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Chapter 13: दादा-दादी के साथ

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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दादा-दादी के साथ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6)  |  अध्याय 13  |  प्रकार: कहानी  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

दादा-दादी के साथ के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): बच्चों को कहानी सुनाते दादा-दादी। यह एक सामान्य चित्र है, किताब का दृश्य नहीं।

दादा-दादी के साथ के लिए चित्र

दादी की मदद करता एक बच्चा — सेवा और सम्मान का एक सामान्य चित्र।

अध्याय का सार

आज पिंकी और उसका छोटा भाई विकी बड़े प्रसन्न थे। सात समुद्र पार इंग्लैंड से उनके हम उम्र भाई-बहन राहुल व पद्मिनी जो आ रहे थे। यद्यपि वे उनके अपने चाचा श्री विपिन प्रताप सिंह के बच्चे थे, फिर भी पिंकी व विकी की उनसे अब तक कभी मुलाकात नहीं हुई थी। पूरा परिवार अतिथियों के स्वागत की तैयारी में लगा था — दादा-दादी, पापा-मम्मी और पिंकी व विकी ही नहीं, घर के नौकर, दाई, माली, चौकीदार इत्यादि सभी कई दिनों से घर की सफ़ाई में लगे थे।

राहुल व पद्मिनी को अपने नए संबंधियों से मिलकर अच्छा लगा। दिन भर परिवार के लोगों का आना-जाना लगा रहा। रिश्ते के ढेर सारे भाई-बहन, चाचा-चाची, दादा-दादी, बुआ-फूफा इत्यादि से प्रथम बार बच्चों की भेंट हुई। ‘अच्छा? यही है तुम्हारी बेटी?!’ ‘कितने बड़े हो गए हैं ये दोनों?’ ‘लगता है बेटी माँ जैसी है। वही नीली आँखें और काले बाल। बड़ी सुंदर निकली है।’ ‘अच्छा किया, इन्हें हिंदी सिखाई। नहीं तो हमारी बात समझ न पाते।’ ‘अच्छी ट्रेनिंग दी तुमने इनको।’ — इत्यादि जैसे शब्द कानों में गूँजते रहे। डैड गर्व से फूले न समाते थे। पद्मिनी और राहुल को भी सबका आकर्षण का केंद्र बनकर खूब आनंद आ रहा था। इतनी प्रशंसा व प्रेम देने के लिए इंग्लैंड में कोई नहीं था। मम्मी के केवल एक अविवाहित भाई थे, जिनसे दो-तीन वर्ष पहले मुलाकात हुई थी। एक ग्रैंडपा (नाना) थे, जिनसे क्रिसमस के समय एक-एक उपहार मिल जाता था। नाना ने अपनी पहली पत्नी अर्थात् मम्मी की माँ की मृत्यु हो जाने के पश्चात् दूसरा विवाह कर लिया था तथा अपनी नई पत्नी के साथ ही रहते थे। कुल मिलाकर दो रिश्तेदार थे और उनसे भी भेंट कभी-कभार होती थी।

शाम हो गई। आज फिर बिजली गायब थी। ‘ओ हो! आई एम सो सॉरी!’ पिंकी ने मुँह बनाकर कहा, ‘तुम सोचोगे कैसी कंट्री है इंडिया?’ पद्मिनी केवल मुस्करा दी, पर मन ही मन वह सोच रही थी — अपनी भाषा होते हुए भी पिंकी और विकी न जाने क्यों सदा अंग्रेज़ी में ही बोलते हैं। उन्हें मालूम था कि राहुल और पद्मिनी हिंदी भली-भाँति समझ लेते थे। फिर भी वे अक्सर उनसे इंग्लिश में क्यों बात करते हैं? पद्मिनी तथा राहुल यहाँ आते समय प्रसन्न थे। उन्होंने सोचा था कि भारत में हिंदी का अच्छा अभ्यास हो जाएगा, परंतु यहाँ कोई भी ठीक से हिंदी नहीं बोलता था। बीच-बीच में अंग्रेज़ी; यही नहीं, अक्सर पिंकी-विकी आपस में भी विदेशी भाषा का ही प्रयोग करते थे। ऐसा क्यों? (इस स्थल का बीच का भाग स्कैन में धुंधला है; सार आसपास की स्पष्ट पंक्तियों से लिया गया है।)

