Chapter 4: विभिन्न प्रकार के पदार्थ
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Science • Book: Vigyan (BSEB, Class 6) (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
विभिन्न प्रकार के पदार्थ — EG's own notes, in simple Hindi
Book: Vigyan (BSEB, Class 6) (Purani pustak — 2025 se pehle wali) | Chapter 4 | Medium: Hindi

Diagram (labels are printed on the image): पदार्थ की तीन अवस्थाएँ — ठोस, द्रव और गैस। यह सामान्य चित्र है, पुस्तक का चित्र नहीं।

वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर समूहों में बाँटा जा सकता है। यह सामान्य चित्र है।
अध्याय के बारे में
आज सुबह स्कूल आने से पहले आपने बहुत कुछ किया होगा — शायद कोई पुस्तक पढ़ी हो, कुछ खाया हो अथवा कोई अन्य दैनिक गतिविधि की होगी। इन गतिविधियों में आपने किन-किन वस्तुओं का उपयोग किया? यह वस्तुएँ हमें कहाँ से मिलती हैं? क्या प्रकृति में यह इन्हीं रूपों में पाई जाती हैं? क्या हम इन्हें बनाते हैं? अगर हम इन्हें बनाते हैं तो किन वस्तुओं से? आपका क्रिकेट बैट लकड़ी का ही था — गेंद किस पदार्थ से बनी है?
यहीं से अध्याय शुरू होता है। पहली तालिका (तालिका 4.1) में प्रयोग में लाई गई वस्तुओं को अंकित कीजिए — प्रत्येक वस्तु किन-किन पदार्थों की बनी है, उनको भी तालिका में भरिए, और आसपास की दस अन्य वस्तुओं को भी तालिका में शामिल कीजिए। फिर तालिका 4.2 में उसी जानकारी से वस्तुओं को इस आधार पर समूहबद्ध कीजिए कि वे किस पदार्थ की बनी हैं — कुछ वस्तुएँ धातु से बनी हैं तो कुछ प्लास्टिक से। एक क्रम में आई वस्तुओं में कम से कम एक गुण समान है — जैसे क्रमांक 2 में आई सभी वस्तुएँ प्लास्टिक की बनी हैं। यही समूहन (वर्गीकरण) इस अध्याय की जान है।
पदार्थों के गुण — कठोरता
पदार्थों की सूची दिए गये गुणों के आधार पर बनाइए। इन्हें दबाने की कोशिश करें — कौन से पदार्थ आसानी से दब रहे हैं? अब इन पदार्थों को खरोंचें। तालिका बनाकर समूह बनाएँ कि कौन-सा पदार्थ आसानी से दबता है और कौन-सा खुरचता है? क्या इसमें कुछ ऐसे पदार्थ हैं जिसमें दोनों गुण विद्यमान हैं?
वे पदार्थ जो आसानी से दबाये अथवा खरोंचे जा सकते हैं, कोमल पदार्थ हैं। जिन पदार्थों को दबाना कठिन है वे कठोर कहलाते हैं। बताइए — रुई, स्पंज और लकड़ी कठोर हैं या कोमल? रुई और स्पंज आसानी से दब जाते हैं, इसलिए कोमल हैं; लकड़ी दबाना कठिन है, इसलिए कठोर है।
चमक
विभिन्न पदार्थों — गत्ता, लकड़ी, ताँबे का तार, ऐलुमिनियम की पन्नी और चॉक के छोटे-छोटे टुकड़े एकत्र कीजिए। क्या इनमें से कोई चमकीला दिखाई पड़ता है? चमकीले पदार्थों को एक समूह में पृथक् कीजिए। पदार्थों की सतह को रेगमाल से रगड़कर यह देख सकते हैं कि वे चमकने वाले हैं अथवा नहीं।
