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Chapter 6: मेरी माँ

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Malhar (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)

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मेरी माँ — EG के अपने शब्दों में सार

पुस्तक: Malhar (Nayi pustak — 2025 ke baad wali, Bihar Board, कक्षा 6)  |  अध्याय 6  |  माध्यम: Hindi

Labelled diagram for मेरी माँ

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बच्चे को कहानी सुनाती माँ। माँ के प्रेम की सामान्य तस्वीर; यह पाठ बिस्मिल की माँ के बारे में है, पुस्तक का दृश्य नहीं।

Illustration for मेरी माँ

बच्चे को गले लगाती माँ। ममता की सामान्य तस्वीर।

पाठ के बारे में

यह पाठ रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’ का एक अंश है। बिस्मिल के बारे में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह ने कहा था — वे बड़े होनहार नौजवान थे, गज़ब के शायर थे, देखने में भी बहुत सुंदर थे, योग्य बहुत थे; यदि किसी और जगह, देश या समय में पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते। बिस्मिल छोटी-सी आयु से ही भारत की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेज़ों से लड़ते रहे। अंग्रेज़ों ने उन्हें जेल भेज दिया और फाँसी की सज़ा दे दी। जेल में भी उन्होंने अनेक अत्याचार सहे और चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा लिखकर बाहर भिजवाई; साथियों ने उसे प्रकाशित करवाया। इसका नाम रखा गया — ‘निज जीवन की एक छटा’। इस पुस्तक ने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए। बिस्मिल मात्र तीस वर्ष की आयु में (1897–1927) फाँसी पर लटका दिए गए; ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसा तराना लिखने वाले वे एक अच्छे कवि और लेखक भी थे।

आत्मकथा के इस अंश में बिस्मिल अपनी माँ के बारे में लिखते हैं। लखनऊ कांग्रेस में जाने की उनकी बड़ी इच्छा थी। दादीजी और पिताजी विरोध करते रहे, किंतु माताजी ने उन्हें खर्च दे ही दिया। उसी समय शाहजहाँपुर में सेवा-समिति का आरंभ हुआ था; बिस्मिल बड़े उत्साह से उसमें सहयोग देते थे। पिताजी और दादीजी को यह अच्छा न लगता था, किंतु माताजी उनका उत्साह भंग न होने देती थीं — जिसके कारण उन्हें अक्सर पिताजी की डाँट-फटकार तथा दंड सहन करना पड़ता था। बिस्मिल लिखते हैं — वास्तव में मेरी माताजी देवी हैं; मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी तथा गुरु देव श्री सोमदेव जी की कृपाओं का ही परिणाम है।

दादीजी और पिताजी विवाह के लिए बहुत अनुरोध करते, किंतु माताजी यही कहतीं कि शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा। माताजी के प्रोत्साहन और सद्व्यवहार ने बिस्मिल के जीवन में वह दृढ़ता उत्पन्न की कि किसी आपत्ति और संकट के आने पर भी उन्होंने अपना संकल्प न त्यागा। एक बार पिताजी दीवानी मुकदमे में किसी पर दावा करके वकील से कह गए थे कि जो काम हो वह बिस्मिल से करा लें। वकील ने बिस्मिल को बुलाकर कहा कि पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर कर दें। बिस्मिल ने तुरंत उत्तर दिया कि यह धर्म-विरुद्ध होगा, इस प्रकार का पाप वे कदापि नहीं कर सकते। वकील ने बहुत समझाया कि मुकदमा खारिज हो जाएगा, किंतु उन पर कुछ भी प्रभाव न हुआ — उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। वे जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करते थे।

माताजी का जीवन भी संघर्ष का था। ग्यारह वर्ष की उम्र में विवाह कर वे शाहजहाँपुर आई थीं; उस समय वे नितांत अशिक्षित, एक ग्रामीण कन्या के समान थीं। दादीजी ने अपनी छोटी बहन को बुला लिया; उन्होंने माताजी को गृहकार्य की शिक्षा दी। थोड़े दिनों में माताजी ने घर के सब काम-काज समझ लिए और भोजनादि का ठीक-ठीक प्रबंध करने लगीं। बिस्मिल के जन्म के पाँच या सात वर्ष बाद उन्होंने हिंदी पढ़ना आरंभ किया — पढ़ने का शौक उन्हें खुद ही पैदा हुआ था। मुहल्ले की सखी-सहेलियों में जो शिक्षित थीं, उनसे वे अक्षर-बोध करतीं; घर का सब काम करके जो समय मिलता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं। परिश्रम के फल से थोड़े दिनों में ही वे देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं। बिस्मिल की बहनों को छोटी आयु में माताजी ही शिक्षा दिया करती थीं। आर्यसमाज में प्रवेश के बाद बिस्मिल का माताजी से खूब वार्तालाप होता; उस समय की अपेक्षा अब उनके विचार भी कुछ उदार हो गए थे।

