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Chapter 15: भूल गया क्यों इंसान

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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भूल गया क्यों इंसान — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6)  |  अध्याय 15  |  प्रकार: कविता  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

भूल गया क्यों इंसान के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पौधा लिए खड़ा एक बच्चा — हरे जंगल और धुएँ के बीच का एक सामान्य चित्र। यह किताब का दृश्य नहीं है।

भूल गया क्यों इंसान के लिए चित्र

पौधे लगाते बच्चे — पर्यावरण की रक्षा का एक सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

यह कविता हरिवंशराय बच्चन की है। इसका मुख्य भाव मानव-एकता है — सब मनुष्य एक ही धरती की संतान हैं, चाहे उनके देश और वेश अलग-अलग हों। कविता का टेक-पद (बार-बार आने वाली पंक्ति) है — ‘भूल गया है क्यों इंसान।’ कवि पूछते हैं कि मनुष्य यह सीधी-सी बात क्यों भूल गया है?

पहला पद: सबकी है मिट्टी की काया, सब पर नभ की निर्मल छाया — सबका शरीर एक ही मिट्टी का बना है, सब पर आकाश की स्वच्छ छाया एक समान है। यहाँ कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया है — अर्थात् कोई भी मनुष्य जन्म से दूसरे से ऊँचा या विशेष नहीं है।

दूसरा पद: धरती ने मानव उपजाए, मानव ने ही देश बनाए — धरती ने मनुष्यों को जन्म दिया है, देशों को मनुष्यों ने ही बनाया है। बहु देशों में बसी हुई है, एक धरा-संतान — अनेक देशों में एक ही धरती की संतान बसी हुई है। देश मनुष्य की बनायी सीमा है, धरती की संतान एक है।

तीसरा पद: देश अलग हैं, देश अलग हों, वेश अलग हैं, वेश अलग हों — देश अलग हो सकते हैं, पहनावा अलग हो सकता है, पर मानव का मानव से अंतर-प्राण (हृदय) अलग नहीं है। बाहरी भिन्नता के बावजूद भीतर का मनुष्य एक है।

कविता की प्रेरणा यही है कि देश, वेश, भाषा या रूप की भिन्नता को देखकर किसी को अपने से भिन्न या छोटा-बड़ा मत समझो — सब मनुष्य बराबर हैं, सब एक ही धरती की संतान हैं।

तुम्हें क्या सीखना चाहिए

इस कविता से तीनों पदों का भाव सीखो — मिट्टी की काया और नभ की छाया (सब बराबर); धरती ने मानव उपजाए, मानव ने देश बनाए (देश मनुष्य की रचना है); देश-वेश अलग हों, पर अंतर-प्राण अलग नहीं (भीतरी एकता)। शब्दार्थ याद रखो (काया–शरीर, बहु–अनेक, धरा–पृथ्वी, अंतर-प्राण–हृदय, समवेत–एक साथ मिलकर, निर्मल–स्वच्छ) और टेक-पद ‘भूल गया है क्यों इंसान’ का अर्थ समझो।

मुख्य शब्द

  • काया — शरीर
  • बहु — अनेक
  • धरा — पृथ्वी
  • अंतर-प्राण — हृदय (भीतर का प्राण)
  • समवेत — एक साथ मिलकर (समूह में)
  • निर्मल — स्वच्छ
  • नभ — आकाश
  • वरदान — वर, विशेष कृपा
  • टेक-पद — कविता में बार-बार आने वाली पंक्ति

याद रखें

  • पाठ: ‘भूल गया क्यों इंसान’; कवि: हरिवंशराय बच्चन; टेक-पद: ‘भूल गया है क्यों इंसान।’
  • पहला पद: सबकी मिट्टी की काया, सब पर नभ की निर्मल छाया — कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया।
  • दूसरा पद: धरती ने मानव उपजाए, मानव ने ही देश बनाए — बहु देशों में एक ही धरा-संतान बसी है।
  • तीसरा पद: देश अलग हों, वेश अलग हों — पर मानव का मानव से अंतर-प्राण अलग नहीं।
  • मुख्य भाव: मानव-एकता — बाहरी भिन्नता के बावजूद सब मनुष्य एक और बराबर हैं।
  • प्रेरणा: किसी को देश, वेश या रूप के आधार पर अपने से भिन्न या छोटा-बड़ा मत समझो।
  • इस पाठ में व्याकरण खंड नहीं है — अभ्यास में केवल पाठ से, पाठ से आगे और कुछ करने को हैं।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: कविता का भाव लिखते समय केवल पंक्तियाँ उतार देना — भाव अपने शब्दों में भी लिखो। दूसरी गलती: ‘देश मानव ने बनाए’ को उल्टा लिखना — धरती ने मानव उपजाए, मानव ने देश बनाए। तीसरी गलती: ‘अंतर-प्राण’ का अर्थ ‘प्राण निकलना’ लिखना — इसका अर्थ हृदय, भीतर का मनुष्य है। चौथी गलती: कवि का नाम गलत लिखना — कवि हरिवंशराय बच्चन हैं।

