Chapter 16: स्वार्थी दानव
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
स्वार्थी दानव — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6) | अध्याय 16 | प्रकार: कहानी | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): दीवार और फाटक वाला फूलों का बगीचा। चित्र में दोनों ओर फूल खिले हैं; सूखा कोना इसमें नहीं दिखाया गया है। यह किताब का दृश्य नहीं है।

बगीचे में खेलते बच्चे — बाँटी हुई खुशी का एक सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
हर रोज़ अपराह्न में जब बच्चे स्कूल से लौटते, तो वे एक बाग में जाकर खेला करते थे। मुलायम, हरी घास से भरा वह एक विशाल सुंदर बाग था। जहाँ-तहाँ घास के ऊपर तारों की तरह सुंदर फूल खिले थे। वहाँ बारह सतालू के पेड़ थे, जो वसंत के समय लाल और मोती की तरह चमकीली कोमल कलियों से भर जाते और शरद काल में फलों से लदे रहते। पेड़ों पर बैठे पंछी इतने मधुर स्वर में गाते कि बच्चे खेलना छोड़कर उनका संगीत सुनने लगते। ‘हम सब यहाँ कितने खुश हैं,’ वे एक-दूसरे से ज़ोर-ज़ोर से कहते। लेकिन यह बाग एक दानव का था।
एक दिन दानव लौटकर आया। वह अपने मित्र कॉर्निस आग्रे से मिलने गया था। उसके पास वह सात वर्षों तक रुक गया था। जब वह लौटा, तो उसने देखा कि बच्चे बाग में खेल रहे हैं। ‘मेरा बाग, मेरा बाग है। कोई भी इस बात को समझ सकता है। मैं अपने सिवा किसी और को इसमें खेलने नहीं दूँगा,’ दानव ने कहा। इसलिए उसने बाग के चारों तरफ ऊँची दीवार खड़ी कर दी, और एक सूचना-पट्ट टाँग दिया — ‘अनाधिकार प्रवेश करनेवालों को सज़ा मिलेगी।’ वह एक बहुत स्वार्थी दानव था। बेचारे बच्चों को खेलने के लिए अब कोई जगह नहीं रही। उन्होंने सड़क पर खेलना चाहा, लेकिन सड़क धूल और कंकड़ों से भरी थी। वे ऊँची दीवारों के चारों ओर घूमते और अंदर के सुंदर बाग की चर्चा करते। ‘हमलोग वहाँ कितने खुश थे,’ वे एक-दूसरे से कहते।
वसंत आया। पूरा देश छोटी-छोटी कलियों और चिड़ियों से भर गया, लेकिन स्वार्थी दानव के बाग में अभी भी जाड़ा था। बच्चों के नहीं रहने के कारण न पंछी वहाँ गीत गाते थे और न पेड़ों में फूल लगे थे। सिर्फ़ बर्फ़ और तुषार ही खुश थे। बर्फ़ ने अपनी लंबी उजली चादर से घास को ढँक दिया और तुषार ने सभी पेड़ों को उजले रंग से रंग दिया। तब ओला आया। हर रोज़ वह तीन-चार घंटे महल की छत पर बरसता रहता। उसने सारे खपड़े तोड़ डाले। इस तरह वह बाग में दौड़ लगाता रहता। उसका रंग धूसर था और उसकी साँस बर्फ़ जैसी थी। (इस स्थल का बीच का भाग स्कैन में धुंधला है; सार आसपास की स्पष्ट पंक्तियों से लिया गया है।) ‘समझ में नहीं आता वसंत आने में विलंब क्यों कर रहा है?’ खिड़की के पास बैठा, बाहर ठंडे उजले बाग पर नज़र दौड़ाते हुए स्वार्थी दानव ने कहा। ‘मुझे उम्मीद है कि मौसम बदलेगा।’ लेकिन वसंत नहीं आया और न गर्मी आई। शरद ऋतु में हर बाग में सुनहले फल लगे, लेकिन दानव के बाग में कोई फल नहीं लगा। वहाँ हमेशा जाड़ा रहता और उत्तरी हवा, ओले और तुषार पेड़ों के आस-पास मँडराते रहते।