पदार्थ जिनमें इस प्रकार की चमक होती है वे प्रायः धातु होते हैं। लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम तथा सोना धातुओं के उदाहरण हैं। कुछ धातुएँ बहुधा अपनी चमक खो देती हैं — ऐसा उन पर वायु तथा नमी की अभिक्रियाओं के कारण होता है। इसलिए हमें केवल ताजे कटे या रगड़कर साफ़ की सतहों पर ही चमक दिखाई देती है।
घुलनशीलता
काँच के चार गिलास लें तथा प्रत्येक को तीन चौथाई जल से भरें। इन गिलासों में क्रमशः एक-एक चम्मच शक्कर, रेत, नमक व चॉक चूर्ण डालकर चम्मच से हिलाएँ। अब इन्हें स्थिर छोड़ दें। पाँच मिनट बाद इन गिलासों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें।
आप यह पाएँगे कि कुछ पदार्थ जल में पूर्णतः विलीन हो गए, अर्थात् घुल गए हैं। हम यह कहते हैं कि ये पदार्थ जल में विलेय (घुलनशील) हैं। जबकि कुछ अन्य पदार्थ जल में नहीं घुलते हैं — ये पदार्थ जल में अविलेय (अघुलनशील) हैं। जल में कई पदार्थों को घोलने की क्षमता होती है। जल को इस स्थिति में घोलक या विलायक कहेंगे।
क्या जल के अलावा अन्य कोई पदार्थ घोलक हो सकता है? हाथ में तैलीय पेन्ट या अलकतरा लग जाता है तो इसे केरोसीन (मिट्टी का) तेल से साफ़ करते हैं — केरोसीन तेल हाथ में लगे अलकतरा को घोल देता है। यानी केरोसीन भी एक घोलक है। बहुत-से पदार्थ जल में घुलनशील हैं इसीलिए हमारे शरीर की प्रक्रियाओं में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
कितना घुला — संतृप्त घोल
कुछ पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो ठंडे पानी में कम घुलते हैं पर गर्म करने पर ज्यादा घुलते हैं। आधी कटोरी पानी लीजिए। उसमें आधा चम्मच चीनी डालिए और चम्मच से मिलाइए। घुलने पर आधी चम्मच चीनी फिर डालिए और मिलाइए। क्या चीनी घुली? ऐसा तब तक करें जब तक चीनी पानी में घुलती रहे। नहीं घुलने पर पानी को गर्म कीजिए तथा अवलोकन कीजिए — आप देखेंगे कि पेंदी में पड़ी चीनी घुल जाती है।
पानी की निश्चित मात्रा में किसी पदार्थ की अधिकतम कितनी मात्रा घुलती है — इसे पदार्थ की घुलनशीलता (विलेयता) कहते हैं और इन घोलों को संतृप्त घोल कहते हैं। गर्म करने पर किसी घोल (विलयन) में घुल्य पदार्थ की घुलने की क्षमता बढ़ जाती है। कुछ गैसें भी जल में घुलनशील हैं, परन्तु गर्म करने पर गैस की घुलनशीलता घट जाती है। किसी संतृप्त घोल में अधिक पदार्थ घोलना हो तो घोल को गरम करके देखिए — नमक के संतृप्त घोल को गरम कीजिए और उसमें आधा चम्मच नमक और डालिए — क्या यह घुला?
