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Chapter 6: तुम कल्पना करो

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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तुम कल्पना करो — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6)  |  अध्याय 6  |  प्रकार: कविता  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

तुम कल्पना करो के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): कल्पना की दुनिया में डूबा एक बच्चा। यह एक सामान्य चित्र है, किताब का दृश्य नहीं।

तुम कल्पना करो के लिए चित्र

अपनी कल्पना को चित्रों में उतारते बच्चे — रचनात्मकता का एक सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

यह कविता किशोरों से एक पुकार है — तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो। कवि कहता है कि समाज की पुरानी नीतियाँ अब घिस गई हैं, मनुष्य की अतीत की रीतियाँ भी घिस गई हैं, और कुरीतियाँ — खराब रीति-रिवाज़ — हमें चुनौतियाँ दे रही हैं। ऐसे समय में राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए, अर्थात् देश को सुंदर और सशक्त बनाने के लिए, नई कल्पना की ज़रूरत है। पुराने ढर्रे से काम नहीं चलेगा; नई सोच चाहिए।

दूसरे पद में कवि चेतावनी देता है कि केवल रोने-गिड़गिड़ाने से कुछ नहीं होगा: जंजीर आँसुओं की धार से कभी नहीं टूटती, दुख-दर्द दुलार से दूर नहीं भागते, और दासता (गुलामी) पुकार और गुहार से नहीं हटती। इसलिए कवि राष्ट्र-शक्ति की कामना करने को कहता है — ‘तुम कामना करो, किशोर कामना करो’ — अर्थात् देश की शक्ति के लिए इच्छा और संकल्प चाहिए, केवल आँसू नहीं।

तीसरे पद में कवि अतीत की वीरता का स्मरण दिलाता है — चित्तौड़ के प्रताप (महाराणा प्रताप) की कहानियाँ — और कहता है कि युवाओं के बिना स्वदेश की जवानी चली जाती है। इसलिए अब समृद्धि, ऋद्धि-सिद्धि की याचना करने को कहा गया है — देश की समृद्धि के लिए माँग और प्रयास, न कि दरिद्रता में संतोष। (इस पद की बीच की पंक्तियाँ स्कैन में धुंधली हैं, इसलिए यहाँ उनका भाव-स्तर का सार दिया गया है, शब्दशः पाठ नहीं।)

अंतिम पद प्रकृति से स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाता है: आकाश स्वतंत्र है, उसकी मेखला (करधनी, कमरबंद — यहाँ आकाश की विस्तृत फैलाव की उपमा) स्वतंत्र है; वृक्ष भी स्वतंत्र ही खड़ा है, बना है, ढला है; जलप्रपात सदैव श्रृंखला (जंजीर) काटता है — अर्थात् प्रकृति में कोई बंधन नहीं मानता। इसलिए आनंद-शोक, जन्म और मृत्यु के लिए भी स्वतंत्र योजना करने को कहा गया है — ‘तुम योजना करो, स्वतंत्र योजना करो’। कविता का पूरा संदेश चार क्रियाओं में बँधा है: कल्पना करो, कामना करो, याचना करो, योजना करो — और चारों में स्वतंत्रता तथा नई सोच की भावना है।

तुम्हें क्या सीखना चाहिए

इस कविता से चारों पदों के चार काम सीखो — नवीन कल्पना, राष्ट्र-शक्ति की कामना, समृद्धि की याचना, स्वतंत्र योजना — और उनके कारण (घिसी नीतियाँ, कुरीतियों की चुनौती, आँसू/पुकार की व्यर्थता, प्रकृति की स्वतंत्रता)। शब्दार्थ याद रखो (नवीन–नया, मेखला–करधनी, कुरीतियाँ–खराब रीति-रिवाज़, अश्रु-धार–आँसुओं की धार, दासता–गुलामी, कामना–इच्छा, याचना–माँगना), चित्तौड़ के प्रताप का प्रसंग समझो और उपसर्गों से शब्द बनाना सीखो।