माताजी का सबसे बड़ा आदेश यही था कि किसी की प्राणहानि न हो — अपने शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। इस आदेश की पूर्ति के लिए बिस्मिल को मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी थी। बिस्मिल लिखते हैं — जन्मदात्री जननी! इस जीवन में तो तुम्हारा ऋण उतारने का प्रयत्न करने का भी अवसर न मिला; अनेक जन्मों में भी सारे जीवन प्रयत्न करूँ तो भी तुमसे उऋण नहीं हो सकता। जिस प्रेम और दृढ़ता से तुमने इस तुच्छ जीवन का सुधार किया है, वह अवर्णनीय है। तुम्हारी दया से ही मैं देश-सेवा में संलग्न हो सका। माँ की एक ही इच्छा अधूरी रह गई — श्रद्धापूर्वक माँ के चरणों की सेवा करके जीवन सफल बनाना; पर यह इच्छा पूरी होती नहीं दिखाई देती, क्योंकि माँ को उनकी मृत्यु की दुखभरी खबर सुनाई जाएगी। बिस्मिल को विश्वास था कि माँ धैर्य धारण करेंगी, यह समझकर कि उनका पुत्र माताओं की माता, भारत माता की सेवा में अपने जीवन को बलि-देवी की भेंट कर गया और उसने माँ की कोख कलंकित न की, अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा। वे गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का उदाहरण देते हैं — पुत्रों की मृत्यु की खबर सुनकर वे बहुत प्रसन्न हुई थीं और गुरु के नाम पर धर्म-रक्षार्थ अपने पुत्रों के बलिदान पर मिठाई बाँटी थी। अंत में बिस्मिल वर माँगते हैं कि अंतिम समय भी उनका हृदय किसी प्रकार विचलित न हो और माँ के चरण-कमलों को प्रणाम कर वे परमात्मा का स्मरण करते हुए शरीर त्याग करें।

घटना-क्रम

  1. भगत सिंह का कथन; बिस्मिल का परिचय और आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’।
  2. लखनऊ कांग्रेस की इच्छा; माँ द्वारा खर्च देना; शाहजहाँपुर सेवा-समिति में सहयोग; पिता-दादी का विरोध और माँ द्वारा डाँट सहना।
  3. विवाह टालना (शिक्षा के बाद ही विवाह); वकालतनामे पर हस्ताक्षर से इनकार — सत्य का आचरण।
  4. माँ का अपना संघर्ष: 11 वर्ष में विवाह, अशिक्षित ग्रामीण कन्या, गृहकार्य सीखना, बाद में हिंदी पढ़ना, देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन, बहनों को पढ़ाना।
  5. माँ का आदेश (किसी की प्राणहानि न हो); ऋण न उतार पाने का भाव; चरण-सेवा की अधूरी इच्छा; गुरु गोबिंद सिंह की धर्मपत्नी का उदाहरण; अंतिम वर।

क्या सीखना है

यह पाठ किसी सामान्य माँ के बारे में नहीं, बिस्मिल की माँ के बारे में है — आत्मकथा का अंश है। बिस्मिल का जीवन (1897–1927), माँ के तीन बड़े काम (खर्च देकर प्रोत्साहन, विवाह टालना, सत्य की शिक्षा) और माँ का आदेश याद करो।

मुख्य शब्द

  • आत्मकथा — अपने जीवन के बारे में स्वयं लिखा गया वर्णन।
  • वकालतनामा — वह लेख जिसके ज़रिए किसी वकील को मुकदमे की पैरवी का अधिकार दिया जाए।
  • सद्व्यवहार — अच्छा व्यवहार, भलाई का बर्ताव।
  • दृढ़ता — संकट में भी संकल्प पर टिके रहना।
  • जन्मदात्री जननी — जन्म देने वाली माता।
  • उऋण — ऋण से मुक्त।
  • प्राणदंड — मृत्यु-दंड।