द्रवों की जल में घुलनशीलता
सिरका, नींबू का रस, सरसों का तेल अथवा नारियल का तेल, मिट्टी का तेल अथवा अन्य किसी द्रव के नमूने एकत्र कीजिए। काँच का एक गिलास लीजिए। इसके आधे भाग को जल से भरिए। अब इसमें कुछ चम्मच भरकर कोई द्रव मिलाइए और भली-भाँति हिलाएँ। इसे पाँच मिनट के लिए छोड़ दीजिए। अवलोकन कीजिए कि क्या यह द्रव जल के साथ मिश्रित हो जाता है।
हम यह देखते हैं कि कुछ द्रव जल में पूर्णतः मिश्रित हो जाते हैं। कुछ अन्य द्रव जल में मिश्रित नहीं होते और कुछ समय तक ऐसे ही छोड़ देने पर अपनी पृथक् परत बना लेते हैं। किताब की सारणी 4.6 में सिरका का खाना भरा हुआ है — सिरका भली-भाँति मिश्रित होता है। शेष द्रवों के प्रयोग-परिणाम नीचे सारणी में दिए गए हैं।
कुछ गैसें जल में घुलनशील हैं जबकि अन्य नहीं हैं। सामान्यतः जल में कुछ गैसें थोड़ी मात्रा में घुलनशील हैं। गर्म जल में ऑक्सीजन की घुलनशीलता घटती है। जल में विलीन ऑक्सीजन गैस जल में रहने वाले जंतुओं एवं पादपों के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
पारदर्शिता
काँच के टुकड़े, प्लास्टिक की थैली, गत्ता, कागज इत्यादि सामग्री एकत्र कीजिए। एक-एक करके इनसे होकर जलते बल्ब को देखने का प्रयास कीजिए। क्या आपको कुछ दिख रहा है? इस आधार पर पदार्थों के समूह बनाइए।
वे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुओं को देखा जा सकता है, उन्हें पारदर्शी कहते हैं। कुछ पदार्थों में से वस्तुओं को नहीं देखा जा सकता — यह पदार्थ अपारदर्शी कहलाते हैं। कुछ वस्तुएँ पदार्थ में से देखने पर अस्पष्ट या धुँधली दिखाई देती हैं — ऐसे पदार्थ पारभासी पदार्थ कहलाते हैं।
उत्प्लावकता — तैरना और डूबना
कुछ पदार्थ जो जल में मिश्रित नहीं हो पाते वे जल की सतह पर आकर तैरने लगे थे। अन्य डूबकर गिलास की तली में पहुँच जाते हैं। किसी तालाब की सतह पर गिरी सूखी पत्तियाँ, वह कंकड़ जो आप इसी तालाब में फेंक देते हैं, शहद की वे बूँदें जिन्हें आप गिलास के जल में गिराते हैं — इन सबका क्या होता है?
पानी पर तैरने वाली वस्तुएँ हल्की तथा पानी में डूब जाने वाली वस्तुएँ भारी होती हैं। लोहे की बनी वस्तुएँ पानी में डूब जाती हैं। एक छोटा पिन भी डूब जाता है, परन्तु लोहे का बना जहाज अपनी विशिष्ट आकृति के कारण नहीं डूबता है — इस पर आप शिक्षक से चर्चा कीजिए।
समूहन क्यों?
हमने यह सीख लिया है कि पदार्थों के अपने भिन्न आकार एवं आकृति तथा गुण होते हैं तथा इनके जल अथवा अन्य द्रवों में मिश्रित होने के ढंग भी भिन्न-भिन्न होते हैं। वे जल में तैर अथवा डूब सकते हैं अथवा पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी हो सकते हैं। पदार्थों का समूहन उनके गुणों में समानताओं अथवा विभिन्नताओं के आधार पर किया जा सकता है।
हमें पदार्थों को समूहों में रखने की आवश्यकता क्यों पड़ती है? दैनिक जीवन में हम प्रायः पदार्थों का वर्गीकरण या समूहन अपनी सुविधा के लिए करते हैं। घर में हम अपनी वस्तुओं का भंडारण सामान्यतः इस प्रकार करते हैं कि एक जैसी वस्तुएँ एक साथ रखी हों — इस व्यवस्था द्वारा हम आसानी से उनका पता लगा सकते हैं। इसी प्रकार कोई पंसारी प्रायः सभी प्रकार के बिस्कुटों को अपनी दुकान के एक कोने में रखता है, सभी साबुनों एवं प्रसाधन सामग्री को अन्य स्थान पर, जबकि अनाज तथा दालों का भंडारण किसी अन्य स्थान पर करता है। पदार्थों को समूहों में बाँटकर उनके गुणों का अध्ययन तथा इन गुणों में किसी प्रतिरूप (पैटर्न) का अवलोकन करना सुविधाजनक बन जाता है। इसके विषय में और अधिक अध्ययन हम उच्च कक्षाओं में करेंगे।
