विकास
विकास क्या है, आर्थिक वृद्धि और विकास में क्या अंतर है और सतत विकास क्यों ज़रूरी है — पूरा अध्याय।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Political Science • Book: Rajnitik Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
विकास — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Rajnitik Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 10 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
विकास का अर्थ सिर्फ आर्थिक वृद्धि (GDP बढ़ना) नहीं है — उसका अर्थ है लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता और गरिमा। एक देश अमीर होकर भी असमान और असुरक्षित हो सकता है; इसलिए विकास को मानव विकास से जाँचना ज़रूरी है।
विकास के मॉडलों पर बहस है — बाज़ार-आधारित (निजी उद्यम, प्रतिस्पर्धा), राज्य-आधारित (योजना, कल्याण) और गांधीवादी (ग्राम स्वराज, स्थानीय आत्मनिर्भरता)। सतत विकास (sustainable development) का अर्थ है आज की ज़रूरतें पूरी करना, पर आने वाली पीढ़ियों की क्षमता को नुकसान न पहुँचाना।
विकास का अर्थ — वृद्धि से आगे
विकास का सामान्य अर्थ आर्थिक वृद्धि (GDP बढ़ना) समझा जाता है, पर विकास इससे बड़ा है — विकास का अर्थ है लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा, स्वतंत्रता और अवसर। यदि GDP बढ़े पर गरीबी और बेरोज़गारी बनी रहे, तो वह विकास नहीं, केवल वृद्धि है।
विकास की प्रचलित परिभाषा सबको समान लाभ नहीं देती — वृद्धि का लाभ अक्सर अमीरों और शहरों तक सीमित रहता है, जबकि गरीब, आदिवासी और महिलाएँ पीछे रह जाती हैं। इसलिए विकास का मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि सबसे कमज़ोर वर्ग का जीवन कितना सुधरा।
विकास के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव
मुख्यधारा के विकास मॉडल के सामाजिक प्रभाव हैं — विस्थापन (बाँध, खदान, उद्योग के लिए गाँव उजड़ना), असमानता में वृद्धि और पारंपरिक आजीविका का नष्ट होना। पर्यावरणीय प्रभाव हैं — वनों की कटाई, नदियों का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता का नुकसान।
इन प्रभावों से नए अधिकारों की माँग उठी है — पर्यावरण का अधिकार, आदिवासी समुदायों के जल-जंगल-ज़मीन पर अधिकार, आजीविका का अधिकार और स्वास्थ्य का अधिकार। ये अधिकार विकास की परिभाषा को बदल रहे हैं।
लोकतंत्र, आंदोलन और सतत विकास
लोकतंत्र विकास को जनहित से जोड़ता है — बहस, चुनाव और आंदोलनों से सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है। जन-आंदोलनों (चिपको, नर्मदा बचाओ, RTI आंदोलन) ने विकास की नीतियों को बदला है — पर्यावरणीय आकलन, विस्थापितों के पुनर्वास और पारदर्शिता की माँगें इन्हीं आंदोलनों से आई हैं।
सतत विकास का अर्थ है आज की ज़रूरतें पूरी करना, पर भविष्य की पीढ़ियों की ज़रूरतों को नुकसान पहुँचाए बिना। इसके लिए विकास में पर्यावरण की लागत को जोड़ना, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और संसाधनों का न्यायपूर्ण बँटवारा ज़रूरी है।
मुख्य बिंदु
- विकास ≠ GDP; अर्थ है जीवन की गुणवत्ता।
- मानव विकास: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता।
- सतत विकास: आज की ज़रूरत, कल की सुरक्षा।
- विकास ≠ वृद्धि — GDP बढ़ना विकास नहीं है, यदि गरीबी और बेरोज़गारी बनी रहे।
- वृद्धि का लाभ अक्सर अमीरों और शहरों तक सीमित रहता है — विकास का मूल्यांकन कमज़ोर वर्ग के जीवन से होना चाहिए।
- जन-आंदोलनों ने विकास की परिभाषा बदली है — पर्यावरण, पुनर्वास और पारदर्शिता की माँगें इन्हीं से आई हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| आर्थिक वृद्धि | GDP बढ़ना |
| मानव विकास | शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा |
| सतत विकास | भविष्य को नुकसान नहीं |
| मॉडल | बाज़ार, राज्य, गांधीवादी |

