Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Chapter 20: पहेलियाँ

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print lets you save as PDF from the browser. This is not a textbook PDF.

पहेलियाँ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6)  |  अध्याय 20  |  प्रकार: पहेलियाँ  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

पहेलियाँ के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पहेली के टुकड़ों पर सोचते बच्चे। यह एक सामान्य चित्र है, किताब का दृश्य नहीं।

पहेलियाँ के लिए चित्र

पहेली बूझने का खेल खेलते बच्चे — सोच का एक सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

पहेली एक ऐसा प्रश्न है, जिसमें उत्तर सीधे नहीं बताया जाता — लक्षणों और संकेतों से उत्तर को पहचानना होता है। इस पाठ में सात पहेलियाँ दी गई हैं (ध्यान रहे — ‘20’ इस पाठ की अध्याय-संख्या है, पहेलियों की संख्या नहीं)। हर पहेली को पढ़ो, उसके लक्षणों को समझो और उत्तर खोजो। जिन पहेलियों के उत्तर पक्के हैं, वे नीचे दिए गए हैं; जिनके उत्तर किताब में नहीं दिए गए हैं, उन्हें कक्षा में बुझाने के लिए संकेत सहित छोड़ा गया है — अनुमान से उत्तर नहीं लिखे गए हैं।

पहेली 1: ‘आग लगे मेरे ही बल से, हर इन्सान के आती काम। दिन में पौधे मुझे बनाते, अब बतलाओ मेरा नाम॥’ — उत्तर: ऑक्सीजन (प्राणवायु) — आग ऑक्सीजन के बल से ही लगती है, हर इन्सान को साँस के लिए इसकी ज़रूरत होती है, और दिन में पौधे प्रकाश-संश्लेषण से इसे बनाते हैं।

पहेली 2: ‘एक फूल काले रंग का, सबके सिर सहाय। तेज़ धूप में खिला रहे, छाया देख मुरझाए॥’ — उत्तर: छाता — काले रंग का, सबके सिर पर सहायक; तेज़ धूप में खुलता (खिलता) है, छाया में बंद (मुरझा) जाता है।

पहेली 3: ‘एक सींग की ऐसी गाय, जितना दो उतना ही खाय। खाते-खाते गाना गाय, पेट नहीं उसका भर पाय॥’ — उत्तर किताब में नहीं दिया गया है; कक्षा में बुझाओ। संकेत: जो सब कुछ खा जाए, खाते समय आवाज़ करे और कभी न भरे — ऐसी कौन-सी चीज़ है?

पहेली 4: ‘एक पहेली मैं कहूँ, तू सुन ले मेरे पूत। बिन परों वह उड़ गई, बान्ध गले में सूत॥’ — उत्तर: पतंग — बिना पंखों के उड़ती है, गले (डोर) में सूत (धागा) बाँधकर उड़ाई जाती है।

पहेली 5: ‘नदी हूँ पर पानी नहीं, सड़क हूँ पर गाड़ी नहीं। भूमि हूँ पर फ़सल नहीं, बस्ती (गाँव) हूँ पर घर नहीं॥’ — उत्तर: मानचित्र (नक्शा) — नक्शे में नदी, सड़क, भूमि, बस्ती सब बने होते हैं, पर उनमें पानी, गाड़ी, फ़सल, घर नहीं होते।

पहेली 6: ‘ऐसा लिखिए शब्द बनाय। फूल, फल, मिठाई बन जाय॥’ — उत्तर किताब में नहीं दिया गया है; कक्षा में बुझाओ। संकेत: एक शब्द फूल है, दूसरा फल — दोनों मिलकर मिठाई बन जाते हैं।

पहेली 7: ‘ऊँट की बैठक, हिरण की चाल। वह कौन-सा जानवर, जिसके दुम न बाल॥’ — उत्तर किताब में नहीं दिया गया है; कक्षा में बुझाओ। संकेत: बैठने का ढंग एक जानवर जैसा, चलने का ढंग दूसरे जैसा, और दुम नहीं — कक्षा में चर्चा करके उत्तर खोजो।