तुम्हें क्या सीखना चाहिए
- वस्तु और पदार्थ का अंतर — एक वस्तु एक या अधिक पदार्थों की बनी हो सकती है; समूहन पदार्थ के आधार पर होता है।
- पाँच गुणों की परिभाषाएँ: कठोरता (कोमल/कठोर), चमक (धातुएँ), घुलनशीलता (विलेय/अविलेय), पारदर्शिता (पारदर्शी/अपारदर्शी/पारभासी), उत्प्लावकता (तैरना/डूबना)।
- घोलक/विलायक, विलेयता, संतृप्त घोल — और गर्म करने पर ठोस की विलेयता बढ़ती है, गैस की घटती है।
- क्रियाकलाप 1-8 के प्रयोग: तालिका 4.1 से 4.6 तक क्या-क्या भरा जाता है।
- साथ ही किताब के अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर — रिक्त स्थान, मिलान, सही विकल्प और परिभाषाएँ।
मुख्य शब्द
- पदार्थ (Substance): वह चीज़ जिससे कोई वस्तु बनी होती है — जैसे लकड़ी, लोहा, प्लास्टिक, काँच।
- कठोर (Hard): वह पदार्थ जिसे दबाना कठिन हो — जैसे लकड़ी, लोहा।
- कोमल: वह पदार्थ जो आसानी से दबाया अथवा खरोंचा जा सके — जैसे रुई, स्पंज, साबुन, रबड़।
- खुरदरा (Rough): वह पदार्थ जिसकी सतह चिकनी न हो, छूने पर खुरदरी लगे।
- चमक (Lustre/Shine): पदार्थ की सतह की चमक — चमक वाले पदार्थ प्रायः धातु होते हैं।
- धातु (Metal): चमक वाला पदार्थ — जैसे लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, सोना।
- घुलनशील — विलेय (Soluble): वह पदार्थ जो जल (या किसी द्रव) में पूर्णतः घुल जाए — जैसे शक्कर, नमक।
- अघुलनशील — अविलेय (Insoluble): वह पदार्थ जो जल में न घुले — जैसे रेत, चॉक चूर्ण।
- घोलक / विलायक: वह द्रव जिसमें कोई पदार्थ घुलता है — जैसे जल; केरोसीन भी अलकतरा का घोलक है।
- विलेयता (घुलनशीलता): पानी की निश्चित मात्रा में किसी पदार्थ की अधिकतम घुलने वाली मात्रा।
- संतृप्त घोल: वह घोल जिसमें घुल्य पदार्थ की और मात्रा घुलने की क्षमता न हो — यानी अधिकतम मात्रा घुल चुकी हो।
- पारदर्शी (Transparent): वह पदार्थ जिससे होकर वस्तुओं को देखा जा सके — जैसे काँच।
- अपारदर्शी (Opaque): वह पदार्थ जिससे होकर वस्तुओं को नहीं देखा जा सके — जैसे गत्ता, लकड़ी।
- पारभासी (Translucent): वह पदार्थ जिससे होकर वस्तुएँ अस्पष्ट या धुँधली दिखाई दें।
- उत्प्लावकता: जल में तैरने या डूबने का गुण — तैरने वाली वस्तुएँ हल्की, डूबने वाली भारी होती हैं।
याद रखें
- समूहन पदार्थ के आधार पर होता है — एक क्रम की वस्तुओं में कम से कम एक गुण समान होता है।
- कोमल = आसानी से दबे या खरोंचे; कठोर = दबाना कठिन। रुई, स्पंज कोमल; लकड़ी, लोहा कठोर।
- चमक वाले पदार्थ प्रायः धातु होते हैं — लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, सोना; वायु व नमी से धातुएँ चमक खो देती हैं, ताज़ी कटी/रगड़ी सतह ही चमकती है।
- विलेय: शक्कर, नमक (जल में घुलते हैं); अविलेय: रेत, चॉक चूर्ण (जल में नहीं घुलते)।
- घोलक जल ही नहीं होता — केरोसीन अलकतरा/तैलीय पेन्ट को घोलता है, इसलिए वह भी घोलक है।
- संतृप्त घोल = अधिकतम मात्रा घुल चुकी; गर्म करने पर ठोस की विलेयता बढ़ती है, गैस की घटती है।
- सिरका जल में भली-भाँति मिश्रित होता है; तेल जल में पृथक् परत बना लेते हैं।
- पारदर्शी = आर-पार दिखे; अपारदर्शी = कुछ न दिखे; पारभासी = धुँधला दिखे।
- तैरने वाली हल्की, डूबने वाली भारी; लोहे का पिन डूबता है पर लोहे का जहाज अपनी आकृति के कारण तैरता है।
- समूहन सुविधा के लिए होता है — और गुणों में प्रतिरूप (पैटर्न) देखने के लिए भी।
