Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Chapter 18: शेरशाह का मकबरा

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print lets you save as PDF from the browser. This is not a textbook PDF.

शेरशाह का मकबरा — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6)  |  अध्याय 18  |  प्रकार: यात्रा वृतान्त  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

शेरशाह का मकबरा के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): तालाब के बीच खड़ा गुंबद वाला मकबरा। यह एक सामान्य चित्र है, किसी वास्तविक स्मारक का फोटो नहीं।

शेरशाह का मकबरा के लिए चित्र

पुल से स्मारक की ओर जाते लोग — यात्रा का एक सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

‘वह देखो! बस आ रही है,’ हेडमास्टर साहब ने कहा। सभी बच्चे सड़क की ओर निहारने लगे। कुछ ही क्षणों में बस विद्यालय के निकट आ गई। बच्चे मारे खुशी के शोर मचाने लगे — ‘बस आ गई, बस आ गई।’ ‘अब बस भी करो,’ हेडमास्टर साहब ने बच्चों से कहा। बच्चे शांत हो गए, परंतु उनके चेहरों पर खुशी की चमक और उत्सुकता की लहर साफ़ दिखाई दे रही थी। वह सभी शेरशाह के मकबरे की सैर के लिए व्याकुल हो रहे थे। इतने में आशा मैडम बच्चों के पास आकर बोलीं — ‘सभी बच्चे लाइन में खड़े होकर एक-एक करके बस के अंदर जाएँ और अपनी सीट लेकर बैठ जाएँ।’ थोड़ी ही देर में सभी बच्चे बस पर सवार हो गए। हेडमास्टर साहब ने आशा मैडम के अतिरिक्त महिमा मैडम और पूर्णनाथ सर को भी बच्चों के साथ जाने को कहा। बच्चे पूर्णनाथ सर के जाने से बहुत अधिक खुश थे, क्योंकि इनसे इतिहास पढ़ने में बच्चों को बहुत आनंद आता था। दिन के दस बज रहे थे। अक्टूबर का महीना था। मौसम बहुत सुहाना था। धूप बहुत भली लग रही थी। गाड़ी के खलासी ने बस का गेट बंद किया और ड्राइवर को गाड़ी बढ़ाने को कहा। देखते ही देखते बस मेनरोड पर आ गई। काली-काली सड़क पर बस हॉर्न बजाते हुए तेज़ी से आगे बढ़ने लगी।

‘शेरशाह के बारे में कुछ बताइए सर,’ सूरज ने आग्रह किया। पूर्णनाथ सर ने कहा — ‘आप ध्यान से सुनें, बताता हूँ।’ उन्होंने कहना शुरू किया — ‘शेरशाह भारत के महान शासकों में एक थे। इनका जन्म 1472 में हुआ। इनका बचपन सासाराम में बीता। इनके बचपन का नाम फ़रीद खाँ था। यह हसन खाँ सूरी के पुत्र थे। हसन खाँ एक बड़े जागीरदार थे। फ़रीद ने अकेले एक शेर को मार दिया था, तब से यह शेर खाँ कहलाने लगे थे। वे बहुत विद्वान, बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति थे। इनका सारा जीवन संघर्ष में बीता। कम उम्र से ही वह पिता की जागीर की देखभाल करने लगे। इन्होंने बाबर की सेना में नौकरी भी की थी। वे बहुत अनुभवी व्यक्ति थे।’ ‘सर, वे बादशाह कैसे बन गए?’ सुमन ने जानना चाहा। ‘शेरशाह ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पराजित करके दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा कर लिया और सूरीवंश की स्थापना की।’ ‘शेरशाह बहुत जवान होंगे तब न, उन्होंने बादशाह हुमायूँ को हरा दिया,’ रामिश ने कहा। ‘नहीं, वह जवान नहीं थे, उनकी आयु 68 वर्ष की थी। जीतने के लिए हिम्मत और साहस की आवश्यकता होती है। तुम्हें यह जानना चाहिए कि उनकी सेना में ज़्यादातर सिपाही बिहार के थे,’ पूर्णनाथ सर ने कहा। संजू ने जानना चाहा — ‘यह लड़ाई कब और कहाँ हुई थी, सर?’ ‘सन् 1540 ई. में कन्नौज में,’ सर ने उत्तर दिया। ‘सर, उनके पास तो बहुत सारा रुपया-पैसा था। वह बहुत आराम से रहते होंगे! उन्हें कोई चिंता नहीं होगी,’ नटखट राजू को जानने की जिज्ञासा हुई। पूर्णनाथ सर ने कहा — ‘नहीं, ऐसी बात नहीं है। इन्हें अपनी जनता की बहुत चिंता थी। वह केवल पाँच वर्ष ही शासन कर सके, परंतु उन्होंने जनता की सेवा के लिए बहुत सारे कल्याणकारी कार्य किए। सड़कें बनवाईं, सड़कों के किनारे यात्रियों के ठहरने के लिए जगह-जगह पर सराय बनवाई, जगह-जगह कुएँ खुदवाए। सड़कों के किनारे वृक्ष लगवाए। उन्होंने डाक और संचार की व्यवस्था में सुधार किए। विभिन्न क्षेत्रों में बहुत सारे सुधार किए, जिसे बाद के राजाओं ने भी अपनाया। राजस्व व लगान की व्यवस्था में उन्होंने महत्त्वपूर्ण सुधार किए, जिससे किसानों को लाभ हुआ। किसानों को बहुत आसानी से ऋण दिया जाता था। जनता खुश थी, इसलिए कि यह न्यायप्रिय बादशाह थे।’

