Chapter 1: मात्रक और मापन
SI मात्रक, विमीय सूत्र, त्रुटि और सार्थक अंक — मापन की पूरी विधि, सूत्रों और पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
मात्रक और मापन — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics) | Chapter 1 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
मापन क्यों ज़रूरी है
किसी भी भौतिक राशि को संख्या और मात्रक के साथ बताना ही मापन है। बिना मात्रक के केवल संख्या अधूरी रहती है, जैसे केवल '5' कहने से यह पता नहीं चलता कि लंबाई 5 मीटर है या 5 सेंटीमीटर।
मूल राशियाँ सात हैं — लंबाई, द्रव्यमान, समय, विद्युत धारा, ताप, पदार्थ की मात्रा और ज्योति तीव्रता। इन्हीं से बाकी सभी व्युत्पन्न राशियाँ बनती हैं।
SI पद्धति और विमाएँ
SI पद्धति में लंबाई का मात्रक मीटर, द्रव्यमान का किलोग्राम और समय का सेकंड है। विमीय सूत्र बताता है कि कोई राशि मूल राशियों की किन घातों से बनी है, जैसे वेग की विमा [M⁰L¹T⁻¹] है।
- विमीय जाँच से सूत्र की शुद्धता की परख होती है।
- एक पद्धति के मात्रक को दूसरी में बदलने में विमाएँ काम आती हैं।
त्रुटियाँ और सार्थक अंक
मापन में यंत्र की सीमा, व्यक्ति की चूक या वातावरण के कारण त्रुटि आ सकती है। निरपेक्ष त्रुटि, आपेक्षिक त्रुटि और प्रतिशत त्रुटि से त्रुटि का आकार समझा जाता है।
सार्थक अंक वे अंक हैं जो मापन की विश्वसनीयता बताते हैं। उत्तर में सार्थक अंकों की संख्या मापन की सबसे कम परिशुद्ध संख्या के बराबर रखी जाती है।
इस अध्याय का विचार: किसी भी भौतिक राशि का मापन उस राशि की एक निश्चित, मान्यताप्राप्त मानक (मात्रक) से तुलना है। संख्या के साथ मात्रक बताए बिना मापन अधूरा है — ‘5’ कहने से यह पता नहीं चलता कि 5 मीटर है या 5 सेंटीमीटर।
पुस्तक की संरचना: यह अध्याय पहले SI पद्धति और उसके सात मूल मात्रकों को पक्का करता है, फिर बहुत छोटी और बहुत बड़ी लंबाइयों, द्रव्यमानों और समयों को मापने की विधियाँ (लंबन, वर्नियर, स्क्रू गेज) बताता है, और अंत में त्रुटियों, सार्थक अंकों तथा विमीय विश्लेषण के नियम सिखाता है।
2.1 भूमिका — मापन क्या है
मापन = भौतिक राशि की तुलना एक मानक से। मूल राशियाँ सात हैं — लंबाई, द्रव्यमान, समय, विद्युत धारा, ताप, पदार्थ की मात्रा, ज्योति तीव्रता — और इन्हीं से सभी व्युत्पन्न राशियाँ बनती हैं। SI में इनके मात्रक क्रमशः मीटर (m), किलोग्राम (kg), सेकंड (s), ऐम्पियर (A), केल्विन (K), मोल (mol), कैंडेला (cd) हैं।
2.2 मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (SI)