परीक्षा टिप
सबसे आम गलती है पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी को गड़बड़ाना। याद रखिए — पारदर्शी = साफ़ दिखे (काँच), पारभासी = धुँधला दिखे (पार + भासी, यानी 'पार तो हो पर भास अधूरा'), अपारदर्शी = कुछ न दिखे (गत्ता)। दूसरी आम गलती: 'संतृप्त घोल' को 'गाढ़ा घोल' समझना — गाढ़ा होना मात्रा का सवाल नहीं है; संतृप्त का अर्थ है और घुलने की क्षमता समाप्त।
सारणी — पदार्थों के गुण और उदाहरण
| गुण | वर्ग | उदाहरण (किताब से) |
|---|---|---|
| कठोरता | कोमल / कठोर | कोमल: रुई, स्पंज, साबुन, रबड़; कठोर: लकड़ी, लोहा |
| चमक | चमक वाले / बिना चमक | चमक वाले (प्रायः धातु): लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, सोना; बिना चमक: गत्ता, लकड़ी, चॉक |
| घुलनशीलता (ठोस) | विलेय / अविलेय | विलेय: शक्कर, नमक, चीनी; अविलेय: रेत, चॉक चूर्ण |
| द्रवों की जल में घुलनशीलता | मिश्रित / पृथक् परत | मिश्रित: सिरका, नींबू का रस; मिश्रित नहीं: सरसों का तेल, नारियल का तेल, केरोसीन तेल |
| पारदर्शिता | पारदर्शी / पारभासी / अपारदर्शी | पारदर्शी: काँच; अपारदर्शी: गत्ता, लकड़ी; पारभासी: धुँधला दिखाने वाले पदार्थ |
| उत्प्लावकता | तैरने वाली / डूबने वाली | तैरने वाली (हल्की): सूखी पत्तियाँ, लकड़ी, कॉर्क; डूबने वाली (भारी): कंकड़, लोहे का पिन, चाबी, सिक्का |
अभ्यास — खुद करके देखो
- अपने घर की दस वस्तुएँ चुनिए और किताब की तालिका 4.1 की तरह लिखिए — वस्तु और वह किन पदार्थों से बनी है। संकेत: एक वस्तु कई पदार्थों की हो सकती है — जैसे कुर्सी लकड़ी + लोहे की कीलें + प्लास्टिक की सीट।
- काँच के चार गिलासों में तीन-चौथाई जल भरकर एक-एक चम्मच शक्कर, रेत, नमक, चॉक चूर्ण डालिए, हिलाइए और पाँच मिनट बाद देखिए — कौन घुला, कौन नहीं? संकेत: शक्कर और नमक विलेय हैं; रेत और चॉक चूर्ण अविलेय — वे तली में बैठेंगे।
- आधी कटोरी पानी में आधी-आधी चम्मच चीनी डालते जाइए जब तक वह घुलती रहे — फिर पानी गरम करके देखिए कि पेंदी की चीनी घुलती है या नहीं। संकेत: यही संतृप्त घोल है; गरम करने पर और चीनी घुल जाती है।
- काँच के टुकड़े, प्लास्टिक की थैली, गत्ता और कागज के पीछे से जलता बल्ब देखिए — किसमें से क्या दिखता है? संकेत: काँच पारदर्शी, गत्ता अपारदर्शी; धुँधला दिखे तो पारभासी।
- एक बर्तन में आधा पानी भरकर बारी-बारी पत्ता, कंकड़, पिन, कॉर्क और सिक्का डालिए — तैरने वाली और डूबने वाली के दो समूह बनाइए। संकेत: हल्की चीज़ें तैरती हैं, भारी डूबती हैं; लोहे का पिन डूबेगा, पर लोहे का जहाज आकृति के कारण तैरता है।
प्रश्नोत्तर
- प्रश्न: वस्तु और पदार्थ में क्या अंतर है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: वस्तु वह चीज़ है जिसका हम उपयोग करते हैं — जैसे गिलास, पुस्तक, कुर्सी। पदार्थ वह सामग्री है जिससे वस्तु बनी होती है — जैसे काँच, कागज, लकड़ी, धातु, प्लास्टिक। एक वस्तु एक से अधिक पदार्थों की भी बनी हो सकती है, और समूहन इसी आधार पर किया जाता है कि वस्तु किस पदार्थ की बनी है। - प्रश्न: कोमल और कठोर पदार्थों में क्या अंतर है? दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जो पदार्थ आसानी से दबाये अथवा खरोंचे जा सकते हैं, वे कोमल पदार्थ हैं — जैसे रुई, स्पंज, साबुन, रबड़। जिन पदार्थों को दबाना कठिन है, वे कठोर कहलाते हैं — जैसे लकड़ी, लोहा। - प्रश्न: चमक वाले पदार्थ कौन-से होते हैं? उनकी चमक क्यों कम हो जाती है?
