Chapter 1: मातृभूमि
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Malhar (Nayi pustak — 2025 ke baad wali)
मातृभूमि — EG के अपने शब्दों में सार
पुस्तक: Malhar (Nayi pustak — 2025 ke baad wali, Bihar Board, कक्षा 6) | अध्याय 1 | माध्यम: Hindi

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): खेत, नदी और पहाड़ों वाली मातृभूमि की तस्वीर। यह पाठ के विषय की सामान्य तस्वीर है, पुस्तक का दृश्य नहीं।

अपनी धरती की सेवा करते बच्चे। मातृभूमि-प्रेम की सामान्य तस्वीर।
पाठ के बारे में
यह कविता सोहनलाल द्विवेदी जी की है। वे हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे जिनका सबसे प्रिय विषय देशभक्ति था। अंग्रेज़ों के शासन के समय उन्होंने अपनी लेखनी से देश के गौरव का गान किया। उनकी चर्चित रचनाओं में ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’ और ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ भी हैं।
कविता की पहली झलक में ऊँचा हिमालय आकाश को छूता दिखाई देता है और उसके चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) झूमता है। गंगा, यमुना और त्रिवेणी की नदियाँ लहरा रही हैं और हर कदम पर जगमग छटा छहर रही है। कवि कहता है — यही पुण्य-भूमि मेरी है, यही स्वर्ण-भूमि मेरी है, यही जन्मभूमि मेरी है, यही मातृभूमि मेरी है।
आगे पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं, झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्त होकर चहक रही हैं, घनी अमराइयों (आम के बागों) में कोयल पुकारती है और मलय पवन बहकर तन-मन सँवारती है। यही धर्म-भूमि और कर्म-भूमि है।
अंत में कवि उन महापुरुषों को याद करता है जो इसी भूमि पर जन्मे — जहाँ रघुपति (श्रीराम) जन्मे, जहाँ सीता जन्मीं, जहाँ श्रीकृष्ण ने वंशी से पूनीत गीता सुनाई और जहाँ गौतम (बुद्ध) ने जन्म लेकर जग को दया सिखाई और दिया (ज्ञान का प्रकाश) दिखाया। इसलिए यह युद्ध-भूमि भी है और बुद्ध-भूमि भी — और वही मातृभूमि, वही जन्मभूमि है।
कविता का क्रम
- हिमालय, सिंधु और गंगा-यमुना-त्रिवेणी की प्राकृतिक शोभा।
- झरने, चिड़ियाँ, अमराइयाँ, कोयल और मलय पवन — धरती की सजीवता।
- रघुपति, सीता, श्रीकृष्ण की वंशी-गीता और गौतम की दया — महापुरुषों की भूमि।
- निष्कर्ष: पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, धर्म-भूमि, कर्म-भूमि, युद्ध-भूमि, बुद्ध-भूमि — सब यही मातृभूमि है।
क्या सीखना है
कविता के तीनों चित्र (प्रकृति, जीवन, महापुरुष), कवि का नाम और ‘सिंधु’, ‘त्रिवेणी’, ‘मलय पवन’, ‘अमराई’ जैसे शब्दों के अर्थ याद करो। परीक्षा में पंक्तियों का भाव और शब्दों का मिलान पूछा जाता है।
मुख्य शब्द
- मातृभूमि — अपनी जन्मभूमि; माँ के समान प्रिय धरती।
- सिंधु — समुद्र; कविता में हिंद महासागर के लिए आया शब्द।
- त्रिवेणी — तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
- अमराई — आम का घना बाग, उद्यान।
- मलय पवन — दक्षिण के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
- रघुपति — श्रीरामचंद्र का एक नाम; दशरथ के पुत्र।
- गीता — श्रीमद्भगवद्गीता; महाभारत में श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद।
- गौतम बुद्ध — बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महापुरुष।
