नागरिकता
नागरिकता क्या है, नागरिक के अधिकार और कर्तव्य क्या हैं, और शरणार्थी व प्रवासी की समस्या क्या है — पूरा अध्याय।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Political Science • Book: Rajnitik Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
नागरिकता — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Rajnitik Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 6 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
नागरिकता का अर्थ है किसी राजनीतिक समुदाय का पूर्ण सदस्य होना — जिसके साथ अधिकार भी मिलते हैं और कर्तव्य भी। नागरिक सिर्फ देश में रहने वाला नहीं है; वह वह व्यक्ति है जो शासन में भाग ले सकता है, वोट दे सकता है और अधिकारों की माँग कर सकता है।
नागरिकता के दो पहलू हैं — कानूनी (पासपोर्ट, वोट का अधिकार) और नैतिक (समुदाय के प्रति ज़िम्मेदारी)। आधुनिक नागरिकता में चुनौतियाँ हैं — शरणार्थी, प्रवासी मज़दूर और दोहरी नागरिकता के सवाल। भारत में एकल नागरिकता है — सिर्फ भारत की नागरिकता, राज्यों की अलग नहीं।
नागरिकता का अर्थ — अधिकार और कर्तव्य
नागरिकता का अर्थ है किसी राजनीतिक समुदाय का पूर्ण सदस्य होना। नागरिक को कुछ अधिकार मिलते हैं — वोट का अधिकार, नागरिक स्वतंत्रताएँ (भाषण, सभा, संघ), और सामाजिक अधिकार (शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार की सुरक्षा)। साथ ही नागरिक के कुछ कर्तव्य भी होते हैं — कानून का पालन, कर देना, सार्वजनिक जीवन में भाग लेना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना।
भारत में एकल नागरिकता है — राज्यों की अलग नागरिकता नहीं होती। कोई व्यक्ति भारत का नागरिक होता है, किसी विशेष राज्य का नहीं।
समान अधिकार, असमान प्रयोग
समान अधिकार होने का अर्थ यह नहीं है कि सब उनका समान प्रयोग कर पाते हैं। गरीबी, निरक्षरता, भेदभाव और दूरी के कारण कई नागरिक अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं उठा पाते — जैसे गरीब व्यक्ति के लिए अदालत जाना महँगा है, और दूर-दराज़ के गाँव में स्वास्थ्य सेवा पहुँचती ही नहीं।
इसलिए नागरिकता का अर्थ केवल कानूनी दर्जा नहीं है — इसका अर्थ है अधिकारों के वास्तविक प्रयोग की शर्तें भी सुनिश्चित करना।
शरणार्थी, प्रवासी और वैश्विक नागरिकता
शरणार्थियों की सबसे बड़ी समस्या है राज्यविहीनता — जब कोई व्यक्ति अपने देश से भागकर दूसरे देश में आता है, तो उसे न तो अपने देश की सुरक्षा मिलती है, न नए देश की नागरिकता। उसे काम, शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित रहना पड़ता है।
प्रवासी मज़दूरों का भी यही हाल है — वे शहरों और उद्योगों को चलाते हैं, पर उन्हें स्थानीय सुविधाओं और अधिकारों से वंचित रखा जाता है। वैश्विक नागरिकता का विचार कहता है कि कुछ अधिकार मनुष्य होने के कारण सबको मिलने चाहिए, चाहे वे किसी भी देश के नागरिक हों — यही मानवाधिकारों की भावना है।
मुख्य बिंदु
- नागरिकता = सदस्यता + अधिकार + कर्तव्य।
- भारत में एकल नागरिकता है।
- चुनौतियाँ: शरणार्थी, प्रवासी, दोहरी नागरिकता।
- नागरिकता = अधिकार + कर्तव्य; केवल अधिकारों की माँग नागरिकता नहीं है।
- समान अधिकार होने पर भी उनका प्रयोग असमान हो सकता है — गरीबी और भेदभाव इसके कारण हैं।
- शरणार्थियों की मूल समस्या राज्यविहीनता है — न अपने देश की सुरक्षा, न नए देश की नागरिकता।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| नागरिक | पूर्ण सदस्य, वोट का अधिकार |
| एकल नागरिकता | सिर्फ भारत की नागरिकता |
| कर्तव्य | कानून पालन, कर, भागीदारी |
| चुनौती | शरणार्थी और प्रवासी |

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): नागरिकता का सामान्य चित्रण — मतदान, पहचान-पत्र और समुदाय। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: नागरिकता के पहलू।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): नागरिकता — अधिकार और कर्तव्य दोनों; भारत में एकल नागरिकता।
