Chapter 1: मनोविज्ञान क्या है?
अनुभव, व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का विज्ञान — शाखाएँ, दृष्टिकोण और दैनिक जीवन में उपयोग।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Psychology • Book: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
मनोविज्ञान क्या है? — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Manovigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 1 | माध्यम: हिंदी
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स्रोत-नोट: यह अध्याय BSTBPC की Class 11 Psychology सूची के अध्याय 1 (What is Psychology?) से मेल खाता है — उसी अध्याय की विषय-वस्तु, EG के अपने हिंदी शब्दों में। यहाँ कोई आधिकारिक PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
मनोविज्ञान की परिभाषा — मनोविज्ञान अनुभव, व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। व्यवहार वह सब कुछ है जो जीव करता है — प्रकट व्यवहार (overt: चलना, बोलना, लिखना) और अप्रकट व्यवहार (covert: सोचना, महसूस करना, याद करना) दोनों। अनुभव भीतरी है — उसे सिर्फ वही व्यक्ति सीधे जानता है, पर उसके बारे में पूछकर और व्यवहार देखकर समझा जा सकता है। मनोविज्ञान को एक साथ प्राकृतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान माना जाता है, क्योंकि वह एक ओर मस्तिष्क और शरीर से जुड़ा है, दूसरी ओर समाज और संस्कृति से।
लोकप्रिय धारणाएँ बनाम वैज्ञानिक मनोविज्ञान — आम धारणा है कि मनोविज्ञान 'मन पढ़ना' है या ज्योतिष जैसा अनुमान है — यह गलत है। वैज्ञानिक मनोविज्ञान निरीक्षण, प्रयोग और आंकड़ों पर चलता है; उसके निष्कर्षों की जाँच दोहराई जा सकती है। सामान्य समझ (common sense) भी हर बार सही नहीं होती — जैसे 'खाली दिमाग शैतान का घर' जैसी कहावतें जाँच के बिना सिद्ध नहीं होतीं। इसलिए उत्तर में हमेशा विधि और प्रमाण की बात लिखें, न कि सिर्फ राय की।
मनोविज्ञान का विकास और प्रमुख संप्रदाय — शब्द psychology ग्रीक psyche (आत्मा/मन) और logos (अध्ययन) से बना है, पर आज इसका अर्थ आत्मा का अध्ययन नहीं, व्यवहार का विज्ञान है। विल्हेम वुंट ने लाइपज़िग में पहली मनोविज्ञान प्रयोगशाला बनाई और अंतर्निरीक्षण (introspection) से चेतना की संरचना को समझने की कोशिश की — इसे संरचनावाद कहते हैं। विलियम जेम्स के प्रकार्यवाद ने पूछा कि मन किस काम आता है। वाटसन के व्यवहारवाद ने केवल प्रेक्षणीय व्यवहार को अध्ययन का विषय माना। गेस्टाल्ट संप्रदाय (वर्दाइमर, कोहलर, कोफ़्का) ने कहा कि अनुभव को टुकड़ों में नहीं, समग्र रूप में समझना चाहिए। फ्रॉयड के मनोविश्लेषण ने अचेतन की भूमिका बताई; मानवतावादी दृष्टिकोण (मास्लो, रोजर्स) ने मनुष्य की वृद्धि और संभावना पर ज़ोर दिया; संज्ञानात्मक दृष्टिकोण मानसिक प्रक्रियाओं — सोचना, याद करना, ध्यान — को केंद्र में रखता है। आज का मनोविज्ञान बहु-स्वरीय (multivocal) है: ये दृष्टिकोण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, एक ही व्यवहार के अलग-अलग स्तर बताते हैं।
भारत में मनोविज्ञान का विकास — भारत में मनोविज्ञान का औपचारिक विकास कलकत्ता विश्वविद्यालय से जुड़ा है, जहाँ मनोविज्ञान को विषय के रूप में स्थान मिला; बाद में भारतीय मनोवैज्ञानिक संघ बना और भारतीय विज्ञान कांग्रेस में मनोविज्ञान शामिल हुआ। भारतीय दार्शनिक परंपराओं में भी मन, चेतना, सुख-दुख और व्यवहार के प्रश्नों पर पुराना चिंतन है — आधुनिक मनोविज्ञान उसी जिज्ञासा को वैज्ञानिक विधि से आगे बढ़ाता है।