याद रखें
- कवि सोहनलाल द्विवेदी हैं; उनका प्रिय विषय देशभक्ति था।
- ‘सिंधु’ का अर्थ समुद्र है — हिंद महासागर के लिए आया है।
- कोयल घनी अमराइयों में पुकारती है; मलय पवन तन-मन सँवारती है।
- श्रीकृष्ण ने वंशी से गीता सुनाई; गौतम ने जग को दया सिखाई।
- ‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, अर्थ पूरी तरह बदल जाता है।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: ‘सिंधु’ को सिंधु नदी समझना। इस कविता में सिंधु समुद्र के लिए आया है — हिमालय के चरणों में झूमता समुद्र। उत्तर में संदर्भ सहित अर्थ लिखो।
तालिका: कविता के शब्द और उनके संदर्भ
| शब्द | अर्थ / संदर्भ |
|---|---|
| हिमालय | भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला |
| त्रिवेणी | तीन नदियों का संगम |
| मलय पवन | मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित वायु |
| रघुपति | श्रीरामचंद्र |
| सीता | जनक की पुत्री जानकी |
| गीता | श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद का ग्रंथ |
भाषा और व्याकरण — पाठ के बिंदु
दोहराए गए शब्द: ‘पग-पग’ का अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। इसी तरह घर-घर (हर घर), बाल-बाल, साँस-साँस, देश-देश, पर्वत-पर्वत — दोहराव से ‘हर’ का भाव आता है। ‘भूमि’ से बने शब्द: पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, धर्म-भूमि, कर्म-भूमि, युद्ध-भूमि, बुद्ध-भूमि — ‘भूमि’ के पहले अलग-अलग शब्द जोड़कर नए शब्द बनते हैं। लय के लिए शब्द-परिवर्तन: ‘यमुन’ शब्द ‘यमुना’ नदी के लिए आया है — कवि कभी-कभी लय और सौंदर्य के लिए शब्द को थोड़ा बदल देता है।
पाठ से आगे — सुनो, बोलो, लिखो, खोजो
मेरी समझ से (बहुविकल्पीय): हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है? — सिंधु। कविता में मुख्य रूप से भारत की प्रशंसा की गई है। सोच-विचार: कोयल कहाँ रहती है? (घनी अमराइयों में) तन-मन कौन सँवारती है? (मलय पवन) झरने कहाँ से झरते हैं? (पहाड़ियों से) श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था? (गीता) गौतम ने किसका यश बढ़ाया? (इस भूमि का)। वाद्य: वंशी (बाँसुरी) मुँह से फूँककर बजाया जाने वाला वाद्य है। झरोखा: ‘वंदे मातरम्’ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना है; ‘पुष्प की अभिलाषा’ माखनलाल चतुर्वेदी की कविता पाठ के अंत में पढ़ने के लिए दी गई है — पुष्प चाहता है कि उसे उस पथ पर फेंका जाए जिस पर वीर मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जाते हैं।
अभ्यास — स्वयं करके देखो
- मातृभूमि का क्या अर्थ है?
Hint: जन्मभूमि और माँ जैसी धरती के बारे में सोचो। - मातृभूमि में क्या-क्या शामिल है?
Hint: धरती, लोग और संस्कृति के बारे में सोचो। - मातृभूमि से प्रेम केवल गीत गाकर क्यों पूरा नहीं होता?
Hint: कर्तव्य के बारे में सोचो। - एक विद्यार्थी देश-सेवा कैसे कर सकता है?
Hint: पढ़ाई और अच्छे व्यवहार से सोचो। - मातृभूमि पर चार पंक्तियाँ लिखो।
Hint: पहले अर्थ, फिर कर्तव्य।
प्रश्न और उत्तर
- मातृभूमि किसे कहते हैं?
मातृभूमि वह धरती है जहाँ हम जन्मे और पले-बढ़े। कवि उसे माँ के समान मानता है, क्योंकि उसी की मिट्टी, हवा और पानी से हमारा जीवन बनता है। - कवि मातृभूमि के प्रति कैसा भाव रखता है?