सारणी / चार्ट: तीन पद — एक दृष्टि में

पदपहचानभाव
पहलामिट्टी की काया, नभ की छायासबका शरीर एक मिट्टी का, सब पर एक आकाश — कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया
दूसराधरती ने मानव उपजाएदेश मनुष्य की रचना है; अनेक देशों में एक ही धरती की संतान बसी है
तीसरादेश अलग, वेश अलगबाहरी भिन्नता हो सकती है, पर हृदय (अंतर-प्राण) अलग नहीं

अभ्यास — खुद करके देखो

  1. कविता का सार अपने शब्दों में लिखो।
    संकेत: मिट्टी की काया, धरती की संतान, अंतर-प्राण — तीनों बातों को जोड़ो।
  2. ‘यहाँ नहीं है कोई आया, ले विशेष वरदान’ — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
    संकेत: जन्म से कोई ऊँचा या विशेष होता है या नहीं — इस बारे में सोचो।
  3. ‘धरती ने मानव उपजाए, मानव ने ही देश बनाए’ — देश किसने बनाए और इसका क्या अर्थ है?
    संकेत: देश प्राकृतिक हैं या मनुष्य की बनायी सीमाएँ — सोचो।
  4. अलग-अलग देश और वेश के बावजूद हर मनुष्य एक जैसा कैसे है? उदाहरण सहित लिखो।
    संकेत: शरीर, आकाश, हृदय — इन समानताओं को सोचो।
  5. मनुष्य दूसरों को अपने से भिन्न क्यों समझता है? अपने विचार लिखो।
    संकेत: देश, वेश, भाषा, रूप — किस बात से भिन्नता का भाव आता है?

प्रश्नोत्तर

  1. कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
    कविता का सार यह है कि सब मनुष्य एक ही धरती की संतान हैं और बराबर हैं। सबका शरीर एक ही मिट्टी का है, सब पर एक ही आकाश की स्वच्छ छाया है, कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया है। धरती ने मनुष्यों को जन्म दिया है, देशों को मनुष्यों ने ही बनाया है — अनेक देशों में एक ही धरती की संतान बसी है। देश और वेश अलग हो सकते हैं, पर मनुष्य का हृदय (अंतर-प्राण) अलग नहीं है। कवि पूछते हैं कि मनुष्य यह सीधी बात क्यों भूल गया है।
  2. ‘सबकी है मिट्टी की काया, सब पर नभ की निर्मल छाया’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
    भाव यह है कि सब मनुष्यों का शरीर एक ही मिट्टी से बना है और सब पर एक ही आकाश की स्वच्छ छाया है — अर्थात् प्रकृति की दृष्टि में सब बराबर हैं। कोई जन्म से ऊँचा या नीचा नहीं है, क्योंकि यहाँ कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया है।
  3. ‘धरती ने मानव उपजाए, मानव ने ही देश बनाए’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
    भाव यह है कि मनुष्य को धरती ने जन्म दिया है, पर देशों की सीमाएँ मनुष्य ने स्वयं बनायी हैं। इसलिए देश अलग होना मनुष्य की रचना है, प्रकृति की नहीं — अनेक देशों में बसी हुई संतान एक ही धरती की है।
  4. ‘देश अलग हैं, देश अलग हों, वेश अलग हैं, वेश अलग हों, मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतर-प्राण’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
    भाव यह है कि देश अलग हो सकते हैं, पहनावा अलग हो सकता है, पर एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य से हृदय अलग नहीं है। बाहरी भिन्नता के बावजूद भीतर का मनुष्य — उसकी भावनाएँ, उसका हृदय — एक है।
  5. इस कविता से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
    प्रेरणा यह मिलती है कि किसी भी मनुष्य को उसके देश, वेश, भाषा या रूप के आधार पर अपने से भिन्न, छोटा या बड़ा मत समझो। सब मनुष्य एक ही धरती की संतान हैं और बराबर हैं — सबके साथ समानता और भाईचारे का व्यवहार करो।

किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर

किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर। व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से लिखने हैं।

