Chapter 1: अरमान
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 6 • Hindi • Book: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
अरमान — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Kislay Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 6) | अध्याय 1 | प्रकार: कविता | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): सपने देखते हुए एक बच्चा और सुबह का सूरज। यह एक सामान्य चित्र है, किताब का दृश्य नहीं।

सुबह के आसमान में पतंग उड़ाते बच्चे — सपनों और उमंग का एक सामान्य चित्र।
अध्याय का सार
यह कविता अरमानों की कविता है — मन की उस लालसा की, जो किसी को कुछ बड़ा और अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है। कवि का अरमान केवल अपने लिए कुछ पाना नहीं है। उसका शौक यही है कि वह कुछ करके दिखाए, ताकि मरने वाली दुनिया में भी उसका नाम अमरों में लिखा जाए — अर्थात् अच्छे कामों से वह ऐसी पहचान बनाए जो समय के साथ मिटे नहीं। कविता की पहचान इसी भाव से होती है: “है शौक यही अरमान यही” — कुछ कर दिखाने की इच्छा।
कविता का अरमान दूसरों से जुड़ा हुआ है। जो लोग गरीब हैं और जिन पर किसी की छाया नहीं है — जिनका कोई सहारा नहीं — कवि उन्हें गले लगाना चाहता है और सुखी बनाना चाहता है। जो लोग हारकर बैठ गए हैं और जिनकी उम्मीद मर गई है, उनके बुझे मन में वह फिर से उत्साह जगाना चाहता है। इस तरह अरमान यहाँ दया, सहानुभूति और हौसला बढ़ाने का रूप लेता है: अपना सपना दूसरों के काम आना चाहिए।
कविता का तीसरा भाव देश से जुड़ा है। कवि कहता है कि उसे रोका न जाए, आगे बढ़ने दिया जाए, क्योंकि वह आज़ादी के दीवानों में से है और मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वस्व — सब कुछ — लगाना चाहता है। अंत में वह अपने को उन वीरों का बच्चा बताता है जो धुन के पक्के और सच्चे थे, और कहता है कि वह उनका मान बढ़ाएगा और जग में नाम कमाएगा। इस तरह कविता का संदेश पूरा होता है: सच्चा अरमान वह है जिसमें अपना सपना, दूसरों की भलाई और देश की सेवा — तीनों जुड़े हों, और उसके लिए लगन, सच्चाई और मेहनत हो।
तुम्हें क्या सीखना चाहिए
इस कविता से अरमान का अर्थ और उसके तीन आयाम सीखो — अपना लक्ष्य (कुछ कर दिखाना), दूसरों के प्रति कर्तव्य (गरीबों को सहारा, हारों में उत्साह) और देश के प्रति कर्तव्य (मातृभूमि की सेवा, वीरों का मान)। शब्दार्थ याद रखो (अरमान–लालसा, सर्वस्व–सब कुछ, धुन–लगन, अमर–अविनाशी, उत्साह–उमंग), व्याकरण का अल्प-विराम वाला बिंदु समझो, और ‘मान’ लगाकर बनने वाले शब्दों का अभ्यास करो।
मुख्य शब्द
- अरमान — मन की गहरी इच्छा या लालसा; कोई सपना जिसे पाने की तीव्र चाह हो
- लालसा — किसी चीज़ को पाने की प्रबल इच्छा
- सर्वस्व — सब कुछ; जो कुछ अपने पास है, वह सब
- धुन — लगन; किसी काम में पूरी तरह लगा रहना
- अमर — नहीं मरने वाला, अविनाशी; यहाँ अच्छे कामों से बनी स्थायी पहचान के अर्थ में
