्मान (सम्+मान), अभिमान (अभि+मान), स्वाभिमान (स्व+अभिमान), विमान (वि+मान), परिमाण (परि+मान)।
- कविता: गीत — सबको मान मिलने का गीत।
- खेती: फूलों की (सुंदरता), गीतों की (आनंद), विद्या की (ज्ञान)।
- भरोसा: ‘इसी जन्म में, इस जीवन में, हमको तुमको मान मिलेगा।’
- पंक्तियाँ: दीप बुझे आँखों को ज्ञान; क्लेश जहाँ है, फूल खिलेगा; हमको तुमको प्रान मिलेगा।
- मान का बदलाव: आत्मविश्वास, काम में सुधार, समाज में जगह।
- संदेश: हर व्यक्ति को मान-सम्मान मिलना चाहिए — समानता।
- भाषा: उपसर्ग (अनुमान, अपमान, सम्मान); उपमा से रिक्त स्थान।
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