Key Terms — मुख्य शब्द
- नागरिकता: राजनीतिक समुदाय की पूर्ण सदस्यता।
- नागरिक: अधिकारों और कर्तव्यों वाला सदस्य।
- एकल नागरिकता: सिर्फ देश की नागरिकता, राज्य की अलग नहीं।
- दोहरी नागरिकता: दो देशों की नागरिकता (भारत में नहीं)।
- शरणार्थी: उत्पीड़न से भागकर आया व्यक्ति।
- एकल नागरिकता — भारत में केवल देश की नागरिकता होती है, राज्यों की अलग नागरिकता नहीं।
- शरणार्थी (Refugee) — उत्पीड़न या युद्ध से भागकर दूसरे देश में शरण लेने वाला व्यक्ति।
- वैश्विक नागरिकता — यह विचार कि कुछ अधिकार मनुष्य होने के कारण सबको मिलने चाहिए, राष्ट्रीयता से परे।
Remember — याद रखें
- नागरिक और निवासी का फर्क लिखें।
- एकल नागरिकता भारत की विशेषता है — याद रखें।
- अधिकार और कर्तव्य दोनों पहलू लिखें।
- शरणार्थी की समस्या को नागरिकता से जोड़ें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: निवासी को ही नागरिक मान लेना। उत्तर में वोट और भागीदारी के अधिकार का फर्क लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- नागरिकता किसे कहते हैं?
संकेत: पूर्ण सदस्यता के बारे में सोचें। - नागरिक और निवासी में क्या अंतर है?
संकेत: वोट के अधिकार के बारे में सोचें। - भारत में कैसी नागरिकता है?
संकेत: एकल नागरिकता के बारे में सोचें। - नागरिक के कर्तव्य क्या हैं?
संकेत: कानून पालन के बारे में सोचें। - नागरिकता की एक चुनौती बताइए।
संकेत: शरणार्थियों के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- नागरिकता क्या है?
किसी राजनीतिक समुदाय की पूर्ण सदस्यता — जिसके साथ अधिकार (जैसे वोट) और कर्तव्य (जैसे कानून पालन) दोनों मिलते हैं। - नागरिक और निवासी में क्या अंतर है?
निवासी सिर्फ रहता है; नागरिक शासन में भाग ले सकता है, वोट दे सकता है और अधिकारों की माँग कर सकता है। - भारत में कैसी नागरिकता है?
एकल नागरिकता — सिर्फ भारत की; राज्यों की अलग नागरिकता नहीं है। - नागरिक के कर्तव्य क्या हैं?
कानून का पालन, कर देना, मतदान में भाग लेना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना। - नागरिकता की चुनौतियाँ क्या हैं?
शरणार्थियों और प्रवासी मज़दूरों के अधिकार, और दोहरी नागरिकता के सवाल।
पुस्तक की प्रश्नावली — Extension Q&A (पुस्तक के अभ्यास प्रश्नों पर आधारित, EG के अपने शब्दों में)
- नागरिकता से जुड़े अधिकारों और कर्तव्यों की सूची बनाइए।
उत्तर: अधिकार — वोट का अधिकार, भाषण/सभा/संघ की स्वतंत्रता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक अधिकार, कानून के सामने समानता। कर्तव्य — कानून का पालन, कर देना, चुनाव में भाग लेना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, दूसरों के अधिकारों का सम्मान। - समान अधिकार होने पर भी उनका प्रयोग असमान क्यों होता है? समझाइए।
उत्तर: क्योंकि अधिकारों के प्रयोग के लिए साधन चाहिए — पैसा, शिक्षा, जानकारी और पहुँच। गरीब व्यक्ति अदालत का खर्च नहीं उठा सकता, निरक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों को जानता ही नहीं, और भेदभाव के कारण दलित व महिलाओं को सुविधाएँ नहीं मिलतीं। इसलिए कानूनी समानता के साथ वास्तविक समानता की भी ज़रूरत है। - भारत में नागरिकों के अधिकारों के लिए हुए दो हालिया संघर्षों के नाम और माँगे बताइए।
उत्तर: (1) सूचना के अधिकार का आंदोलन — माँग: सरकार के कामों की जानकारी जनता को मिले (परिणाम: RTI अधिनियम, 2005)। (2) काम के अधिकार का आंदोलन — माँग: ग्रामीण परिवारों को रोज़गार की गारंटी मिले (परिणाम: मनरेगा, 2005)। दोनों ने नागरिकों के अधिकारों को कानून का रूप दिया। - शरणार्थियों की समस्याएँ क्या हैं? वैश्विक नागरिकता का विचार उनकी कैसे मदद कर सकता है?
