Chapter 3: चिड़िया
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
चिड़िया — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6) | अध्याय 3 | प्रकार: कविता | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): ऊँची डाली पर गाती चिड़िया और पास का घोंसला। यह एक सामान्य चित्र है, किताब का दृश्य नहीं।

खुले आसमान में आज़ाद उड़ते पक्षी — आज़ादी का एक सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया गाती है, और अपनी बोली में वह मनुष्य को एक संदेश सुनाती है। चिड़िया प्रेम-प्रीति की रीति सिखलाती है — मिल-जुलकर रहने की रीति — और जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है, अर्थात् बंधनों से मुक्त होकर जीने का मंत्र। कविता का यही केंद्रीय संदेश है: पक्षियों का जीवन मनुष्य के लिए एक पाठ है।
कविता पक्षियों का एक सुंदर चित्र खींचती है। वन में जितने पक्षी हैं — खंजन, कपोत (कबूतर), चातक (पपीहा), कोकिल (कोयल), काक (कौआ), हंस, शुक (तोता) आदि — वे सब आपस में हिल-मिलकर रहते हैं और सब मिल-जुलकर खाते हैं। आसमान ही उनका घर है; जहाँ चाहते हैं, वहाँ जाते हैं। उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं है, परवाह नहीं है — जग का सारा माल हड़पकर जीने की भी चाह नहीं है। जो मिलता है, अपने श्रम से, उतना भर वे ले लेते हैं; जो बच जाता है, उसे औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं। सीमाहीन गगन में उड़ते हुए वे निर्भय विचरण करते हैं।
अंत में चिड़िया मनुष्य को सीधे संबोधित करती है: मानव, हमसे जग में जीना सीखो — हम स्वच्छन्द (स्वतंत्र) हैं, और तुमने अपने पग में बेड़ी क्यों डाल ली है? अर्थात् मनुष्य ने स्वयं अपने पैरों में बंधनों की जंजीर डाल ली है — लोभ, पाप और परवाह की बेड़ियाँ। पीपल की डाली पर चिड़िया यही सुनाने आती है; घड़ी भर बैठकर, हमें चकित करके, गाकर फिर उड़ जाती है। कविता की सीख स्पष्ट है: लोभ छोड़ो, श्रम से जितना मिले उसी में संतोष करो, बचा हुआ औरों के हित में दो, मिल-जुलकर रहो और स्वतंत्र मन से जियो।
तुम्हें क्या सीखना चाहिए
इस कविता से चिड़िया के संदेश के तीन भाग सीखो — प्रेम-प्रीति की रीति, मिल-जुलकर रहना और खाना, तथा लोभ-रहित, श्रम-संतोषी जीवन। पक्षियों के नाम और उनके शब्दार्थ याद रखो (कपोत–कबूतर, कोकिल–कोयल, शुक–तोता, चातक–पपीहा, काक–कौआ, वास–रहना, स्वच्छन्द–स्वतंत्र, बेड़ी–जंजीर, विचरण–घूमना-फिरना, पग–पैर), विशेषण की परिभाषा समझो और ‘घर’ लगाकर बनने वाले शब्दों का अभ्यास करो।
मुख्य शब्द
- कपोत — कबूतर
- कोकिल — कोयल
- शुक — तोता
- चातक — पपीहा
- काक — कौआ
- वास — रहना
- स्वच्छन्द — स्वतंत्र; अपनी इच्छा से विचरने वाला
- बेड़ी — जंजीर; पैर में डालने वाला बंधन
- विचरण — घूमना-फिरना
- पग — पैर
- प्रीति — प्रेम; स्नेह
- विशेषण — संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द (जैसे ‘ऊँची’ डाली में ऊँची)
याद रखें
- चिड़िया पीपल की ऊँची डाली पर बैठकर गाती है और मनुष्य को संदेश सुनाती है।
- संदेश: प्रेम-प्रीति की रीति सीखो; बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र — बंधनों से मुक्ति का मंत्र।
- पक्षी: खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस, शुक आदि — सब आपस में हिल-मिलकर रहते हैं, मिल-जुलकर खाते हैं।
- आसमान ही उनका घर है; जहाँ चाहते हैं, वहाँ जाते हैं; सीमाहीन गगन में निर्भय विचरते हैं।
- उनके मन में लोभ नहीं, पाप नहीं, परवाह नहीं; जग का सारा माल हड़पकर जीने की चाह नहीं।
- जो मिलता है, अपने श्रम से, उतना भर लेते हैं; बचा हुआ औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।
- मनुष्य से कहा गया है: हमसे जीना सीखो — हम स्वच्छन्द हैं, तुमने अपने पग में बेड़ी क्यों डाली है?