याद रखें

  • यह पाठ बिस्मिल की आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’ का अंश है।
  • बिस्मिल (1897–1927) को मात्र तीस वर्ष की आयु में फाँसी दी गई।
  • माँ ने लखनऊ कांग्रेस के लिए खर्च दिया और सेवा-समिति के काम में उत्साह बनाए रखा।
  • बिस्मिल ने पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर करने से इनकार किया — सत्य का आचरण।
  • माँ 11 वर्ष में विवाह कर शाहजहाँपुर आई थीं; बाद में उन्होंने स्वयं हिंदी पढ़ना सीखा।
  • माँ का सबसे बड़ा आदेश: किसी की प्राणहानि न हो, शत्रु को भी प्राणदंड न देना।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: इस पाठ को सामान्य ‘माँ की ममता’ का निबंध समझना। उत्तर में हमेशा लिखो कि यह बिस्मिल की आत्मकथा का अंश है और माँ के विशिष्ट कामों (खर्च देना, विवाह टालना, सत्य की शिक्षा, प्राणहानि न करने का आदेश) के उदाहरण दो — सामान्य बातों से अंक नहीं मिलेंगे।

तालिका: माँ के काम और उनका प्रभाव

माँ का कामबिस्मिल पर प्रभाव
लखनऊ कांग्रेस के लिए खर्च देनादेश-सेवा की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन
पिता-दादी की डाँट सहकर उत्साह बनाए रखनासंकल्प की दृढ़ता
शिक्षा के बाद ही विवाह की बात कहनाशिक्षा को प्राथमिकता
स्वयं हिंदी पढ़ना, बहनों को पढ़ानाघर में शिक्षा का वातावरण
प्राणहानि न करने का आदेशकरुणा और संयम की शिक्षा

भाषा और व्याकरण — पाठ के बिंदु

आत्मकथा की भाषा: बिस्मिल स्वयं ‘मैं’ शैली में लिखते हैं — “मेरी माताजी देवी हैं”, “मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया…” — आत्मकथा में लेखक अपने जीवन की घटनाओं को स्वयं ही सुनाता है। संबोधन: “जन्मदात्री जननी!” — माँ को संबोधित करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की गई है। तत्सम शब्द: प्रोत्साहन, सद्व्यवहार, दृढ़ता, अवर्णनीय — इनके अर्थ संदर्भ से समझो।

पाठ से आगे — सुनो, बोलो, लिखो, खोजो

मेरी समझ से: ‘किंतु यह इच्छा पूरी होती नहीं दिखाई देती’ — बिस्मिल को अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की इच्छा के पूरे न होने की आशंका थी, क्योंकि उन्हें फाँसी होने वाली थी और माँ को उनकी मृत्यु की खबर मिलनी थी। चर्चा: माँ का कौन-सा काम तुम्हें सबसे अधिक प्रभावित करता है और क्यों? खोज: ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ तराने के बारे में जानकारी एकत्र करो।

अभ्यास — स्वयं करके देखो

  1. यह पाठ किसकी आत्मकथा का अंश है और उस आत्मकथा का नाम क्या है?
    Hint: बिस्मिल और ‘निज जीवन की एक छटा’ के बारे में सोचो।
  2. माँ ने बिस्मिल की देश-सेवा में कैसे सहायता की? दो उदाहरण दो।
    Hint: खर्च देना और डाँट सहकर उत्साह बनाए रखना।
  3. बिस्मिल ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?
    Hint: सत्य और धर्म-विरुद्ध काम के बारे में सोचो।
  4. माँ ने स्वयं पढ़ना कैसे सीखा?
    Hint: सखी-सहेलियों से अक्षर-बोध और घर के काम के बाद के समय से सोचो।
  5. माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?
    Hint: प्राणहानि न करने के बारे में सोचो।

प्रश्न और उत्तर

  1. यह पाठ किसकी रचना का अंश है?
    यह पाठ रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’ का अंश है। बिस्मिल क्रांतिकारी, कवि और लेखक थे; मात्र तीस वर्ष की आयु में उन्हें फाँसी दी गई।
  2. माँ ने बिस्मिल के देश-सेवा के कामों में कैसे साथ दिया?
    माँ ने लखनऊ कांग्रेस जाने के लिए खर्च दिया और शाहजहाँपुर सेवा-समिति के काम में उनका उत्साह बनाए रखा — भले ही इसके लिए उन्हें पिताजी की डाँट-फटकार सहनी पड़ती थी।
  3. बिस्मिल ने वकील की बात क्यों नहीं मानी?
    क्योंकि वकील चाहते थे कि वे पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर कर दें। बिस्मिल ने कहा कि यह धर्म-विरुद्ध होगा, ऐसा पाप वे कदापि नहीं कर सकते — वे हमेशा सत्य का आचरण करते थे।
  4. माँ ने पढ़ना-लिखना कैसे सीखा?
    माँ 11 वर्ष में विवाह कर शाहजहाँपुर आई थीं और तब अशिक्षित थीं। बाद में मुहल्ले की शिक्षित सखी-सहेलियों से अक्षर-बोध करके, घर का काम करके बचे समय में पढ़ना-लिखना सीखा और देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं।
  5. माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था और बिस्मिल उस पर कैसे चले?
    माँ का आदेश था कि किसी की प्राणहानि न हो, शत्रु को भी प्राणदंड न देना। इस आदेश की पूर्ति के लिए बिस्मिल को दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भी भंग करनी पड़ी, पर वे माँ के आदेश पर दृढ़ रहे।

