संघवाद
संघवाद क्या है, केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति कैसे बँटी है और राज्य स्वायत्तता की माँग क्यों उठती है — पूरा अध्याय।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Political Science • Book: Bharat ka Samvidhan: Siddhant aur Vyavahar (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
संघवाद — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bharat ka Samvidhan: Siddhant aur Vyavahar (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 7 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
संघवाद वह व्यवस्था है जिसमें शासन की शक्ति केंद्र और राज्यों के बीच बँटी होती है। भारत में तीन सूचियाँ हैं — संघ सूची (केंद्र: रक्षा, विदेश), राज्य सूची (राज्य: पुलिस, कृषि) और समवर्ती सूची (दोनों: शिक्षा, वन)। अवशिष्ट विषय केंद्र के पास हैं।
भारत का संघवाद 'अटूट संघ' वाला है — राज्य संघ से अलग नहीं हो सकते, और केंद्र के पास अधिक शक्तियाँ हैं (जैसे राष्ट्रपति शासन, राज्य का पुनर्गठन)। फिर भी राज्यों की अपनी निर्वाचित सरकारें हैं और भाषा, संस्कृति की विविधता को संघवाद ही संभालता है।
संघवाद का अर्थ और शक्ति-विभाजन
संघवाद वह व्यवस्था है जिसमें शासन की शक्ति केंद्र और राज्यों के बीच बँटी होती है। भारत में यह बँटवारा संविधान की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियों से होता है — संघ सूची (रक्षा, विदेश, रेलवे — 100 विषय), राज्य सूची (पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य — 61 विषय) और समवर्ती सूची (शिक्षा, वन, विवाह — 52 विषय)। किसी सूची में न आने वाले अवशिष्ट विषय केंद्र के पास रहते हैं।
समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, पर टकराव होने पर केंद्र का कानून प्रभावी होता है। यह व्यवस्था भारत को 'सशक्त केंद्र वाला संघ' बनाती है — राज्यों को स्वायत्तता है, पर राष्ट्र की एकता के लिए केंद्र मज़बूत है।
विशेष प्रावधान और केंद्र-राज्य संबंध
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान हैं — जैसे अनुच्छेद 371 के तहत महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ। इनका उद्देश्य क्षेत्रीय विविधता, ऐतिहासिक परिस्थितियों और जनजातीय संस्कृति की रक्षा करना है।
केंद्र-राज्य संबंधों में तीन क्षेत्र हैं — विधायी (सूचियाँ), प्रशासनिक (राज्यपाल, अखिल भारतीय सेवाएँ) और वित्तीय (करों का बँटवारा, वित्त आयोग, अनुदान)। वित्त आयोग हर पाँच वर्ष में केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के बँटवारे की सिफ़ारिश करता है।
स्वायत्तता की माँग और राज्यपाल की भूमिका
राज्य अक्सर अधिक स्वायत्तता माँगते हैं — अधिक वित्तीय संसाधन, राज्य सूची के विषयों पर कम हस्तक्षेप और राज्यपाल की भूमिका में सुधार। राज्यपाल केंद्र द्वारा नियुक्त होता है, इसलिए कई बार उस पर केंद्र के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगता है, विशेषकर अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) की सिफ़ारिश के मामलों में।
राष्ट्रपति शासन केवल तभी लगना चाहिए जब राज्य में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो जाए — जैसे सरकार का बहुमत खोना और कोई विकल्प न बनना, या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना। केवल कानून-व्यवस्था की समस्या या अलग दल की सरकार होना राष्ट्रपति शासन का आधार नहीं है (सरकारिया आयोग की सिफ़ारिशें)।