मनोविज्ञान की शाखाएँ — मुख्य शाखाएँ हैं: संज्ञानात्मक मनोविज्ञान (सोचना, याद करना, भाषा), जैविक मनोविज्ञान (मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और व्यवहार), विकासात्मक मनोविज्ञान (जन्म से वृद्धावस्था तक बदलाव), सामाजिक मनोविज्ञान (समूह में व्यवहार, दृष्टिकोण, पूर्वाग्रह), शैक्षिक और विद्यालय मनोविज्ञान (सीखना, स्कूल की समस्याएँ), नैदानिक और परामर्श मनोविज्ञान (मानसिक स्वास्थ्य, उपचार और सलाह), स्वास्थ्य मनोविज्ञान, पर्यावरणीय मनोविज्ञान (परिवेश और व्यवहार), औद्योगिक/संगठनात्मक मनोविज्ञान (कार्यस्थल, मानव संसाधन) और खेल मनोविज्ञान।
अन्य विषयों से संबंध और मनोवैज्ञानिकों का काम — मनोविज्ञान अकेला नहीं चलता — अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र (सामाजिक विज्ञान), तंत्रिका विज्ञान, शरीर विज्ञान और चिकित्सा (जैव विज्ञान), जनसंचार, संगीत और ललित कला से उसका मेल है। मनोवैज्ञानिक विद्यालयों, अस्पतालों, उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों, सेना और सरकारी संस्थानों में काम करते हैं; कई निजी परामर्श भी करते हैं। दैनिक जीवन में मनोविज्ञान पढ़ाई की अच्छी आदतें बनाने, निर्णय लेने, दूसरों को समझने और परीक्षा के तनाव को कम करने में काम आता है।
मुख्य बिंदु
- मनोविज्ञान = अनुभव + व्यवहार + मानसिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन।
- व्यवहार में प्रकट (बाहरी) और अप्रकट (भीतरी) दोनों आते हैं।
- प्रमुख संप्रदाय: संरचनावाद, प्रकार्यवाद, व्यवहारवाद, गेस्टाल्ट, मनोविश्लेषण, मानवतावादी, संज्ञानात्मक।
- शाखाएँ: संज्ञानात्मक, जैविक, विकासात्मक, सामाजिक, शैक्षिक, नैदानिक/परामर्श, स्वास्थ्य, पर्यावरणीय, संगठनात्मक, खेल।
- मनोविज्ञान 'मन पढ़ना' नहीं है — वह विधि और आंकड़ों पर चलता है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| अनुभव | भीतर का एहसास, जैसे दर्द या खुशी का अनुभव |
| प्रकट व्यवहार | दिखाई देने वाली क्रिया — चलना, बोलना |
| अप्रकट व्यवहार | भीतरी प्रक्रिया — सोचना, महसूस करना |
| संरचनावाद | वुंट — अंतर्निरीक्षण से चेतना की संरचना |
| व्यवहारवाद | वाटसन — केवल प्रेक्षणीय व्यवहार का अध्ययन |
| नैदानिक मनोविज्ञान | मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का आकलन और उपचार |

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): मनोविज्ञान का सामान्य चित्रण — मस्तिष्क, विचार और भावनाएँ। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: मनोविज्ञान के लक्ष्य।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मनोविज्ञान के तीन अध्ययन-विषय: अनुभव, व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाएँ।
Key Terms — मुख्य शब्द
- मनोविज्ञान: व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का विज्ञान।
- व्यवहार: जीव की क्रिया और प्रतिक्रिया।
- मानसिक प्रक्रिया: सोचना, महसूस करना, याद करना।
- नैदानिक मनोविज्ञान: मानसिक स्वास्थ्य का क्षेत्र।
- वैज्ञानिक विधि: निरीक्षण, प्रयोग, आंकड़ों से अध्ययन।
- अंतर्निरीक्षण: अपने भीतरी अनुभवों को ध्यान से देखकर बताना — वुंट की विधि।
- प्रकार्यवाद: जेम्स का दृष्टिकोण — मन किस काम आता है, इस पर ज़ोर।
- गेस्टाल्ट: समग्र रूप में अनुभव को समझने का संप्रदाय — पूरा, भागों के जोड़ से बड़ा है।
