Chapter 9: यः जानाति सः पण्डितः
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Sanskrit • Book: Deepakam (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
यः जानाति सः पण्डितः — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Deepakam (Nayi pustak — 2025 ke baad wali, Bihar Board, कक्षा 6) | अध्याय 9 | माध्यम: Sanskrit (सरल Hindi व्याख्या सहित)

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पढ़ाते आचार्य की सामान्य तस्वीर। पाठ प्रहेलिकाओं और षष्ठी-विभक्ति के बारे में है; पुस्तक का दृश्य नहीं।

पुस्तकालय में पढ़ते बच्चे। ज्ञान के पाठ की सामान्य तस्वीर।
पाठ के बारे में
इस पाठ का नाम है — ‘यः जानाति सः पण्डितः’ अर्थात् ‘जो जानता है, वही पंडित है’। पाठ का पहला भाग प्रहेलिकाओं (पहेलियों) का है — आबालवृद्ध (बच्चों से बूढ़ों तक) सबको मानसिक उल्लास देने वाली, बुद्धि, तार्किक शक्ति और चिंतन-क्षमता का विकास करने वाली पहेलियाँ। पूर्व कवियों की बुद्धिमत्ता और कल्पना भी इनमें झलकती है। पाठ में पाँच प्रहेलिकाएँ दी गई हैं, उनके उत्तर भी पुस्तक में दिए गए हैं।
पहली प्रहेलिका: भोजन के अंत में पीने योग्य क्या है? जयन्त किसका पुत्र है? विष्णु का पद कैसा है? — उत्तर: तक्रम् (छाछ), शक्रस्य (इंद्र का), दुर्लभम् (दुर्लभ)। दूसरी प्रहेलिका: जिसका न आदि है, न अंत है, मध्य में ‘य’ है — और जो तुम्हारे और मेरे पास भी है — वह क्या है? — उत्तर: नयनम् (नेत्र)। तीसरी: वृक्ष के आगे फल है, फल के आगे वृक्ष है, जो अकारादि (अ से शुरू) और सकारांत (स पर समाप्त) है — वह क्या है? — उत्तर: अनानसः (अनन्नास)।
चौथी प्रहेलिका: काशी में मनुष्य क्या इच्छा करता है? युद्ध में राजाओं का हितैषी कौन है? सभी देवों में वंदनीय कौन है? — तीनों प्रश्नों का एक ही उत्तर है: मृत्युम्/जयः (पुस्तक-उत्तर के अनुसार)। पाँचवीं: कुम्हार के घर आधा और हस्तिनापुर में आधा — मिलकर लंका में पूर्ण — वह क्या है? — उत्तर: कुम्भः/कर्णः — कुम्हार के घर ‘कुम्भ’, हस्तिनापुर में ‘कर्ण’ — मिलकर कुम्भकर्ण।
पाठ का दूसरा भाग व्याकरण का है — षष्ठी-विभक्ति (संबंध कारक — ‘का/की/के’ के लिए)। षष्ठी के रूप: छात्रस्य/छात्रयोः/छात्राणाम्; सीतायाः; नद्याः/नद्योः/नदीनाम्; पुस्तकस्य; अहम् → मम/आवयोः/अस्माकम्; त्वम् → तव/युवयोः/युष्माकम्; तत्/एतत् तीनों लिंगों में। अवधेयांश में गुरु-शिष्य (वसिष्ठ-श्रीराम, परशुराम-कर्ण, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चंद्रगुप्त, शंकराचार्य-पद्मपाद, रामकृष्ण-विवेकानंद), ग्रंथ-रचयिता (रामायण-वाल्मीकि, महाभारत-व्यास, कर्णभार-भास, रघुवंश-कालिदास, पञ्चतंत्र-विष्णुशर्मा, हितोपदेश-नारायणपण्डित) और पति-पत्नी (वसिष्ठ-अरुंधती, श्रीराम-सीता, लक्ष्मण-ऊर्मिला, पांडुराज-कुंती, कृष्ण-रुक्मिणी, अर्जुन-सुभद्रा) के जोड़े भी दिए गए हैं।
पाँच प्रहेलिकाएँ और उनके उत्तर
| प्रहेलिका | उत्तर |