- अंत: चिड़िया घड़ी भर बैठकर, हमें चकित करके, गाकर फिर उड़ जाती है।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: पक्षियों के नाम गलत लिखना — कपोत = कबूतर, कोकिल = कोयल, शुक = तोता, चातक = पपीहा, काक = कौआ — इन्हें आपस में न मिलाएँ। दूसरी गलती: केवल ‘चिड़िया गाती है’ लिखकर उत्तर छोड़ देना — परीक्षा में उसके तीनों संदेश लिखो: प्रेम-प्रीति की रीति, मिल-जुलकर रहना, लोभ-रहित श्रम-संतोषी जीवन। तीसरी गलती: ‘बेड़ी’ को गहना समझ लेना — यहाँ बेड़ी का अर्थ जंजीर/बंधन है, जो मनुष्य ने अपने पग में स्वयं डाली है।
सारणी / चार्ट: चिड़िया का संदेश — पक्षी बनाम मानव
| विषय | पक्षियों का जीवन (कविता के अनुसार) | मनुष्य से अपेक्षा |
|---|---|---|
| रहना-खाना | सब आपस में हिल-मिलकर रहते हैं, मिल-जुलकर खाते हैं | प्रेम-प्रीति की रीति अपनाओ |
| घर | आसमान ही घर है; जहाँ चाहते हैं, जाते हैं | बंधनों से मुक्ति का मंत्र सीखो |
| मन | लोभ नहीं, पाप नहीं, परवाह नहीं; माल हड़पने की चाह नहीं | लोभ छोड़ो |
| कमाई | अपने श्रम से जितना मिलता है, उतना भर लेते हैं | श्रम से मिले में संतोष करो |
| बचत | बचा हुआ औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं | दूसरों के हित में देना सीखो |
| विचरण | सीमाहीन गगन में निर्भय विचरते हैं, स्वच्छन्द हैं | अपने पग की बेड़ी खोलो |
अभ्यास — खुद करके देखो
- चिड़िया मनुष्य को कौन-कौन से संदेश सुनाती है? तीन संदेश लिखो।
संकेत: प्रेम-प्रीति, मुक्ति-मंत्र और स्वच्छन्द जीवन — तीनों सोचो। - पक्षियों के जीवन से मनुष्य को क्या सीखना चाहिए? दो सीख लिखो।
संकेत: लोभ न करना और मिल-जुलकर रहना — इन पर सोचो। - ‘हम स्वच्छन्द और क्यों तुमने डाली है बेड़ी पग में’ — इस पंक्ति का भाव अपने शब्दों में लिखो।
संकेत: बेड़ी का अर्थ जंजीर/बंधन है, गहना नहीं। - कपोत, कोकिल, शुक, चातक, काक — इनके सामान्य नाम लिखो।
संकेत: शब्दार्थ-सूची को बिना देखे याद करने की कोशिश करो। - आजकल पक्षियों की संख्या क्यों कम होती जा रही है? दो कारण और एक सुझाव लिखो।
संकेत: अपने आस-पास के वातावरण के बारे में सोचो।
प्रश्नोत्तर
- चिड़िया पीपल की ऊँची डाली पर बैठकर क्या संदेश सुनाती है?
चिड़िया प्रेम-प्रीति की रीति सिखलाती है और जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है। उसका संदेश है: मिल-जुलकर रहो, लोभ छोड़ो, अपने श्रम से मिले में संतोष करो, बचा हुआ औरों के हित में दो, और स्वच्छन्द होकर जियो — अपने पग में बेड़ी मत डालो। - पक्षियों का जीवन कैसा बताया गया है?
पक्षी आपस में हिल-मिलकर रहते हैं और मिल-जुलकर खाते हैं। आसमान ही उनका घर है; जहाँ चाहते हैं, वहाँ जाते हैं। उनके मन में लोभ, पाप और परवाह नहीं है; जग का सारा माल हड़पकर जीने की चाह भी नहीं है। वे सीमाहीन गगन में निर्भय विचरते हैं। - ‘जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं’ — इससे क्या सीख मिलती है?