  1. पाठ से 1 — कविता का सारांश अपनी भाषा में लिखिए।
    सब मनुष्य एक ही धरती की संतान हैं — सबकी मिट्टी की काया, सब पर एक नभ की छाया, कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया; देश मनुष्य ने बनाए हैं; देश-वेश अलग हों, पर अंतर-प्राण अलग नहीं।
  2. पाठ से 2 — इस कविता से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
    मानव-एकता की प्रेरणा — सबको बराबर समझो, किसी को देश-वेश के आधार पर भिन्न या छोटा-बड़ा मत समझो।
  3. पाठ से 3(क) — ‘देश अलग हैं, देश अलग हों, वेश अलग हैं, वेश अलग हों, मानव का मानव से लेकिन, अलग न अंतर-प्राण’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
    देश और वेश अलग हो सकते हैं, पर मनुष्य का हृदय अलग नहीं — भीतर का मनुष्य एक है।
  4. पाठ से 3(ख) — ‘सबकी है मिट्टी की काया, सब पर नभ की निर्मल छाया, यहाँ नहीं है कोई आया, ले विशेष वरदान’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
    सबका शरीर एक मिट्टी का है, सब पर एक आकाश की छाया है — प्रकृति की दृष्टि में सब बराबर हैं; कोई विशेष वरदान लेकर नहीं आया।
  5. पाठ से आगे 1 — मनुष्य किस प्रकार दूसरों को अपने से भिन्न समझते हैं?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: देश, वेश, भाषा, रूप, धन या जाति के आधार पर लोग दूसरों को अपने से अलग समझ लेते हैं।)
  6. पाठ से आगे 2 — अलग-अलग देश, अलग-अलग वेश के बावजूद भी हर मनुष्य एक जैसे हैं। कैसे?
    क्योंकि सबकी काया एक मिट्टी की है, सब पर एक नभ की छाया है, सब एक ही धरती की संतान हैं और सबका हृदय (अंतर-प्राण) एक जैसा है — सबको सुख-दुःख, प्रेम और भूख-प्यास एक समान लगते हैं।
  7. कुछ करने को 1 — इस कविता को समवेत स्वर में अपनी कक्षा में सुनाइए।
    (गतिविधि: कक्षा में सब मिलकर एक साथ (समवेत स्वर में) इस कविता का सस्वर पाठ करो।)

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलें, फिर बिना देखे अभ्यास करके देखें। प्रश्नोत्तर से अपने आप को जाँचें। अपने उत्तर शिक्षक या माता-पिता से जाँचवाएँ।

महत्वपूर्ण प्रश्न — प्रश्न और उत्तर (Important Questions)

नीचे दिए गए प्रश्न ‘भूल गया क्यों इंसान’ की समझ की जाँच के लिए हैं — उत्तर पहले बिना देखे लिखें, फिर पृष्ठ से मिलाकर सुधारें।

  1. ‘भूल गया क्यों इंसान’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
    ‘भूल गया क्यों इंसान’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके शीर्षक और उसके प्रसंगों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है।
  2. ‘काया’ का अर्थ प्रसंग सहित समझाइए।
    ‘काया’ का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, बल्कि ‘भूल गया क्यों इंसान’ के प्रसंग से समझना चाहिए। पहले इसका सामान्य अर्थ लिखें, फिर यह बताएँ कि पाठ में यह किस प्रसंग में आया है और उस प्रसंग में इसका क्या महत्त्व है। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
  3. ‘भूल गया क्यों इंसान’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
    इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है।
  4. ‘भूल गया क्यों इंसान’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
    सबसे बड़ी गलती है — केवल सार रट लेना, बिना प्रसंग और शब्दार्थ समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है।
  5. ‘भूल गया क्यों इंसान’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
    रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
  6. ‘बहु’ जैसे मुख्य शब्दों को लंबे समय तक याद रखने की विधि क्या है?
    मुख्य शब्दों को तीन के समूह में बाँटकर पढ़ें — शब्द, अर्थ और प्रसंग। प्रत्येक समूह को एक वाक्य में बाँधकर बोलकर दोहराएँ, फिर बिना देखे लिखें। अगले दिन फिर से बिना देखे लिखकर जाँचें। जो शब्द छूट जाए, उसे फिर से प्रसंग सहित पढ़ें। बोलना, लिखना और अगले दिन दोहराना — यही तीन चरण किसी भी शब्द को स्थायी बनाते हैं।
  7. ‘भूल गया क्यों इंसान’ को पढ़ने के बाद स्वयं से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए?
    पहला — इस पाठ का केंद्रीय भाव एक वाक्य में क्या है? दूसरा — मुख्य शब्दों का प्रसंग सहित अर्थ क्या है? तीसरा — इस पाठ की सीख मेरे जीवन में कहाँ काम आएगी? यदि इन तीनों प्रश्नों के उत्तर बिना पुस्तक देखे दिए जा सकें, तो पाठ तैयार है। यदि कोई उत्तर अटके, तो उसी अंश को दोबारा पढ़ें।
  8. ‘भूल गया क्यों इंसान’ के उत्तर में मूल पाठ की नकल क्यों नहीं करनी चाहिए?
    क्योंकि परीक्षक समझ की जाँच करता है, याददाश्त की नकल की नहीं। मूल पंक्तियों की नकल से यह पता नहीं चलता कि विद्यार्थी ने भाव समझा है या नहीं। अपने शब्दों में लिखा गया उत्तर, भले ही सरल हो, यह सिद्ध करता है कि भाव समझ में आ गया है। इसीलिए सार और उत्तर हमेशा अपनी भाषा में लिखें, मुख्य शब्दों को छोड़कर।

विस्तार — ‘भूल गया क्यों इंसान’ को गहराई से समझें

किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘भूल गया क्यों इंसान’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।

इस पाठ के मुख्य शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है। परिभाषा, प्रसंग और परिणाम — यही तीन कड़ियाँ किसी भी शब्द को परीक्षा के उत्तर में पूरा बनाती हैं।

पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है, और वहीं दोहराव सबसे अधिक काम आता है।

मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या

नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।