|---|---|
| भोजनान्ते पेयं? जयन्तः कस्य सुतः? विष्णुपदं? | तक्रम् / शक्रस्य / दुर्लभम् |
| न आदि, न अंत, मध्य में ‘य’ — तव/मम अपि अस्ति | नयनम् |
| वृक्ष के आगे फल, फल के आगे वृक्ष, अकारादि सकारांत | अनानसः |
| काश्यां नरः किम् इच्छति? रणे भूपानां कः हितः? सर्वदेवानां कः वन्द्यः? | मृत्युम् / जयः (पुस्तक-उत्तर) |
| कुलालस्य गृहे अर्धं + हस्तिनापुरे अर्धं = लंकायां पूर्ण | कुम्भः / कर्णः (कुम्भकर्ण) |
क्या सीखना है
पाँचों प्रहेलिकाओं के उत्तर, षष्ठी-विभक्ति के रूप और गुरु-शिष्य/ग्रंथ-रचयिता के जोड़े याद करो। यह पाठ किसी सामान्य ‘ज्ञान’ निबंध का नहीं — पहेलियों और षष्ठी का है।
मुख्य शब्द
- प्रहेलिका — पहेली। पेयम् — पीने योग्य। सुतः — पुत्र। तक्रम् — छाछ। कुलालस्य — कुम्हार का। रणे — युद्ध में। षष्ठी-विभक्ति — संबंध कारक (का/की/के)।
याद रखें
- यः जानाति सः पण्डितः — जो जानता है, वही पंडित है।
- भोजनान्ते पेयं = तक्रम्; जयन्तः शक्रस्य सुतः; विष्णुपदं दुर्लभम्।
- नयनम् — न आदि, न अंत, मध्य में ‘य’।
- अनानसः — वृक्ष के आगे फल, फल के आगे वृक्ष।
- कुम्भः + कर्णः = कुम्भकर्ण।
- षष्ठी: छात्रस्य/छात्रयोः/छात्राणाम्; मम/आवयोः/अस्माकम्; तव/युवयोः/युष्माकम्।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: प्रहेलिकाओं के उत्तर अनुमान से लिखना। पुस्तक के उत्तर ही लिखो — तक्रम्, नयनम्, अनानसः, कुम्भकर्ण। दूसरी गलती: षष्ठी और द्वितीया को मिलाना — षष्ठी संबंध (का/की/के) के लिए है।
तालिका: षष्ठी-विभक्ति के रूप
| शब्द | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| छात्र (पुंलिङ्ग) | छात्रस्य | छात्रयोः | छात्राणाम् |
| सीता (स्त्रीलिङ्ग) | सीतायाः | सीतयोः | सीतानाम् |
| नदी (स्त्रीलिङ्ग) | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
| पुस्तक (नपुंसकलिङ्ग) | पुस्तकस्य | पुस्तकयोः | पुस्तकानाम् |
| अहम् | मम | आवयोः | अस्माकम् |
| त्वम् | तव | युवयोः | युष्माकम् |
व्याकरण — पाठ के बिंदु
षष्ठी-विभक्ति: संबंध बताने के लिए — ‘विद्यालयस्य छात्रः’ (विद्यालय का छात्र)। उदाहरण-वाक्य: विद्यालयस्य छात्रः गच्छति — इसी तरह द्विचक्रिका-चक्रम्, वृक्ष-फलम् आदि से वाक्य बनाओ। गुरु-शिष्य/ग्रंथ-रचयिता: वसिष्ठ-श्रीराम, परशुराम-कर्ण, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चंद्रगुप्त, शंकराचार्य-पद्मपाद, रामकृष्ण-विवेकानंद; रामायण-वाल्मीकि, महाभारत-व्यास, कर्णभार-भास, रघुवंश-कालिदास, पञ्चतंत्र-विष्णुशर्मा, हितोपदेश-नारायणपण्डित।
पाठ से आगे — सुनो, बोलो, लिखो, खोजो
एकपदीय/पूर्ण-वाक्य: प्रहेलिकाओं के उत्तर एकपदीय और पूर्ण-वाक्य में लिखो। षष्ठी सारणी: षष्ठी के रूपों की सारणी भरो। उदाहरण-वाक्य: षष्ठी से वाक्य बनाओ। अपनी प्रहेलिका: अपनी एक प्रहेलिका बनाओ और कक्षा में पूछो।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- ‘यः जानाति सः पण्डितः’ का क्या अर्थ है?