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): विकास का सामान्य चित्रण — स्कूल, अस्पताल, स्वच्छ जल और हरियाली। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: विकास के आयाम।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): विकास बनाम वृद्धि — और सतत विकास: आज की ज़रूरत, कल की सुरक्षा।
Key Terms — मुख्य शब्द
- विकास: जीवन की गुणवत्ता में सुधार।
- आर्थिक वृद्धि: उत्पादन और आय में वृद्धि।
- मानव विकास: शिक्षा-स्वास्थ्य-स्वतंत्रता पर केंद्रित विकास।
- सतत विकास: भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान न पहुँचाने वाला विकास।
- ग्राम स्वराज: गांधी का स्थानीय स्वशासन का विचार।
- आर्थिक वृद्धि — GDP और उत्पादन में बढ़ोतरी; विकास का एक हिस्सा, पूरा विकास नहीं।
- सतत विकास (Sustainable Development) — आज की ज़रूरतें पूरी करना, भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाए बिना।
- मानव विकास — शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन-स्तर के आधार पर विकास का माप (मानव विकास सूचकांक)।
Remember — याद रखें
- विकास और वृद्धि का फर्क लिखें।
- तीनों मॉडलों के नाम और सार लिखें।
- सतत विकास की परिभाषा पक्की करें।
- उदाहरण: शिक्षा-स्वास्थ्य के बिना वृद्धि अधूरी है।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: विकास को सिर्फ GDP मान लेना। उत्तर में मानव विकास की बात ज़रूर लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- विकास और आर्थिक वृद्धि में क्या अंतर है?
संकेत: जीवन की गुणवत्ता के बारे में सोचें। - मानव विकास क्या है?
संकेत: शिक्षा और स्वास्थ्य के बारे में सोचें। - सतत विकास किसे कहते हैं?
संकेत: भविष्य की पीढ़ियों के बारे में सोचें। - विकास के तीन मॉडल कौन से हैं?
संकेत: बाज़ार, राज्य, गांधीवादी के बारे में सोचें। - GDP बढ़ना ही विकास क्यों नहीं है?
संकेत: असमानता के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- विकास और आर्थिक वृद्धि में क्या अंतर है?
वृद्धि सिर्फ उत्पादन-आय बढ़ना है; विकास जीवन की गुणवत्ता — शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता और गरिमा — में सुधार है। - मानव विकास क्या है?
लोगों की क्षमताओं का विकास — अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के अवसर। - सतत विकास क्या है?
आज की ज़रूरतें इस तरह पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियों की अपनी ज़रूरतें पूरी करने की क्षमता को नुकसान न पहुँचे। - विकास के मॉडल कौन से हैं?
बाज़ार-आधारित (निजी उद्यम), राज्य-आधारित (योजना और कल्याण) और गांधीवादी (ग्राम स्वराज, स्थानीय आत्मनिर्भरता)। - एक अमीर देश भी अविकसित क्यों हो सकता है?
अगर वहाँ शिक्षा-स्वास्थ्य कमज़ोर और असमानता अधिक है, तो लोगों का जीवन अच्छा नहीं है — इसलिए विकास अधूरा है।
पुस्तक की प्रश्नावली — Extension Q&A (पुस्तक के अभ्यास प्रश्नों पर आधारित, EG के अपने शब्दों में)
- विकास से क्या तात्पर्य है? विकास की प्रचलित परिभाषा क्या सबको समान लाभ देती है? समझाइए।
उत्तर: विकास का अर्थ है लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार — शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा, स्वतंत्रता और अवसर। प्रचलित परिभाषा (GDP वृद्धि) सबको समान लाभ नहीं देती — वृद्धि का लाभ अक्सर अमीरों और शहरों तक सीमित रहता है, जबकि गरीब, आदिवासी और महिलाएँ पीछे रह जाती हैं। इसलिए विकास का मूल्यांकन कमज़ोर वर्ग के जीवन से होना चाहिए। - मुख्यधारा के विकास मॉडल के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव बताइए।