अब बस एक बहुत चौड़ी सड़क पर आ गई। पूर्णनाथ सर ने बताया — ‘यह सड़क ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से जानी जाती है। यह कोलकाता से पेशावर (पाकिस्तान) तक जाती है। इस सड़क को भी शेरशाह ने ही बनवाया था। यह उनका महान योगदान था।’ अब कुछ ही समय में बस सासाराम पहुँच गई। शहर में पहुँचकर बच्चों की उत्सुकता और बढ़ गई। शहर की सड़कों से गुज़रती हुई बस एक बहुत बड़े तालाब के किनारे आकर रुक गई। ‘लो आ गया शेरशाह का मकबरा!’ पूर्णनाथ सर ने कहा। आशा और महिमा मैडम ने बच्चों को आराम से उतर जाने को कहा। जमाली ने कहा — ‘बाप रे बाप! इतना बड़ा और इतना सुंदर।’ सभी बच्चे भी इसकी सुंदरता को देखकर चकित हो गए। शिक्षकों ने सभी बच्चों को एक साथ जमा हो जाने को कहा; सभी बच्चे एक जगह जमा हो गए। पूर्णनाथ सर ने फिर बताना शुरू किया — ‘देखिए! यह मकबरे पर जाने का मुख्य द्वार है, इसके दोनों ओर मस्जिदें हैं।’ बच्चों को पानी के बीच भवन देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। ‘मकबरे का निर्माण किसने करवाया?’ बच्चों ने जानने की इच्छा व्यक्त की। पूर्णनाथ सर ने कहा — ‘1545 ई. में कालिंजर के किले की घेराबंदी के समय एक विस्फोट में शेरशाह के देहांत के उपरांत उनके पुत्र और उत्तराधिकारी इसलाम शाह सूरी ने इस मकबरे को बनवाया। मकबरे को बनाने के लिए एक बहुत बड़ा तालाब खुदवाया गया, ताकि मकबरा और सुंदर दिखाई दे। विशेष देखने की बात यह है कि यह मकबरा भवन एक ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बनाया गया है।’ सर ने बच्चों से जानना चाहा कि वे देखकर बताएँ मकबरा किस चीज़ से बना है। सभी बच्चों ने कहा — ‘पत्थर से।’ ‘कितनी भुजाओं वाला है यह?’ ‘आठ,’ सभी ने एक साथ कहा। ‘इसकी कितनी मंज़िलें हैं?’ ‘तीन,’ सभी ने ज़ोरों से कहा। ‘कितना ऊँचा होगा यह मकबरा?’ ‘पता नहीं सर, आप बता दीजिए।’ ‘45 मीटर से ऊँचा है,’ सर ने कहा। ‘इसका गुंबद कितना बड़ा होगा!’ ‘बहुत बड़ा,’ बच्चों ने कहा। ‘बच्चों, आपको पता होना चाहिए, इसका गुंबद ताजमहल के गुंबद से 3 फ़ुट बड़ा है।’ सर ने बताया कि ‘यह मकबरा अफ़गान शैली का बेहतरीन नमूना है।’

