Chapter 3: पहली बूँद
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Malhar (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
पहली बूँद — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Malhar (Nayi pustak — 2025 ke baad wali, Bihar Board, कक्षा 6) | अध्याय 3 | माध्यम: Hindi

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): सूखी मिट्टी पर गिरती पहली बूँद और हरे पत्ते। यह वर्षा के विषय की सामान्य तस्वीर है।

पहली बारिश में खेलते बच्चे। वर्षा की सामान्य तस्वीर।
पाठ के बारे में
यह कविता बाल-साहित्यकार गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) की है। उन्होंने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ी बहुत-सी मनोरम कविताएँ लिखी हैं। उनकी एक अन्य कविता ‘हम कुछ सीखें’ में वे कहते हैं — “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।”
कविता पावस (वर्षा ऋतु) के प्रथम दिवस की है। जब पहली बूँद धरा पर आई, तो धरती से अंकुर फूट पड़ा — मानो नव-जीवन ने अँगड़ाई ली हो। धरती के सूखे अधरों पर बूँद अमृत-सी आकर गिरी और वसुंधरा की रोमावलि-सी हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
दूसरे चित्र में आसमान में उड़ता सागर बिजली के स्वर्णिम पर (सुनहरे पंख) लगाकर उड़ रहा है और नगाड़े बज रहे हैं — मानो बादल धरती की तरुणाई (यौवन) को जगा रहे हों। तीसरे चित्र में आकाश नीले नयनों-सा है और बादल काली पुतली-से हैं; करुणा से विगलित (पिघले हुए) अश्रु बहाकर बादलों ने धरती की चिर-प्यास बुझाई। बढ़ी हुई धरती अब शस्य-श्यामला (फसलों से हरी-भरी) बनने को फिर से ललचाई।
कविता का क्रम
- पावस का प्रथम दिवस: पहली बूँद, अंकुर का फूटना, नव-जीवन की अँगड़ाई।
- सूखे अधरों पर अमृत-सी बूँद; हरी दूब का पुलकित-मुसकाना।
- आसमान में उड़ता सागर, बिजली के स्वर्णिम पर, नगाड़ों की ध्वनि, धरती की तरुणाई का जागना।
- नीले नयन-सा अंबर, काली पुतली-से जलधर, करुणा के अश्रु, चिर-प्यास का बुझना, शस्य-श्यामला धरती।
क्या सीखना है
कवि का नाम, ‘नव-जीवन की अँगड़ाई’ (अंकुर के लिए), ‘काली पुतली’ (बादल के लिए), ‘जलधर’ (जल को धारण करने वाला), ‘नगाड़ा’ और ‘फूट’ के अनेक अर्थ याद करो।
मुख्य शब्द
- पावस — वर्षा ऋतु, मानसून।
- अंकुर — बीज से फूटा हुआ नन्हा पौधा।
- वसुंधरा — पृथ्वी, धरती।
- रोमावलि — रोमों की पंक्ति; यहाँ धरती पर हरी दूब की पंक्ति।
- जलधर — जल को धारण करने वाला (बादल; संदर्भ से समुद्र भी)।
- अंबर — आकाश।
- नगाड़ा — भारत का पारंपरिक वाद्ययंत्र; चोट मारकर बजाया जाता है, जोड़े में बजता है।
- शस्य-श्यामला — फसलों से हरी-भरी।
याद रखें
- कवि गोपालकृष्ण कौल हैं (1923–2007)।
- ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ अंकुर के लिए कहा गया है।
- ‘काली पुतली’ बादलों के लिए आई है; आकाश नीले नयनों-सा है।
- ‘आसमान में उड़ता सागर’ — समुद्र का जल बिजली के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है (काव्य-कल्पना)।
- नगाड़ा, ढोलक, डमरू, डफली — चोट मारकर बजाए जाने वाले वाद्य हैं।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: ‘नव-जीवन’ को बूँद या पावस समझना। पुस्तक के बहुविकल्पीय प्रश्न में सही उत्तर ‘अंकुर’ है — अंकुर फूटना ही नव-जीवन की अँगड़ाई है।
तालिका: कविता के चित्र और उनके अर्थ
| पंक्ति का चित्र | अर्थ |
|---|---|
| आसमान में उड़ता सागर | बादल (समुद्र का जल आकाश में) |
| बिजलियों के स्वर्णिम पर | बिजली के सुनहरे पंख |
| बजा नगाड़े | मेघ-गर्जना |
| नीले नयनों-सा अंबर | आकाश |
| काली पुतली-से जलधर | बादल |
| वसुंधरा की रोमावलि-सी हरी दूब | हरी दूब |
भाषा और व्याकरण — पाठ के बिंदु
‘फूट’ के अनेक अर्थ: ‘अंकुर फूट पड़ा’ में फूटने का अर्थ पौधे का अंकुरण है। पर ‘फूट डालना’ (झगड़ा कराना) और ‘घड़ा फूटना’ (टूटना) में अर्थ बदल जाता है — एक शब्द, अनेक अर्थ। ‘धर’ से बने शब्द: जलधर = जल + धर (जल को धारण करने वाला)। बादल और समुद्र दोनों जल धारण करते हैं, इसलिए दोनों जलधर हैं; वाक्य के संदर्भ से पता चलता है कि किसका अर्थ है। तुक: इस पद की पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि मिलती है (जैसे पठायो-आयो जैसी तुक-परंपरा) — कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का प्रयोग होता है।
पाठ से आगे — सुनो, बोलो, लिखो, खोजो
मेरी समझ से: ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ अंकुर के लिए है; ‘काली पुतली’ बादल है। सोच-विचार: बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है? (अंकुर फूटना, दूब का मुसकाना, चिर-प्यास का बुझना)। आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है? (आकाश नीले नयनों-सा, बादल काली पुतली-से)। शब्द-जाल: नगाड़ा, नयन, जलधर, दूब, अश्रु, अंबर। झरोखा: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की कविता ‘एक बूँद’ भी पाठ में पढ़ने के लिए दी गई है — बादलों की गोद से निकली एक बूँद सोचती है कि घर छोड़कर क्यों बढ़ी। सृजन: इंद्रधनुष बनाकर उस पर छोटी कविता लिखना और उसे प्यारा-सा नाम देना।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- पहली बूँद को आशा का संदेश क्यों कहा गया है?