मुख्य बिंदु
- तीन सूचियाँ: संघ, राज्य, समवर्ती।
- अवशिष्ट विषय केंद्र के पास।
- केंद्र की विशेष शक्तियाँ: राष्ट्रपति शासन, पुनर्गठन।
- भारत 'सशक्त केंद्र वाला संघ' है — अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास, एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका।
- अनुच्छेद 371 जैसे विशेष प्रावधान विविधता की रक्षा के लिए हैं, राष्ट्र की एकता के विरुद्ध नहीं।
- राष्ट्रपति शासन अंतिम उपाय है — केवल संवैधानिक तंत्र की विफलता पर, हर राजनीतिक मतभेद पर नहीं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| संघ सूची | रक्षा, विदेश, रेलवे |
| राज्य सूची | पुलिस, कृषि, स्वास्थ्य |
| समवर्ती सूची | शिक्षा, वन, विवाह |
| अवशिष्ट | केंद्र के पास |

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): संघवाद का सामान्य चित्रण — केंद्र और राज्यों के भवन जुड़े हुए। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: तीन सूचियाँ और अवशिष्ट विषय।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): शक्ति का बँटवारा — तीन सूचियाँ और केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियाँ।
Key Terms — मुख्य शब्द
- संघवाद: केंद्र-राज्य में शक्ति का बँटवारा।
- संघ सूची: सिर्फ केंद्र के विषय।
- राज्य सूची: सिर्फ राज्य के विषय।
- समवर्ती सूची: दोनों के साझा विषय।
- अवशिष्ट विषय: सूचियों में न आया विषय।
- सातवीं अनुसूची — संविधान की अनुसूची जिसमें संघ, राज्य और समवर्ती सूचियाँ दी गई हैं।
- अवशिष्ट शक्ति — किसी सूची में न आने वाले विषयों पर कानून बनाने की शक्ति; भारत में यह केंद्र के पास है।
- अनुच्छेद 356 — राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान।
- वित्त आयोग — हर पाँच वर्ष में केंद्र-राज्य राजस्व बँटवारे की सिफ़ारिश करने वाला संवैधानिक निकाय (अनुच्छेद 280)।
Remember — याद रखें
- तीनों सूचियों के कम से कम दो-दो उदाहरण याद करें।
- अवशिष्ट विषय केंद्र के पास — यह विशेष तथ्य है।
- भारत का संघवाद केंद्र की ओर झुका है — कारण सहित लिखें।
- समवर्ती सूची में टकराव होने पर केंद्र का कानून प्रभावी होता है।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: समवर्ती सूची को सिर्फ राज्यों की सूची मान लेना। उत्तर में 'दोनों के साझा विषय' लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- संघवाद किसे कहते हैं?
संकेत: शक्ति के बँटवारे के बारे में सोचें। - तीन सूचियाँ कौन सी हैं?
संकेत: संघ, राज्य, समवर्ती के बारे में सोचें। - संघ सूची के दो विषय बताइए।
संकेत: रक्षा और विदेश के बारे में सोचें। - अवशिष्ट विषय किसके पास हैं?
संकेत: केंद्र के बारे में सोचें। - भारत का संघवाद कैसा है?
संकेत: केंद्र की ओर झुकाव के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- संघवाद क्या है?
शासन की शक्ति का केंद्र और राज्यों के बीच संवैधानिक बँटवारा। - तीन सूचियाँ कौन सी हैं?
संघ सूची (केंद्र: रक्षा, विदेश), राज्य सूची (राज्य: पुलिस, कृषि) और समवर्ती सूची (दोनों: शिक्षा, वन)। - अवशिष्ट विषय किसके पास हैं?
केंद्र के पास — जो विषय किसी सूची में नहीं है, उस पर केंद्र कानून बना सकता है। - भारत का संघवाद केंद्र की ओर क्यों झुका है?
क्योंकि अवशिष्ट विषय, राष्ट्रपति शासन और राज्यों के पुनर्गठन जैसी शक्तियाँ केंद्र के पास हैं। - समवर्ती सूची में टकराव हो तो क्या होता है?