सभी बच्चे और शिक्षकगण मकबरे के बीच वाले भाग में पहुँच गए। यहाँ खूब रोशनी और हवा आ रही थी। मकबरे के ऊपरी भाग में कई खिड़कियाँ और जालियाँ थीं। सर ने बच्चों से कहा — ‘इस मकबरे में शेरशाह सूरी के अतिरिक्त उनके चौबीस साथी दफ़न हैं।’ अफ़गान शैली की इस वास्तुकला (स्थापत्य कला) को देखकर बच्चे बहुत आनंदित हो रहे थे। मकबरे के हर ओर से पानी में जाने के लिए सीढ़ियाँ हैं। बच्चे नीचे जाना चाह रहे थे, पर दोनों ने हाथ पकड़कर रोक लिया। कुछ बच्चे मकबरे की दीवारों पर लोगों द्वारा लिखे गए नामों और वाक्यों को पढ़ रहे थे। सर ने बच्चों को बताया कि जो लोग ऐतिहासिक धरोहर के महत्त्व को नहीं जानते, वैसे लोग ही ऐसी गंदी हरकतें करते हैं। पुरू ने कहा — ‘सर, झील का पानी बहुत गंदा दिखाई दे रहा है।’ ‘हाँ, आपने सही कहा, लोग गंदा पानी इसमें गिरा देते हैं। परंतु अब ज़िला प्रशासन ने गंदे पानी गिराने पर पूर्णतः रोक लगा दी है। अब यह मकबरा हमारे देश के ऐतिहासिक धरोहरों की सूची में आ गया है। हमारी राज्य सरकार भी इस मकबरे के रख-रखाव पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है।’ पूर्णनाथ सर ने बच्चों से जानना चाहा कि इसे साफ़ रखने का दायित्व किस पर है। सभी बच्चों ने एक स्वर में कहा — ‘हम सभी नागरिकों पर।’ अब ढाई बज चुके थे। सभी को भूख लग गई थी। सभी ने एक साथ खाना खाया। पीछे मुड़कर एक बार फिर मकबरे की ओर देखा और बस पर सवार हो गए।

तुम्हें क्या सीखना चाहिए

इस पाठ से सीखो — शेरशाह का जीवन-क्रम (जन्म 1472, बचपन सासाराम, बचपन का नाम फ़रीद खाँ, पिता हसन खाँ सूरी, शेर मारने पर शेर खाँ, बाबर की सेना में नौकरी, 1540 कन्नौज में हुमायूँ पर विजय, आयु 68 वर्ष, सूरीवंश की स्थापना, केवल पाँच वर्ष का शासन, 1545 कालिंजर में देहांत); जनहित कार्य (सड़कें, सराय, कुएँ, वृक्ष, डाक-संचार सुधार, लगान-सुधार, किसानों को आसान ऋण); मकबरे की विशेषताएँ (सासाराम, तालाब के बीच, ऊँचा चौकोर चबूतरा, पत्थर, आठ भुजाएँ, तीन मंज़िलें, 45 मीटर से ऊँचा, गुंबद ताजमहल से 3 फ़ुट बड़ा, अफ़गान शैली, मुख्य द्वार के दोनों ओर मस्जिदें, चौबीस साथी दफ़न); और धरोहर-संरक्षण का संदेश (दीवारों पर नाम लिखना गंदी हरकत; सफ़ाई का दायित्व सभी नागरिकों पर)। शब्दार्थ याद रखो (मकबरा, जागीर, दफ़न, ऐतिहासिक धरोहर, उत्सुकता) और संज्ञा-सर्वनाम के भेद सीखो।