एक सुबह, जब दानव अपने बिस्तर पर पड़ा था, उसने बहुत सुंदर संगीत सुना। दरअसल एक छोटी लिनेट (छोटी चिड़िया) उसकी खिड़की के बाहर गा रही थी। लेकिन उसने बहुत दिनों से अपने बाग में किसी चिड़िया को गाते नहीं सुना था, इसलिए उसे लगा जैसे वह संसार का सबसे मधुर संगीत हो। अचानक ओले बंद हो गए, उत्तरी हवा का शोर बंद हो गया और खिड़की से एक मधुर सुगंध आने लगी। ‘मुझे लगता है आखिर वसंत आ गया है,’ दानव ने कहा। वह अपने बिस्तर से उछल पड़ा और बाहर देखने लगा। उसने एक अद्भुत दृश्य देखा। दीवार में एक छोटे छेद से बच्चे भीतर घुस आए थे और वे पेड़ों की डालियों पर बैठे थे। हर पेड़ पर एक छोटा बच्चा बैठा था। पेड़ बच्चों को अपने बीच पाकर इतने खुश थे कि वे कलियों से लद गए थे और बच्चों के सिर पर अपनी बाँहों को धीरे-धीरे हिला रहे थे। चिड़ियाँ उड़ रही थीं और खुशी से गा रही थीं। फूल हर घास से निकलकर मुस्कुरा रहे थे। वह बहुत ही मनोरम दृश्य था। लेकिन बाग के एक कोने में अभी भी जाड़ा था। वह बाग का सबसे दूर वाला भाग था। वहाँ एक छोटा लड़का खड़ा था। वह इतना छोटा था कि वह पेड़ की टहनियों को छू नहीं पा रहा था। वह फूट-फूटकर रोता हुआ चारों ओर घूम रहा था। बेचारा पेड़ अभी भी बर्फ़ और तुषार से ढँका था। उत्तरी हवा उसके ऊपर गरज रही थी। ‘चढ़ो, छोटे बच्चे,’ पेड़ ने कहा और उसने अपनी डालियों को यथासंभव नीचे झुका लिया। लेकिन बच्चा बहुत छोटा था।
दानव ने जब यह देखा, तो उसका हृदय पिघल गया। ‘मैं कितना मूर्ख हूँ?’ उसने कहा। ‘अब मुझे पता चला वसंत क्यों नहीं आ रहा था। मैं उस छोटे बच्चे को पेड़ के ऊपर चढ़ा दूँगा। मैं दीवार को गिरा दूँगा। मेरा बाग हमेशा के लिए बच्चों का क्रीड़ा-स्थल बन जाएगा।’ वह सचमुच अपने किए पर पछता रहा था। वह नीचे उतरा और धीरे से अगला दरवाज़ा खोलकर बाग के अंदर गया। जब बच्चों ने उसे देखा, तो वे इतने भयभीत हो गए कि वे सब के सब भाग खड़े हुए। बाग में जाड़ा फिर लौट आया। सिर्फ़ छोटा बच्चा नहीं भागा, क्योंकि उसकी आँखें आँसुओं से इस तरह भरी थीं कि वह दानव को आते हुए नहीं देख पाया। दानव दबे पाँव उसके पीछे गया और उसे धीरे से अपने हाथ से उठाकर पेड़ के ऊपर चढ़ा दिया। पेड़ तुरंत खिल उठा और चिड़ियाँ आकर गाने लगीं। वह छोटा बच्चा अपनी दोनों बाँहों को फैलाकर दानव के गले से लिपट गया और उसे चूम लिया। जब दूसरे बच्चों ने देखा कि दानव अब कठोर नहीं रहा, तब वे दौड़ते हुए लौट आए, और उनके साथ वसंत भी आ गया। ‘छोटे बच्चो! यह बाग अब तुम्हारा है,’ दानव ने कहा। उसने एक बड़ा हथौड़ा लिया और दीवार को तोड़ डाला।
अब दिनभर बच्चे खेलते रहते। शाम को दानव के पास जाकर उसे गुड बाई कहते। ‘लेकिन तुम्हारा छोटा साथी कहाँ है? जिसको मैंने पेड़ पर चढ़ाया था?’ दानव ने पूछा। दानव उसे सबसे अधिक प्यार करता था, क्योंकि उसने उसे चूमा था। ‘हमें पता नहीं,’ बच्चों ने जवाब दिया, ‘वह कहीं दूर चला गया है।’ हर रोज़ अपराह्न में जब स्कूल बंद होता, बच्चे आते और दानव के साथ खेला करते थे। लेकिन वह छोटा लड़का, जिसे दानव बहुत चाहता था, कभी दिखाई नहीं पड़ा। दानव सभी बच्चों को बहुत प्यार करता था, फिर भी वह अपने छोटे मित्र के लिए तरसता रहता था। वर्षों बीत गए। दानव बहुत बूढ़ा और कमज़ोर हो गया। वह खेल-कूद नहीं कर सकता था, इसलिए वह एक बड़ी आराम कुर्सी पर बैठा रहता। खेलते बच्चों को देखा करता और अपने बाग की प्रशंसा करता। ‘मेरे पास बहुत-से सुंदर फूल हैं,’ उसने कहा, ‘लेकिन बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं।’
एक दिन जाड़े की शाम को जब वह कपड़े पहन रहा था, उसने खिड़की से बाहर देखा। अचानक वह आश्चर्य से अपनी आँखें मिचने लगा और एकटक देखता रहा। सचमुच वह एक अद्भुत दृश्य था। बाग के सबसे अंतिम कोने में एक पेड़ सुंदर उजली कलियों से लदा हुआ था। उसकी डालियाँ सुनहली थीं और उनसे चाँदी की तरह उजले फल लटक रहे थे। उसके नीचे वही छोटा बच्चा खड़ा था, जिसे वह बहुत प्यार करता था। आनंद से विह्वल दानव दौड़ता हुआ सीढ़ियों से उतरा और बाग में गया। वह घास को पार कर उस बालक के पास गया। लेकिन जब वह उसके बिल्कुल करीब पहुँचा, तो वह अवाक् रह गया। क्योंकि वह लड़का घायल था। उसके हथेलियों और पैरों पर दो-दो काँटी के निशान थे। ‘किसने तुम्हें घायल किया है?’ दानव ने चिल्लाकर पूछा — ‘बताओ मुझे, ताकि मैं अपनी बड़ी तलवार से उसे दो टूक कर दूँ।’ ‘नहीं,’ बालक ने जवाब दिया, ‘ये प्रेम के घाव हैं।’ ‘तुम कौन हो?’ दानव ने पूछा और एक विचित्र भय ने उसे घेर लिया। वह उस छोटे बालक के सामने घुटने के बल झुक गया। बालक दानव पर प्यार से मुस्कुराया, और उससे कहा — ‘तुमने मुझे एक बार अपने बाग में खेलने दिया है, इसलिए अब तुम मेरे बाग में खेलोगे, जो स्वर्ग में है।’ (इस संवाद का एक वाक्य स्कैन में धुंधला होने के कारण हल्का पुनर्गठित है; भाव वही है।) जब बच्चे उस रोज़ अपराह्न में पहुँचे, तो उन्होंने उस दानव को पेड़ के नीचे मरा पाया, और वह कलियों से बिल्कुल ढँका हुआ था।
तुम्हें क्या सीखना चाहिए
इस कहानी से सीखो — दानव का स्वार्थ (ऊँची दीवार, सूचना-पट्ट) और उसका परिणाम (बाग में स्थायी जाड़ा — बर्फ़, तुषार, उत्तरी हवा, ओला); हृदय-परिवर्तन का क्षण (छोटा लड़का जो पेड़ तक नहीं पहुँच पा रहा था); दीवार तोड़ना और बाग बच्चों को सौंपना; बुढ़ापे में ‘बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं’ का भाव; और अंत (काँटी के निशान, ‘प्रेम के घाव’, स्वर्ग का बाग)। शब्दार्थ याद रखो (स्वार्थी–खुदगर्ज़, अपराह्न–दोपहर के बाद, तुषार–पाला, मनोरम–सुंदर, विह्वल–व्याकुल/द्रवित) और यह अंतर याद रखो कि मूल लेखक ऑस्कर वाइल्ड हैं, प्रो. रामजी राय अनुवादक हैं।
मुख्य शब्द
- स्वार्थी — अपना मतलब निकालने वाला, खुदगर्ज़
- अपराह्न — दोपहर के बाद, तीसरा पहर
- तुषार — पाला
- मनोरम — सुंदर
- विह्वल — अशांत, व्याकुल, द्रवित
- अनाधिकार प्रवेश — बिना अधिकार के प्रवेश
- क्रीड़ा-स्थल — खेलने का स्थान
- लिनेट — एक छोटी चिड़िया
- सतालू — एक फल (कहानी में पेड़ों का फल)
याद रखें
- पाठ: ‘स्वार्थी दानव’; मूल लेखक: ऑस्कर वाइल्ड; अनुवादक: प्रो. रामजी राय।
