Chapter 2: एषः कः? एषा का? एतत् किम्?
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Sanskrit • Book: Deepakam (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
एषः कः? एषा का? एतत् किम्? — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Deepakam (Nayi pustak — 2025 ke baad wali, Bihar Board, कक्षा 6) | अध्याय 2 | माध्यम: Sanskrit (सरल Hindi व्याख्या सहित)

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): साथ में पुस्तक लिए बालक और बालिका। यह लिंग-भेद के पाठ की सामान्य तस्वीर है, पुस्तक का दृश्य नहीं।

बगीचे में वस्तुओं की ओर संकेत करते बच्चे। पाठ के विषय की सामान्य तस्वीर।
पाठ के बारे में
इस पाठ का नाम है — ‘एषः कः? एषा का? एतत् किम्?’ अर्थात् ‘यह कौन है? यह कौन है? यह क्या है?’ — तीनों लिंगों में प्रश्न पूछने का पाठ। संस्कृत में संज्ञा के तीन लिंग होते हैं — पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग। प्रत्येक लिंग में तीन वचन होते हैं — एकवचन, द्विवचन और बहुवचन। इस पाठ में ‘यह’ के लिए दूर और निकट के सर्वनामों का प्रयोग सिखाया गया है।
पुंलिङ्ग में: बालकः (एक बालक), बालकौ (दो बालक), बालकाः (अनेक बालक); वृक्षः, गजः (हाथी) भी पुंलिङ्ग हैं। स्त्रीलिङ्ग में: बालिका (एक बालिका), बालिके (दो बालिकाएँ), बालिकाः (अनेक बालिकाएँ); वैद्या (डॉक्टरनी), अजा (बकरी) भी स्त्रीलिङ्ग हैं। नपुंसकलिङ्ग में: पत्रम् (एक पत्ता/पत्र), पत्रे (दो), पत्राणि (अनेक); चक्रम् (पहिया), पुस्तकम् (पुस्तक) भी नपुंसकलिङ्ग हैं।
क्रियापद भी वचन के अनुसार बदलते हैं — पठति (एक पढ़ता है), पठतः (दो पढ़ते हैं), पठन्ति (अनेक पढ़ते हैं); इसी तरह पिबति (पीता है), खादति (खाता है), गच्छति (जाता है), क्रीडति (खेलता है)। सर्वनामों का प्रयोग इस प्रकार है — दूर के लिए: सः/तौ/ते (पुंलिङ्ग), सा/ते/ताः (स्त्रीलिङ्ग), तत्/ते/तानि (नपुंसकलिङ्ग); निकट के लिए: एषः/एतौ/एते (पुंलिङ्ग), एषा/एते/एताः (स्त्रीलिङ्ग), एतत्/एते/एतानि (नपुंसकलिङ्ग)।
पाठ के संवाद-उदाहरण: सः शिक्षकः, सः पाठयति (वह शिक्षक है, वह पढ़ाता है); तौ मयूरौ, तौ नृत्यतः (वे दो मोर हैं, वे नाचते हैं); ते बालकाः, ते क्रीडन्ति (वे बालक हैं, वे खेलते हैं); एषः शिक्षकः, शिक्षकः लिखति (यह शिक्षक है, शिक्षक लिखता है); एतौ बालकौ, बालकौ पठतः (ये दो बालक हैं, वे पढ़ते हैं); एते बालकाः, बालकाः पिबन्ति (ये बालक हैं, वे पानी पीते हैं); सा वृद्धा, सा विहरति (वह वृद्धा है, वह घूमती है); ते अजे, ते चरतः (वे दो बकरियाँ हैं, वे चरती हैं); ताः महिलाः, ताः धावन्ति (वे महिलाएँ हैं, वे दौड़ती हैं); एषा लता, एषा खादति (यह लता है, यह खाती है); एते बालिके, एते भ्रमतः (ये दो बालिकाएँ हैं, वे घूमती हैं); एताः अजाः, एताः चरन्ति (ये बकरियाँ हैं, वे चरती हैं); तत् चन्द्रयानम् (वह चंद्रयान है); ते पुस्तके (वे दो पुस्तकें हैं); तानि रेलयानानि (वे रेलगाड़ियाँ हैं); एतत् दूरदर्शनम् (यह दूरदर्शन है); एते फले (ये दो फल हैं); एतानि पुस्तकानि (ये पुस्तकें हैं)।