मुख्य शब्द

  • नवीन — नया
  • मेखला — करधनी, कमरबंद
  • कुरीतियाँ — खराब रीति-रिवाज़
  • अश्रु-धार — आँसुओं की धार
  • दासता — गुलामी
  • कामना — इच्छा
  • याचना — माँगना
  • रवानियाँ — बहाव (किताब के शब्दार्थ के अनुसार)
  • उपसर्ग — शब्द के शुरू में जुड़कर अर्थ में विशेषता लाने वाला शब्दांश (जैसे प्र, कु, उप, आ, परि, पर, स्व, प्रति)
  • श्रृंखला — जंजीर; बंधन की कड़ी

याद रखें

  • कवि: गोपाल सिंह ‘नेपाली’; कविता का संबोधन किशोरों से है।
  • पद 1: नवीन कल्पना करो — समाज की नीतियाँ और मनुष्य की अतीत रीतियाँ घिस गई हैं; कुरीतियाँ चुनौतियाँ दे रही हैं; राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए नई कल्पना चाहिए।
  • पद 2: कामना करो — जंजीर अश्रु-धार से नहीं टूटती, दुख-दर्द दुलार से नहीं भागते, दासता पुकार-गुहार से नहीं हटती; राष्ट्र-शक्ति की कामना करो।
  • पद 3: याचना करो — चित्तौड़ के प्रताप की कहानियों का स्मरण; समृद्धि, ऋद्धि-सिद्धि की याचना करो।
  • पद 4: योजना करो — आकाश स्वतंत्र है, वृक्ष स्वतंत्र खड़ा है, जलप्रपात सदैव श्रृंखला काटता है; आनंद-शोक, जन्म-मृत्यु के लिए स्वतंत्र योजना करो।
  • चार काम: कल्पना, कामना, याचना, योजना — हर पद एक काम सिखाता है।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: चारों पदों के काम आपस में मिला देना — पद 1 = कल्पना, पद 2 = कामना, पद 3 = याचना, पद 4 = योजना — इसी क्रम में लिखो। दूसरी गलती: ‘दासता हटाने का उपाय आँसू/पुकार है’ लिख देना — कविता साफ़ कहती है कि जंजीर अश्रु-धार से नहीं टूटती और दासता पुकार-गुहार से नहीं हटती। तीसरी गलती: कवि का नाम गलत लिखना — कवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ हैं।

सारणी / चार्ट: चार पद — चार काम

पदकामकारण / आधार
1नवीन कल्पना करोपुरानी नीतियाँ और अतीत रीतियाँ घिस गईं; कुरीतियाँ चुनौती दे रही हैं; राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिए
2राष्ट्र-शक्ति की कामना करोजंजीर अश्रु-धार से नहीं टूटती; दुख-दर्द दुलार से नहीं भागते; दासता पुकार-गुहार से नहीं हटती
3समृद्धि की याचना करोचित्तौड़ के प्रताप की कहानियों का स्मरण; स्वदेश की जवानी युवाओं से है
4स्वतंत्र योजना करोआकाश स्वतंत्र, वृक्ष स्वतंत्र, जलप्रपात श्रृंखला काटता है; आनंद-शोक, जन्म-मृत्यु के लिए

अभ्यास — खुद करके देखो

  1. कविता के चार पदों के चार काम क्रम से लिखो।
    संकेत: कल्पना, कामना, याचना, योजना — इसी क्रम में।
  2. ‘जंजीर अश्रु-धार से नहीं टूटती’ — इसका भाव अपने शब्दों में लिखो।
    संकेत: केवल रोने से बंधन क्यों नहीं टूटते, यह सोचो।
  3. प्रकृति से स्वतंत्रता का क्या पाठ मिलता है? आकाश, वृक्ष और जलप्रपात के उदाहरण लिखो।
    संकेत: तीनों में बंधन न मानने की बात सोचो।
  4. तुम अपने विद्यालय के लिए क्या नवीन कल्पना करोगे? तीन बातें लिखो।
    संकेत: अपने अनुभव से जोड़कर लिखो।
  5. तुम अपने समाज की किन प्रथाओं को समाप्त करना चाहोगे और क्यों? दो प्रथाएँ लिखो।
    संकेत: कुरीतियों के उदाहरण सोचो, पर किसी समुदाय का अपमान न करो।

