Chapter 7: अतिथिदेवो भव
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Sanskrit • Book: Deepakam (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
अतिथिदेवो भव — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Deepakam (Nayi pustak — 2025 ke baad wali, Bihar Board, कक्षा 6) | अध्याय 7 | माध्यम: Sanskrit (सरल Hindi व्याख्या सहित)

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): द्वार पर अतिथि का स्वागत करता परिवार। यह अतिथि-सत्कार के पाठ की सामान्य तस्वीर है, पुस्तक का दृश्य नहीं।

अतिथि को जल और पुष्प देते बच्चे। सत्कार के पाठ की सामान्य तस्वीर।
पाठ के बारे में
इस पाठ का नाम है — ‘अतिथिदेवो भव’ अर्थात् ‘अतिथि देव है’। यह उपनिषद् का वचन है — अतिथि की सेवा हमारे पञ्चमहायज्ञों में से एक है। पाठ की कहानी राधिका और एक मार्जारी (बिल्ली) की है। राधिका के घर में नए विशिष्ट अतिथि आए हैं — माता मार्जारी और उसके 4 शावक (बच्चे) — कुल 5 अतिथि। वे घर की छत के ऊपर रहते हैं। राधिका दिन-रात उनकी चिंता करती है।
शावकों के नाम उनकी विशेषताओं से रखे गए हैं — तन्वी (आकृति से सुंदरी, पतली), मृद्वी (स्पर्श से कोमल), शबलः (चित्रवर्ण, चितकबरा), भीमः (कुछ स्थूल, मोटा)। राधिका मार्जारी को क्षीर (दूध) देती है; मार्जारी उसे धन्यवाद-सा देखती है। जब राधिका शावकों के पास जाती है, तो मार्जारी पीछे-पीछे धीरे-धीरे आती है। शावक राधिका को देखकर भयभीत नहीं होते — वे उससे परिचित हो गए हैं।
राधिका की पितामही (दादी) समझाती हैं — अतिथि कब आएँगे, यह हम नहीं जानते; जब वे आएँ, वैसी ही सेवा करनी चाहिए। ‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ है — अतिथि हमारा देव है, उसका आदर से सेवा-सत्कार करो। राधिका दिन-भर इस मंत्र-सा वाक्य दोहराती रहती है और शावकों को भी यही सिखाती है — अतिथि देव है।
कहानी का क्रम
- उपनिषद्-वचन: अतिथिदेवो भव; अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञों में से एक।
- राधिका के घर में नए अतिथि — मार्जारी + 4 शावक = 5; छत के ऊपर निवास।
- शावकों के नाम: तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः।
- राधिका मार्जारी को क्षीर देती है; मार्जारी धन्यवाद-सा देखती है।
- शावक राधिका से भयभीत नहीं; मार्जारी पीछे-पीछे धीरे-धीरे आती है।
- पितामही का उपदेश — अतिथि कब आएँगे, नहीं जानते; जैसी सेवा हो, वैसी करो।
- राधिका मंत्र-सा दोहराती है और शावकों को भी सिखाती है।
क्या सीखना है
अतिथियों की संख्या, शावकों के नाम और उनके अर्थ, पितामही का उपदेश और ‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ याद करो। परीक्षा में एकपदीय और पूर्ण-वाक्य प्रश्न पूछे जाते हैं।
मुख्य शब्द
- अतिथिः — मेहमान। मार्जारी — बिल्ली। शावकाः — बच्चे (जानवरों के)। क्षीरम् — दूध। छद्याः उपरि — छत के ऊपर। अहोरात्रम् — दिन-रात। मन्दं मन्दम् — धीरे-धीरे। पृष्ठतः — पीछे-पीछे। कूर्दमाना — कूदती हुई। नूतनाः — नए। मिलित्वा — मिलकर। दृष्ट्वा — देखकर। एतादृशाः — ऐसे। स्थापयन्ती — रखती है। किमर्थम् — किसलिए। आदिनम् — सारा दिन। वारं वारम् — बार-बार।
याद रखें
- अतिथिदेवो भव — उपनिषद्-वचन; अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञों में से एक है।
- राधिका के घर में 5 अतिथि — मार्जारी + 4 शावक।
- शावकों के नाम: तन्वी (सुंदरी), मृद्वी (कोमल), शबलः (चित्रवर्ण), भीमः (स्थूल)।
- राधिका मार्जारी को क्षीर देती है।
- पितामही: अतिथि कब आएँगे, नहीं जानते; जब आएँ, वैसी सेवा करो।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: अतिथियों की संख्या 4 लिखना। कुल 5 हैं — मार्जारी + 4 शावक। दूसरी गलती: शावकों के नामों के अर्थ उल्टा लिखना — तन्वी सुंदरी/पतली, मृद्वी कोमल, शबलः चित्रवर्ण, भीमः स्थूल।
तालिका: शावकों के नाम और अर्थ
| नाम | अर्थ / विशेषता |
|---|---|
| तन्वी | आकृति से सुंदरी, पतली |
| मृद्वी | स्पर्श से कोमल |
| शबलः | चित्रवर्ण (चितकबरा) |
| भीमः | कुछ स्थूल (मोटा) |
व्याकरण — पाठ के बिंदु
प्रश्न-सूचक वाक्य: अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), अन्यत्र (अन्यत्र), सर्वत्र (सर्वत्र), एकत्र (एकत्र) से प्रश्न-सूचक वाक्य बनाना पाठ का अभ्यास है। उत्पीठिका: चौकी/तख्त पर क्या है और क्या नहीं है — इसका वर्णन। भोजनशाला: भोजनशाला में क्या-क्या है — 5 वाक्य बनाना।
पाठ से आगे — सुनो, बोलो, लिखो, खोजो
एकपदीय: राधिका कैसे चलती है? घर में कितने अतिथि हैं? किसे देखकर शावक भयभीत नहीं होते? मार्जारी के कितने शावक हैं? राधिका मार्जारी को क्या देती है? चित्रवर्ण कौन है? पूर्ण-वाक्य: शावकों के नाम, राधिका शावकों को क्या पढ़ाती है, विशिष्ट अतिथि कौन है, पितामही क्या कहती है, मार्जारी कब पीछे आती है, शावक कैसे हैं। अत्र-तत्र रेखाचित्र: रेखाचित्र देखकर अत्र/तत्र से वाक्य बनाओ।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- ‘अतिथिदेवो भव’ का क्या अर्थ है?