लिङ्ग और वचन की सारणी
| लिङ्ग | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| पुंलिङ्ग | बालकः | बालकौ | बालकाः |
| स्त्रीलिङ्ग | बालिका | बालिके | बालिकाः |
| नपुंसकलिङ्ग | पत्रम् | पत्रे | पत्राणि |
क्या सीखना है
तीनों लिंगों के रूप, दूर (सः/सा/तत्) और निकट (एषः/एषा/एतत्) के सर्वनाम, और क्रियापदों के तीनों वचनों के रूप याद करो। परीक्षा में चित्र देखकर वाक्य बनाना और वचन-पूर्ति पूछी जाती है।
मुख्य शब्द
- पुंलिङ्ग — पुल्लिंग; जैसे बालकः, वृक्षः, गजः।
- स्त्रीलिङ्ग — स्त्रीलिंग; जैसे बालिका, वैद्या, अजा।
- नपुंसकलिङ्ग — नपुंसकलिंग; जैसे पत्रम्, चक्रम्, पुस्तकम्।
- एकवचन / द्विवचन / बहुवचन — एक / दो / अनेक के लिए रूप।
- लता — बेल। फलम् — फल। पुस्तकम् — पुस्तक। अजा — बकरी। सोपानम् — सीढ़ी। सङ्गणकम् — कंप्यूटर। दूरदर्शनम् — टेलीविज़न।
याद रखें
- संस्कृत में तीन लिंग और तीन वचन होते हैं।
- दूर के लिए सः/सा/तत्; निकट के लिए एषः/एषा/एतत्।
- क्रियापद भी वचन के अनुसार बदलते हैं — पठति/पठतः/पठन्ति।
- स्त्रीलिङ्ग के द्विवचन में ‘ते’ आता है — जैसे ते अजे (वे दो बकरियाँ)।
- नपुंसकलिङ्ग के बहुवचन में ‘नि’ आता है — जैसे पत्राणि, पुस्तकानि।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: द्विवचन को भूलकर सीधे बहुवचन लिख देना। संस्कृत में दो के लिए अलग रूप होता है — बालकौ, बालिके, पत्रे। उत्तर में वचन का ध्यान रखो। दूसरी गलती: दूर और निकट के सर्वनामों को उल्टा लिखना — सः दूर के लिए, एषः निकट के लिए।
तालिका: दूर और निकट के सर्वनाम
| लिङ्ग | दूर (एक/दो/अनेक) | निकट (एक/दो/अनेक) |
|---|---|---|
| पुंलिङ्ग | सः / तौ / ते | एषः / एतौ / एते |
| स्त्रीलिङ्ग | सा / ते / ताः | एषा / एते / एताः |
| नपुंसकलिङ्ग | तत् / ते / तानि | एतत् / एते / एतानि |
व्याकरण — पाठ के बिंदु
क्रियापद: पठति/पठतः/पठन्ति, पिबति, खादति, गच्छति, क्रीडति — क्रिया भी कर्ता के वचन के अनुसार बदलती है। वचन-पूर्ति: पाठ के अभ्यास में चषकः, देवाः, सैनिकः, रजकौ, तन्त्रज्ञः जैसे पदों के वचन भरने हैं। पिट्टका-प्रयोग: सः/सा/तत् के साथ शुकः, स्यूतः, अजा, फलम्, पुष्पम्, महिषी, वृक्षः, कुक्कुरः, पार्वती, पुस्तकम् का प्रयोग करके वाक्य बनाओ।
पाठ से आगे — सुनो, बोलो, लिखो, खोजो
चित्र-नाम: चित्र देखकर उसका संस्कृत नाम और लिङ्ग लिखो। वर्गीकरण: दिए गए पदों को एकवचन और बहुवचन में बाँटो। संवाद: कक्षा में एक-दूसरे से पूछो — ‘एषः कः?’ ‘एषा का?’ ‘एतत् किम्?’ — और उत्तर दो।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- संस्कृत में कितने लिंग होते हैं?
Hint: पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग, नपुंसकलिङ्ग के बारे में सोचो। - बालकः का द्विवचन और बहुवचन लिखो।
Hint: बालकौ और बालकाः के बारे में सोचो। - दूर और निकट के सर्वनामों में क्या अंतर है?