मुख्य शब्द

  • मकबरा — वह कब्र जिस पर इमारत या गुंबद हो
  • जागीर — पुरस्कार स्वरूप राजाओं-महाराजाओं द्वारा दी गई ज़मीन
  • दफ़न — ज़मीन में गाड़ना, मृत शरीर का कब्र में दफ़न होना
  • ऐतिहासिक धरोहर — इतिहास संबंधी अमानत
  • उत्सुकता — प्रबल इच्छा
  • सराय — यात्रियों के ठहरने का स्थान
  • वास्तुकला — स्थापत्य कला, भवन-निर्माण कला
  • ग्रैंड ट्रंक रोड — कोलकाता से पेशावर तक की सड़क, शेरशाह द्वारा बनवाई गई

याद रखें

  • पाठ: ‘शेरशाह का मकबरा’; भ्रमण: हेडमास्टर साहब, आशा मैडम, महिमा मैडम, पूर्णनाथ सर और बच्चे; दिन के दस बजे, अक्टूबर का महीना।
  • शेरशाह: जन्म 1472; बचपन सासाराम में; बचपन का नाम फ़रीद खाँ; पिता हसन खाँ सूरी (बड़े जागीरदार); अकेले शेर मारने पर शेर खाँ।
  • जीवन: विद्वान, बहादुर, बुद्धिमान; सारा जीवन संघर्ष में; कम उम्र से जागीर की देखभाल; बाबर की सेना में नौकरी।
  • बादशाह: 1540 में कन्नौज में हुमायूँ को पराजित करके दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा; सूरीवंश की स्थापना; आयु 68 वर्ष; सेना में ज़्यादातर सिपाही बिहार के थे।
  • शासन: केवल पाँच वर्ष; जनहित कार्य — सड़कें (ग्रैंड ट्रंक रोड), सराय, कुएँ, वृक्ष, डाक-संचार सुधार, लगान-सुधार, किसानों को आसान ऋण; न्यायप्रिय बादशाह।
  • मृत्यु: 1545 में कालिंजर के किले की घेराबंदी के समय विस्फोट में देहांत; पुत्र इसलाम शाह सूरी ने मकबरा बनवाया।
  • मकबरा: सासाराम में, बड़े तालाब के बीच, ऊँचे चौकोर चबूतरे पर; पत्थर से बना; आठ भुजाएँ; तीन मंज़िलें; 45 मीटर से ऊँचा; गुंबद ताजमहल के गुंबद से 3 फ़ुट बड़ा; अफ़गान शैली का बेहतरीन नमूना।
  • अन्य विशेषताएँ: मुख्य द्वार के दोनों ओर मस्जिदें; बीच वाले भाग में रोशनी-हवा; ऊपरी भाग में खिड़कियाँ-जालियाँ; शेरशाह के अतिरिक्त चौबीस साथी दफ़न; हर ओर पानी में जाने की सीढ़ियाँ।
  • बिहार से संबंध: बचपन सासाराम में बीता; सेना में ज़्यादातर सिपाही बिहार के; मकबरा सासाराम में है।
  • संरक्षण: दीवारों पर नाम लिखना गंदी हरकत; झील में गंदा पानी गिराने पर ज़िला प्रशासन की पूर्ण रोक; राज्य सरकार हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है; सफ़ाई का दायित्व सभी नागरिकों पर।
  • वापसी: ढाई बजे खाना खाया; पीछे मुड़कर मकबरे की ओर देखा; बस पर सवार हो गए।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: जन्म-वर्ष या युद्ध-वर्ष गलत लिखना — किताब के अनुसार जन्म 1472, कन्नौज-युद्ध 1540, मृत्यु 1545 याद रखो। दूसरी गलती: मकबरा बनाने वाले का नाम गलत लिखना — मकबरा शेरशाह ने नहीं, उनके पुत्र इसलाम शाह सूरी ने बनवाया। तीसरी गलती: मंज़िलों या भुजाओं की संख्या गलत लिखना — आठ भुजाएँ, तीन मंज़िलें, 45 मीटर से ऊँचा याद रखो। चौथी गलती: गुंबद की तुलना उल्टी लिखना — मकबरे का गुंबद ताजमहल के गुंबद से 3 फ़ुट बड़ा है। पाँचवीं गलती: ग्रैंड ट्रंक रोड किसी और की बताना — यह सड़क शेरशाह ने ही बनवाई थी।