- बाग: मुलायम हरी घास, तारों-से फूल, बारह सतालू के पेड़ (वसंत में कलियाँ, शरद में फल), मधुर गाने वाले पंछी।
- दानव: मित्र कॉर्निस आग्रे के पास सात वर्ष रुका; लौटकर बच्चों को खेलते देखा; ऊँची दीवार + सूचना-पट्ट (‘अनाधिकार प्रवेश करनेवालों को सज़ा मिलेगी’)।
- परिणाम: बाग में स्थायी जाड़ा — बर्फ़, तुषार, उत्तरी हवा, ओला; वसंत नहीं आया, गर्मी नहीं आई, शरद में कोई फल नहीं।
- बदलाव: लिनेट का गीत; दीवार के छेद से बच्चे अंदर; हर पेड़ पर एक बच्चा; कोने में छोटा लड़का पेड़ तक नहीं पहुँच पा रहा था।
- हृदय-परिवर्तन: ‘मैं कितना मूर्ख हूँ? अब मुझे पता चला वसंत क्यों नहीं आ रहा था।’ — दीवार गिराने और बाग बच्चों को सौंपने का निश्चय।
- छोटा बच्चा: आँसुओं से भरी आँखों के कारण भागा नहीं; दानव ने उसे पेड़ पर चढ़ाया; बच्चा गले से लिपट गया, चूम लिया; फिर कभी दिखाई नहीं पड़ा।
- बुढ़ापा: ‘मेरे पास बहुत-से सुंदर फूल हैं, लेकिन बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं।’
- अंत: जाड़े की शाम — सुनहली डालियों वाला पेड़, चाँदी-से फल; बच्चे के हथेलियों-पैरों पर काँटी के निशान; ‘ये प्रेम के घाव हैं’; स्वर्ग के बाग का निमंत्रण; दानव पेड़ के नीचे कलियों से ढँका मरा पाया गया।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: कहानी के लेखक के रूप में प्रो. रामजी राय का नाम लिखना — मूल लेखक ऑस्कर वाइल्ड हैं, रामजी राय अनुवादक हैं। दूसरी गलती: सतालू के पेड़ों की संख्या गलत लिखना — बारह याद रखो। तीसरी गलती: मित्र के पास रुकने के वर्ष गलत लिखना — सात वर्ष याद रखो। चौथी गलती: छोटे लड़के के घावों का कारण मन से गढ़ना — किताब में कारण स्पष्ट नहीं है; बालक का उत्तर है: ‘ये प्रेम के घाव हैं’। पाँचवीं गलती: दीवार तोड़ने का श्रेय बच्चों को देना — दीवार दानव ने स्वयं हथौड़े से तोड़ी थी।
सारणी / चार्ट: दानव का बदलना — पहले और बाद में
| पक्ष | पहले (स्वार्थी दानव) | बाद में (बदला हुआ दानव) |
|---|---|---|
| बाग | ऊँची दीवार, सूचना-पट्ट, बच्चों के लिए बंद | दीवार तोड़ दी, बाग बच्चों का क्रीड़ा-स्थल |
| मौसम | स्थायी जाड़ा — बर्फ़, तुषार, उत्तरी हवा, ओला | बच्चों के लौटते ही वसंत आ गया |
| बच्चों से व्यवहार | ‘मैं अपने सिवा किसी और को खेलने नहीं दूँगा’ | ‘छोटे बच्चो! यह बाग अब तुम्हारा है’ |
| भाव | स्वार्थ, कठोरता | पछतावा, प्रेम — ‘बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं’ |
अभ्यास — खुद करके देखो
- दानव के बाग में सतालू के कितने पेड़ थे? दानव अपने मित्र के पास कितने वर्ष रुका था? दोनों संख्याएँ याद करके लिखो।
संकेत: पेड़ों की संख्या बारह है; वर्षों की संख्या सात है — दोनों को अलग-अलग याद करो। - बर्फ़, तुषार, उत्तरी हवा और ओला बाग में क्यों खुश थे? अपने शब्दों में लिखो।
संकेत: बच्चों के नहीं रहने से बाग में क्या हुआ था — इस बारे में सोचो। - ‘बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं’ — दानव ने ऐसा क्यों सोचा?