- मनोविश्लेषण: फ्रॉयड का दृष्टिकोण — अचेतन इच्छाओं और संघर्षों की भूमिका।
- मानवतावादी दृष्टिकोण: मास्लो और रोजर्स — मनुष्य की वृद्धि, संभावना और आत्म-सिद्धि पर ज़ोर।
- संज्ञानात्मक दृष्टिकोण: सोचना, याद करना, ध्यान और भाषा जैसी मानसिक प्रक्रियाओं को केंद्र में रखना।
मनोविज्ञान एक साथ प्राकृतिक विज्ञान (मस्तिष्क, शरीर) और सामाजिक विज्ञान (समाज, संस्कृति) है — दोनों पक्ष उत्तर में आ सकते हैं।
मनोविज्ञान को ज्योतिष, हस्तरेखा या 'मन पढ़ने की कला' से मिलाना सबसे आम गलती है — परीक्षा में इससे अंक कटते हैं।
संप्रदाय याद करने की तरकीब: वुंट–संरचना, जेम्स–प्रकार्य, वाटसन–व्यवहार, फ्रॉयड–अचेतन, मास्लो–वृद्धि — नाम से काम जोड़कर याद करें।
Remember — याद रखें
- मनोविज्ञान को 'मन पढ़ना' न लिखें — वैज्ञानिक अध्ययन लिखें।
- चार लक्ष्यों के नाम लिखें।
- व्यवहार में बाहरी + आंतरिक दोनों शामिल हैं।
- क्षेत्रों के उदाहरण दें।
- सभी संप्रदायों के नाम और एक-एक जनक/पहचान साथ लिखें।
- मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक (psychiatrist, जो डॉक्टर होता है और दवा दे सकता है) का फर्क साफ़ लिखें।
- शाखा का नाम लिखते समय उसका एक काम/उदाहरण भी दें।
- उत्तर में 'वैज्ञानिक अध्ययन' शब्द ज़रूर आए — 'मन पढ़ना' कभी न लिखें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: मनोविज्ञान को ज्योतिष या मन पढ़ने की कला मान लेना। उत्तर में वैज्ञानिक विधि की बात लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- मनोविज्ञान किसे कहते हैं?
संकेत: व्यवहार के विज्ञान के बारे में सोचें। - व्यवहार में क्या-क्या आता है?
संकेत: बाहरी और आंतरिक के बारे में सोचें। - मनोविज्ञान के लक्ष्य क्या हैं?
संकेत: वर्णन और समझ के बारे में सोचें। - नैदानिक मनोविज्ञान क्या है?
संकेत: मानसिक स्वास्थ्य के बारे में सोचें। - मनोविज्ञान 'मन पढ़ना' क्यों नहीं है?
संकेत: वैज्ञानिक विधि के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- मनोविज्ञान क्या है?
व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन। - व्यवहार क्या है?
जीव की हर क्रिया और प्रतिक्रिया — बाहरी (चलना, बोलना) और आंतरिक (सोचना, महसूस करना)। - मनोविज्ञान के लक्ष्य क्या हैं?
व्यवहार का वर्णन करना, उसे समझना, उसकी भविष्यवाणी करना और ज़रूरत पड़ने पर बदलने में मदद करना। - मनोविज्ञान के क्षेत्र कौन से हैं?
नैदानिक (मानसिक स्वास्थ्य), शैक्षिक (सीखना), संगठनात्मक (कार्यस्थल) और सामाजिक (समूह व्यवहार)। - मनोविज्ञान वैज्ञानिक क्यों है?
क्योंकि वह निरीक्षण, प्रयोग और आंकड़ों से निष्कर्ष निकालता है, न कि अनुमान से।
बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न
नीचे के प्रश्न बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न हैं — ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- मनोविज्ञान की परिभाषा देते हुए उसके तीन अध्ययन-विषय लिखिए।
मनोविज्ञान अनुभव, व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। अनुभव भीतरी एहसास है, व्यवहार प्रकट और अप्रकट क्रिया है, मानसिक प्रक्रिया सोचना-याद करना-महसूस करना है। - प्रकट और अप्रकट व्यवहार का एक-एक उदाहरण दीजिए।
प्रकट: किताब पढ़ने के लिए पन्ना पलटना। अप्रकट: मन ही मन किसी सवाल का उत्तर सोचना। - संरचनावाद और प्रकार्यवाद में क्या अंतर है?