Hint: अतिथि और देव के बारे में सोचो। - राधिका के घर में कितने अतिथि आए?
Hint: मार्जारी और शावकों के बारे में सोचो। - शावकों के नाम लिखो।
Hint: तन्वी, मृद्वी, शबल, भीम से सोचो। - राधिका मार्जारी को क्या देती है?
Hint: क्षीर के बारे में सोचो। - पितामही ने क्या समझाया?
Hint: अतिथि के आने के समय के बारे में सोचो।
प्रश्न और उत्तर
- ‘अतिथिदेवो भव’ का क्या अर्थ है?
अतिथि हमारा देव है — अतिथि का आदर से सेवा-सत्कार करो। यह उपनिषद् का वचन है और अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञों में से एक है। - राधिका के घर में कितने अतिथि आए और वे कहाँ रहते थे?
कुल 5 अतिथि — माता मार्जारी और उसके 4 शावक। वे घर की छत के ऊपर रहते थे। - शावकों के नाम और उनके अर्थ क्या हैं?
तन्वी (आकृति से सुंदरी), मृद्वी (स्पर्श से कोमल), शबलः (चित्रवर्ण), भीमः (कुछ स्थूल)। - राधिका मार्जारी की सेवा कैसे करती थी?
राधिका मार्जारी को क्षीर (दूध) देती थी; मार्जारी उसे धन्यवाद-सा देखती थी। जब राधिका शावकों के पास जाती, तो मार्जारी पीछे-पीछे धीरे-धीरे आती थी। - पितामही ने क्या समझाया?
पितामही ने कहा — अतिथि कब आएँगे, यह हम नहीं जानते; जब वे आएँ, वैसी ही सेवा करनी चाहिए।
विस्तार — प्रश्न और उत्तर
- [एकपदीय] राधिका कैसे चलती है? (मार्जारी के पीछे जाने पर।)
मार्जारी पीछे-पीछे धीरे-धीरे (मन्दं मन्दम्) आती है। - [एकपदीय] किसे देखकर शावक भयभीत नहीं होते?
राधिका को देखकर। - [एकपदीय] चित्रवर्ण शावक कौन है?
शबलः। - [रिक्त स्थान] राधिका मार्जारी को ______ देती है।
क्षीरम् (दूध)। - [लघु उत्तर] शावक राधिका से भयभीत क्यों नहीं होते?
क्योंकि राधिका दिन-रात उनकी चिंता करती है, उन्हें दूध देती है और प्रेम से व्यवहार करती है — वे उससे परिचित हो गए हैं। - [लघु उत्तर] राधिका शावकों को क्या पढ़ाती है?
राधिका शावकों को ‘अतिथिदेवो भव’ मंत्र-सा पढ़ाती है — अतिथि देव है, उसकी सेवा करो। - [दीर्घ उत्तर] पितामही के उपदेश का भाव अपने शब्दों में लिखो।
अतिथि के आने का समय निश्चित नहीं होता; इसलिए जब भी कोई अतिथि आए, उसका आदर से सेवा-सत्कार करना चाहिए — यही अतिथिदेवो भव का अर्थ है। - [व्याकरण] अत्र/तत्र/सर्वत्र/एकत्र से चार वाक्य बनाओ।
अत्र मार्जारी अस्ति। तत्र शावकाः सन्ति। सर्वत्र अतिथिसेवा करणीया। एकत्र सर्वे मिलित्वा तिष्ठन्ति। - [चित्र-आधारित] अत्र-तत्र रेखाचित्र देखकर पाँच वाक्य लिखो (पाठ के रेखाचित्रों के अनुसार)।
रेखाचित्र के अनुसार अत्र/तत्र से वाक्य लिखो। - [लेखन] अपने घर आए किसी अतिथि की सेवा का वर्णन पाँच वाक्यों में लिखो।
अपने अनुभव से लिखो — अतिथि, सेवा, भाव।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