संकेत: बुढ़ापे में दानव क्या देखता था और क्या महसूस करता था — सोचो। - छोटा लड़का दानव को देखकर क्यों नहीं भागा? अपने शब्दों में लिखो।
संकेत: उसकी आँखों की हालत के बारे में सोचो। - क्या स्वार्थी लोगों को इस प्रकार की सज़ा देना उचित है? अपने साथियों से चर्चा करके अपना मत लिखो।
संकेत: दानव को क्या सज़ा मिली और उसने क्या सीखा — दोनों पक्ष सोचो।
प्रश्नोत्तर
- दानव का बाग कैसा था और बच्चे वहाँ क्यों खुश थे?
बाग मुलायम हरी घास से भरा विशाल सुंदर बाग था — घास पर तारों-से फूल, बारह सतालू के पेड़ (वसंत में कलियाँ, शरद में फल), पेड़ों पर मधुर गाने वाले पंछी। बच्चे वहाँ खेलते, पंछियों का संगीत सुनते और कहते — ‘हम सब यहाँ कितने खुश हैं।’ - स्वार्थी दानव ने बाग के चारों ओर ऊँची दीवार क्यों खड़ी कर दी और इसका क्या परिणाम हुआ?
क्योंकि वह अपने सिवा किसी और को बाग में खेलने नहीं देना चाहता था — ‘मेरा बाग, मेरा बाग है।’ परिणाम यह हुआ कि बाग में स्थायी जाड़ा आ गया — वसंत नहीं आया, गर्मी नहीं आई, शरद में कोई फल नहीं लगा; बर्फ़, तुषार, उत्तरी हवा और ओले बाग में मँडराते रहे; बच्चों को सड़क की धूल-कंकड़ों में खेलना पड़ा। - दानव के बाग में वसंत क्यों नहीं आ रहा था?
क्योंकि बच्चों के नहीं रहने के कारण पंछी गीत नहीं गाते थे और पेड़ों में फूल नहीं लगते थे — बाग में प्रेम और आनंद नहीं था। दानव ने स्वयं समझा: ‘अब मुझे पता चला वसंत क्यों नहीं आ रहा था’ — उसका स्वार्थ ही वसंत को रोके हुए था। - दानव का हृदय कब और कैसे पिघला?
जब उसने देखा कि बाग के सबसे दूर वाले कोने में एक छोटा लड़का पेड़ की टहनियों तक नहीं पहुँच पा रहा है, फूट-फूटकर रो रहा है, और पेड़ ने अपनी डालियाँ नीचे झुकाकर भी उसे नहीं चढ़ा पाया — तब दानव का हृदय पिघल गया। उसने निश्चय किया कि वह बच्चे को पेड़ पर चढ़ाएगा, दीवार गिराएगा और बाग हमेशा के लिए बच्चों का क्रीड़ा-स्थल बनाएगा। - कहानी के अंत में छोटे लड़के के घावों और उसके निमंत्रण का क्या अर्थ है?
अंत में लड़के के हथेलियों और पैरों पर दो-दो काँटी के निशान थे। दानव के पूछने पर उसने कहा — ‘ये प्रेम के घाव हैं।’ किताब में घावों का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है; केवल बालक का यही उत्तर दिया गया है। फिर बालक ने कहा कि तुमने मुझे अपने बाग में खेलने दिया है, इसलिए अब तुम मेरे बाग में खेलोगे, जो स्वर्ग में है। उसी दिन अपराह्न में बच्चे दानव को पेड़ के नीचे कलियों से ढँका मरा पाते हैं।
किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर
किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर। व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से लिखने हैं।
- पाठ से 1(क) — दानव के बाग में सतालू के कितने पेड़ थे? उचित विकल्प पर सही का निशान लगाइए।
बारह — (आठ, दस, चौदह गलत हैं)। - पाठ से 1(ख) — दानव अपने मित्र के पास कितने वर्षों तक रुका था? उचित विकल्प पर सही का निशान लगाइए।
सात वर्ष — (छः, आठ, नौ गलत हैं)। - पाठ से 1(ग) — इस कहानी के लेखक कौन हैं? उचित विकल्प पर सही का निशान लगाइए।
ऑस्कर वाइल्ड — (प्रो. रामजी राय अनुवादक हैं; कॉर्निस आग्रे दानव का मित्र है)। - पाठ से 2 — स्वार्थी दानव ने बाग के चारों ओर ऊँची दीवार क्यों खड़ी कर दी?