उत्तर: चमक वाले पदार्थ प्रायः धातु होते हैं — लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, सोना। कुछ धातुएँ बहुधा अपनी चमक खो देती हैं क्योंकि उन पर वायु तथा नमी की अभिक्रियाएँ होती हैं; इसलिए चमक केवल ताजे कटे या रगड़कर साफ़ की सतहों पर ही दिखाई देती है। - प्रश्न: विलेय और अविलेय पदार्थ क्या हैं? घोलक किसे कहते हैं?
उत्तर: जो पदार्थ जल में पूर्णतः घुल जाएँ, वे विलेय (घुलनशील) हैं — जैसे शक्कर, नमक। जो जल में न घुलें, वे अविलेय (अघुलनशील) हैं — जैसे रेत, चॉक चूर्ण। जिस द्रव में पदार्थ घुलता है, उसे घोलक या विलायक कहते हैं — जल सबसे सामान्य घोलक है, और केरोसीन अलकतरा का घोलक है। - प्रश्न: संतृप्त घोल किसे कहते हैं? गर्म करने पर उसमें क्या बदलाव आता है?
उत्तर: पानी की निश्चित मात्रा में किसी पदार्थ की अधिकतम कितनी मात्रा घुलती है — इसे पदार्थ की विलेयता कहते हैं, और जब वह अधिकतम मात्रा घुल चुकी हो तो वह घोल संतृप्त घोल कहलाता है (उसमें घुल्य पदार्थ की और मात्रा घुलने की क्षमता नहीं होती)। गर्म करने पर ठोस की घुलने की क्षमता बढ़ जाती है — पेंदी में पड़ी चीनी घुल जाती है; परन्तु गैसों की घुलनशीलता गर्म करने पर घट जाती है।
किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर
- प्रश्न (अभ्यास 1): रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — (1) जल में चीनी ................ है। (2) ................ पदार्थ से होकर प्रकाश अंशतः पार करता है। (3) कुछ गैसें जल में ................ है। (4) कुछ पदार्थ ठंडे पानी में ................ और गरम पानी में ................ घुलते हैं।
उत्तर: (1) जल में चीनी घुलनशील (विलेय) है। (2) पारभासी पदार्थ से होकर प्रकाश अंशतः पार करता है। (3) कुछ गैसें जल में घुलनशील (थोड़ी मात्रा में) हैं — जैसे ऑक्सीजन। (4) कुछ पदार्थ ठंडे पानी में कम और गरम पानी में ज्यादा (अधिक) घुलते हैं। - प्रश्न (अभ्यास 2): स्तंभ 'अ' का स्तंभ 'ब' से सही मिलान कीजिए — (i) विलेय (ii) अविलेय (iii) घोलक/विलायक (iv) चमक वाले पदार्थ (v) जल में विलीन गैस | (क) नमक, चीनी (ख) प्रायः धातु होते हैं (ग) ऑक्सीजन (घ) लोहा, रेत आदि (ङ) जल।
उत्तर: (i) विलेय — (क) नमक, चीनी। (ii) अविलेय — (घ) लोहा, रेत आदि (लोहा जल में नहीं घुलता, रेत भी नहीं)। (iii) घोलक/विलायक — (ङ) जल। (iv) चमक वाले पदार्थ — (ख) प्रायः धातु होते हैं। (v) जल में विलीन गैस — (ग) ऑक्सीजन। - प्रश्न (अभ्यास 3): निम्न वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — (i) वे पदार्थ जो आसानी से दबाये या खरोंचे जा सकते हैं, ................ पदार्थ हैं। (कोमल/कठोर) (ii) हमारे हाथ में तैलीय पेन्ट या अलकतरा लग जाता है, तो इसे हम ................ से साफ़ करते हैं। (जल/केरोसीन तेल) (iii) वे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुओं को देखा जा सकता है, ................ कहलाते हैं। (पारदर्शी/अपारदर्शी) (iv) वे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुओं को नहीं देखा जा सकता है, ................ कहलाते हैं। (अपारदर्शी/पारदर्शी) (v) पानी पर तैरने वाली वस्तुएँ ................ तथा पानी में डूब जाने वाली वस्तुएँ ................ होती हैं। (भारी/हल्की)
उत्तर: (i) कोमल। (ii) केरोसीन तेल से — जल अलकतरा को नहीं घोलता, केरोसीन घोलता है। (iii) पारदर्शी। (iv) अपारदर्शी। (v) तैरने वाली हल्की तथा डूबने वाली भारी होती हैं। - प्रश्न (अभ्यास 4): सही विकल्प चुनिए — (i) निम्न में कोमल पदार्थ हैं — (क) साबुन (ख) रबड़ (ग) लकड़ी (घ) लोहा। (ii) निम्न पदार्थ में चमक होती है — (क) लोहा (ख) ताँबा (ग) सोना (घ) लकड़ी। (iii) निम्न में कौन-कौन से पदार्थ जल के अलावा भी घोलक हो सकता है — (क) तेल (ख) तारपीन का तेल (ग) केरोसीन तेल (घ) सरसों का तेल। (iv) वह घोल जिसमें घुल्य पदार्थ की और मात्रा घुलने की क्षमता नहीं होती, कहलाता है — (क) संतृप्त घोल (ख) असंतृप्त घोल (ग) हल्का घोल (घ) गाढ़ा घोल। (v) वैसे पदार्थ जिनसे होकर वस्तुएँ या चीजें अस्पष्ट रूप से या धुँधली दिखाई देती हैं, कहलाते हैं — (क) पारदर्शी (ख) अपारदर्शी (ग) पारभासी (घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर: (i) किताब की परिभाषा से (क) साबुन और (ख) रबड़ दोनों कोमल हैं — दोनों आसानी से दबाये/खरोंचे जा सकते हैं; लकड़ी और लोहा कठोर हैं। (ii) (क) लोहा, (ख) ताँबा और (ग) सोना — तीनों में चमक होती है, क्योंकि चमक वाले पदार्थ प्रायः धातु होते हैं और तीनों ही धातुएँ हैं; (घ) लकड़ी में चमक नहीं होती। (iii) (ग) केरोसीन तेल — किताब में सीधे दिया गया है कि केरोसीन हाथ में लगे अलकतरा को साफ़ (घोल) देता है; तारपीन का तेल भी पेंट घोलने का प्रसिद्ध घोलक है, पर किताब में उसका उदाहरण नहीं दिया गया है। (iv) (क) संतृप्त घोल। (v) (ग) पारभासी। - प्रश्न (अभ्यास 5): प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर: प्लास्टिक की थैली (किताब के क्रियाकलाप-7 का उदाहरण), प्लास्टिक की बाल्टी, बोतल, मग, खिलौने और कुर्सियाँ — ये सभी प्लास्टिक से बनती हैं और तालिका 4.2 के 'प्लास्टिक से बनी' समूह में आएँगी। - प्रश्न (अभ्यास 6): जल में तैरने वाली तथा डूबने वाली वस्तुओं का समूह बनायें।
उत्तर: तैरने वाली (हल्की): सूखी पत्तियाँ, लकड़ी का टुकड़ा, कॉर्क, प्लास्टिक की थैली/बोतल, पत्ता। डूबने वाली (भारी): कंकड़, लोहे का पिन, चाबी, सिक्का, लोहे की बनी वस्तुएँ। किताब का विशेष उदाहरण याद रखिए — एक छोटा पिन भी डूब जाता है, परन्तु लोहे का बना जहाज अपनी विशिष्ट आकृति के कारण नहीं डूबता। - प्रश्न (अभ्यास 7): पारभासी, पारदर्शी एवं अपारदर्शी वस्तु में अंतर बतायें।