प्रश्नोत्तर

  1. कविता में किस प्रकार की कल्पना करने को कहा गया है?
    नवीन कल्पना करने को कहा गया है — नई सोच, जो घिसी हुई पुरानी नीतियों और अतीत रीतियों की जगह ले सके और कुरीतियों की चुनौतियों का सामना कर सके, ताकि राष्ट्र के शरीर का सिंगार हो सके।
  2. ‘राष्ट्र के शरीर’ कहने से किसका चित्र मन में आता है?
    राष्ट्र को एक जीवित शरीर के रूप में देखने का चित्र आता है — जिसके अंग उसके लोग, प्रदेश, संस्थाएँ और संस्कृति हैं, और जिसका सिंगार अर्थात् सुंदरता और सशक्ति नई कल्पना से होगी। राष्ट्र कोई निर्जीव नक्शा नहीं, बल्कि एक सजीव शरीर है जिसकी देखभाल और सजावट हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
  3. चित्तौड़ के ‘प्रताप’ की कहानी हमें क्या सिखलाती है?
    चित्तौड़ के प्रताप (महाराणा प्रताप) की कहानी हमें स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संघर्ष की सीख देती है — कठिनाइयों में भी झुकना नहीं, अपनी आन और देश की स्वतंत्रता के लिए डटे रहना। कविता इसी वीरता के स्मरण से युवाओं में समृद्धि की याचना और शक्ति की कामना जगाना चाहती है।
  4. इस कविता के माध्यम से हमें क्या-क्या करने की बात कही गई है?
    चार बातें: (1) नवीन कल्पना करो, (2) राष्ट्र-शक्ति की कामना करो, (3) समृद्धि, ऋद्धि-सिद्धि की याचना करो, (4) स्वतंत्र योजना करो। और न करने की बात: केवल आँसू बहाना, दुलार से दुख दूर होने की आशा करना, या पुकार-गुहार से दासता हटने की आशा करना — ये व्यर्थ हैं।
  5. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
    मुख्य संदेश है कि देश को नई सोच, शक्ति की कामना, समृद्धि की याचना और स्वतंत्र योजना की ज़रूरत है — पुराने ढर्रे, कुरीतियाँ और केवल रोना-गिड़गिड़ाना देश को आगे नहीं ले जाएँगे। प्रकृति भी यही सिखाती है: आकाश, वृक्ष और जलप्रपात — सब स्वतंत्र हैं और बंधन नहीं मानते।

किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर

किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर। व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से लिखने हैं।