क्योंकि वह अपने सिवा किसी और को बाग में खेलने नहीं देना चाहता था। - पाठ से 3 — बाग के चारों ओर ऊँची दीवार खड़ी करने का क्या परिणाम हुआ?
बाग में स्थायी जाड़ा आ गया — वसंत, गर्मी नहीं आई; शरद में फल नहीं लगे; बर्फ़, तुषार, उत्तरी हवा, ओले मँडराते रहे। - पाठ से 4 — स्वार्थी दानव ने बाग में कौन-सा अद्भुत दृश्य देखा?
दीवार के छेद से बच्चे अंदर आ गए थे — हर पेड़ पर एक बच्चा बैठा था, पेड़ कलियों से लद गए थे, चिड़ियाँ गा रही थीं, फूल मुस्कुरा रहे थे; पर एक कोने में अभी भी जाड़ा था, जहाँ छोटा लड़का पेड़ तक नहीं पहुँच पा रहा था। - पाठ से 5 — छोटा लड़का घायल कैसे हो गया था?
किताब में इसका कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है। लड़के के हथेलियों और पैरों पर दो-दो काँटी के निशान थे; पूछने पर उसने कहा — ‘ये प्रेम के घाव हैं।’ - पाठ से आगे 1(क) — ‘लेकिन बच्चे सबसे सुंदर फूल हैं।’ स्वार्थी दानव ने ऐसा क्यों सोचा?
क्योंकि बुढ़ापे में आराम कुर्सी पर बैठकर खेलते बच्चों को देखकर उसे समझ आया कि बाग के फूलों से भी सुंदर बच्चे हैं — बच्चों का आनंद और प्रेम ही बाग की असली शोभा है। - पाठ से आगे 1(ख) — ‘ये प्रेम के घाव हैं।’ छोटे लड़के के कहने का क्या अभिप्राय है?
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: अभिप्राय यह है कि वे घाव किसी शत्रुता के नहीं, प्रेम के कारण लगे हैं — प्रेम में सहा गया कष्ट भी प्रेम ही है।) - पाठ से आगे 2 — स्वार्थी दानव को कब महसूस हुआ कि उसने बहुत बड़ी गलती की है?
जब उसने छोटे लड़के को पेड़ तक न पहुँच पाते और रोते हुए देखा — तब उसका हृदय पिघल गया और उसने कहा, ‘मैं कितना मूर्ख हूँ? अब मुझे पता चला वसंत क्यों नहीं आ रहा था।’ - पाठ से आगे 3 — ‘अनाधिकार प्रवेश निषेध’ ऐसा वाक्य और कहाँ-कहाँ लिखा जाता है?
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: सरकारी कार्यालयों, सैन्य क्षेत्रों, निजी संपत्तियों, कारखानों, परीक्षा-केंद्रों के द्वार पर।) - पाठ से आगे 4 — भारतवर्ष में कौन-कौन सी ऋतुएँ हैं? आपको सबसे अच्छी ऋतु कौन-सी लगती है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: भारत में छह ऋतुएँ हैं — वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर; मुझे वसंत सबसे अच्छी लगती है, क्योंकि तब फूल खिलते हैं, मौसम सुहावना होता है।) - पाठ से आगे 5 — शीत ऋतु एवं वसंत ऋतु में प्रकृति के दृश्यों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: शीत ऋतु में ठंड, कोहरा, पाला; वसंत में कलियाँ, फूल, पक्षियों का गीत, सुहावना मौसम।) - व्याकरण 1 — ‘अन्’ उपसर्ग लगाकर पाँच शब्द बनाइए।
अनाधिकार, अनजान, अनपढ़, अनमोल, अनहोनी। - व्याकरण 2 — अनेक शब्दों के लिए एक शब्द बताइए।
(क) दोपहर से पहले का समय — पूर्वाह्न। (ख) दोपहर के बाद का समय — अपराह्न। (ग) अपना मतलब निकालने वाला — स्वार्थी। (घ) दूसरों पर दया करनेवाला — दयालु। (ङ) दूसरों पर उपकार करनेवाला — उपकारी। - व्याकरण 3 — इस पाठ में आए विशेषण शब्दों को चुनकर लिखिए।
मुलायम (घास), हरी (घास), विशाल (बाग), सुंदर (बाग, फूल), लाल (कलियाँ), चमकीली (कलियाँ), कोमल (कलियाँ), मधुर (स्वर), ऊँची (दीवार), छोटा (बच्चा, छेद), सुनहले (फल), उजली (चादर, कलियाँ), धूसर (रंग), ठंडा (बाग)। - व्याकरण 4 — निम्नलिखित वाक्यों का रूप बदलकर लिखिए।