SI के दो पूरक मात्रक हैं — समतल कोण का रेडियन (rad) और घन कोण का स्टेरेडियन (sr)। उपसर्गों से गुणज बनते हैं: 10⁻¹⁵ फेम्टो, 10⁻¹² पिको, 10⁻⁹ नैनो, 10⁻⁶ माइक्रो, 10⁻³ मिली, 10³ किलो, 10⁶ मेगा, 10⁹ गीगा, 10¹⁵ पेटा। लंबाई की खगोलीय इकाइयाँ: 1 AU ≈ 1.496×10¹¹ m, 1 प्रकाश-वर्ष ≈ 9.46×10¹⁵ m, 1 पारसेक ≈ 3.08×10¹⁶ m ≈ 3.26 प्रकाश-वर्ष।
2.3 लंबाई का मापन — लंबन विधि
बहुत दूर की वस्तु की दूरी लंबन से: D = b/θ, जहाँ b आधार रेखा और θ लंबन कोण (रेडियन में) है। पृथ्वी की कक्षा का व्यास (≈ 3×10¹¹ m) आधार बनाकर निकट तारों की दूरी निकाली जाती है। बहुत छोटी लंबाई के लिए वर्नियर कैलिपर्स (अल्पतमांक = 1 मुख्य पैमाना भाग − 1 वर्नियर भाग) और स्क्रू गेज (अल्पतमांक = चूड़ी अंतराल ÷ वृत्तीय पैमाने के भाग) काम आते हैं।
2.4 द्रव्यमान का मापन
द्रव्यमान का मापन जड़त्वीय द्रव्यमान (त्वरण से) या गुरुत्वीय द्रव्यमान (तुला से) से होता है। परमाण्विक पैमाने पर मात्रक amu है: 1 amu = 1.66×10⁻²⁷ kg। बड़े द्रव्यमान (पृथ्वी, सूर्य) गुरुत्वाकर्षण नियम और कक्षीय गति से निकाले जाते हैं।
2.5 समय का मापन
समय का मानक अब सीज़ियम-133 परमाणु घड़ी है: 1 सेकंड = सीज़ियम-133 की 9,192,631,770 कंपन अवधियाँ। इसी परिशुद्धता के कारण दो सीज़ियम घड़ियाँ 100 वर्ष में केवल ~0.02 s का अंतर दिखाती हैं।
2.6 यथार्थता, परिशुद्धता और मापन में त्रुटि
यथार्थता = माप का सत्य मान से निकटता; परिशुद्धता = बार-बार के मापों का आपस में निकटता (विभेदन से तय)। त्रुटियाँ तीन तरह की: क्रमबद्ध (यंत्रगत, शून्य त्रुटि), यादृच्छिक (प्रेक्षण में उतार-चढ़ाव) और सकल (भूल)। निरपेक्ष त्रुटि Δa, आपेक्षिक त्रुटि Δa/a, प्रतिशत त्रुटि (Δa/a)×100%। योग/अंतर में निरपेक्ष त्रुटियाँ जुड़ती हैं; गुणा/भाग में आपेक्षिक त्रुटियाँ जुड़ती हैं; घात में आपेक्षिक त्रुटि घातांक से गुणा होती है।
2.7 सार्थक अंक
सार्थक अंक वे अंक हैं जो मापन की विश्वसनीयता बताते हैं: शून्य से पहले के शून्य गिने नहीं जाते, दशमलव के बाद का शून्य गिना जाता है, और 10 की घात से सार्थक अंकों की संख्या नहीं बदलती। जोड़/घटाव में उत्तर दशमलव के सबसे कम स्थान तक; गुणा/भाग में उत्तर सबसे कम सार्थक अंकों तक रखा जाता है।
2.8 भौतिक राशियों की विमाएँ
सात मूल राशियों की विमाएँ [M], [L], [T], [A], [K], [mol], [cd] हैं। उदाहरण: वेग [M⁰L¹T⁻¹], त्वरण [M⁰L¹T⁻²], बल [M¹L¹T⁻²], कार्य/ऊर्जा [M¹L²T⁻²], दाब [M¹L⁻¹T⁻²], गुरुत्वाकर्षण नियतांक G [M⁻¹L³T⁻²]।
2.9 विमीय सूत्र और विमीय समीकरण