आँगन में रमुआ को लालटेन जलाते देख राहुल उसके निकट जा पहुँचा। ‘मैं भी जलाऊँ?’ कह वह उसकी मदद करने लगा। जब पैट्रोमैक्स की लालटेन झक से जल उठी, तो उसे बड़ा आनंद आया। वह लालटेन उठाकर दादी के पास गया। दादी की खाट बाहर पीछे की तरफ बिछी थी। ‘लाओ बेटा, इधर, आओ, मेरे पास बैठो। अपने हालचाल सुनाओ।’ दोनों रस्सी से बुनी चारपाई पर बैठ गए। कितना रोमांचकारी लग रहा था वातावरण — लालटेन की सीमित रोशनी में चारों ओर की टूटी दीवारें, फ़र्श पर पड़ी दरारें तथा कोनों में बेतरतीब बिखरी लकड़ियों व कोयलों के ढेर अदृश्य हो गए। रह गया दादी का मधुर, प्रेम भरा सामीप्य। दादी ने पद्मिनी को अपने से सटाकर बिठा लिया था और उसके रेशमी बालों को प्यार से सहलाने लगीं। पद्मिनी को यह अच्छा लग रहा था। बाहर काली रात के साए में मेंढकों का टर्राना सुनाई दे रहा था। ऊपर नभ में ढेर सारे तारे छिटके थे। पद्मिनी को लगा जैसे वे किसी बीते हुए अतीत में पुनः आ गए थे। यही विशेष बात थी डैड के देश की — प्राचीन जीवन व सभ्यता से अब भी वह कितना जुड़ा हुआ था।

‘बेटा, तुमने रामायण-महाभारत की कहानियाँ सुनी हैं?’ दादी का कोमल स्वर सुन पद्मिनी उत्सुकतापूर्वक उनकी ओर देखने लगी। ‘ओह दादी! आप फिर अपने किस्से-कहानी लेकर बैठ गईं?’ पिंकी के स्पष्ट स्वर ने पद्मिनी को झकझोरकर फिर वर्तमान में ला दिया। ‘सुनाइए न दादी।’ राहुल बोला, ‘डैड ने कुछ सुनाया है परंतु…।’ ‘ओह नो, नॉट अगेन? फिर वही पुरानी कथाएँ?’ पिंकी ने मुँह बनाया। ‘बेटा, पुराण कथाओं में कितना ज्ञान भरा है। हमारे जीवन के सिद्धांतों, मान्यताओं व मूल्यों के विषय में इनसे पता चलता है,’ दादी बोली। ‘आजकल के साइंस के ज़माने में तुम्हारी कहानियाँ बिल्कुल फ़िट नहीं बैठतीं,’ पिंकी ने बहस की, ‘क्या मिलेगा हमें उनसे?’ ‘जो ढूँढे उसे मिले!’ बहस सुन दादाजी भी आ गए और कहा, ‘किस्सों द्वारा ही पहले आम लोगों को अच्छे-बुरे का ज्ञान मिलता था। मनोरंजन के साथ आदर्श व मूल्य समझाने का कार्य भी हो जाता था। एक पंथ दो काज।’ दादी हँसी। ‘हाँ, हाँ हम सुनेंगे,’ कहते हुए राहुल व पद्मिनी दादी के और निकट सरक आए। फिर कहानियों का ऐसा दौर चला कि कब भोजन का समय हुआ, पता ही नहीं चला।

रात का भोजन बाहर आँगन में ही किया गया। डैड ने बचपन में खाए सत्तू की लिट्टी की माँग पेश की थी। सुनते ही पिंकी-विकी ने नाक-भौं चढ़ाया और अपने लिए सूप, ब्रेड व अंडे बनवा लिए। दोनों विदेशी बच्चों के लिए लिट्टी ही विशेष व्यंजन बन गया। दादी ने गोबर के उपलों को खाट के निकट ही रखवा लिया। गोल-गोल आटे की सत्तू भरी लिट्टियाँ उनमें डाल दी गईं और गर्म घी के साथ मज़े से खाया गया। इस प्राचीन ढंग से बेक की गई पेस्ट्री में कितना सोंधा स्वाद था। उन्हें क्या पता उपले कहाँ से आए थे? खाते-खाते अगले दिन का प्रोग्राम बनने लगा।