(क) मैं बच्चों को पेड़ पर चढ़ने देनेवाला नहीं हूँ। — मैं बच्चों को पेड़ पर चढ़ने नहीं दूँगा। (ख) फूल खिलने वाले हैं। — फूल खिलेंगे। (ग) छोटी चिड़िया गाने वाली है। — छोटी चिड़िया गाएगी। (घ) दानव उसे तलवार से दो टूक करनेवाला है। — दानव उसे तलवार से दो टूक कर देगा। (ङ) अपराह्न में स्कूल बंद होनेवाला है। — अपराह्न में स्कूल बंद हो जाएगा। - कुछ करने को 1 — क्या स्वार्थी लोगों को इस प्रकार की सज़ा देना उचित है? अपने साथियों से चर्चा कीजिए और लिखिए।
(गतिविधि: साथियों से चर्चा करो — दानव को क्या सज़ा मिली (बाग में स्थायी जाड़ा, अकेलापन) और उसने क्या सीखा — और अपना मत लिखो।)
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महत्वपूर्ण प्रश्न — प्रश्न और उत्तर (Important Questions)
नीचे दिए गए प्रश्न ‘स्वार्थी दानव’ की समझ की जाँच के लिए हैं — उत्तर पहले बिना देखे लिखें, फिर पृष्ठ से मिलाकर सुधारें।
- ‘स्वार्थी दानव’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘स्वार्थी दानव’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके शीर्षक और उसके प्रसंगों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘स्वार्थी’ का अर्थ प्रसंग सहित समझाइए।
‘स्वार्थी’ का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, बल्कि ‘स्वार्थी दानव’ के प्रसंग से समझना चाहिए। पहले इसका सामान्य अर्थ लिखें, फिर यह बताएँ कि पाठ में यह किस प्रसंग में आया है और उस प्रसंग में इसका क्या महत्त्व है। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं। - ‘स्वार्थी दानव’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘स्वार्थी दानव’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल सार रट लेना, बिना प्रसंग और शब्दार्थ समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘स्वार्थी दानव’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है। - ‘अपराह्न’ जैसे मुख्य शब्दों को लंबे समय तक याद रखने की विधि क्या है?
मुख्य शब्दों को तीन के समूह में बाँटकर पढ़ें — शब्द, अर्थ और प्रसंग। प्रत्येक समूह को एक वाक्य में बाँधकर बोलकर दोहराएँ, फिर बिना देखे लिखें। अगले दिन फिर से बिना देखे लिखकर जाँचें। जो शब्द छूट जाए, उसे फिर से प्रसंग सहित पढ़ें। बोलना, लिखना और अगले दिन दोहराना — यही तीन चरण किसी भी शब्द को स्थायी बनाते हैं। - ‘स्वार्थी दानव’ को पढ़ने के बाद स्वयं से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए?
पहला — इस पाठ का केंद्रीय भाव एक वाक्य में क्या है? दूसरा — मुख्य शब्दों का प्रसंग सहित अर्थ क्या है? तीसरा — इस पाठ की सीख मेरे जीवन में कहाँ काम आएगी? यदि इन तीनों प्रश्नों के उत्तर बिना पुस्तक देखे दिए जा सकें, तो पाठ तैयार है। यदि कोई उत्तर अटके, तो उसी अंश को दोबारा पढ़ें। - ‘स्वार्थी दानव’ के उत्तर में मूल पाठ की नकल क्यों नहीं करनी चाहिए?
क्योंकि परीक्षक समझ की जाँच करता है, याददाश्त की नकल की नहीं। मूल पंक्तियों की नकल से यह पता नहीं चलता कि विद्यार्थी ने भाव समझा है या नहीं। अपने शब्दों में लिखा गया उत्तर, भले ही सरल हो, यह सिद्ध करता है कि भाव समझ में आ गया है। इसीलिए सार और उत्तर हमेशा अपनी भाषा में लिखें, मुख्य शब्दों को छोड़कर।