तुम्हें क्या सीखना चाहिए

इस पाठ से सीखो — पहेली कैसे बुझाई जाती है: हर पंक्ति के लक्षण को पकड़ो (आग का बल + साँस की ज़रूरत + पौधों का बनाना = ऑक्सीजन; काला फूल + सिर की सहायता + धूप में खिलना = छाता; बिना परों के उड़ना + गले में सूत = पतंग; नदी-सड़क-भूमि-बस्ती बिना पानी-गाड़ी-फ़सल-घर के = मानचित्र)। और यह भी सीखो कि हर पहेली का उत्तर तुरंत नहीं मिलता — कुछ पहेलियाँ कक्षा में चर्चा करके बुझाई जाती हैं, जैसे इस पाठ की पहेलियाँ 3, 6 और 7।

मुख्य शब्द

  • पहेली — लक्षणों और संकेतों से उत्तर पहचानने वाला प्रश्न
  • प्राणवायु — ऑक्सीजन; साँस के लिए आवश्यक गैस
  • प्रकाश-संश्लेषण — पौधों द्वारा दिन में ऑक्सीजन बनाने की क्रिया
  • मानचित्र — नक्शा; किसी स्थान का चित्र-रूप
  • सूत — धागा, डोर
  • संकलन — संग्रह, इकट्ठा करना

याद रखें

  • पाठ: ‘पहेलियाँ’; इस पाठ में सात पहेलियाँ हैं (‘20’ अध्याय-संख्या है)।
  • पहेली 1 — ऑक्सीजन: आग का बल, साँस की ज़रूरत, पौधे दिन में बनाते हैं।
  • पहेली 2 — छाता: काला फूल, सिर का सहायक, धूप में खिलता, छाया में मुरझाता।
  • पहेली 3 — उत्तर किताब में नहीं है: एक सींग की गाय, जितना दो उतना खाए, खाते-खाते गाना गाए, पेट न भरे।
  • पहेली 4 — पतंग: बिना परों के उड़े, गले में सूत बाँधकर।
  • पहेली 5 — मानचित्र: नदी बिना पानी, सड़क बिना गाड़ी, भूमि बिना फ़सल, बस्ती बिना घर।
  • पहेली 6 — उत्तर किताब में नहीं है: ऐसा शब्द लिखो कि फूल, फल, मिठाई बन जाए।
  • पहेली 7 — उत्तर किताब में नहीं है: ऊँट की बैठक, हिरण की चाल, दुम न बाल।
  • किताब की गतिविधि: पहेलियों का संकलन कर अपनी कक्षा में बुझाइए।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: पहेली 5 का उत्तर ‘नदी’ या ‘सड़क’ लिखना — नदी में पानी होता है, सड़क पर गाड़ी चलती है; यहाँ मानचित्र है, जिसमें सब कुछ चित्र में होता है, असल में कुछ नहीं। दूसरी गलती: पहेली 4 का उत्तर ‘पक्षी’ लिखना — पक्षी के पर होते हैं; यहाँ पतंग है, जो बिना परों के उड़ती है। तीसरी गलती: पहेलियाँ 3, 6, 7 के उत्तर अनुमान से लिख देना — इनके उत्तर किताब में नहीं दिए गए हैं; इन्हें कक्षा में चर्चा करके बुझाना है, अनुमान से नहीं। चौथी गलती: ‘20 पहेलियाँ’ समझना — पाठ में सात पहेलियाँ हैं; 20 अध्याय-संख्या है।

सारणी / चार्ट: सात पहेलियाँ — एक दृष्टि में

पहेलीपहचानउत्तर
1आग का बल, साँस की ज़रूरत, पौधे बनाते हैंऑक्सीजन
2काला फूल, सिर का सहायक, धूप में खिलताछाता
3एक सींग की गाय, खाते-खाते गाना, पेट न भरेकक्षा में बुझाओ (संकेत सहित)
4बिना परों के उड़े, गले में सूतपतंग
5नदी बिना पानी, सड़क बिना गाड़ी, बस्ती बिना घरमानचित्र
6एक शब्द से फूल, फल, मिठाईकक्षा में बुझाओ (संकेत सहित)
7ऊँट की बैठक, हिरण की चाल, दुम न बालकक्षा में बुझाओ (संकेत सहित)