विस्तार — प्रश्न और उत्तर

  1. [सही/गलत] बिस्मिल की माँ शिक्षित परिवार से आई थीं। सही है या गलत?
    गलत। वे 11 वर्ष में विवाह कर शाहजहाँपुर आई थीं और तब नितांत अशिक्षित, एक ग्रामीण कन्या के समान थीं; पढ़ना उन्होंने बाद में स्वयं सीखा।
  2. [रिक्त स्थान] बिस्मिल की आत्मकथा का नाम ‘निज जीवन की ______’ है।
    एक छटा।
  3. [मिलान] भगत सिंह ने बिस्मिल के बारे में क्या कहा — (क) वे अच्छे व्यापारी थे (ख) वे होनहार नौजवान और गज़ब के शायर थे (ग) वे सेनाध्यक्ष बन गए थे।
    (ख) वे होनहार नौजवान और गज़ब के शायर थे; भगत सिंह ने कहा कि किसी और समय/देश में पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते।
  4. [एक शब्द] बिस्मिल के गुरु का नाम क्या था?
    श्री सोमदेव जी।
  5. [लघु उत्तर] माँ ने विवाह के लिए क्या कहा और क्यों?
    माँ कहती थीं कि शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा। इससे बिस्मिल की शिक्षा पूरी हो सकी और उनमें दृढ़ता आई।
  6. [लघु उत्तर] ‘जन्मदात्री जननी! … उऋण नहीं हो सकता’ — बिस्मिल माँ का ऋण क्यों नहीं उतार सकते?
    क्योंकि माँ ने केवल जन्म और पालन-पोषण ही नहीं दिया, बल्कि प्रेम और दृढ़ता से उनके जीवन का सुधार किया, आत्मिक, धार्मिक और सामाजिक उन्नति में सहायता की — इतना बड़ा उपकार किसी जन्म में चुकाया नहीं जा सकता।
  7. [भाव-व्याख्या] गुरु गोबिंद सिंह की धर्मपत्नी का उदाहरण बिस्मिल क्यों देते हैं?
    वे माँ को धैर्य बँधाते हैं — जैसे गुरु-पत्नी ने पुत्रों के बलिदान पर प्रसन्न होकर मिठाई बाँटी थी, वैसे ही माँ भी समझें कि उनका पुत्र भारत माता की सेवा में जीवन अर्पित करके गया है, उसने कोख कलंकित नहीं की।
  8. [दीर्घ उत्तर] माँ के प्रोत्साहन और सद्व्यवहार ने बिस्मिल के जीवन में क्या दृढ़ता उत्पन्न की? तीन उदाहरणों से समझाओ।
    पहला, विरोध के बावजूद देश-सेवा के कामों में लगे रहना। दूसरा, संकट आने पर भी संकल्प न त्यागना। तीसरा, वकालतनामे पर झूठे हस्ताक्षर से इनकार करके सत्य पर टिके रहना।
  9. [व्याकरण] ‘माताजी देवी हैं’ — इस वाक्य में ‘देवी’ किस अलंकार/भाव से आया है? समझाओ।
    यह रूपक/उपमा-भाव है — माँ की ममता, त्याग और प्रोत्साहन को देवी के समान पवित्र और पूजनीय बताया गया है; माँ सचमुच देवी नहीं हैं, पर उनके गुण देवी-तुल्य हैं।
  10. [लेखन] अपनी माँ (या किसी अभिभावक) के किसी एक काम के बारे में लिखो जिसने तुम्हारे जीवन को दृढ़ता दी हो।
    अपने अनुभव से लिखो — घटना, उस व्यक्ति का व्यवहार और तुम पर उसका प्रभाव।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ो, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलो, फिर बिना देखे अभ्यास हल करो। उत्तर अध्यापक या माता-पिता से जाँचवाओ।