सारणी / चार्ट: शेरशाह — जीवन और मकबरा

विषयविवरण
जन्म / बचपन1472; बचपन सासाराम में; बचपन का नाम फ़रीद खाँ; पिता हसन खाँ सूरी
बादशाह बनना1540, कन्नौज में हुमायूँ पर विजय; आयु 68 वर्ष; सूरीवंश की स्थापना
शासनकेवल पाँच वर्ष; सड़कें, सराय, कुएँ, वृक्ष, डाक-संचार, लगान-सुधार, आसान ऋण
मृत्यु1545, कालिंजर की घेराबंदी में विस्फोट
मकबरासासाराम; तालाब के बीच; चौकोर चबूतरा; पत्थर; आठ भुजाएँ; तीन मंज़िलें; 45 मीटर से ऊँचा; गुंबद ताजमहल से 3 फ़ुट बड़ा; अफ़गान शैली; पुत्र इसलाम शाह सूरी ने बनवाया

अभ्यास — खुद करके देखो

  1. शेरशाह के जीवन की पाँच घटनाएँ क्रम से लिखो: जन्म, बचपन का नाम, बादशाह बनना, शासन-कार्य, मृत्यु।
    संकेत: वर्ष — 1472, 1540, 1545 — और आयु 68 वर्ष को याद करो।
  2. शेरशाह के जनहित कार्यों की सूची बनाओ और बताओ कि प्रत्येक से जनता को क्या लाभ हुआ।
    संकेत: सड़क, सराय, कुआँ, वृक्ष, डाक, लगान, ऋण — हर एक का लाभ सोचो।
  3. मकबरे की विशेषताएँ गिनाओ: स्थान, चबूतरा, भुजाएँ, मंज़िलें, ऊँचाई, गुंबद, शैली, बनाने वाला।
    संकेत: आठ, तीन, 45 मीटर, 3 फ़ुट, अफ़गान — संख्याओं को याद करो।
  4. ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए तुम क्या सुझाव दोगे? तीन सुझाव लिखो।
    संकेत: दीवारों पर नाम लिखना, गंदा पानी गिराना — इनके उल्टे काम सोचो।
  5. अगर तुम्हें किसी ऐतिहासिक स्थल की सैर पर जाना हो, तो क्या-क्या तैयारी करोगे? सूची बनाओ।
    संकेत: बस, शिक्षक, खाना, समय — पाठ के भ्रमण से जोड़कर सोचो।