सीख यह है कि श्रम से जो मिले, उसी में संतोष करना चाहिए और लालच से अधिक हड़पने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जो बच जाए, उसे औरों के हित के लिए छोड़ देना चाहिए — यही पक्षियों का जीवन-नियम है और मनुष्य के लिए भी यही आदर्श है। - चिड़िया मनुष्य को क्या सीखने को कहती है?
चिड़िया कहती है: मानव, हमसे जग में जीना सीखो। हम स्वच्छन्द हैं, और तुमने अपने पग में बेड़ी क्यों डाल ली है? अर्थात् मनुष्य ने लोभ, पाप और चिंता की बेड़ियाँ स्वयं अपने पैरों में डाल ली हैं; उसे उनसे मुक्त होकर स्वतंत्र मन से जीना सीखना चाहिए। - इस कविता की मुख्य सीख क्या है?
मुख्य सीख है: प्रेम और मेल-जोल से रहो, लोभ छोड़ो, श्रम और संतोष का जीवन जियो, दूसरों के हित में देना सीखो और मन के बंधनों से मुक्त होकर स्वच्छन्द जीवन जियो — जैसे पक्षी जीते हैं।
किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर
किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर।
- पाठ से 1 — चिड़िया पीपल की ऊँची डाली पर बैठकर क्या-क्या संदेश सुनाती है?
चिड़िया प्रेम-प्रीति की रीति सिखलाती है, जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है, और यह कहती है कि मानव पक्षियों से जीना सीखे — मिल-जुलकर रहना, लोभ छोड़ना, श्रम-संतोष और स्वच्छन्दता ही उसके संदेश हैं। - पाठ से 2(क) — भाव स्पष्ट कीजिए: ‘सब मिल-जुलकर रहते हैं, सब मिल-जुलकर खाते हैं। आसमान ही उनका घर है, जहाँ चाहते जाते हैं।’
भाव यह है कि पक्षियों में कोई भेद-भाव या लड़ाई नहीं है — वे सब मिलकर रहते और खाते हैं। उनका घर कोई बंद मकान नहीं, खुला आसमान है; वे जहाँ चाहें, वहाँ जा सकते हैं। यह स्वतंत्र और मेल-जोल भरे जीवन का चित्र है, जो मनुष्य के लिए आदर्श है। - पाठ से 2(ख) — भाव स्पष्ट कीजिए: ‘जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं। बच जाता तो औरों के हित उसे छोड़ वे देते हैं।’
भाव यह है कि पक्षी लालच नहीं करते — अपने परिश्रम से जितना मिलता है, उतने में संतुष्ट रहते हैं। यदि कुछ बच जाए, तो उसे अपने पास जमा नहीं करते, बल्कि औरों के भले के लिए छोड़ देते हैं। यह संतोष और परोपकार का भाव है। - पाठ से 3(क) — रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए: ‘उनके मन में लोभ नहीं है। जग का सारा माल हड़पकर …’
इस छंद का भाव पूरा इस प्रकार है: उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं; जग का सारा माल हड़पकर जीने की भी चाह नहीं। (नोट: किताब के इस प्रश्न में ठीक-ठाक कौन-सी पंक्ति खाली छोड़ी गई है, वह स्कैन में अस्पष्ट है — इसलिए यहाँ छंद का पूरा भाव दिया गया है; किताब से मिलान करके खाली पंक्ति लिखो।) - पाठ से 3(ख) — रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए: ‘वे कहते हैं — मानव! सीखो, ……………… हम स्वच्छन्द और क्यों तुमने …’
पूर्ति है: ‘वे कहते हैं — मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में। हम स्वच्छन्द और क्यों तुमने डाली है बेड़ी पग में।’ अर्थात् पक्षी मनुष्य से कहते हैं कि हमसे जग में जीना सीखो — हम स्वतंत्र हैं, तुमने अपने पैरों में बेड़ी क्यों डाल ली है? - पाठ से आगे 1 — आजकल पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है; इसे रोकने के लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: पेड़ लगाना और उनकी रक्षा करना, पक्षियों के लिए पानी और दाना रखना, कीटनाशकों का कम प्रयोग, शोर और प्रदूषण कम करना, पक्षियों का शिकार रोकना। दो-तीन सुझाव कारणों सहित लिखो।) - पाठ से आगे 2(क) — कविता में से उन पंक्तियों को छाँटिए, जिनमें चिड़ियों के स्वच्छन्द रूप से खुले आकाश में उड़ने की बात की गई है।