‘अब यहाँ म्यूज़ियम तो है नहीं,’ पिंकी बोली, ‘क्या दिखाऊँ तुम्हें? हमीरपुर छोटी जगह है। अब मुंबई, दिल्ली होता तब अच्छा लगता। उन्हें देख पता चलता, इंडिया कैसा है। कितने स्मार्ट और पढ़े-लिखे लोग हैं यहाँ।’ ‘हमीरपुर देखकर लगता होगा कि तुम किसी गाँव में आ गए हो,’ विकी हँसकर बोला। ‘मुझे बहुत रोचक लग रहा है सब कुछ,’ पद्मिनी ने गंभीरतापूर्वक आश्वासन दिया। ‘मेरे लिए तो सब एक बड़ा एडवेंचर है,’ राहुल ने खुश होकर कहा, ‘रात के अंधेरे में बाहर बैठकर खाना पकाने और खाने में कितना मज़ा आया। लालटेन जली है, नीले आकाश की छत है और यह रस्सी की बनी अजब-सी चारपाई है। पर मैं सचमुच का एक गाँव देखना चाहूँगा।’ ‘गाँव?’ विकी उछला, ‘हमीरपुर भी विलेज ही है।’ ‘नहीं!’ पिंकी ने समझाया, ‘इसका मतलब रियल विलेज से है। जहाँ लोग केवल हट में रहते हैं। हमारे आसपास कई ऐसी जगह है। चलो, कल इन्हें दिखा दें!’ ‘कहाँ ले चलें?’ विकी सोचने लगा, ‘हाँ, वे जो खंडहर हैं, उनके पास बसा एक छोटा-सा रियल विलेज है। वहीं चला जाए।’

पद्मिनी की नीली आँखें रोशनी में चमक उठीं। ‘खंडहर? यानी टूटे-फूटे ध्वस्त भवन? कब के हैं? क्या वे बहुत प्राचीन हैं?’ वह उत्सुकतावश उछलकर खड़ी हो गई। उसकी उत्सुकता देख पिंकी हँसने लगी। ‘इतना सब कुछ हमें नहीं मालूम। हमने केवल दूर से उन्हें देखा है। पास जाने की कभी इच्छा नहीं हुई। टूटी-फूटी दीवारों को देखने में मेरी रुचि तो नहीं है।’ ‘मुझे है,’ पद्मिनी बोली, ‘मैंने बताया न, मुझे इतिहास में विशेष रुचि है। पुराने खंडहर में खोज व अन्वेषण करने मैं अनेक बार पाठशाला से गई हूँ। हमने काफी अध्ययन भी किया है इस विषय पर। किस प्रकार प्राचीन भग्नावशेष पर खोज की जाती है और समय व इतिहास की जानकारी ली जाती है। इस सब का मुझे थोड़ा-बहुत ज्ञान है। मैं अवश्य देखना चाहूँगी उन खंडहरों को।’ ‘मैं भी। शायद उधर कुछ दुर्लभ पक्षियों का भी संकेत मिल जाए,’ राहुल बोला, ‘मैं अपना कैमरा ले चलूँगा ताकि पक्षियों के चित्र खींच सकूँ।’ ‘उल्लू और चमगादड़ के सिवाय और क्या मिलेगा?’ विकी ने हँसते हुए कहा, ‘खंडहरों में यही सब तो पाए जाते हैं।’ ‘वे भी ठीक रहेंगे,’ राहुल खुशी-खुशी बोला, ‘चमगादड़ भी एक ऐसा पक्षी है जो हर जगह नहीं मिलता और फिर भारतीय चमगादड़ कैसे होते हैं, मैं अवश्य देखना चाहूँगा। पाठशाला में प्रकृति-विज्ञान के लिए यह चित्र रोचक होंगे। हम अवश्य इन खंडहरों में चलेंगे।’ पद्मिनी को लगा जैसे पिंकी-विकी इस बात पर बहुत खुश नहीं थे। लेकिन उसने मन ही मन तय कर लिया कि वह खंडहरों को अवश्य देखेगी। यदि वे नहीं जाना चाहेंगे, तो वह और राहुल ही चले जाएँगे। उन्हें हिंदी आती ही थी। कोई कठिनाई नहीं होगी; नक्शा देखते हुए वे स्वयं घूम आएँगे। कहानी यहीं समाप्त होती है — अगले दिन खंडहर जाने का वर्णन नहीं दिया गया है।