संरचनावाद (वुंट) चेतना की संरचना जानना चाहता था, अंतर्निरीक्षण से। प्रकार्यवाद (जेम्स) यह जानना चाहता था कि मन और चेतना किस काम आते हैं। - विद्यालय मनोवैज्ञानिक का एक काम बताइए।
विद्यालय मनोवैज्ञानिक विद्यार्थियों की सीखने की कठिनाई का आकलन करता है, शिक्षकों और माता-पिता को सलाह देता है और स्कूल की नीतियाँ बनाने में मदद करता है। - मनोविज्ञान को विज्ञान क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वह निरीक्षण, प्रयोग और आंकड़ों से निष्कर्ष निकालता है और उसके निष्कर्षों की जाँच दोहराकर की जा सकती है — अनुमान से नहीं।
पुस्तक की प्रश्नावली से — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के Review Questions पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के अपने शब्दों में हिंदी में लिखा गया है (किताब का शब्दशः पाठ नहीं) और उत्तर अध्याय की विषय-वस्तु से दिए गए हैं।
- व्यवहार किसे कहते हैं? प्रकट और अप्रकट व्यवहार के उदाहरण दीजिए।
व्यवहार जीव की हर क्रिया और प्रतिक्रिया है। प्रकट व्यवहार दिखाई देता है — जैसे चलना, बोलना, लिखना। अप्रकट व्यवहार भीतर चलता है — जैसे सोचना, किसी बात पर खुश या दुखी होना, मन ही मन याद करना। - वैज्ञानिक मनोविज्ञान को मनोविज्ञान के बारे में लोकप्रिय धारणाओं से कैसे अलग करेंगे?
लोकप्रिय धारणाएँ कहती हैं कि मनोविज्ञान मन पढ़ना है या अनुमान की कला है। वैज्ञानिक मनोविज्ञान इसके उल्टा है — वह निरीक्षण, प्रयोग और आंकड़ों पर चलता है, उसके निष्कर्ष जाँच-योग्य होते हैं और सामान्य समझ की हर बात को सही नहीं मानता। - मनोविज्ञान के विकास का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
शुरुआत में मनोविज्ञान को आत्मा/मन का अध्ययन कहा गया। वुंट ने प्रयोगशाला बनाकर इसे प्रयोगात्मक विज्ञान बनाया (संरचनावाद), जेम्स ने प्रकार्यवाद दिया, वाटसन ने व्यवहारवाद, गेस्टाल्ट संप्रदाय ने समग्र अनुभव पर ज़ोर दिया, फ्रॉयड ने मनोविश्लेषण दिया, फिर मानवतावादी और संज्ञानात्मक दृष्टिकोण आए। आज कई दृष्टिकोण साथ-साथ चलते हैं। - किन समस्याओं में मनोवैज्ञानिकों का अन्य विषयों से सहयोग फलदायी हो सकता है? किन्हीं दो समस्याओं से समझाइए।
पहली, पर्यावरण की समस्या — पर्यावरणीय मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और जनसंचार मिलकर लोगों में पर्यावरण-अनुकूल आदतें बना सकते हैं। दूसरी, स्वास्थ्य की समस्या — स्वास्थ्य मनोविज्ञान और चिकित्सा मिलकर तनाव, आदतों और जीवन-शैली की बीमारियों से निपट सकते हैं। - अंतर कीजिए: (a) मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक, (b) परामर्शदाता और नैदानिक मनोवैज्ञानिक।
(a) मनोवैज्ञानिक मनोविज्ञान की डिग्री लेकर शोध, आकलन, परामर्श या अध्यापन करता है; मनोचिकित्सक (psychiatrist) मेडिकल डॉक्टर होता है जो मानसिक रोगों का निदान करता है और दवा लिख सकता है। (b) परामर्शदाता रोज़मर्रा की समस्याओं — पढ़ाई, करियर, संबंध — में सलाह देता है; नैदानिक मनोवैज्ञानिक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का आकलन और उपचार (मनोचिकित्सा) करता है। - दैनिक जीवन के कुछ क्षेत्रों का वर्णन कीजिए जहाँ मनोविज्ञान की समझ काम आती है।
पढ़ाई की आदतें सुधारने में, याददाश्त और ध्यान बढ़ाने में, निर्णय लेने में, दूसरों के व्यवहार को समझने में, परिवार और दोस्तों से संबंध सुधारने में, और परीक्षा के तनाव को संभालने में मनोविज्ञान सीधे काम आता है। - पर्यावरणीय मनोविज्ञान के ज्ञान से पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार कैसे बढ़ाया जा सकता है?