उत्तर: समस्याएँ — राज्यविहीनता (किसी देश की सुरक्षा नहीं), काम और शिक्षा से वंचना, हिरासत और वापसी का डर। वैश्विक नागरिकता का विचार कहता है कि जीवन, सुरक्षा और गरिमा के अधिकार मनुष्य होने के कारण सबको मिलने चाहिए — इससे शरणार्थियों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सहायता का आधार मिलता है। - प्रवासी मज़दूरों के योगदान पर चर्चा कीजिए — वे शहरों को क्या देते हैं और बदले में क्या पाते हैं?
उत्तर: प्रवासी मज़दूर शहरों के निर्माण, उद्योग, सफ़ाई, परिवहन और घरेलू काम चलाते हैं — उनके बिना शहर ठप हो जाएँगे। बदले में उन्हें कम मज़दूरी, असुरक्षित आवास, स्वास्थ्य व शिक्षा से वंचना और स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ता है। न्यायपूर्ण नागरिकता का अर्थ है उनके योगदान को मान्यता और अधिकारों की सुरक्षा देना। - आज भारत में नागरिकता से जुड़े किन मुद्दों पर बहस हो रही है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: बहस के मुद्दे — नागरिकता की परिभाषा और दस्तावेज़ों को लेकर विवाद, शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रश्न, प्रवासी मज़दूरों के अधिकार और सामाजिक भेदभाव के कारण अधिकारों के असमान प्रयोग की समस्या। इन बहसों का केंद्र यही है कि नागरिकता केवल कागज़ी दर्जा न रहे, बल्कि अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा बने।
बोर्ड-पैटर्न अभ्यास — Board-pattern Q&A (EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न; वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र नहीं हैं)
- नागरिक के दो अधिकार और दो कर्तव्य बताइए।
अधिकार — वोट का अधिकार और भाषण की स्वतंत्रता। कर्तव्य — कानून का पालन और कर देना। - भारत में एकल नागरिकता से क्या तात्पर्य है?
भारत में केवल देश की नागरिकता होती है; राज्यों की अलग नागरिकता नहीं होती — कोई व्यक्ति भारत का नागरिक होता है, किसी राज्य का नहीं। - शरणार्थी किसे कहते हैं?
उत्पीड़न या युद्ध से भागकर दूसरे देश में शरण लेने वाला व्यक्ति। - समान अधिकार होने पर भी उनका प्रयोग असमान क्यों होता है?
क्योंकि गरीबी, निरक्षरता, भेदभाव और दूरी के कारण कई नागरिक अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। - वैश्विक नागरिकता का विचार क्या है?
यह विचार कि कुछ अधिकार मनुष्य होने के कारण सबको मिलने चाहिए, चाहे वे किसी भी देश के नागरिक हों।
विस्तार — ‘नागरिकता’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘नागरिकता’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘नागरिकता’ और ‘नागरिक’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- नागरिकता — ‘नागरिकता’ का अर्थ है — राजनीतिक समुदाय की पूर्ण सदस्यता।। ‘नागरिकता’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- नागरिक — ‘नागरिक’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — अधिकारों और कर्तव्यों वाला सदस्य। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘नागरिकता’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- एकल नागरिकता — ‘एकल नागरिकता’ — सिर्फ देश की नागरिकता, राज्य की अलग नहीं।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘नागरिकता’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- दोहरी नागरिकता — ‘दोहरी नागरिकता’ का सामान्य अर्थ है — दो देशों की नागरिकता (भारत में नहीं)।। परंतु ‘नागरिकता’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- शरणार्थी — ‘शरणार्थी’ का अर्थ है — उत्पीड़न से भागकर आया व्यक्ति।। ‘नागरिकता’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- शरणार्थी (Refugee) — ‘शरणार्थी (Refugee)’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — उत्पीड़न या युद्ध से भागकर दूसरे देश में शरण लेने वाला व्यक्ति। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘नागरिकता’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