उत्तर: सामाजिक — विस्थापन (बाँध, खदान, उद्योग के लिए गाँव उजड़ना), असमानता में वृद्धि, पारंपरिक आजीविका (मछली पकड़ना, वन-उत्पाद) का नष्ट होना। पर्यावरणीय — वनों की कटाई, नदियों का प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता का नुकसान। - विकास के कारण कौन-से नए अधिकारों की माँग उठी है? बताइए।
उत्तर: पर्यावरण का अधिकार (स्वच्छ हवा-पानी), आदिवासी समुदायों के जल-जंगल-ज़मीन पर अधिकार, आजीविका का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार और सूचना का अधिकार। ये अधिकार विकास की परिभाषा को केवल आर्थिक वृद्धि से आगे बढ़ाकर मानव-गरिमा तक ले जाते हैं। - लोकतंत्र सामान्य हित को बढ़ावा देने में कैसे मदद करता है? समझाइए।
उत्तर: लोकतंत्र में बहस, चुनाव और आंदोलनों से सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है। जनता अपनी माँगें उठा सकती है, गलत नीतियों का विरोध कर सकती है और सरकार बदल सकती है। इससे विकास की नीतियाँ केवल कुछ लोगों के हित में नहीं, बल्कि सामान्य हित में बनती हैं। - जन-आंदोलनों ने सरकार को जवाबदेह बनाने में कितनी सफलता पाई है? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।
उत्तर: आंशिक सफलता मिली है। चिपको आंदोलन से वन-संरक्षण की नीति बदली, नर्मदा बचाओ आंदोलन से विस्थापितों के पुनर्वास का मुद्दा राष्ट्रीय बहस में आया, RTI आंदोलन से सूचना का अधिकार कानून बना। पर कई माँगें अब भी अधूरी हैं — पुनर्वास और पर्यावरणीय आकलन का क्रियान्वयन कमज़ोर है। इसलिए आंदोलन ज़रूरी हैं, पर उनकी सफलता के लिए निरंतर दबाव चाहिए।
बोर्ड-पैटर्न अभ्यास — Board-pattern Q&A (EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न; वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र नहीं हैं)
- विकास और आर्थिक वृद्धि में अंतर बताइए।
आर्थिक वृद्धि GDP और उत्पादन की बढ़ोतरी है; विकास जीवन की गुणवत्ता में सुधार है — शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा और अवसर। वृद्धि विकास का एक हिस्सा है, पूरा विकास नहीं। - सतत विकास से क्या तात्पर्य है?
आज की ज़रूरतें पूरी करना, पर भविष्य की पीढ़ियों की ज़रूरतों को नुकसान पहुँचाए बिना। - विकास के दो पर्यावरणीय प्रभाव बताइए।
वनों की कटाई और नदियों का प्रदूषण (अन्य — जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता का नुकसान)। - जन-आंदोलनों ने विकास की नीतियों को कैसे बदला है?
आंदोलनों से पर्यावरणीय आकलन, विस्थापितों के पुनर्वास और पारदर्शिता (RTI) की माँगें उठीं और नीतियों में शामिल हुईं। - विकास का मूल्यांकन किस आधार पर होना चाहिए?
सबसे कमज़ोर वर्ग के जीवन में सुधार के आधार पर — यदि गरीब, आदिवासी और महिलाओं का जीवन नहीं सुधरा, तो विकास अधूरा है।
विस्तार — ‘विकास’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘विकास’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘विकास’ और ‘आर्थिक वृद्धि’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- विकास — ‘विकास’ का अर्थ है — जीवन की गुणवत्ता में सुधार।। ‘विकास’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- आर्थिक वृद्धि — ‘आर्थिक वृद्धि’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — उत्पादन और आय में वृद्धि। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘विकास’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- मानव विकास — ‘मानव विकास’ — शिक्षा-स्वास्थ्य-स्वतंत्रता पर केंद्रित विकास।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘विकास’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- सतत विकास — ‘सतत विकास’ का सामान्य अर्थ है — भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान न पहुँचाने वाला विकास।। परंतु ‘विकास’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- ग्राम स्वराज — ‘ग्राम स्वराज’ का अर्थ है — गांधी का स्थानीय स्वशासन का विचार।। ‘विकास’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- सतत विकास (Sustainable Development) — ‘सतत विकास (Sustainable Development)’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — आज की ज़रूरतें पूरी करना, भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुँचाए बिना। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘विकास’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