कवि के मन में मातृभूमि के प्रति प्रेम, आदर और कृतज्ञता का भाव है। वह धरती के उपकारों को याद करता है। - मातृभूमि से प्रेम दिखाने के दो तरीके बताओ।
पहला, अपनी धरती और संस्कृति का सम्मान करना। दूसरा, ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना — जैसे मन लगाकर पढ़ना और दूसरों की मदद करना। - मातृभूमि केवल एक स्थान क्यों नहीं है?
क्योंकि मातृभूमि में उस स्थान के लोग, भाषा, रीति-रिवाज़, खेत, नदियाँ और संस्कृति — सब कुछ शामिल है। - पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
पाठ का संदेश है कि मातृभूमि से सच्चा प्रेम शब्दों से नहीं, कर्तव्य निभाकर और देश को अच्छा बनाकर दिखाया जाता है।
विस्तार — प्रश्न और उत्तर
- [सही/गलत] कविता में ‘सिंधु’ शब्द सिंधु नदी के लिए आया है। सही है या गलत? कारण सहित बताओ।
गलत। सिंधु यहाँ समुद्र (हिंद महासागर) के लिए आया है, जो हिमालय के चरणों के नीचे झूमता है। - [रिक्त स्थान] गंगा, यमुना और ______ की नदियाँ लहर रही हैं।
त्रिवेणी। - [मिलान] ‘मलय पवन’ का अर्थ चुनो — (क) ठंडी हवा (ख) मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित वायु (ग) समुद्री तूफ़ान।
(ख) मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित वायु। - [एक शब्द] कविता के कवि का नाम एक शब्द में लिखो।
सोहनलाल द्विवेदी। - [लघु उत्तर] ‘वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी’ — इन दो शब्दों से कवि क्या कहना चाहता है?
यही भूमि वीरों की युद्ध-भूमि भी रही है और बुद्ध की शांति व दया की भूमि भी — वीरता और शांति दोनों इसी मातृभूमि की पहचान हैं। - [लघु उत्तर] ‘पग-पग छहर रही हैं’ में ‘पग-पग’ का क्या अर्थ है? दो और ऐसे दोहराए शब्द लिखो।
‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। जैसे घर-घर, देश-देश। - [भाव-व्याख्या] ‘बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है’ — पवन तन-मन कैसे सँवारती है?
सुगंधित, शीतल वायु शरीर को सुख देती है और मन को प्रसन्न करती है — प्रकृति का सुख ही तन-मन को सँवारना है। - [दीर्घ उत्तर] कविता के अनुसार भारत की प्राकृतिक शोभा और महापुरुषों की परंपरा — दोनों का वर्णन अपने शब्दों में करो।
प्रकृति: ऊँचा हिमालय, नीचे सिंधु, गंगा-यमुना-त्रिवेणी, झरने, चिड़ियाँ, अमराइयाँ, कोयल, मलय पवन। महापुरुष: रघुपति और सीता, श्रीकृष्ण की वंशी-गीता, गौतम की दया और ज्ञान का प्रकाश। दोनों मिलकर मातृभूमि को पुण्य, स्वर्ण, धर्म और कर्म की भूमि बनाते हैं। - [व्याकरण] ‘दया’ और ‘दिया’ में क्या अंतर है? इसी तरह मात्रा बदलने से अर्थ बदलने वाले दो शब्द-युग्म बनाओ।
केवल एक मात्रा का अंतर है, पर अर्थ पूरी तरह अलग है — ‘दया’ करुणा है, ‘दिया’ प्रकाश देने वाली वस्तु/ज्ञान का प्रकाश। जैसे घड़ा-घड़ी (पाठ का उदाहरण)। - [लेखन] अपने गाँव/शहर की तीन विशेषताएँ (प्रकृति, खान-पान या प्रसिद्ध स्थान) लिखो और बताओ कि वह स्थान तुम्हें कैसा लगता है।
अपने अनुभव से लिखो — पहले स्थान का नाम, फिर उसकी प्रकृति/खान-पान/प्रसिद्ध स्थान, अंत में अपना भाव।
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