- उत्साह — उमंग; काम करने का जोश और हिम्मत
- मातृभूमि — अपनी जन्मभूमि, अपना देश — माँ के समान प्यारी भूमि
- अल्प-विराम — वाक्य में ठहराव दिखाने वाला चिह्न (,); इसके स्थान से वाक्य का अर्थ बदल सकता है
याद रखें
- कविता के कवि रामनरेश त्रिपाठी हैं; यह एक कविता है, कहानी नहीं।
- कवि का अरमान: कुछ कर दिखाना और अच्छे कामों से अमरों में नाम लिखाना।
- गरीबों को गले लगाना और सुखी बनाना; हारकर बैठे लोगों के बुझे मन में फिर से उत्साह जगाना।
- मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वस्व लगाना; वीरों का मान बढ़ाना और जग में नाम कमाना।
- अरमान केवल अपने लिए नहीं — दूसरों की भलाई और देश की सेवा भी उसका हिस्सा है।
- शब्दार्थ: अरमान–लालसा, सर्वस्व–सब कुछ, धुन–लगन, अमर–अविनाशी, उत्साह–उमंग।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: उत्तर में केवल ‘सपने देखो’ लिख देना। परीक्षा में कविता के तीनों आयाम लिखो — अपना लक्ष्य, दूसरों की भलाई और देश की सेवा — तभी उत्तर पूरा माना जाएगा। दूसरी गलती: अरमान को केवल ‘इच्छा’ कहकर छोड़ देना — किताब का शब्दार्थ लालसा है, वही लिखो। तीसरी गलती: कवि का नाम गलत लिखना — कवि रामनरेश त्रिपाठी हैं। चौथी गलती: अल्प-विराम वाले प्रश्न में केवल चिह्न का नाम लिखना — यह भी बताओ कि चिह्न की जगह बदलने से अर्थ कैसे बदल जाता है (उदाहरण सहित)।
सारणी / चार्ट: कविता के भाव — क्रम से
| क्रम | भाव | क्या कहा गया है |
|---|---|---|
| 1 | कुछ कर दिखाना | शौक और अरमान यही है कि कुछ करके दिखाएँ; अच्छे कामों से अमरों में नाम लिखाएँ |
| 2 | गरीबों का सहारा | जिन पर किसी की छाया नहीं, उन्हें गले लगाना और सुखी बनाना |
| 3 | हारों में उत्साह | हारकर बैठे और उम्मीद खो चुके लोगों के बुझे मन में फिर से उत्साह जगाना |
| 4 | मातृभूमि की सेवा | रोको मत, आगे बढ़ने दो — आज़ादी के दीवाने हैं; मातृभूमि की सेवा में सर्वस्व लगाना |
| 5 | वीरों का मान | धुन के पक्के, सच्चे वीरों के बच्चे हैं — उनका मान बढ़ाना, जग में नाम कमाना |
अभ्यास — खुद करके देखो
- अरमान किसे कहते हैं? किताब का शब्दार्थ क्या है?
संकेत: लालसा शब्द को याद करो। - कविता में गरीबों और हारकर बैठे लोगों के लिए क्या कहा गया है?
संकेत: गले लगाना, सुखी बनाना और उत्साह जगाना — तीनों बातें सोचो। - कवि मातृभूमि की सेवा में क्या लगाना चाहता है? सर्वस्व का क्या अर्थ है?
संकेत: सब कुछ — यही सर्वस्व है। - अल्प-विराम की जगह बदलने से अर्थ कैसे बदल जाता है? ‘रोको मत, जाने दो’ वाले उदाहरण से समझाओ।
संकेत: एक बार ‘रोको’ के बाद ठहरो, एक बार ‘मत’ के बाद — अर्थ उल्टा हो जाएगा। - अपना एक अरमान लिखो और उसे पूरा करने के लिए दो काम बताओ जो तुम अभी कर सकते हो।
संकेत: अपने अनुभव से जोड़कर लिखो; बड़ा सपना और छोटे कदम दोनों लिखो।
प्रश्नोत्तर
- अरमान शब्द का क्या अर्थ है?