अभ्यास — खुद करके देखो

  1. पहेली 3 को बुझाओ: ‘एक सींग की ऐसी गाय, जितना दो उतना ही खाय। खाते-खाते गाना गाय, पेट नहीं उसका भर पाय॥’ — संकेत: जो सब कुछ खा जाए, खाते समय आवाज़ करे और कभी न भरे।
    संकेत: खाते समय आवाज़ करने वाली चीज़ों के बारे में सोचो।
  2. पहेली 6 को बुझाओ: ‘ऐसा लिखिए शब्द बनाय। फूल, फल, मिठाई बन जाय॥’ — संकेत: एक शब्द फूल है, दूसरा फल — दोनों मिलकर मिठाई बन जाते हैं।
    संकेत: फूलों और फलों के नामों को जोड़कर सोचो।
  3. पहेली 7 को बुझाओ: ‘ऊँट की बैठक, हिरण की चाल। वह कौन-सा जानवर, जिसके दुम न बाल॥’ — कक्षा में चर्चा करके उत्तर खोजो।
    संकेत: बैठने और चलने के ढंग अलग-अलग जानवरों जैसे हैं; दुम नहीं है।
  4. अपनी तीन पहेलियाँ बनाओ और कक्षा में बुझाओ।
    संकेत: किसी चीज़ के 2–3 लक्षण चुनो, नाम छिपाओ, चार पंक्तियों में लिखो।
  5. पहेलियों का संकलन करो: घर के लोगों और किताबों से 10 पहेलियाँ इकट्ठा करके कक्षा में बुझाओ।
    संकेत: किताब की गतिविधि के अनुसार — संकलन करके कक्षा में सुनाओ।

प्रश्नोत्तर

  1. पहेली क्या होती है? इस पाठ में कितनी पहेलियाँ हैं?
    पहेली एक ऐसा प्रश्न है, जिसमें उत्तर सीधे नहीं बताया जाता — लक्षणों और संकेतों से उत्तर को पहचानना होता है। इस पाठ में सात पहेलियाँ हैं (20 अध्याय-संख्या है, पहेलियों की संख्या नहीं)।
  2. पहेली 1 का उत्तर क्या है और क्यों?
    ऑक्सीजन (प्राणवायु) — क्योंकि आग ऑक्सीजन के बल से ही लगती है, हर इन्सान को साँस के लिए इसकी ज़रूरत होती है, और दिन में पौधे प्रकाश-संश्लेषण से इसे बनाते हैं।
  3. पहेली 2 का उत्तर क्या है और क्यों?
    छाता — क्योंकि वह काले रंग का फूल-सा लगता है, सबके सिर पर सहायक होता है, तेज़ धूप में खुलता (खिलता) है और छाया में बंद (मुरझा) जाता है।
  4. पहेली 4 का उत्तर क्या है और क्यों?
    पतंग — क्योंकि वह बिना परों के उड़ती है और उसके गले (डोर) में सूत (धागा) बाँधकर उड़ाई जाती है।
  5. पहेली 5 का उत्तर क्या है और क्यों?
    मानचित्र (नक्शा) — क्योंकि नक्शे में नदी, सड़क, भूमि, बस्ती सब बने होते हैं, पर उनमें असल पानी, गाड़ी, फ़सल, घर नहीं होते।

किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर

किताब के इस पाठ में शब्दार्थ/पाठ से/व्याकरण खंड नहीं हैं — केवल पहेलियाँ और नीचे दी गई गतिविधि है। EG के अपने शब्दों में उत्तर।

  1. पहेली 1 — आग लगे मेरे ही बल से, हर इन्सान के आती काम। दिन में पौधे मुझे बनाते, अब बतलाओ मेरा नाम॥
    उत्तर: ऑक्सीजन (प्राणवायु)।
  2. पहेली 2 — एक फूल काले रंग का, सबके सिर सहाय। तेज़ धूप में खिला रहे, छाया देख मुरझाए॥
    उत्तर: छाता।
  3. पहेली 3 — एक सींग की ऐसी गाय, जितना दो उतना ही खाय। खाते-खाते गाना गाय, पेट नहीं उसका भर पाय॥
    उत्तर किताब में नहीं दिया गया है — कक्षा में बुझाओ। संकेत: जो सब कुछ खा जाए, खाते समय आवाज़ करे और कभी न भरे।
  4. पहेली 4 — एक पहेली मैं कहूँ, तू सुन ले मेरे पूत। बिन परों वह उड़ गई, बान्ध गले में सूत॥
    उत्तर: पतंग।
  5. पहेली 5 — नदी हूँ पर पानी नहीं, सड़क हूँ पर गाड़ी नहीं। भूमि हूँ पर फ़सल नहीं, बस्ती (गाँव) हूँ पर घर नहीं॥
    उत्तर: मानचित्र (नक्शा)।
  6. पहेली 6 — ऐसा लिखिए शब्द बनाय। फूल, फल, मिठाई बन जाय॥
    उत्तर किताब में नहीं दिया गया है — कक्षा में बुझाओ। संकेत: एक शब्द फूल है, दूसरा फल — दोनों मिलकर मिठाई बन जाते हैं।
  7. पहेली 7 — ऊँट की बैठक, हिरण की चाल। वह कौन-सा जानवर, जिसके दुम न बाल॥
    उत्तर किताब में नहीं दिया गया है — कक्षा में बुझाओ। संकेत: बैठने का ढंग एक जानवर जैसा, चलने का ढंग दूसरे जैसा, और दुम नहीं।
  8. कुछ करने को 1 — पहेलियों का संकलन कर अपनी कक्षा में बुझाइए।
    (गतिविधि: घर के लोगों, किताबों और पत्रिकाओं से पहेलियाँ इकट्ठा करो और कक्षा में बुझाओ।)