तुम्हें क्या सीखना चाहिए

इस कहानी से सीखो — पिंकी-विकी बनाम राहुल-पद्मिनी का अंतर (अपनी भाषा, अपने गाँव, अपनी कहानियों और अपने खाने के प्रति दो रुख); दादा-दादी की भूमिका (प्रेम भरा सामीप्य, पुराण कथाओं से ज्ञान और मूल्य); कहानी के मुख्य प्रसंग (स्वागत की तैयारी, बिजली गायब होना, लालटेन और चारपाई, कहानियों का दौर, लिट्टी का भोजन, अगले दिन का प्रोग्राम और खंडहरों की योजना)। शब्दार्थ याद रखो (म्यूज़ियम–संग्रहालय, उत्सुक–प्रबल इच्छा, दुर्लभ–जो जल्दी न मिले, अन्वेषण–खोज, सामीप्य–पास में, भग्नावशेष–खंडहर, अतीत–बीता हुआ) और व्याकरण सीखो (शुद्ध रूप, वचन, सर्वनाम, जानवरों की बोली)।

मुख्य शब्द

  • म्यूज़ियम — संग्रहालय; वह स्थान जहाँ एक ही अथवा अनेक प्रकार की चीज़ों का संग्रह हो
  • उत्सुक — प्रबल इच्छा (वाला)
  • दुर्लभ — जिसे पाना सहज न हो, जो जल्दी न मिले
  • अन्वेषण — खोज
  • सामीप्य — नज़दीक में, पास में
  • भग्नावशेष — भग्न + अवशेष; खंडहर, टूटे हुए अवशेष
  • अतीत — बीता हुआ (समय)
  • सत्तू की लिट्टी — आटे की सत्तू भरी गोल टिकिया, उपलों पर सेंकी जाती है
  • पैट्रोमैक्स — एक प्रकार की तेज़ रोशनी वाली लालटेन
  • उपले — गोबर के सुखाए गए पिंड, ईंधन के रूप में प्रयुक्त

याद रखें

  • पाठ: ‘दादा-दादी के साथ’; पात्र: पिंकी, विकी, राहुल, पद्मिनी, दादा-दादी, पापा-मम्मी, रमुआ।
  • राहुल व पद्मिनी: इंग्लैंड से आए, चाचा विपिन प्रताप सिंह के बच्चे; पिंकी-विकी के हम उम्र भाई-बहन; अब तक कभी मुलाकात नहीं हुई थी।
  • स्वागत: पूरा परिवार + नौकर, दाई, माली, चौकीदार कई दिनों से घर की सफ़ाई में लगे।
  • इंग्लैंड में राहुल-पद्मिनी के केवल दो रिश्तेदार: मम्मी के अविवाहित भाई और नाना (क्रिसमस पर उपहार)।
  • खटकने वाली बात: पिंकी-विकी अपनी भाषा (हिंदी) होते हुए भी सदा अंग्रेज़ी में बोलते थे, आपस में भी।
  • लालटेन-प्रसंग: रमुआ की मदद से राहुल ने पैट्रोमैक्स जलाई; दादी की खाट, रस्सी की चारपाई, मेंढकों का टर्राना, तारों भरा आकाश।
  • कहानी-बहस: दादी — पुराण कथाओं में ज्ञान, सिद्धांत, मान्यताएँ, मूल्य; पिंकी — साइंस के ज़माने में फ़िट नहीं; दादाजी — ‘जो ढूँढे उसे मिले’, ‘एक पंथ दो काज’।
  • भोजन: आँगन में; डैड की माँग — सत्तू की लिट्टी; पिंकी-विकी ने सूप, ब्रेड, अंडे लिए; लिट्टी उपलों पर सेंककर गर्म घी के साथ खाई गई।
  • अगले दिन का प्रोग्राम: हमीरपुर छोटी जगह; रियल विलेज + खंडहर देखने की योजना।
  • पद्मिनी की उत्सुकता का कारण: इतिहास में विशेष रुचि; पाठशाला से खंडहरों में अन्वेषण का अनुभव।
  • राहुल की रुचि: दुर्लभ पक्षियों के चित्र — कैमरा ले चलना; चमगादड़ भी ठीक।
  • अंत: कहानी अगले दिन के वर्णन के बिना समाप्त — इसलिए ‘अधूरी’ लग सकती है।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: राहुल-पद्मिनी को पिंकी-विकी के भाई-बहन लिखना — वे चाचा विपिन प्रताप सिंह के बच्चे हैं, चचेरे भाई-बहन। दूसरी गलती: ‘किसने कहा’ में (क)(घ)(ङ) का वक्ता किसी एक पात्र का नाम लिखना — किताब में ये वाक्य परिवार के लोगों/रिश्तेदारों के हैं, किसी एक नाम से नहीं। तीसरी गलती: लिट्टी को पिंकी-विकी का पसंदीदा खाना बताना — लिट्टी डैड की माँग थी; पिंकी-विकी ने सूप, ब्रेड, अंडे लिए। चौथी गलती: कहानी का अंत बता देना — कहानी अगले दिन के वर्णन के बिना समाप्त होती है; आगे क्या हुआ, वह अनुमान का प्रश्न है।