सामाजिक विज्ञान के इस अध्याय को कारण-प्रभाव से समझें
सामाजिक विज्ञान के अध्यायों में घटनाओं, संस्थाओं और प्रक्रियाओं के बीच कारण और प्रभाव का संबंध सबसे महत्त्वपूर्ण होता है। पढ़ते समय प्रत्येक तथ्य के साथ यह पूछें — इसका कारण क्या था, इसका प्रभाव क्या पड़ा, और इससे किस वर्ग या समुदाय पर क्या असर हुआ? कारण, प्रभाव और प्रभावित वर्ग — ये तीन बिंदु मिलकर किसी भी सामाजिक प्रश्न का पूरा ढाँचा बना देते हैं।
तिथियों, नामों और परिभाषाओं को अलग-अलग रटने की अपेक्षा उन्हें कहानी के क्रम में जोड़कर पढ़ें। पहले पृष्ठभूमि समझें, फिर मुख्य घटना या प्रक्रिया, फिर उसके परिणाम, और अंत में उसका दीर्घकालिक महत्त्व। इस क्रम से पढ़ने पर तिथियाँ और नाम भी अपने स्थान पर याद रहते हैं, क्योंकि वे किसी कहानी की कड़ियाँ बन जाते हैं, अलग-अलग टुकड़े नहीं।
उत्तर लिखते समय भूमिका में विषय का एक वाक्य का परिचय दें, मुख्य भाग में दो-तीन बिंदु क्रम से लिखें, और निष्कर्ष में एक पंक्ति का महत्त्व जोड़ें। बिंदुओं को ‘पहला, दूसरा, तीसरा’ के क्रम में लिखने से उत्तर स्पष्ट और परीक्षक के लिए जाँचने में आसान बनता है। साथ ही, जहाँ संभव हो, एक तुलना या एक उदाहरण अवश्य जोड़ें — तुलना से समझ की गहराई दिखती है।
परीक्षा में कैसे लिखें — उत्तर-लेखन की कला
‘विकास’ जैसे पाठों पर प्रश्न प्रायः तीन प्रकार के आते हैं — सीधा तथ्य या परिभाषा पूछने वाले, केंद्रीय भाव या कारण पूछने वाले, और अपने शब्दों में सार या मत पूछने वाले। तीनों के उत्तर की संरचना एक ही है: भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष। भूमिका में एक वाक्य में विषय का परिचय दें — पाठ किस बारे में है। मुख्य भाग में दो से चार बिंदु क्रम से लिखें — प्रत्येक बिंदु एक अलग तर्क, उदाहरण या परिणाम हो। निष्कर्ष में एक वाक्य में पाठ का संदेश या महत्त्व लिखें।
अंकों के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें। एक-दो अंक के प्रश्न में केवल परिभाषा और एक उदाहरण पर्याप्त है। तीन-चार अंक के प्रश्न में परिभाषा के साथ प्रसंग और एक-दो परिणाम जोड़ें। पाँच अंक के लंबे प्रश्न में भूमिका, तीन-चार बिंदु, एक तुलना या उदाहरण, और निष्कर्ष — सब कुछ होना चाहिए। उत्तर को अनुच्छेदों में बाँटें; एक ही लंबे अनुच्छेद में सब कुछ लिख देने से उत्तर भले ही सही हो, परंतु पढ़ने में कठिन लगता है।
उत्तर में पाठ के मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, परंतु मूल पाठ की पंक्तियों की नकल न करें। परीक्षक यह देखना चाहता है कि आपने समझा है — और समझ अपने शब्दों में ही दिखती है। उत्तर लिखने के बाद उसे एक बार पढ़कर देखें: क्या पहला वाक्य प्रश्न का सीधा उत्तर देता है? क्या बिंदु क्रम में हैं? क्या अंतिम वाक्य निष्कर्ष देता है? यदि तीनों उत्तर ‘हाँ’ हैं, तो उत्तर पूरा है।
- विकास = जीवन की गुणवत्ता में सुधार (शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा, अवसर); वृद्धि = केवल GDP बढ़ना।
- वृद्धि का लाभ सब तक समान नहीं पहुँचता।
- सामाजिक प्रभाव — विस्थापन, असमानता, आजीविका का नाश।
- पर्यावरणीय प्रभाव — वन-कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन।
- सतत विकास — आज की ज़रूरत, भविष्य की सुरक्षा।
- लोकतंत्र और आंदोलन विकास को जनहित से जोड़ते हैं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