Hint: जानने और पंडित के बारे में सोचो। - भोजन के अंत में पीने योग्य क्या है?
Hint: तक्रम् के बारे में सोचो। - न आदि, न अंत, मध्य में ‘य’ — क्या है?
Hint: नयनम् के बारे में सोचो। - षष्ठी-विभक्ति किसके लिए आती है?
Hint: संबंध के बारे में सोचो। - अपनी एक प्रहेलिका बनाओ।
Hint: पहले उत्तर, फिर प्रश्न।
प्रश्न और उत्तर
- ‘यः जानाति सः पण्डितः’ का क्या अर्थ है?
जो जानता है, वही पंडित है — ज्ञान ही पंडित की पहचान है। - भोजन के अंत में पीने योग्य क्या है और जयन्त किसका पुत्र है?
भोजन के अंत में पीने योग्य तक्रम् (छाछ) है; जयन्त शक्रस्य (इंद्र का) पुत्र है; विष्णु का पद दुर्लभ है। - न आदि, न अंत, मध्य में ‘य’ — वह क्या है?
नयनम् (नेत्र) — ‘नयन’ शब्द में न आदि है, न अंत है, मध्य में ‘य’ है और वह तुम्हारे-मेरे पास भी है। - वृक्ष के आगे फल, फल के आगे वृक्ष — वह क्या है?
अनानसः (अनन्नास) — अकारादि और सकारांत। - षष्ठी-विभक्ति किसके लिए आती है? उदाहरण दो।
षष्ठी संबंध (का/की/के) के लिए आती है — जैसे विद्यालयस्य छात्रः (विद्यालय का छात्र), छात्रस्य पुस्तकम् (छात्र की पुस्तक)।
विस्तार — प्रश्न और उत्तर
- [एकपदीय] कुम्हार के घर आधा + हस्तिनापुर में आधा = ?
कुम्भकर्ण (कुम्भः + कर्णः)। - [एकपदीय] काश्यां नरः किम् इच्छति? (पुस्तक-उत्तर के अनुसार।)
मृत्युम्/जयः (पुस्तक-उत्तर)। - [रिक्त स्थान] छात्रस्य ______ छात्राणाम्। (द्विवचन।)
छात्रयोः। - [मिलान] रामायण — वाल्मीकि; महाभारत — व्यास; रघुवंश — कालिदास; पञ्चतंत्र — विष्णुशर्मा; हितोपदेश — नारायणपण्डित।
रामायण — वाल्मीकि; महाभारत — व्यास; रघुवंश — कालिदास; पञ्चतंत्र — विष्णुशर्मा; हितोपदेश — नारायणपण्डित। - [लघु उत्तर] गुरु-शिष्य के तीन जोड़े लिखो।
वसिष्ठ-श्रीराम, द्रोण-अर्जुन, चाणक्य-चंद्रगुप्त। - [लघु उत्तर] पति-पत्नी के तीन जोड़े लिखो।
वसिष्ठ-अरुंधती, श्रीराम-सीता, कृष्ण-रुक्मिणी। - [दीर्घ उत्तर] पाँचों प्रहेलिकाओं के प्रश्न और उत्तर क्रम से लिखो।
तक्रम्/शक्रस्य/दुर्लभम्; नयनम्; अनानसः; मृत्युम्/जयः; कुम्भः/कर्णः (कुम्भकर्ण)। - [व्याकरण] षष्ठी-विभक्ति में ‘मैं’ और ‘तुम’ के रूप लिखो।
अहम् → मम/आवयोः/अस्माकम्; त्वम् → तव/युवयोः/युष्माकम्। - [चित्र-आधारित] चित्र देखकर षष्ठी से वाक्य बनाओ — जैसे ‘वृक्षस्य फलम्’।
चित्र के अनुसार षष्ठी-वाक्य लिखो। - [लेखन] अपनी एक प्रहेलिका बनाओ — प्रश्न, संकेत और उत्तर सहित।
अपनी प्रहेलिका लिखो — प्रश्न, संकेत, उत्तर।
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