सारणी / चार्ट: दो रुख — पिंकी-विकी बनाम राहुल-पद्मिनी

विषयपिंकी-विकी का रुखराहुल-पद्मिनी का रुख
भाषाहिंदी होते हुए भी सदा अंग्रेज़ी में बोलते हैं, आपस में भीहिंदी सीखना चाहते हैं; हिंदी भली-भाँति समझते हैं
कहानियाँपुरानी कथाएँ ‘फ़िट नहीं बैठतीं’; ‘ओह नो, नॉट अगेन’सुनना चाहते हैं; ‘हाँ, हाँ हम सुनेंगे’
खानालिट्टी पर नाक-भौं; सूप, ब्रेड, अंडेलिट्टी ही विशेष व्यंजन; सोंधा स्वाद
गाँव/खंडहरहमीरपुर ‘विलेज ही है’; खंडहरों में रुचि नहींसब रोचक, बड़ा एडवेंचर; खंडहर + दुर्लभ पक्षी देखना चाहते हैं
दादा-दादीकिस्से-कहानी से ऊबते हैंदादी के सामीप्य में आनंद; कहानियाँ सुनना चाहते हैं

अभ्यास — खुद करके देखो

  1. राहुल और पद्मिनी को पिंकी-विकी की कौन-सी बात खटकती थी? उदाहरण सहित लिखो।
    संकेत: भाषा के प्रयोग के बारे में सोचो — हिंदी होते हुए भी क्या बोलते थे?
  2. दादी की खाट और लालटेन वाले प्रसंग में वातावरण कैसा था? अपने शब्दों में वर्णन करो।
    संकेत: टूटी दीवारें, दरारें, लकड़ी-कोयले के ढेर — लालटेन की रोशनी में क्या दिखा और क्या छिप गया?
  3. पिंकी और दादाजी के बीच कहानियों को लेकर क्या बहस हुई? दोनों के तर्क लिखो।
    संकेत: ‘साइंस का ज़माना’ बनाम ‘जो ढूँढे उसे मिले’ — दोनों पक्ष सोचो।
  4. पद्मिनी खंडहर क्यों देखना चाहती थी? उसके किन अनुभवों ने उसे उत्सुक बनाया?
    संकेत: इतिहास की रुचि और पाठशाला के अन्वेषण के बारे में सोचो।
  5. अगर तुम्हारे यहाँ कोई संबंधी आए, तो तुम क्या-क्या करोगे? सूची बनाओ।
    संकेत: स्वागत, सफ़ाई, खाना, घुमाना — अपने घर के हिसाब से सोचो।