विमीय सूत्र किसी राशि को मूल विमाओं की घातों में लिखता है; विमीय समीकरण दोनों पक्षों की विमाएँ बराबर रखता है, जैसे [v] = [u] + [at] में दोनों ओर [L¹T⁻¹] है। शुद्ध संख्या (½, π, 2) की कोई विमा नहीं होती — इसलिए विमा से नियतांक का मान कभी नहीं निकलता।
2.10 विमीय विश्लेषण और इसके अनुप्रयोग
तीन उपयोग: (i) किसी सूत्र की शुद्धता की जाँच — दोनों पक्षों की विमाएँ बराबर होनी चाहिए; (ii) एक पद्धति के मात्रक को दूसरी में बदलना — n₂ = n₁ (M₁/M₂)ᵃ (L₁/L₂)ᵇ (T₁/T₂)ᶜ; (iii) विभिन्न राशियों के बीच संबंध निकालना — जैसे दोलन काल T ∝ √(l/g)। सीमाएँ: विमा त्रिकोणमितीय/चरघातांकी फलनों के कोणांक, योग में जुड़ने वाले पदों की विमा-समानता, और नियतांक के बारे में कुछ नहीं बताती।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| मूल राशि | मूल राशियों की संख्या |
| व्युत्पन्न राशि | मूल राशियों से बनी राशि |
| विमीय जाँच | सूत्र की शुद्धता की परख |

चित्र 1: चित्र 1 में मापन की पूरी प्रक्रिया क्रम से दिखाई गई है — मूल राशि से लेकर त्रुटि की जाँच तक। चित्र पर लगे लेबल ही प्रक्रिया के चरण हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं; इन्हें याद करके पूरा अध्याय दोहराया जा सकता है।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): SI मात्रक, विमीय सूत्र और त्रुटि-नियम — एक नज़र में
मुख्य शब्द / Key Terms
- मूल राशि: जो किसी अन्य राशि से न बनी हो, जैसे लंबाई।
- व्युत्पन्न राशि: मूल राशियों से बनी राशि, जैसे वेग।
- विमीय सूत्र: राशि का मूल राशियों की घातों में रूप।
- सार्थक अंक: मापन की विश्वसनीयता बताने वाले अंक।
- प्रतिशत त्रुटि: आपेक्षिक त्रुटि को 100 से गुणा करने पर।
- लंबन: दूर की वस्तु की दिशा में, आधार रेखा के दोनों सिरों से दिखने वाला कोणीय अंतर; दूरी = आधार ÷ कोण (रेडियन)।
- अल्पतमांक: किसी यंत्र से मापी जा सकने वाली सबसे छोटी लंबाई; वर्नियर के लिए 1 MSD − 1 VSD, स्क्रू गेज के लिए चूड़ी अंतराल ÷ वृत्तीय भाग।
- यादृच्छिक त्रुटि: बार-बार के मापों में इधर-उधर उतार-चढ़ाव; अधिक बार मापकर औसत लेने से घटती है।
- विमाहीन राशि: जिसकी सभी मूल विमाओं की घात शून्य हो, जैसे आपेक्षिक घनत्व, कोण (रेडियन) — फिर भी इसका मात्रक हो सकता है।
- परिशुद्धता बनाम यथार्थता: परिशुद्धता विभेदन (अल्पतमांक) से आती है, यथार्थता सत्य मान से निकटता से; परिशुद्ध माप यथार्थ हो, यह ज़रूरी नहीं।
याद रखें
- SI के सात मूल मात्रक याद रखें।
- विमा की जाँच उत्तर की शुद्धता की पहली कसौटी है।
- वर्नियर कैलिपर्स और स्क्रू गेज से छोटी लंबाई मापी जाती है।
- त्रुटियों को जोड़ते समय आपेक्षिक त्रुटियाँ जुड़ती हैं।