Hint: सूखे के बाद की उम्मीद के बारे में सोचो। - पहली बारिश के बाद मिट्टी से कैसी गंध आती है?
Hint: सोंधी खुशबू के बारे में सोचो। - पहली बूँद से कौन-कौन खुश होता है?
Hint: धरती, पेड़ और बच्चों के बारे में सोचो। - छोटी शुरुआत बड़ा बदलाव कैसे लाती है?
Hint: पहली बूँद और वर्षा के उदाहरण से सोचो। - पहली बारिश पर चार पंक्तियाँ लिखो।
Hint: पहले सूखा, फिर पहली बूँद।
प्रश्न और उत्तर
- पहली बूँद का क्या महत्व है?
पहली बूँद लंबे सूखे के बाद वर्षा की शुरुआत का संकेत है। वह धरती की प्यास बुझाने का पहला कदम है और सबके मन में आशा जगाती है। - पहली बूँद गिरने पर धरती पर क्या बदलाव आता है?
सूखी मिट्टी से सोंधी खुशबू उठती है, पेड़-पौधे हरे होने लगते हैं और पशु-पक्षी व बच्चे खुश हो जाते हैं। - पहली बूँद किसका प्रतीक है?
पहली बूँद आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है — जैसे एक छोटी शुरुआत बड़े बदलाव का आरंभ बन सकती है। - मिट्टी की खुशबू कब आती है?
लंबे सूखे के बाद जब पहली बारिश की बूँदें सूखी मिट्टी पर गिरती हैं, तब मिट्टी से सोंधी खुशबू उठती है। - कविता का मुख्य भाव क्या है?
पहली बूँद केवल पानी नहीं, नव-जीवन और आशा का संदेश है — सूखी धरती फिर से हरी-भरी होने को ललचाती है।
विस्तार — प्रश्न और उत्तर
- [बहुविकल्पीय] ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए कहा गया है — (क) बादल (ख) अंकुर (ग) बूँद (घ) पावस।
(ख) अंकुर। - [बहुविकल्पीय] ‘काली पुतली’ किसे कहा गया है — (क) बारिश की बूँदें (ख) नगाड़ा (ग) वृद्ध धरती (घ) बादल।
(घ) बादल। - [मिलान] ‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर’ — रेखांकित ‘सागर’ का भावार्थ चुनो: (क) मेघ-गर्जना (ख) बादल (ग) हरी दूब (घ) आकाश।
(ख) बादल — समुद्र का जल ही बादल बनकर आकाश में उड़ता है। - [रिक्त स्थान] धरती के सूखे अधरों पर बूँद ______-सी आकर गिरी।
अमृत। - [लघु उत्तर] ‘बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई’ — नगाड़े क्या हैं और वे किसे जगा रहे हैं?
नगाड़े मेघ-गर्जना के प्रतीक हैं; वे धरती की तरुणाई (यौवन, नई ऊर्जा) को जगा रहे हैं। - [लघु उत्तर] ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ — इस उपमा को समझाओ।
आकाश को नीली आँखों के समान और बादलों को आँख की काली पुतली के समान बताया गया है — जैसे आँख में पुतली होती है, वैसे ही नीले आकाश में काले बादल हैं। - [भाव-व्याख्या] ‘करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई’ — बादलों के आँसू करुणा के क्यों कहे गए हैं?
बादल दया करके बरसते हैं — उनका बरसना धरती की लंबी प्यास बुझाता है, इसलिए वर्षा को करुणा के आँसू कहा गया है। - [दीर्घ उत्तर] कविता के तीनों चित्र (पहली बूँद-अंकुर, उड़ता सागर-नगाड़े, नयन-पुतली-अश्रु) क्रम से अपने शब्दों में लिखो।
पहला: पहली बूँद से अंकुर फूटा, दूब मुसकाई। दूसरा: बिजली के सुनहरे पंखों वाला बादल-समुद्र आकाश में उड़ा, गर्जना से धरती जागी। तीसरा: नीले आकाश में काले बादलों ने करुणा के आँसू बहाए, चिर-प्यास बुझी और धरती शस्य-श्यामला बनने को ललचाई। - [व्याकरण] ‘फूट’ शब्द के तीन भिन्न अर्थों वाले वाक्य बनाओ।
अंकुर फूट पड़ा (उगना)। घड़ा फूट गया (टूटना)। अंग्रेज़ों की नीति थी ‘फूट डालो और राज करो’ (फूट = मतभेद)। - [लेखन] बारिश आने पर तुम्हें कैसा लगता है? अपनी प्रिय ऋतु और उसका कारण लिखो।
अपने अनुभव से लिखो — बारिश का दृश्य, मन का भाव, प्रिय ऋतु का नाम और कारण।
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