  1. पाठ से 1 — पाठ के आधार पर आप किस प्रकार की कल्पना कीजिएगा?
    नवीन कल्पना — ऐसी नई सोच जो घिसी हुई नीतियों और अतीत रीतियों की जगह ले, कुरीतियों की चुनौतियों का सामना करे और राष्ट्र के शरीर के सिंगार, अर्थात् देश को सुंदर और सशक्त बनाने का काम करे।
  2. पाठ से 2 — ‘राष्ट्र के शरीर’ कहने से आपके मन में किसका चित्र आता है?
    राष्ट्र का एक सजीव शरीर के रूप में चित्र — जिसके अंग उसके लोग, प्रदेश और संस्थाएँ हैं। जैसे शरीर की देखभाल और सजावट ज़रूरी है, वैसे ही राष्ट्र की सुंदरता और शक्ति के लिए नई कल्पना और सबके प्रयास ज़रूरी हैं।
  3. पाठ से 3 — चित्तौड़ के ‘प्रताप’ की कहानी हमें क्या सिखलाती है?
    स्वतंत्रता और स्वाभिमान की सीख — कठिनाइयों में भी न झुकना, अपनी आन पर डटे रहना और देश के लिए संघर्ष करना। यही वीरता युवाओं को शक्ति और समृद्धि की कामना-याचना के लिए प्रेरित करती है।
  4. पाठ से 4 — इस कविता के माध्यम से हमें क्या-क्या करने की बात कही गई है?
    नवीन कल्पना करना, राष्ट्र-शक्ति की कामना करना, समृद्धि की याचना करना और स्वतंत्र योजना करना — चारों काम, इसी क्रम में। साथ ही यह भी कि आँसू, दुलार और पुकार-गुहार से बंधन नहीं टूटते — इसलिए संकल्प और योजना चाहिए।
  5. पाठ से 5 — नीचे लिखी पंक्तियों को पूरा कीजिए: ‘जंजीर टूटती कभी न अश्रु-धार से; हटती न दासता पुकार से, गुहार से; …’
    पूरा भाव इस प्रकार है: जंजीर टूटती कभी न अश्रु-धार से; दुख-दर्द दूर भागते नहीं दुलार से; हटती न दासता पुकार से, गुहार से — और फिर राष्ट्र-शक्ति की कामना की पंक्तियाँ आती हैं (‘तुम कामना करो, किशोर कामना करो, तुम कामना करो’)। (नोट: इस पद की एक बीच की पंक्ति स्कैन में अस्पष्ट है, इसलिए यहाँ पुष्ट पंक्तियाँ दी गई हैं — किताब से मिलान करके पूरी पंक्ति लिखो।)
  6. पाठ से आगे 1 — आकाश को स्वतंत्र क्यों कहा गया है?
    क्योंकि आकाश पर कोई बंधन नहीं है — वह खुला और असीम है, उसकी मेखला (फैलाव) भी स्वतंत्र है। वह किसी की जंजीर में नहीं बँधा; इसी से वह स्वतंत्रता का प्रतीक है, जैसे वृक्ष स्वतंत्र खड़ा है और जलप्रपात श्रृंखला काटता है।
  7. पाठ से आगे 2 — कविता को पढ़ने के बाद अपने मन में कौन-सा भाव उत्पन्न होता है?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: देश-प्रेम और उत्साह का भाव, नई सोच और कुछ करने की इच्छा। अपना भाव और उसका कारण लिखो।)
  8. पाठ से आगे 3 — इस पाठ के प्रत्येक पद में एक-एक काम करने के लिए कहा गया है; उन्हें खोजिए और प्रत्येक के संबंध में पाँच पंक्तियाँ लिखिए।
    चार काम हैं — कल्पना, कामना, याचना, योजना। प्रत्येक के बारे में पाँच पंक्तियाँ इस प्रकार लिखो: (कल्पना) नई सोच क्या है, क्यों ज़रूरी है, किसके लिए है, कैसे की जाए, क्या परिणाम होगा — इसी ढंग से कामना, याचना और योजना के बारे में भी पाँच-पाँच पंक्तियाँ लिखो। (विधि दी गई है; अपना लेखन स्वयं करो।)
  9. पाठ से आगे 4 — ‘इस कविता को पढ़ने से मेरा मन … से भर गया।’ (प्रेम, श्रद्धा, उत्साह, देश-प्रेम) — उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरिए तथा चुने हुए शब्द के लिए अपना विचार दीजिए।
    उचित शब्द: देश-प्रेम — ‘इस कविता को पढ़ने से मेरा मन देश-प्रेम से भर गया।’ क्योंकि कविता राष्ट्र के सिंगार, राष्ट्र-शक्ति और समृद्धि की बात करती है और चित्तौड़ के प्रताप का स्मरण दिलाती है — यह सब देश-प्रेम जगाता है। (उत्साह भी ठीक लगता है, पर देश-प्रेम कविता के केंद्रीय भाव के सबसे निकट है।)
  10. व्याकरण 1 — र् के भिन्न-भिन्न रूपों का प्रयोग करते हुए शब्द लिखिए।
    र् के मुख्य रूप: (1) रेफ — र् किसी व्यंजन से पहले आता है, जैसे कर्म, धर्म, सूर्य (र् ऊपर की ओर लगता है)। (2) पदेन (्र) — र् किसी व्यंजन के बाद आता है, जैसे प्रेम, क्रम, ट्रक (र् नीचे की ओर लगता है)। इन रूपों से पाँच-पाँच शब्द इस प्रकार बनाओ: रेफ वाले — कर्म, धर्म, सूर्य, वर्ष, चर्चा; पदेन वाले — प्रेम, क्रम, ट्रक, प्रिय, क्रिया। (नोट: किताब के इस प्रश्न की शब्द-सूची स्कैन में अपठनीय है, इसलिए यहाँ रूपों की विधि + उदाहरण दिए गए हैं — किताब की सूची से मिलान करके अपने शब्द लिखो।)
  11. व्याकरण 2 — उपसर्गों से दो-दो शब्द बनाइए: प्र, कु, उप, आ, परि, पर, स्व, प्रति।
    प्र — प्रहार, प्रबल (किताब के उदाहरण)। कु — कुकर्म, कुप्रथा। उप — उपकार, उपवन। आ — आगमन, आजीवन। परि — परिश्रम, परिवर्तन। पर — परदेश, परहित। स्व — स्वदेश, स्वतंत्र। प्रति — प्रतिदिन, प्रतिकार। उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो शब्द के शुरू में जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता लाते हैं।
  12. कुछ करने को 1 — आप एक अच्छे विद्यालय की कल्पना कीजिए और बताइए कि विद्यालय में क्या-क्या होना चाहिए।
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: अच्छी कक्षाएँ, पुस्तकालय, खेल का मैदान, अच्छे शिक्षक, स्वच्छ पानी, पुस्तकें — और बताओ कि तुम्हारी कल्पना का विद्यालय कैसा होगा।)
  13. कुछ करने को 2 — आप अपने समाज की किन-किन प्रथाओं को समाप्त करना चाहते हैं और क्यों?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: कुरीतियाँ जो लोगों को नुकसान पहुँचाती हैं या भेद-भाव बढ़ाती हैं, उन्हें समाप्त करना चाहोगे — नाम और कारण सहित, बिना किसी का अपमान किए।)