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलें, फिर बिना देखे अभ्यास करके देखें। प्रश्नोत्तर से अपने आप को जाँचें। अपने उत्तर शिक्षक या माता-पिता से जाँचवाएँ।

महत्वपूर्ण प्रश्न — प्रश्न और उत्तर (Important Questions)

नीचे दिए गए प्रश्न ‘पहेलियाँ’ की समझ की जाँच के लिए हैं — उत्तर पहले बिना देखे लिखें, फिर पृष्ठ से मिलाकर सुधारें।

  1. ‘पहेलियाँ’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
    ‘पहेलियाँ’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके शीर्षक और उसके प्रसंगों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है।
  2. ‘पहेली’ का अर्थ प्रसंग सहित समझाइए।
    ‘पहेली’ का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, बल्कि ‘पहेलियाँ’ के प्रसंग से समझना चाहिए। पहले इसका सामान्य अर्थ लिखें, फिर यह बताएँ कि पाठ में यह किस प्रसंग में आया है और उस प्रसंग में इसका क्या महत्त्व है। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
  3. ‘पहेलियाँ’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
    इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है।
  4. ‘पहेलियाँ’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
    सबसे बड़ी गलती है — केवल सार रट लेना, बिना प्रसंग और शब्दार्थ समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है।
  5. ‘पहेलियाँ’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
    रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
  6. ‘प्राणवायु’ जैसे मुख्य शब्दों को लंबे समय तक याद रखने की विधि क्या है?
    मुख्य शब्दों को तीन के समूह में बाँटकर पढ़ें — शब्द, अर्थ और प्रसंग। प्रत्येक समूह को एक वाक्य में बाँधकर बोलकर दोहराएँ, फिर बिना देखे लिखें। अगले दिन फिर से बिना देखे लिखकर जाँचें। जो शब्द छूट जाए, उसे फिर से प्रसंग सहित पढ़ें। बोलना, लिखना और अगले दिन दोहराना — यही तीन चरण किसी भी शब्द को स्थायी बनाते हैं।
  7. ‘पहेलियाँ’ को पढ़ने के बाद स्वयं से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए?
    पहला — इस पाठ का केंद्रीय भाव एक वाक्य में क्या है? दूसरा — मुख्य शब्दों का प्रसंग सहित अर्थ क्या है? तीसरा — इस पाठ की सीख मेरे जीवन में कहाँ काम आएगी? यदि इन तीनों प्रश्नों के उत्तर बिना पुस्तक देखे दिए जा सकें, तो पाठ तैयार है। यदि कोई उत्तर अटके, तो उसी अंश को दोबारा पढ़ें।
  8. ‘पहेलियाँ’ के उत्तर में मूल पाठ की नकल क्यों नहीं करनी चाहिए?
    क्योंकि परीक्षक समझ की जाँच करता है, याददाश्त की नकल की नहीं। मूल पंक्तियों की नकल से यह पता नहीं चलता कि विद्यार्थी ने भाव समझा है या नहीं। अपने शब्दों में लिखा गया उत्तर, भले ही सरल हो, यह सिद्ध करता है कि भाव समझ में आ गया है। इसीलिए सार और उत्तर हमेशा अपनी भाषा में लिखें, मुख्य शब्दों को छोड़कर।

विस्तार — ‘पहेलियाँ’ को गहराई से समझें

किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘पहेलियाँ’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।

इस पाठ के मुख्य शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है। परिभाषा, प्रसंग और परिणाम — यही तीन कड़ियाँ किसी भी शब्द को परीक्षा के उत्तर में पूरा बनाती हैं।

पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है, और वहीं दोहराव सबसे अधिक काम आता है।