सामाजिक विज्ञान के इस अध्याय को कारण-प्रभाव से समझें
सामाजिक विज्ञान के अध्यायों में घटनाओं, संस्थाओं और प्रक्रियाओं के बीच कारण और प्रभाव का संबंध सबसे महत्त्वपूर्ण होता है। पढ़ते समय प्रत्येक तथ्य के साथ यह पूछें — इसका कारण क्या था, इसका प्रभाव क्या पड़ा, और इससे किस वर्ग या समुदाय पर क्या असर हुआ? कारण, प्रभाव और प्रभावित वर्ग — ये तीन बिंदु मिलकर किसी भी सामाजिक प्रश्न का पूरा ढाँचा बना देते हैं।
तिथियों, नामों और परिभाषाओं को अलग-अलग रटने की अपेक्षा उन्हें कहानी के क्रम में जोड़कर पढ़ें। पहले पृष्ठभूमि समझें, फिर मुख्य घटना या प्रक्रिया, फिर उसके परिणाम, और अंत में उसका दीर्घकालिक महत्त्व। इस क्रम से पढ़ने पर तिथियाँ और नाम भी अपने स्थान पर याद रहते हैं, क्योंकि वे किसी कहानी की कड़ियाँ बन जाते हैं, अलग-अलग टुकड़े नहीं।
उत्तर लिखते समय भूमिका में विषय का एक वाक्य का परिचय दें, मुख्य भाग में दो-तीन बिंदु क्रम से लिखें, और निष्कर्ष में एक पंक्ति का महत्त्व जोड़ें। बिंदुओं को ‘पहला, दूसरा, तीसरा’ के क्रम में लिखने से उत्तर स्पष्ट और परीक्षक के लिए जाँचने में आसान बनता है। साथ ही, जहाँ संभव हो, एक तुलना या एक उदाहरण अवश्य जोड़ें — तुलना से समझ की गहराई दिखती है।
परीक्षा में कैसे लिखें — उत्तर-लेखन की कला
‘नागरिकता’ जैसे पाठों पर प्रश्न प्रायः तीन प्रकार के आते हैं — सीधा तथ्य या परिभाषा पूछने वाले, केंद्रीय भाव या कारण पूछने वाले, और अपने शब्दों में सार या मत पूछने वाले। तीनों के उत्तर की संरचना एक ही है: भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष। भूमिका में एक वाक्य में विषय का परिचय दें — पाठ किस बारे में है। मुख्य भाग में दो से चार बिंदु क्रम से लिखें — प्रत्येक बिंदु एक अलग तर्क, उदाहरण या परिणाम हो। निष्कर्ष में एक वाक्य में पाठ का संदेश या महत्त्व लिखें।
अंकों के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें। एक-दो अंक के प्रश्न में केवल परिभाषा और एक उदाहरण पर्याप्त है। तीन-चार अंक के प्रश्न में परिभाषा के साथ प्रसंग और एक-दो परिणाम जोड़ें। पाँच अंक के लंबे प्रश्न में भूमिका, तीन-चार बिंदु, एक तुलना या उदाहरण, और निष्कर्ष — सब कुछ होना चाहिए। उत्तर को अनुच्छेदों में बाँटें; एक ही लंबे अनुच्छेद में सब कुछ लिख देने से उत्तर भले ही सही हो, परंतु पढ़ने में कठिन लगता है।
उत्तर में पाठ के मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, परंतु मूल पाठ की पंक्तियों की नकल न करें। परीक्षक यह देखना चाहता है कि आपने समझा है — और समझ अपने शब्दों में ही दिखती है। उत्तर लिखने के बाद उसे एक बार पढ़कर देखें: क्या पहला वाक्य प्रश्न का सीधा उत्तर देता है? क्या बिंदु क्रम में हैं? क्या अंतिम वाक्य निष्कर्ष देता है? यदि तीनों उत्तर ‘हाँ’ हैं, तो उत्तर पूरा है।
- नागरिकता = राजनीतिक समुदाय की पूर्ण सदस्यता।
- अधिकार — वोट, नागरिक स्वतंत्रताएँ, सामाजिक अधिकार।
- कर्तव्य — कानून पालन, कर, भागीदारी, दूसरों के अधिकारों का सम्मान।
- भारत में एकल नागरिकता।
- समान अधिकार ≠ समान प्रयोग (गरीबी, निरक्षरता, भेदभाव)।
- शरणार्थी/प्रवासी — राज्यविहीनता और सुविधाओं से वंचना; वैश्विक नागरिकता का विचार।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