- मापन का उत्तर हमेशा मात्रक सहित लिखें।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: विमीय सूत्र में संख्यात्मक नियतांक (जैसे ½, π) नहीं दिखते, इसलिए विमा से नियतांक का मान कभी नहीं निकाला जा सकता।
विमीय जाँच सूत्र के गलत होने को पकड़ लेती है, पर सही होने की गारंटी नहीं देती। जैसे s = ut + ½at² और s = ut + at² दोनों विमीय रूप से सही हैं — नियतांक ½ विमा से नहीं निकलता, उसे प्रयोग या सिद्धांत से ही तय करना पड़ता है।
अंतिम उत्तर में माप से अधिक सार्थक अंक लिखना गलत है, और शून्य त्रुटि को ठीक किए बिना लिया गया हर माप एक ही दिशा में गलत होगा। स्क्रू गेज/वर्नियर का शून्य पाठ्यांक पहले जाँचो, फिर माप में उसका संशोधन लगाओ।
गुणा/भाग में प्रतिशत त्रुटियाँ सीधे जुड़ती हैं और घात में गुणा हो जाती हैं: यदि P = a³b²/(√c·d) हो और a,b,c,d की प्रतिशत त्रुटियाँ 1%, 3%, 4%, 2% हों, तो P की त्रुटि = 3×1 + 2×3 + ½×4 + 2 = 13%।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- लंबाई, द्रव्यमान और समय के SI मात्रक लिखिए। संकेत: SI मात्रक: मीटर, किलोग्राम, सेकंड।
- वेग की विमा निकालिए। संकेत: वेग = दूरी/समय, इसलिए विमा [M⁰L¹T⁻¹]।
- सार्थक अंक क्यों ज़रूरी हैं? संकेत: वे मापन की परिशुद्धता बताते हैं।
- निरपेक्ष और आपेक्षिक त्रुटि में अंतर बताइए। संकेत: निरपेक्ष त्रुटि वास्तविक अंतर है; आपेक्षिक त्रुटि उसका मापे गए मान से अनुपात है।
- एक पेंच का व्यास स्क्रू गेज से क्यों मापते हैं? संकेत: क्योंकि वह बहुत छोटा होता है और साधारण पैमाने से परिशुद्ध नहीं मापा जाता।
मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A
- SI के सात मूल मात्रक और उनके प्रतीक लिखिए। उत्तर: मीटर (m), किलोग्राम (kg), सेकंड (s), ऐम्पियर (A), केल्विन (K), मोल (mol), कैंडेला (cd)।
- 1 पारसेक को मीटर और प्रकाश-वर्ष में बदलिए। उत्तर: 1 पारसेक ≈ 3.08×10¹⁶ m ≈ 3.26 प्रकाश-वर्ष।
- वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक 0.01 cm है — इसका क्या अर्थ है? उत्तर: इससे 0.01 cm से छोटी लंबाई का अंतर नहीं मापा जा सकता; हर माप में ±0.01 cm तक की अनिश्चितता रहती है।
- दो माप 4.2 m और 4.25 m में कौन अधिक परिशुद्ध है और क्यों? उत्तर: 4.25 m, क्योंकि उसका अल्पतमांक (0.01 m) छोटा है — दशमलव के बाद दो अंक परिशुद्धता बढ़ाते हैं।
- सूत्र F = ma की विमीय जाँच कीजिए। उत्तर: [ma] = [M][LT⁻²] = [MLT⁻²] = [F]; दोनों पक्ष बराबर, अतः विमीय रूप से सही।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- दो मापनों 4.2 m और 4.25 m में कौन अधिक परिशुद्ध है और क्यों? उत्तर: 4.25 m अधिक परिशुद्ध है क्योंकि उसमें दशमलव के बाद दो अंक हैं, अर्थात् उसका अल्पतमांक छोटा है।