प्रश्नोत्तर

  1. शेरशाह ने जनहित के लिए कौन-कौन से कार्य किए?
    सड़कें बनवाईं (ग्रैंड ट्रंक रोड — कोलकाता से पेशावर तक); सड़कों के किनारे यात्रियों के ठहरने के लिए जगह-जगह सराय बनवाई; जगह-जगह कुएँ खुदवाए; सड़कों के किनारे वृक्ष लगवाए; डाक और संचार की व्यवस्था में सुधार किए; राजस्व व लगान की व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण सुधार किए, जिससे किसानों को लाभ हुआ; किसानों को बहुत आसानी से ऋण दिया जाता था। वे न्यायप्रिय बादशाह थे, इसलिए जनता खुश थी।
  2. शेरशाह के मकबरे की क्या विशेषता है?
    मकबरा सासाराम में एक बड़े तालाब के बीच, ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बना है। यह पत्थर से बना है, आठ भुजाओं वाला है, तीन मंज़िलों का है, 45 मीटर से ऊँचा है, और इसका गुंबद ताजमहल के गुंबद से 3 फ़ुट बड़ा है। यह अफ़गान शैली का बेहतरीन नमूना है। मुख्य द्वार के दोनों ओर मस्जिदें हैं; बीच वाले भाग में रोशनी-हवा आती है; ऊपरी भाग में खिड़कियाँ-जालियाँ हैं; शेरशाह के अतिरिक्त उनके चौबीस साथी इसमें दफ़न हैं; हर ओर से पानी में जाने के लिए सीढ़ियाँ हैं।
  3. शेरशाह का बिहार से क्या संबंध है?
    तीन संबंध हैं — उनका बचपन सासाराम (बिहार) में बीता; उनकी सेना में ज़्यादातर सिपाही बिहार के थे; और उनका मकबरा भी सासाराम (बिहार) में है।
  4. शेरशाह के जीवन की प्रमुख घटनाओं का सही क्रम लिखो।
    जन्म 1472 (सासाराम में बचपन, नाम फ़रीद खाँ) → बाबर की सेना में नौकरी → 1540 में कन्नौज में हुमायूँ पर विजय (आयु 68 वर्ष), दिल्ली की गद्दी, सूरीवंश की स्थापना → पाँच वर्ष का जनहित-शासन → 1545 में कालिंजर की घेराबंदी में विस्फोट से देहांत → पुत्र इसलाम शाह सूरी द्वारा मकबरे का निर्माण।
  5. ऐतिहासिक धरोहरों को साफ़ रखने का दायित्व किस पर है और क्यों?
    सभी नागरिकों पर — जैसा कि बच्चों ने एक स्वर में कहा। धरोहरें देश की अमानत हैं; दीवारों पर नाम लिखना गंदी हरकत है, और झील में गंदा पानी गिराना भी; ज़िला प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार रख-रखाव पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है, पर असली ज़िम्मेदारी नागरिकों की ही है।

किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर

किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर। व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से लिखने हैं।