केंद्र का कानून प्रभावी होता है।
पुस्तक की प्रश्नावली — Extension Q&A (पुस्तक के अभ्यास प्रश्नों पर आधारित, EG के अपने शब्दों में)
- निम्नलिखित घटनाओं में से किनमें संघवाद की कार्य-प्रणाली दिखाई देती है? (क) दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल को छठी अनुसूची के तहत स्वायत्तता (ख) बाढ़-प्रभावित प्रदेशों से केंद्र द्वारा विस्तृत योजना माँगना (ग) दिल्ली नगरपालिका आयुक्त की नियुक्ति (घ) मणिपुर विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा (ङ) केंद्र द्वारा अरुणाचल प्रदेश को ग्रामीण जलापूर्ति के लिए धन देना (च) मुंबई में शिवसैनिकों की उठा-पटक (छ) नागालैंड सरकार को भंग करने की माँग (ज) नक्सलियों से हथियार डालने की अपील
उत्तर: संघीय कार्य-प्रणाली वाली घटनाएँ — (क) छठी अनुसूची की स्वायत्तता संघीय विविधता की रक्षा है। (ख) बाढ़ राहत में केंद्र-राज्य वित्तीय सहयोग संघीय संबंध है। (ङ) केंद्रीय धन का राज्यों को हस्तांतरण वित्तीय संघवाद है। (छ) राज्य सरकार भंग करने की माँग अनुच्छेद 356 के संघीय तनाव से जुड़ी है। संघीय कार्य-प्रणाली नहीं — (ग) दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है, वहाँ नगर आयुक्त की नियुक्ति केंद्र का प्रशासनिक कार्य है। (च) मुंबई की उठा-पटक कानून-व्यवस्था का मामला है। (घ) केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाना संसद का विधायी कार्य है, केंद्र-राज्य शक्ति-बँटवारे का उदाहरण नहीं। (ज) नक्सलवाद से निपटना आंतरिक सुरक्षा का विषय है। - बताइए कि निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत: (क) संघवाद राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय विविधता दोनों की रक्षा करता है (ख) संघवाद राज्यों के बीच आर्थिक आदान-प्रदान में बाधा डालता है (ग) संघवाद केंद्र की शक्तियों को सीमित करता है
उत्तर: (क) सही — संघवाद विविधता में एकता का सूत्र है। (ख) गलत — संघीय व्यवस्था में एकल बाज़ार और मुक्त आवागमन बना रहता है, आर्थिक आदान-प्रदान बाधित नहीं होता। (ग) सही — संविधान केंद्र की शक्तियों की सीमा तय करता है, राज्य सूची के विषयों पर केंद्र सीधे कानून नहीं बना सकता। - बेल्जियम के संविधान के अनुच्छेदों का अध्ययन करके भारत के लिए एक ऐसा अनुच्छेद लिखिए जो संघवाद की भावना को दर्शाए।
उत्तर: उदाहरण — 'अनुच्छेद 1: भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का एक संघ होगा। संघ और राज्य अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार करेंगे और एक-दूसरे की स्वायत्तता का सम्मान करेंगे।' बेल्जियम की तरह भारत में भी भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा संघवाद के माध्यम से होती है। - शक्ति-विभाजन, वित्तीय संबंध और राज्यपाल की भूमिका पर 300 शब्दों में निबंध लिखिए।
उत्तर: शक्ति-विभाजन — तीन सूचियों से केंद्र-राज्य शक्तियाँ बँटी हैं; समवर्ती सूची पर टकराव में केंद्र का कानून प्रभावी। वित्तीय संबंध — करों का बँटवारा, वित्त आयोग की सिफ़ारिशें और अनुदान; राज्यों की आय सीमित होने से वे केंद्र पर निर्भर रहते हैं। राज्यपाल — केंद्र द्वारा नियुक्त, राज्य का संवैधानिक प्रमुख; विवाद तब होता है जब राज्यपाल केंद्र के एजेंट की तरह काम करे। निष्कर्ष: सहयोगात्मक संघवाद ही संतुलन है। - भारत में राज्यों के गठन का मुख्य आधार क्या रहा है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: भाषा — 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम से राज्यों का गठन मुख्यतः भाषायी आधार पर हुआ। तर्क: भाषा समुदाय की पहचान और प्रशासन की सुविधा का आधार है; भाषायी राज्यों से क्षेत्रीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक रूप मिला और राष्ट्रीय एकता मज़बूत हुई। - हिंदी भाषी राज्यों को एक बड़े राज्य में मिलाने के प्रस्ताव के पक्ष-विपक्ष में तर्क दीजिए। आप किस पक्ष से सहमत हैं?