- बल का विमीय सूत्र लिखिए। उत्तर: बल = द्रव्यमान × त्वरण, इसलिए विमा [M¹L¹T⁻²] है।
- विमीय विधि से सूत्र v = u + at की जाँच कीजिए। उत्तर: at की विमा [L¹T⁻¹] वेग की विमा के बराबर है, इसलिए सूत्र विमीय रूप से सही है।
- प्रतिशत त्रुटि 2% का अर्थ क्या है? उत्तर: इसका अर्थ है कि मापा गया मान वास्तविक मान से लगभग 2% तक अलग हो सकता है।
- मापन में शून्य त्रुटि क्या होती है? उत्तर: जब यंत्र का शून्य चिह्न सही स्थान पर न हो, तो हर मापन में एक स्थिर त्रुटि आ जाती है, जिसे शून्य त्रुटि कहते हैं।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।
- 2.1 रिक्त स्थान भरिए: (a) 1 cm भुजा वाले घन का आयतन 10⁻⁶ m³ है। (b) 2 cm त्रिज्या, 10 cm ऊँचाई वाले सिलिंडर का पृष्ठ क्षेत्रफल 15080 mm² है (2πr(r+h) = 150.8 cm²)। (c) 18 km/h की चाल 5 m/s है। (d) सीसे का आपेक्षिक घनत्व 11.3 है, अतः घनत्व 11.3 g cm⁻³ = 11300 kg m⁻³ है।
- 2.2 मात्रक परिवर्तन: (a) 1 kg m² s⁻² = 10⁷ g cm² s⁻²; (b) 1 m = 1.057×10⁻¹⁶ ly; (c) 3.0 m s⁻² = 3.888×10⁴ km h⁻²; (d) G = 6.67×10⁻¹¹ N m² kg⁻² = 6.67×10⁻⁸ cm³ s⁻² g⁻¹।
- 2.3 कैलोरी = 4.2 J है। नए मात्रकों (द्रव्यमान α kg, लंबाई β m, समय γ s) में कैलोरी का मान 4.2 α⁻¹ β⁻² γ² नए मात्रक होगा, क्योंकि ऊर्जा की विमा [ML²T⁻²] है और नया ऊर्जा-मात्रक αβ²γ⁻² J के बराबर है।
- 2.4 कथन की व्याख्या: ‘तुलना के मानक का विशेष उल्लेख किए बिना किसी विमीय राशि का कोई अर्थ नहीं’ — मापन ही तुलना है; बिना मात्रक बताए संख्या (जैसे ‘5’) का कोई अर्थ नहीं रहता, और विमीय सूत्र भी तभी अर्थ देता है जब मात्रक-पद्धति ज्ञात हो।
- 2.5 नए लंबाई-मात्रक में प्रकाश की चाल 1 है; सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश 8 min 20 s = 500 s लेता है, अतः दूरी = 1 × 500 = 500 नए मात्रक।
- 2.6 सबसे परिशुद्ध यंत्र (c) प्रकाशिक यंत्र है: वर्नियर का अल्पतमांक 0.05 mm, स्क्रू गेज का 0.01 mm, जबकि प्रकाशिक यंत्र प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (~6000 Å = 0.0006 mm) की सीमा तक माप सकता है।
- 2.7 बाल की मोटाई = आभासी मोटाई ÷ आवर्धन = 3.5 mm ÷ 100 = 0.035 mm (≈ 35 μm)।
- 2.8 (a) धागे को पैमाने पर कसकर N बार लपेटकर कुल लंबाई L मापो; व्यास = L/N। (b) नहीं — वृत्तीय भाग मनमाने ढंग से बढ़ाने से यथार्थता नहीं बढ़ती; चूड़ी अंतराल और यांत्रिक दोष सीमा बन जाते हैं। (c) 100 मापों का औसत अधिक विश्वसनीय है क्योंकि यादृच्छिक त्रुटियाँ औसत में घट जाती हैं (औसत की त्रुटि लगभग 1/√N से घटती है)।