  1. पाठ से 1 — शेरशाह ने जनहित के लिए कौन-कौन से कार्य किए?
    सड़कें, सराय, कुएँ, वृक्ष, डाक-संचार सुधार, लगान-सुधार, किसानों को आसान ऋण।
  2. पाठ से 2 — शेरशाह के मकबरे की क्या विशेषता है?
    सासाराम में तालाब के बीच, चौकोर चबूतरा, पत्थर, आठ भुजाएँ, तीन मंज़िलें, 45 मीटर से ऊँचा, गुंबद ताजमहल से 3 फ़ुट बड़ा, अफ़गान शैली, दोनों ओर मस्जिदें, चौबीस साथी दफ़न।
  3. पाठ से 3 — शेरशाह का बिहार से क्या संबंध है?
    बचपन सासाराम में बीता; सेना में ज़्यादातर सिपाही बिहार के; मकबरा सासाराम में है।
  4. पाठ से 4 — स्तंभ ‘क’ को स्तंभ ‘ख’ से मिलान कीजिए।
    शेरशाह का जन्म — 1472; शेरशाह के पिता — हसन खाँ सूरी; कन्नौज में हुमायूँ से युद्ध — 1540; शेरशाह की मृत्यु — 1545; शेरशाह का पुत्र — इसलाम शाह सूरी।
  5. पाठ से 5 — रिक्त स्थानों को भरिए (केवल वे जो स्कैन में पढ़े जा सके)।
    (ग) शेरशाह का मकबरा सासाराम में है। (घ) शेरशाह के बचपन का नाम फ़रीद खाँ था। (ङ) यह मकबरा अफ़गान शैली का बेहतरीन नमूना है। (नोट: रिक्त-स्थान (क)(ख) स्कैन में कटे हुए हैं, इसलिए वे यहाँ नहीं दिए गए हैं — किताब से देखकर भरो।)
  6. पाठ से आगे 1 — अगर आपको कहीं का राजा बना दिया जाए, तो आप आम-जनता के लिए क्या करना चाहेंगे?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: सड़कें, स्कूल, अस्पताल, पानी, सफ़ाई — शेरशाह के कार्यों से प्रेरणा लेकर लिखो।)
  7. पाठ से आगे 2 — केवल पाँच वर्षों के शासनकाल में शेरशाह ने बहुत सारे कार्य किए। कैसे? सोचकर बताइए।
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: क्योंकि वे अनुभवी, परिश्रमी और जनता की चिंता करने वाले थे; उन्होंने सही योजनाएँ बनाईं और उन्हें जल्दी पूरा किया।)
  8. पाठ से आगे 3 — अधिक उम्र होने के बावजूद शेरशाह ने हुमायूँ को पराजित किया। सोचिए, वह ऐसा कैसे कर पाया?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: जीतने के लिए उम्र नहीं, हिम्मत और साहस चाहिए — जैसा कि पूर्णनाथ सर ने कहा; अनुभव और अच्छी सेना भी कारण थे।)
  9. पाठ से आगे 4 — ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: दीवारों पर नाम न लिखें, कूड़ा न फैलाएँ, गंदा पानी न गिराएँ, सबको धरोहर का महत्त्व समझाएँ।)
  10. व्याकरण 1 — निम्नलिखित संज्ञाओं के प्रकार बताइए।
    बादशाह — जातिवाचक; हुमायूँ — व्यक्तिवाचक; सेना — समूहवाचक; बुढ़ापा — भाववाचक; पानी — द्रव्यवाचक; बचपन — भाववाचक; बच्चे — जातिवाचक; बस — जातिवाचक; सड़क — जातिवाचक; ताजमहल — व्यक्तिवाचक।
  11. व्याकरण 2 — निम्नलिखित सर्वनामों के प्रकार बताइए।
    यह — निश्चयवाचक; सभी — अनिश्चयवाचक; इतने — अनिश्चयवाचक; कुछ — अनिश्चयवाचक; अपने-आप — निजवाचक; जैसे-जैसे — संबंधवाचक; कौन — प्रश्नवाचक; तुमने — पुरुषवाचक (मध्यम पुरुष); कहाँ — प्रश्नवाचक; कब — प्रश्नवाचक। (नोट: सभी और इतने के वर्गीकरण पर पुस्तकों में मतभेद हो सकता है — शिक्षक से मिलान करके पक्का करो।)
  12. व्याकरण 3 — शब्द-समूहों को व्यवस्थित कर वाक्य पूरा कीजिए।
    (क) अब बस एक बहुत चौड़ी सड़क पर आ गई। (ख) अपनी सीट लेकर बैठ जाएँ। (ग) अब ढाई बज चुके थे। (घ) सभी ने एक साथ खाना खाया। (ङ) यह मकबरा कितना ऊँचा होगा?
  13. व्याकरण 4 — पर्यायवाची शब्द लिखिए।
    पुत्र — बेटा, सुत, तनय; वृक्ष — पेड़, तरु, पादप; विद्यालय — स्कूल, पाठशाला; शिक्षक — गुरु, अध्यापक, आचार्य; सराय — धर्मशाला, मुसाफ़िरखाना।
  14. व्याकरण 5 — प्रत्येक पंक्ति में एक शब्द बाकी शब्दों से मेल नहीं खाता है, उस शब्द पर गोला लगाइए।
    (क) कोलकाता, पेशावर, कन्नौज, सिपाही — सिपाही (बाकी स्थान हैं)। (ख) शेरशाह, हुमायूँ, प्रधानाध्यापक, बाबर — प्रधानाध्यापक (बाकी बादशाह हैं)। (ग) मकबरा, ड्राइवर, खलासी, कंडक्टर — मकबरा (बाकी बस-कर्मचारी हैं)। (घ) झील, सरकार, नदी, समुद्र — सरकार (बाकी जल-स्रोत हैं)।
  15. कुछ करने को 1 — शेरशाह से संबंधित जानकारियाँ एकत्रित कीजिए और एक आलेख तैयार कीजिए।
    (गतिविधि: शेरशाह के जीवन, शासन-कार्यों और मकबरे के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करके एक आलेख लिखो।)
  16. कुछ करने को 2 — हमारे देश में शेरशाह के मकबरे के अलावा और किन-किन बादशाहों के मकबरे हैं और वे कहाँ हैं? पता करके सूची बनाइए।
    (गतिविधि: अन्य बादशाहों के मकबरों — जैसे ताजमहल (आगरा), हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली) — की सूची बनाओ; किताब/शिक्षक से मिलान करो।)
  17. कुछ करने को 3 — अपने प्रधानाध्यापक या वर्ग-शिक्षक से मिलकर किसी ऐतिहासिक स्थल को देखने का कार्यक्रम तैयार कीजिए।
    (गतिविधि: प्रधानाध्यापक/वर्ग-शिक्षक से मिलकर किसी ऐतिहासिक स्थल की सैर का कार्यक्रम बनाओ।)