अरमान का अर्थ है मन की गहरी इच्छा या लालसा — कोई सपना जिसे पाने की तीव्र चाह हो। इस कविता में अरमान केवल अपने लिए कुछ पाना नहीं है, बल्कि कुछ करके दिखाना और दूसरों तथा देश के काम आना है। - कविता के अनुसार कवि गरीबों के लिए क्या करना चाहता है?
कवि उन लोगों को गले लगाना चाहता है जो गरीब हैं और जिन पर किसी की छाया नहीं है, अर्थात् जिनका कोई सहारा नहीं है, और उन्हें सुखी बनाना चाहता है। यह कविता के अरमान का दूसरों से जुड़ा आयाम है — अपना सपना दूसरों की भलाई से जुड़ा होना चाहिए। - हारकर बैठे लोगों के लिए कविता में क्या कहा गया है?
जो लोग हारकर बैठ गए हैं और जिनकी उम्मीद मर गई है, उनके बुझे मन में कवि फिर से उत्साह जगाना चाहता है। संदेश यह है कि हार अंतिम नहीं होती — हौसला जगाने से मनुष्य फिर कोशिश कर सकता है। - मातृभूमि के प्रति कवि का भाव क्या है?
कवि कहता है कि उसे रोका न जाए, आगे बढ़ने दिया जाए, क्योंकि वह आज़ादी के दीवानों में से है और मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वस्व — सब कुछ — लगाना चाहता है। देश की सेवा उसके अरमान का सबसे ऊँचा आयाम है। - इस कविता से हमें क्या सीख मिलती है?
सीख यह है कि सच्चा अरमान तीन बातों से बनता है — अपना लक्ष्य (कुछ कर दिखाना), दूसरों की भलाई (गरीबों का सहारा, हारों में उत्साह) और देश की सेवा (मातृभूमि के लिए सर्वस्व, वीरों का मान) — और इनके लिए लगन, सच्चाई और मेहनत चाहिए।
किताब के अभ्यास — विस्तार सहित प्रश्नोत्तर
किताब के ‘प्रश्न-अभ्यास’ खंड से, EG के अपने शब्दों में उत्तर। व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभव से लिखने हैं — यहाँ उनकी विधि और दिशा दी गई है।
- पाठ से 1 — कविता में गरीबों को गले लगाने और सुखी बनाने की बात क्यों की गई है?
क्योंकि कवि का अरमान केवल अपने लिए नहीं है। जिन लोगों पर किसी की छाया नहीं है, अर्थात् जिनका कोई सहारा नहीं है, उन्हें सहारा देना और सुखी बनाना ही मनुष्य का कर्तव्य है। गरीबों की भलाई के बिना अरमान अधूरा रहता है — सपना तभी बड़ा होता है जब वह दूसरों के काम आए। - पाठ से 2 — इस कविता में हारे हुए व्यक्ति के लिए क्या कहा गया है?
हारे हुए व्यक्ति के लिए कहा गया है कि वह हारकर बैठा है और उसकी उम्मीद मर गई है, इसलिए उसके बुझे मन में फिर से उत्साह जगाना चाहिए। हार को अंत नहीं मानना चाहिए — हौसला जगाने से वह फिर कोशिश कर सकता है। - पाठ से 3 — इन पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए: ‘रोको मत, आगे बढ़ने दो — आज़ादी के दीवाने हैं। हम मातृभूमि की सेवा में, अपना सर्वस्व लगाएँगे।’
भाव यह है कि देश की सेवा करने वाले को रोका नहीं जाना चाहिए। कवि अपने को आज़ादी का दीवाना बताता है — वह देश के लिए कुछ करना चाहता है और इसमें अपना सब कुछ लगाने को तैयार है। ‘सर्वस्व’ का अर्थ है जो कुछ अपने पास है, वह सब। यह पंक्तियाँ देशप्रेम और त्याग का भाव व्यक्त करती हैं। - पाठ से 4 — पूर्वजों का मान बढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
कविता के अनुसार हमें धुन के पक्के और सच्चे वीरों के बच्चे होने का मान रखना चाहिए — अर्थात् लगन और सच्चाई से काम करना चाहिए, अच्छे काम करके उनका मान बढ़ाना चाहिए और जग में नाम कमाना चाहिए। मान केवल कहने से नहीं बढ़ता, अच्छे कामों से बढ़ता है। - पाठ से 5 — क्या आप कभी किसी चीज़ से हारे हैं? यदि ‘हाँ’, तो आपने हार को जीत कैसे बनाया?