वे पंक्तियाँ हैं — ‘आसमान ही उनका घर है, जहाँ चाहते जाते हैं’ और ‘सीमाहीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं’ — इनमें पक्षियों के खुले आकाश में स्वतंत्र विचरण की बात है। - पाठ से आगे 2(ख) — कविता में से उन पंक्तियों को छाँटिए, जिनमें मनुष्य को दुश्मनी की भावना छोड़ने की बात कही गई है।
सीधे ‘दुश्मनी’ शब्द वाली पंक्ति कविता के स्पष्ट पाठ में नहीं दिखती; दुश्मनी छोड़ने का भाव प्रेम-प्रीति वाली पंक्तियों में है — ‘चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है’ — अर्थात् प्रेम की रीति अपनाने का अर्थ ही है दुश्मनी की भावना छोड़ना। (नोट: यह जोड़ किताब के प्रश्न के भाव से किया गया है; शिक्षक से मिलान करके पक्का करो।) - पाठ से आगे 3 — क्या चिड़िया के संदेशों के अनुसार मानव कार्य करते हैं? अपना विचार प्रस्तुत कीजिए।
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: नहीं, अधिकतर मानव लोभ और लड़ाई में लगे हैं, पक्षियों जैसा मिल-जुलकर रहना और संतोष कम दिखता है; पर कुछ लोग प्रेम और परोपकार से रहते भी हैं। अपना मत उदाहरणों सहित लिखो।) - व्याकरण 1 — इन शब्दों से वाक्य बनाइए: लोभ, गगन, जग, संदेश, पाप।
लोभ — लोभ मनुष्य के मन की बेड़ी है। गगन — पक्षी सीमाहीन गगन में उड़ते हैं। जग — चिड़िया जग के मानव को संदेश सुनाती है। संदेश — चिड़िया का संदेश प्रेम और स्वतंत्रता का है। पाप — पक्षियों के मन में पाप नहीं होता। - व्याकरण 2 — विशेषण: ‘ऊँची डाली, काली चिड़िया’ में ऊँची और काली विशेषण हैं (संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं)।
परिभाषा: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए, वह विशेषण कहलाता है। कविता के उदाहरण: ‘ऊँची’ डाली की विशेषता बताता है, ‘स्वच्छन्द’ पक्षियों की विशेषता बताता है, ‘सीमाहीन’ गगन की विशेषता बताता है। (नोट: किताब के इस प्रश्न की संज्ञा-सूची स्कैन में अपठनीय है, इसलिए यहाँ सूची के बजाय कविता के उदाहरणों से विशेषण की पहचान दी गई है — किताब की सूची से मिलान करके अपने विशेषण लिखो।) - व्याकरण 3 — ‘चिड़ियाघर’ में चिड़िया + घर दो शब्द आए हैं; इस तरह के और शब्द बनाइए।
रसोई + घर = रसोईघर; सिनेमा + घर = सिनेमाघर; डाक + घर = डाकघर; अजायब + घर = अजायबघर; पार्सल + घर = पार्सलघर; पूजा + घर = पूजाघर; भंडार + घर = भंडारघर। ये सभी दो शब्दों के मेल से बने हैं, जैसे चिड़ियाघर। - कुछ करने को 1 — विभिन्न पक्षियों की सूची बनाइए एवं उनके चित्र बनाकर कक्षा में लगाइए।
(गतिविधि: खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस, शुक आदि की सूची बनाओ, उनके चित्र बनाओ और कक्षा में लगाओ।) - कुछ करने को 2 — यदि संसार में एक भी पक्षी नहीं हो, तो आपको कैसा लगेगा? अपने विचार कक्षा में सुनाइए।
(अपना उत्तर लिखो और कक्षा में सुनाओ — जैसे: सुबह की चहचहाहट के बिना सूना लगेगा, प्रकृति अधूरी लगेगी, कीट बढ़ जाएँगे।) - कुछ करने को 3 — इसी प्रकार की कोई और कविता ढूँढ़िए और कक्षा में सुनाइए।
(गतिविधि: पक्षियों या प्रकृति पर कोई और कविता ढूँढ़कर कक्षा में सुनाओ।)
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