Hint: सः और एषः के बारे में सोचो। - पठति का द्विवचन और बहुवचन लिखो।
Hint: पठतः और पठन्ति के बारे में सोचो। - चित्र देखकर तीन वाक्य बनाओ — एक पुंलिङ्ग, एक स्त्रीलिङ्ग, एक नपुंसकलिङ्ग।
Hint: पहले लिङ्ग पहचानो, फिर सर्वनाम चुनो।
प्रश्न और उत्तर
- संस्कृत में कितने लिंग और वचन होते हैं?
तीन लिंग — पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग, नपुंसकलिङ्ग; और तीन वचन — एकवचन, द्विवचन, बहुवचन। - बालकः, बालिका, पत्रम् के द्विवचन और बहुवचन लिखो।
बालकः — बालकौ — बालकाः; बालिका — बालिके — बालिकाः; पत्रम् — पत्रे — पत्राणि। - दूर और निकट के सर्वनाम क्या हैं?
दूर के लिए सः/तौ/ते (पुंलिङ्ग), सा/ते/ताः (स्त्रीलिङ्ग), तत्/ते/तानि (नपुंसकलिङ्ग); निकट के लिए एषः/एतौ/एते, एषा/एते/एताः, एतत्/एते/एतानि। - पठति के तीनों वचन क्या हैं?
पठति (एक पढ़ता है), पठतः (दो पढ़ते हैं), पठन्ति (अनेक पढ़ते हैं)। - ‘एषा लता, एषा खादति’ का अर्थ क्या है?
यह लता है, यह खाती है — यहाँ ‘एषा’ निकट की स्त्रीलिङ्ग सर्वनाम है और ‘खादति’ एकवचन की क्रिया है।
विस्तार — प्रश्न और उत्तर
- [एकपदीय] ‘वे दो मोर नाचते हैं’ — संस्कृत में लिखो।
तौ मयूरौ, तौ नृत्यतः। - [रिक्त स्थान] ते _______, ते क्रीडन्ति। (बालकाः)
बालकाः। - [मिलान] सः — वह (पुंलिङ्ग); सा — वह (स्त्रीलिङ्ग); तत् — वह (नपुंसकलिङ्ग); एषः — यह (पुंलिङ्ग)।
सः — वह (पुंलिङ्ग); सा — वह (स्त्रीलिङ्ग); तत् — वह (नपुंसकलिङ्ग); एषः — यह (पुंलिङ्ग)। - [एक शब्द] ‘पुस्तकें’ के लिए नपुंसकलिङ्ग बहुवचन क्या है?
पुस्तकानि। - [लघु उत्तर] ‘ते अजे, ते चरतः’ — यहाँ ‘ते’ किस लिङ्ग और वचन का है?
स्त्रीलिङ्ग द्विवचन का — ‘वे दो बकरियाँ चरती हैं’। - [लघु उत्तर] पिट्टका से चुनकर वाक्य बनाओ — सः + शुकः।
सः शुकः — वह तोता है। (इसी तरह सा अजा, तत् फलम् आदि।) - [दीर्घ उत्तर] तीनों लिंगों में ‘यह’ और ‘वह’ के रूपों की पूरी सारणी बनाओ।
पुंलिङ्ग: एषः/एतौ/एते; सः/तौ/ते। स्त्रीलिङ्ग: एषा/एते/एताः; सा/ते/ताः। नपुंसकलिङ्ग: एतत्/एते/एतानि; तत्/ते/तानि। - [व्याकरण] क्रियापद वचन के अनुसार कैसे बदलते हैं? पठ् धातु से समझाओ।
पठति (एक), पठतः (दो), पठन्ति (अनेक) — कर्ता के वचन के अनुसार क्रिया का रूप बदलता है। - [चित्र-आधारित] चित्र में दो बालिकाएँ घूम रही हैं — संस्कृत वाक्य लिखो।
एते बालिके, एते भ्रमतः। - [लेखन] अपनी कक्षा की पाँच वस्तुओं के संस्कृत नाम लिङ्ग सहित लिखो।
अपनी कक्षा से लिखो — जैसे पुस्तकम् (नपुंसकलिङ्ग), फलम् (नपुंसकलिङ्ग) आदि।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।