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: किस काम में हार मिली, मन कैसा हुआ, किसने हौसला बढ़ाया, क्या नया तरीका अपनाया और फिर कैसे सफलता मिली। हार से मिली सीख भी लिखो; इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है।) - पाठ से आगे 1 — इस कविता का कौन-सा अंश आपको ज़्यादा झकझोरता है? विवेचना कीजिए।
(अपना उत्तर लिखो — जैसे: गरीबों को गले लगाने वाला अंश, हारों में उत्साह जगाने वाला अंश, या मातृभूमि की सेवा वाला अंश — और बताओ कि वह अंश तुम्हारे मन को क्यों छूता है, तुम्हारे जीवन से उसका क्या संबंध है।) - पाठ से आगे 2 — आपके भी कुछ शौक या अरमान होंगे; उनको पूरा करने के लिए आप क्या करना चाहेंगे?
(अपना उत्तर लिखो — अपना अरमान, उसे पूरा करने के लिए रोज़ के छोटे कदम, किसकी मदद लोगे, और कठिनाई आने पर क्या करोगे।) - पाठ से आगे 3 — जन्मभूमि या मातृभूमि के प्रति कैसा लगाव होना चाहिए?
मातृभूमि के प्रति माँ जैसा लगाव होना चाहिए — उसके प्रति सम्मान, प्रेम और सेवा का भाव। उसकी भलाई के लिए काम करना, उसके लोगों की मदद करना और ज़रूरत पड़ने पर अपना सर्वस्व लगाने की भावना रखना ही सच्चा लगाव है। - पाठ से आगे 4 — यदि आप चाहते हैं कि देश आप पर अभिमान करे, तो इसके लिए आपको क्या काम करना होगा?
अच्छे काम करने होंगे — ईमानदारी से पढ़ाई, दूसरों की मदद, देश के नियमों का पालन, और ऐसा काम जिससे समाज और देश का भला हो। नाम कमाने के लिए पहले काम करना पड़ता है; अभिमान कामों से पैदा होता है, कहने से नहीं। - व्याकरण — ‘रोको, मत जाने दो।’ और ‘रोको मत, जाने दो।’ में अल्प-विराम की जगह बदलने से अर्थ कैसे बदल गया? ऐसे कुछ और वाक्य बनाइए।
पहले वाक्य में ‘रोको’ के बाद अल्प-विराम है, इसलिए अर्थ है — ‘रोको, उसे मत जाने दो’ (रोकने को कहा गया है)। दूसरे वाक्य में ‘मत’ के बाद अल्प-विराम है, इसलिए अर्थ है — ‘रोको मत, उसे जाने दो’ (जाने देने को कहा गया है)। एक ही चिह्न की जगह बदलने से अर्थ उल्टा हो गया। अपने वाक्य बनाओ — जैसे: ‘खाओ, मत जाओ।’ / ‘खाओ मत, जाओ।’ — और अर्थ का अंतर लिखो। - व्याकरण — ‘मान’ लगाकर नए शब्द बनाइए: अर + मान, अप + मान, अभि + मान, सम् + मान, बुद्धि + मान, गति + मान।
अर + मान = अरमान; अप + मान = अपमान; अभि + मान = अभिमान; सम् + मान = सम्मान; बुद्धि + मान = बुद्धिमान; गति + मान = गतिमान। (नोट: किताब के इस भाग का दायाँ स्तंभ स्कैन में धुंधला है; ये शब्द किताब के ही पैटर्न — उपसर्ग/शब्द + ‘मान’ — से बने हैं।) - कुछ करने को 1 — पता कीजिए कि देश के लिए किन-किन लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
(खोज-कार्य: अपने शिक्षक, पुस्तकालय या परिवार के बड़ों से पूछकर ऐसे लोगों के नाम और उनके कामों की सूची बनाओ — जैसे स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी — और कक्षा में सुनाओ।) - कुछ करने को 2 — अपने अरमान के बारे में दस पंक्तियों में लिखिए और अपने शिक्षक को सुनाइए।