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलें, फिर बिना देखे अभ्यास करके देखें। प्रश्नोत्तर से अपने आप को जाँचें। अपने उत्तर शिक्षक या माता-पिता से जाँचवाएँ।

महत्वपूर्ण प्रश्न — प्रश्न और उत्तर (Important Questions)

नीचे दिए गए प्रश्न ‘शेरशाह का मकबरा’ की समझ की जाँच के लिए हैं — उत्तर पहले बिना देखे लिखें, फिर पृष्ठ से मिलाकर सुधारें।

  1. ‘शेरशाह का मकबरा’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
    ‘शेरशाह का मकबरा’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके शीर्षक और उसके प्रसंगों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है।
  2. ‘मकबरा’ का अर्थ प्रसंग सहित समझाइए।
    ‘मकबरा’ का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, बल्कि ‘शेरशाह का मकबरा’ के प्रसंग से समझना चाहिए। पहले इसका सामान्य अर्थ लिखें, फिर यह बताएँ कि पाठ में यह किस प्रसंग में आया है और उस प्रसंग में इसका क्या महत्त्व है। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
  3. ‘शेरशाह का मकबरा’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
    इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है।
  4. ‘शेरशाह का मकबरा’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
    सबसे बड़ी गलती है — केवल सार रट लेना, बिना प्रसंग और शब्दार्थ समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है।
  5. ‘शेरशाह का मकबरा’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
    रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
  6. ‘जागीर’ जैसे मुख्य शब्दों को लंबे समय तक याद रखने की विधि क्या है?
    मुख्य शब्दों को तीन के समूह में बाँटकर पढ़ें — शब्द, अर्थ और प्रसंग। प्रत्येक समूह को एक वाक्य में बाँधकर बोलकर दोहराएँ, फिर बिना देखे लिखें। अगले दिन फिर से बिना देखे लिखकर जाँचें। जो शब्द छूट जाए, उसे फिर से प्रसंग सहित पढ़ें। बोलना, लिखना और अगले दिन दोहराना — यही तीन चरण किसी भी शब्द को स्थायी बनाते हैं।
  7. ‘शेरशाह का मकबरा’ को पढ़ने के बाद स्वयं से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए?
    पहला — इस पाठ का केंद्रीय भाव एक वाक्य में क्या है? दूसरा — मुख्य शब्दों का प्रसंग सहित अर्थ क्या है? तीसरा — इस पाठ की सीख मेरे जीवन में कहाँ काम आएगी? यदि इन तीनों प्रश्नों के उत्तर बिना पुस्तक देखे दिए जा सकें, तो पाठ तैयार है। यदि कोई उत्तर अटके, तो उसी अंश को दोबारा पढ़ें।
  8. ‘शेरशाह का मकबरा’ के उत्तर में मूल पाठ की नकल क्यों नहीं करनी चाहिए?
    क्योंकि परीक्षक समझ की जाँच करता है, याददाश्त की नकल की नहीं। मूल पंक्तियों की नकल से यह पता नहीं चलता कि विद्यार्थी ने भाव समझा है या नहीं। अपने शब्दों में लिखा गया उत्तर, भले ही सरल हो, यह सिद्ध करता है कि भाव समझ में आ गया है। इसीलिए सार और उत्तर हमेशा अपनी भाषा में लिखें, मुख्य शब्दों को छोड़कर।