उत्तर: पक्ष में — प्रशासनिक सुविधा और एक भाषा। विपक्ष में — विशाल राज्य का प्रबंधन कठिन होगा, क्षेत्रीय पहचान दबेगी, छोटे राज्यों की आकांक्षाएँ कुचली जाएँगी और संघवाद की भावना कमज़ोर होगी। निष्कर्ष: विपक्ष से सहमत — संघवाद विविधता की रक्षा पर टिका है, एकरूपता पर नहीं। - केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाने वाली चार विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: (1) अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास हैं। (2) संघ सूची राज्य सूची से बड़ी है और महत्त्वपूर्ण विषय (रक्षा, विदेश, रेलवे) केंद्र के पास हैं। (3) अनुच्छेद 356 से केंद्र राज्य सरकार भंग कर सकता है। (4) राज्यपाल केंद्र द्वारा नियुक्त होता है और अखिल भारतीय सेवाएँ केंद्र के नियंत्रण में रहती हैं। - राज्य सरकारें राज्यपाल की भूमिका से क्यों नाराज़ रहती हैं? समझाइए।
उत्तर: क्योंकि राज्यपाल केंद्र द्वारा नियुक्त होता है और कई बार उसने केंद्र के हित में काम किया है — जैसे बहुमत की जाँच में पक्षपात, विधेयकों को लंबे समय तक रोके रखना और अनुच्छेद 356 की सिफ़ारिश करना। इससे राज्यों को लगता है कि उनकी लोकतांत्रिक सरकार पर केंद्र का अंकुश है। - निम्नलिखित स्थितियों में राष्ट्रपति शासन उचित है या नहीं? कारण सहित उत्तर दीजिए: (क) विपक्षी विधायकों की हत्या (ख) कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति (ग) बहुमत खोना और कोई विकल्प न बनना (घ) राज्य में अलग दल की सरकार होना (ङ) बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा (च) सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना
उत्तर: (क) नहीं — अपराध की घटना संवैधानिक विफलता नहीं है। (ख) नहीं — कानून-व्यवस्था की समस्या से अकेले राष्ट्रपति शासन उचित नहीं होता। (ग) उचित हो सकता है — यदि कोई दल/गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में न हो। (घ) नहीं — अलग दल की सरकार होना लोकतंत्र की सामान्य बात है। (ङ) उचित हो सकता है — बड़े पैमाने पर हिंसा से संवैधानिक तंत्र ठप हो जाता है। (च) उचित — सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना संवैधानिक विफलता है। - राज्यों की स्वायत्तता की माँग के पक्ष में तर्क दीजिए — वित्तीय स्वायत्तता, विषयों का बँटवारा और राज्यपाल की भूमिका के संदर्भ में।
उत्तर: वित्तीय — राज्यों की आय के स्रोत सीमित हैं, वे केंद्र के अनुदानों पर निर्भर हैं; अधिक राजस्व हिस्सेदारी से वे अपनी योजनाएँ खुद चला सकेंगे। विषय — राज्य सूची के विषयों पर केंद्र के हस्तक्षेप से स्थानीय ज़रूरतें दबती हैं। राज्यपाल — निष्पक्ष राज्यपाल से केंद्र-राज्य विश्वास बढ़ेगा। निष्कर्ष: स्वायत्तता से संघ मज़बूत होगा, कमज़ोर नहीं। - कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान (अनुच्छेद 371 आदि) उचित हैं या नहीं? चर्चा कीजिए।
उत्तर: उचित हैं — इन राज्यों की ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ अलग हैं (जैसे नागालैंड की जनजातीय परंपराएँ, असम की जनसांख्यिकी)। विशेष प्रावधान इनकी पहचान की रक्षा करते हैं और इन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ते हैं। आलोचना यह है कि इससे असमानता का भाव पैदा हो सकता है, पर असममित संघवाद विविधता वाले देश के लिए ज़रूरी है।
बोर्ड-पैटर्न अभ्यास — Board-pattern Q&A (EG द्वारा बनाए गए अभ्यास प्रश्न; वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र नहीं हैं)
- संघवाद से क्या तात्पर्य है?
वह व्यवस्था जिसमें शासन की शक्ति संविधान द्वारा केंद्र और राज्यों के बीच बाँटी जाती है और दोनों अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। - तीन सूचियों के नाम और एक-एक विषय लिखिए।
संघ सूची — रक्षा; राज्य सूची — पुलिस; समवर्ती सूची — शिक्षा। - अवशिष्ट शक्तियाँ किसके पास हैं?
केंद्र सरकार के पास — जो विषय किसी सूची में नहीं आते, उन पर कानून बनाने का अधिकार संसद को है। - अनुच्छेद 356 क्या है?
राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रावधान — राज्य सरकार भंग हो जाती है और शासन केंद्र के हाथ में आ जाता है। - वित्त आयोग का क्या कार्य है?
हर पाँच वर्ष में केंद्र और राज्यों के बीच कर-राजस्व के बँटवारे और अनुदानों की सिफ़ारिश करना।
- तीन सूचियाँ — संघ (रक्षा, विदेश), राज्य (पुलिस, कृषि), समवर्ती (शिक्षा, वन); अवशिष्ट = केंद्र।
- समवर्ती सूची पर टकराव में केंद्र का कानून प्रभावी।
- विशेष प्रावधान — अनुच्छेद 371 (नागालैंड, असम, मणिपुर आदि)।
- वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) — हर 5 वर्ष में राजस्व बँटवारा।
- अनुच्छेद 356 — केवल संवैधानिक विफलता पर राष्ट्रपति शासन।
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