प्रश्नोत्तर

  1. सभी लोग घर की सफ़ाई क्यों कर रहे थे?
    क्योंकि इंग्लैंड से राहुल और पद्मिनी आ रहे थे — सात समुद्र पार से आने वाले अतिथियों के स्वागत की तैयारी में पूरा परिवार लगा था; दादा-दादी, पापा-मम्मी, पिंकी-विकी ही नहीं, नौकर, दाई, माली, चौकीदार भी कई दिनों से घर की सफ़ाई में लगे थे।
  2. पद्मिनी और राहुल को पिंकी-विकी की कौन-सी बात खटकती थी?
    यह बात कि पिंकी-विकी अपनी भाषा (हिंदी) होते हुए भी सदा अंग्रेज़ी में ही बोलते थे — राहुल-पद्मिनी से भी, और आपस में भी। राहुल-पद्मिनी हिंदी भली-भाँति समझते थे और भारत आकर हिंदी का अभ्यास करना चाहते थे, परंतु यहाँ कोई भी ठीक से हिंदी नहीं बोलता था।
  3. पद्मिनी की उत्सुकता का क्या कारण था?
    खंडहरों के प्रति पद्मिनी की उत्सुकता का कारण यह था कि उसे इतिहास में विशेष रुचि थी और वह पुराने खंडहरों में खोज व अन्वेषण करने अनेक बार पाठशाला से जा चुकी थी; प्राचीन भग्नावशेष पर खोज और समय-इतिहास की जानकारी का उसे थोड़ा-बहुत ज्ञान भी था।
  4. राहुल और पद्मिनी को यहाँ का गाँव क्यों अच्छा लगा?
    क्योंकि उन्हें सब कुछ रोचक और एक बड़ा एडवेंचर लग रहा था — प्राचीन जीवन व सभ्यता से जुड़ा हुआ देश, लालटेन की रोशनी, नीले आकाश की छत के नीचे बाहर बैठकर खाना पकाना और खाना, रस्सी की चारपाई, मेंढकों का टर्राना, तारों भरा आकाश; और ऊपर से पद्मिनी की इतिहास-रुचि और राहुल की दुर्लभ पक्षियों के चित्र खींचने की इच्छा।
  5. ‘किसने कहा, किससे कहा और क्यों कहा’ — पाँचों वाक्यों का उत्तर लिखो।
    (क) ‘अच्छा किया जो इन्हें हिंदी सिखाई’ — परिवार के लोगों/रिश्तेदारों ने डैड-मम्मी से कहा, क्योंकि राहुल-पद्मिनी हिंदी समझ लेते थे, नहीं तो उनकी बात समझ न पाते। (ख) ‘ओ हो! आई एम सो सॉरी!’ — पिंकी ने राहुल-पद्मिनी से कहा, क्योंकि शाम को बिजली गायब थी और उसे लगा कि वे सोचेंगे कि इंडिया कैसी कंट्री है। (ग) ‘अपनी भाषा होते हुए भी न जाने क्यों वे सदा अंग्रेज़ी ही बोलते हैं’ — पद्मिनी ने मन ही मन सोचा (राहुल के संदर्भ में भी), क्योंकि पिंकी-विकी हिंदी होते हुए भी अंग्रेज़ी बोलते थे। (घ) ‘अच्छा, यही है तुम्हारी बेटी?’ — परिवार के लोगों/रिश्तेदारों ने डैड से कहा, पहली भेंट पर आश्चर्य और स्नेह से। (ङ) ‘लगता है बेटी माँ जैसी है। वही नीली आँखें और काले बाल। बड़ी सुंदर निकली है’ — परिवार के लोगों/रिश्तेदारों ने कहा, पद्मिनी की प्रशंसा में।

किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर

किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर। व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से लिखने हैं।