उत्तर: पारदर्शी — जिससे होकर वस्तुओं को साफ़ देखा जा सके (काँच)। अपारदर्शी — जिससे होकर वस्तुओं को बिल्कुल नहीं देखा जा सके (गत्ता, लकड़ी)। पारभासी — जिससे होकर वस्तुएँ अस्पष्ट या धुँधली दिखाई दें (बीच की स्थिति — प्रकाश अंशतः पार करता है)। - प्रश्न (अभ्यास 8): विलेय एवं अविलेय से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: विलेय (घुलनशील) — जो पदार्थ जल में पूर्णतः विलीन हो जाएँ, अर्थात् घुल जाएँ (शक्कर, नमक, चीनी)। अविलेय (अघुलनशील) — जो पदार्थ जल में न घुलें (रेत, चॉक चूर्ण, लोहा)। - प्रश्न (अभ्यास 9): संतृप्त घोल किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब पानी की निश्चित मात्रा में किसी पदार्थ की अधिकतम मात्रा घुल चुकी हो और उसमें घुल्य पदार्थ की और मात्रा घुलने की क्षमता न हो, तो वह घोल संतृप्त घोल कहलाता है। उदाहरण — आधी कटोरी पानी में आधी-आधी चम्मच चीनी डालते जाना जब तक वह घुलती रहे; जिस बिंदु पर चीनी पेंदी में पड़ी रह जाए, वह चीनी का संतृप्त घोल है — और पानी गरम करने पर वह पेंदी की चीनी भी घुल जाती है। - प्रश्न (परियोजना): किसी कमरे में, घर में तथा अपने आस-पास में रखी वस्तुओं को कुछ मिनट तक प्रेक्षण के पश्चात् विशिष्ट गुण के साथ नाम लिखिए तथा आपस में तुलना करके वर्गीकरण कीजिए तथा इसे चार्ट में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: कमरे की वस्तुओं को देखिए और प्रत्येक के साथ उसका विशिष्ट गुण लिखिए — जैसे काँच का गिलास (पारदर्शी, कठोर), लकड़ी की कुर्सी (कठोर, अपारदर्शी), रबड़ (कोमल), स्टील की कटोरी (चमक वाली धातु), प्लास्टिक की थैली (हल्की, तैरने वाली)। फिर इन्हें गुणों के आधार पर समूहों में बाँटकर चार्ट बनाइए — यही इस अध्याय का असली अभ्यास है।
नोट: प्रश्न 4(i) और 4(ii) में किताब के एक से अधिक विकल्प सही बैठते हैं — (i) में साबुन और रबड़ दोनों कोमल हैं, (ii) में लोहा, ताँबा, सोना तीनों धातुएँ चमक वाली हैं। इसलिए वहाँ अकेला विकल्प चुनने के बजाय सभी सही विकल्प बताए गए हैं।
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पहले 'अध्याय के बारे में' और सारणी को ध्यान से पढ़िए — पाँच गुणों (कठोरता, चमक, घुलनशीलता, पारदर्शिता, उत्प्लावकता) की परिभाषाएँ और उनके उदाहरण समझ लीजिए। फिर 'याद रखें' की सूची को अपनी कॉपी में उतारिए और अभ्यास के पाँच प्रश्न खुद करके देखिए। अंत में किताब के अभ्यास के उत्तरों से अपनी तैयारी जाँचिए — विशेषकर पारदर्शी/पारभासी/अपारदर्शी के अंतर, संतृप्त घोल की परिभाषा और प्रश्न 4 के बहु-विकल्प वाले उत्तरों पर। परीक्षा में 'विलेय/अविलेय' और 'घोलक' की परिभाषाएँ अवश्य पूछी जाती हैं।