(लेखन-कार्य: अपना अरमान, उसे क्यों चुना, उसे पूरा करने के लिए क्या-क्या करोगे, और वह दूसरों तथा देश के किस काम आएगा — इन बातों को दस पंक्तियों में लिखो और शिक्षक को सुनाओ।)
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में बोलें, फिर बिना देखे अभ्यास करके देखें। प्रश्नोत्तर से अपने आप को जाँचें। अपने उत्तर शिक्षक या माता-पिता से जाँचवाएँ।
महत्वपूर्ण प्रश्न — प्रश्न और उत्तर (Important Questions)
नीचे दिए गए प्रश्न ‘अरमान’ की समझ की जाँच के लिए हैं — उत्तर पहले बिना देखे लिखें, फिर पृष्ठ से मिलाकर सुधारें।
- ‘अरमान’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘अरमान’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके शीर्षक और उसके प्रसंगों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘अरमान’ का अर्थ प्रसंग सहित समझाइए।
‘अरमान’ का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं, बल्कि ‘अरमान’ के प्रसंग से समझना चाहिए। पहले इसका सामान्य अर्थ लिखें, फिर यह बताएँ कि पाठ में यह किस प्रसंग में आया है और उस प्रसंग में इसका क्या महत्त्व है। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं। - ‘अरमान’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘अरमान’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल सार रट लेना, बिना प्रसंग और शब्दार्थ समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘अरमान’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है। - ‘लालसा’ जैसे मुख्य शब्दों को लंबे समय तक याद रखने की विधि क्या है?
मुख्य शब्दों को तीन के समूह में बाँटकर पढ़ें — शब्द, अर्थ और प्रसंग। प्रत्येक समूह को एक वाक्य में बाँधकर बोलकर दोहराएँ, फिर बिना देखे लिखें। अगले दिन फिर से बिना देखे लिखकर जाँचें। जो शब्द छूट जाए, उसे फिर से प्रसंग सहित पढ़ें। बोलना, लिखना और अगले दिन दोहराना — यही तीन चरण किसी भी शब्द को स्थायी बनाते हैं। - ‘अरमान’ को पढ़ने के बाद स्वयं से कौन-से तीन प्रश्न पूछने चाहिए?
पहला — इस पाठ का केंद्रीय भाव एक वाक्य में क्या है? दूसरा — मुख्य शब्दों का प्रसंग सहित अर्थ क्या है? तीसरा — इस पाठ की सीख मेरे जीवन में कहाँ काम आएगी? यदि इन तीनों प्रश्नों के उत्तर बिना पुस्तक देखे दिए जा सकें, तो पाठ तैयार है। यदि कोई उत्तर अटके, तो उसी अंश को दोबारा पढ़ें। - ‘अरमान’ के उत्तर में मूल पाठ की नकल क्यों नहीं करनी चाहिए?
क्योंकि परीक्षक समझ की जाँच करता है, याददाश्त की नकल की नहीं। मूल पंक्तियों की नकल से यह पता नहीं चलता कि विद्यार्थी ने भाव समझा है या नहीं। अपने शब्दों में लिखा गया उत्तर, भले ही सरल हो, यह सिद्ध करता है कि भाव समझ में आ गया है। इसीलिए सार और उत्तर हमेशा अपनी भाषा में लिखें, मुख्य शब्दों को छोड़कर।