पर्यावरणीय मनोविज्ञान बताता है कि दृष्टिकोण, आदत और परिवेश व्यवहार बदलते हैं। इसलिए कूड़ा अलग करने की सुविधा देना, ऊर्जा बचाने पर सकारात्मक फीडबैक देना, स्कूलों में पर्यावरण-शिक्षा और सामुदायिक कार्यक्रम चलाना — ये सब पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार बढ़ाते हैं। - अपराध जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक समस्या को सुलझाने में मनोविज्ञान की कौन-सी शाखा सबसे उपयुक्त है? उस शाखा के मनोवैज्ञानिकों के काम की चर्चा कीजिए।
सबसे उपयुक्त शाखा सामाजिक मनोविज्ञान है — वह समूह, दृष्टिकोण, पूर्वाग्रह, आक्रामकता और सामाजिक दबाव के कारणों को समझती है। इसके मनोवैज्ञानिक अपराध के सामाजिक कारणों पर शोध करते हैं, रोकथाम के कार्यक्रम बनाते हैं और पुनर्वास में नैदानिक व परामर्श मनोवैज्ञानिकों के साथ काम करते हैं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
विस्तार — ‘मनोविज्ञान क्या है?’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘मनोविज्ञान क्या है?’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘मनोविज्ञान’ और ‘व्यवहार’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- मनोविज्ञान — ‘मनोविज्ञान’ का अर्थ है — व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं का विज्ञान।। ‘मनोविज्ञान क्या है?’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- व्यवहार — ‘व्यवहार’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — जीव की क्रिया और प्रतिक्रिया। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘मनोविज्ञान क्या है?’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- मानसिक प्रक्रिया — ‘मानसिक प्रक्रिया’ — सोचना, महसूस करना, याद करना।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘मनोविज्ञान क्या है?’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- नैदानिक मनोविज्ञान — ‘नैदानिक मनोविज्ञान’ का सामान्य अर्थ है — मानसिक स्वास्थ्य का क्षेत्र।। परंतु ‘मनोविज्ञान क्या है?’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- वैज्ञानिक विधि — ‘वैज्ञानिक विधि’ का अर्थ है — निरीक्षण, प्रयोग, आंकड़ों से अध्ययन।। ‘मनोविज्ञान क्या है?’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- अंतर्निरीक्षण — ‘अंतर्निरीक्षण’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — अपने भीतरी अनुभवों को ध्यान से देखकर बताना — वुंट की विधि। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘मनोविज्ञान क्या है?’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- मनोविज्ञान = अनुभव + व्यवहार + मानसिक प्रक्रियाओं का विज्ञान।
- प्रकट व्यवहार दिखता है, अप्रकट भीतर चलता है — दोनों व्यवहार हैं।
- वुंट–संरचनावाद, जेम्स–प्रकार्यवाद, वाटसन–व्यवहारवाद, फ्रॉयड–मनोविश्लेषण।
- शाखाएँ: संज्ञानात्मक, जैविक, विकासात्मक, सामाजिक, शैक्षिक, नैदानिक, स्वास्थ्य, पर्यावरणीय, संगठनात्मक, खेल।
- मनोवैज्ञानिक ≠ मनोचिकित्सक — मनोचिकित्सक मेडिकल डॉक्टर होता है।
- मनोविज्ञान दैनिक जीवन में भी काम आता है — पढ़ाई, निर्णय, तनाव-प्रबंधन।