  1. पाठ से 1 — सभी लोग घर की सफ़ाई क्यों कर रहे थे?
    इंग्लैंड से आने वाले अतिथियों राहुल-पद्मिनी के स्वागत की तैयारी में।
  2. पाठ से 2 — पद्मिनी और राहुल को पिंकी-विकी की कौन-सी बात खटकती थी?
    पिंकी-विकी का हिंदी होते हुए भी सदा अंग्रेज़ी में बोलना — दूसरों से भी, आपस में भी।
  3. पाठ से 3 — पद्मिनी की उत्सुकता का क्या कारण था?
    इतिहास में विशेष रुचि और पाठशाला से खंडहरों में अन्वेषण का अनुभव।
  4. पाठ से 4 — राहुल और पद्मिनी को यहाँ का गाँव क्यों अच्छा लगा?
    सब कुछ रोचक और एडवेंचर-सा लगा — प्राचीन जीवन, लालटेन, खुले आकाश के नीचे खाना, चारपाई, इतिहास और पक्षी-रुचि।
  5. पाठ से 5 — किसने कहा, किससे कहा और क्यों कहा?
    (क) परिवार के लोगों ने डैड-मम्मी से — हिंदी सिखाने की प्रशंसा में। (ख) पिंकी ने राहुल-पद्मिनी से — बिजली जाने पर क्षमा माँगते हुए। (ग) पद्मिनी ने मन ही मन — पिंकी-विकी के अंग्रेज़ी बोलने पर। (घ) परिवार के लोगों ने डैड से — पहली भेंट पर। (ङ) परिवार के लोगों ने — पद्मिनी की प्रशंसा में।
  6. पाठ से आगे 1 — इस कहानी में किसकी भूमिका आपको अच्छी लगी और क्यों?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: दादी की, क्योंकि उन्होंने प्रेम से कहानियाँ सुनाईं और ज्ञान दिया; या पद्मिनी की, क्योंकि उसे अपनी जड़ों और इतिहास में रुचि थी।)
  7. पाठ से आगे 2 — क्या आपको लगता है कि यह कहानी अधूरी है? यदि ‘हाँ’ तो क्यों?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: हाँ, क्योंकि कहानी अगले दिन खंडहर जाने की योजना पर समाप्त हो जाती है; वहाँ क्या हुआ, यह बताया ही नहीं गया।)
  8. पाठ से आगे 3 — सोचिए, इस कहानी के अंत में अगले दिन क्या हुआ होगा?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: सब खंडहर गए होंगे; पद्मिनी ने खोज की होगी; राहुल ने पक्षियों के चित्र खींचे होंगे; पिंकी-विकी को भी मज़ा आया होगा।)
  9. पाठ से आगे 4 — अगर आपके यहाँ कोई संबंधी आए तो आप क्या-क्या करेंगे?
    (अपना उत्तर लिखो — जैसे: घर साफ़ करूँगा, स्वागत करूँगा, अच्छा खाना बनवाऊँगा, गाँव/शहर घुमाऊँगा, दादा-दादी से मिलवाऊँगा।)
  10. व्याकरण 1 — निम्न शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए।
    प्राचिन — प्राचीन; खंढहर — खंडहर; भगनावसेस — भग्नावशेष; मयूजियम — म्यूज़ियम।
  11. व्याकरण 2 — निम्न शब्दों के वचन बदलिए।
    अतिथि — अतिथि; मेंढक — मेंढक; कहानी — कहानियाँ; संबंधी — संबंधी (विभक्ति के साथ: संबंधियों); खंडहर — खंडहर; दीवार — दीवारों। (नोट: अतिथि, मेंढक, खंडहर के रूप एकवचन और बहुवचन में समान रहते हैं; कहानी, दीवार के रूप बदलते हैं।)
  12. व्याकरण 3 — इन वाक्यों में सर्वनाम शब्द को रेखांकित कीजिए।
    (क) ‘अच्छा, यही है तुम्हारी बेटी?’ — तुम्हारी (तुम का रूप)। (ख) ‘वह उसकी मदद करने लगा’ — वह, उसकी। (ग) ‘जो ढूँढे उसे मिले’ — जो, उसे। (घ) ‘मैं अवश्य देखना चाहूँगी उन खंडहरों को’ — मैं, उन।
  13. व्याकरण 4 — खाली स्थान को जानवरों की बोली से भरिए।
    मेंढक — टर्राता है (टर-टर); कुत्ता — भौंकता है (भौं-भौं); गधा — रेंकता है (ढेंचू-ढेंचू); बकरी — मिमियाती है (में-में)।
  14. कुछ करने को 1 — आपके घर पर किसी खास अवसर पर कौन-कौन संबंधी/रिश्तेदार आते हैं? उनकी सूची बनाइए।
    (गतिविधि: अपने घर पर त्योहार, शादी या अन्य अवसर पर आने वाले संबंधियों — चाचा-चाची, बुआ-फूफा, मामा-मामी, दादा-दादी, नाना-नानी — की सूची बनाओ।)
  15. कुछ करने को 2 — क्या आपको भी दादी/नानी कोई कहानी सुनाती हैं? कहानी सुनते समय आप क्या महसूस करते हैं? अपनी कक्षा में सुनाइए।
    (गतिविधि: दादी/नानी की सुनाई कहानी और सुनते समय की अपनी अनुभूति कक्षा में सुनाओ।)

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