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलें, फिर बिना देखे अभ्यास करके देखें। प्रश्नोत्तर से अपने आप को जाँचें। अपने उत्तर शिक्षक या माता-पिता से जाँचवाएँ।

महत्वपूर्ण प्रश्न — प्रश्न और उत्तर (Important Questions)

नीचे दिए गए प्रश्न ‘तुम कल्पना करो’ की समझ की जाँच के लिए हैं — उत्तर पहले बिना देखे लिखें, फिर पृष्ठ से मिलाकर सुधारें।

  1. ‘तुम कल्पना करो’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
    ‘तुम कल्पना करो’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके शीर्षक और उसके प्रसंगों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है।
  2. ‘नवीन’ का अर्थ प्रसंग सहित समझाइए।
    ‘नवीन’ का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, बल्कि ‘तुम कल्पना करो’ के प्रसंग से समझना चाहिए। पहले इसका सामान्य अर्थ लिखें, फिर यह बताएँ कि पाठ में यह किस प्रसंग में आया है और उस प्रसंग में इसका क्या महत्त्व है। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
  3. ‘तुम कल्पना करो’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
    इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है।
  4. ‘तुम कल्पना करो’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
    सबसे बड़ी गलती है — केवल सार रट लेना, बिना प्रसंग और शब्दार्थ समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है।
  5. ‘तुम कल्पना करो’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
    रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
  6. ‘मेखला’ जैसे मुख्य शब्दों को लंबे समय तक याद रखने की विधि क्या है?
    मुख्य शब्दों को तीन के समूह में बाँटकर पढ़ें — शब्द, अर्थ और प्रसंग। प्रत्येक समूह को एक वाक्य में बाँधकर बोलकर दोहराएँ, फिर बिना देखे लिखें। अगले दिन फिर से बिना देखे लिखकर जाँचें। जो शब्द छूट जाए, उसे फिर से प्रसंग सहित पढ़ें। बोलना, लिखना और अगले दिन दोहराना — यही तीन चरण किसी भी शब्द को स्थायी बनाते हैं।
  7. ‘तुम कल्पना करो’ को पढ़ने के बाद स्वयं से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए?
    पहला — इस पाठ का केंद्रीय भाव एक वाक्य में क्या है? दूसरा — मुख्य शब्दों का प्रसंग सहित अर्थ क्या है? तीसरा — इस पाठ की सीख मेरे जीवन में कहाँ काम आएगी? यदि इन तीनों प्रश्नों के उत्तर बिना पुस्तक देखे दिए जा सकें, तो पाठ तैयार है। यदि कोई उत्तर अटके, तो उसी अंश को दोबारा पढ़ें।
  8. ‘तुम कल्पना करो’ के उत्तर में मूल पाठ की नकल क्यों नहीं करनी चाहिए?
    क्योंकि परीक्षक समझ की जाँच करता है, याददाश्त की नकल की नहीं। मूल पंक्तियों की नकल से यह पता नहीं चलता कि विद्यार्थी ने भाव समझा है या नहीं। अपने शब्दों में लिखा गया उत्तर, भले ही सरल हो, यह सिद्ध करता है कि भाव समझ में आ गया है। इसीलिए सार और उत्तर हमेशा अपनी भाषा में लिखें, मुख्य शब्दों को छोड़कर।