- 2.9 रेखीय आवर्धन = √(क्षेत्रफलों का अनुपात) = √(1.55 m² ÷ 1.75 cm²) = √8857 ≈ 94।
- 2.10 सार्थक अंक: (a) 0.007 m² — 1; (b) 2.64×10²⁴ kg — 3; (c) 0.2370 g cm⁻³ — 4; (d) 6.320 J — 4; (e) 6.032 N m⁻² — 4; (f) 0.0006032 m² — 4।
- 2.11 क्षेत्रफल = 4.234 × 1.005 = 4.255 m²; आयतन = 4.255 × 0.0201 = 0.0855 m³ (मोटाई के 3 सार्थक अंकों तक)।
- 2.12 (a) कुल द्रव्यमान = 2.300 + 0.02015 + 0.02017 = 2.340 kg (तीन दशमलव तक)। (b) टुकड़ों के द्रव्यमानों का अंतर = 20.17 − 20.15 = 0.02 g।
- 2.13 P = a³b²/(√c·d) में प्रतिशत त्रुटि = 3×1 + 2×3 + ½×4 + 2 = 13%; P = 3.763 को 13% त्रुटि के साथ 3.8 तक (2 सार्थक अंक) लिखा जाएगा।
- 2.14 विमीय आधार पर गलत सूत्र (b) y = a sin vt (vt की विमा [L] है, कोणांक विमाहीन होना चाहिए) और (c) y = (a/T) sin(t/a) (बायाँ पक्ष [LT⁻¹] है, दायाँ [L] होना चाहिए; t/a भी विमाहीन नहीं) हैं; (a) और (d) विमीय रूप से सही हैं।
- 2.15 संबंध m = m₀/(1 − v²/c²)^{1/2} विमीय रूप से सही है क्योंकि v²/c² विमाहीन है। v → c पर m → ∞, और v > c पर हर काल्पनिक हो जाता है — इसलिए कोई कण प्रकाश की चाल से तेज़ नहीं चल सकता।
- 2.16 हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या 0.5 Å = 0.5×10⁻¹⁰ m; एक परमाणु का आयतन ≈ 5.24×10⁻³¹ m³; एक मोल का कुल परमाण्विक आयतन = 5.24×10⁻³¹ × 6.023×10²³ ≈ 3.2×10⁻⁷ m³।
- 2.17 एक मोल आदर्श गैस का STP पर आयतन 22.4 L = 22.4×10⁻³ m³; परमाणुओं का कुल आयतन (त्रिज्या ~1 Å) ≈ 2.5×10⁻⁶ m³; अनुपात ≈ 10⁻⁴ — गैस का लगभग पूरा आयतन खाली स्थान है, इसलिए अनुपात इतना छोटा है।
- 2.18 व्याख्या: तेज़ रेलगाड़ी से निकट की वस्तुएँ अधिक कोणीय चाल से पीछे भागती दिखती हैं, दूर की धीरे — क्योंकि समान रेखीय चाल पर कोणीय चाल ≈ v/दूरी होती है; दूरी बढ़ने पर कोणीय चाल घटती है। यही लंबन का दैनिक रूप है।
- 2.19 1 पारसेक वह दूरी है जहाँ से 1 AU लंबन कोण 1″ (सेकंड) बनाता है: 1 पारसेक = 1.496×10¹¹ ÷ (4.848×10⁻⁶) ≈ 3.08×10¹⁶ m।
- 2.20 निकटतम तारा 4.29 प्रकाश-वर्ष दूर है; पारसेक में = 4.29 ÷ 3.26 ≈ 1.32 पारसेक।
- 2.21 परिशुद्ध मापन विज्ञान की आवश्यकता है — जैसे उपग्रह की कक्षा, दवा की खुराक या पुल की सामर्थ्य में छोटी त्रुटि भी बड़े परिणाम देती है; बिना परिशुद्ध मापन के सिद्धांत की जाँच और तकनीक का विकास संभव नहीं।
- 2.22 परिशुद्ध मापन के साथ-साथ सामान्य प्रेक्षण और कोटि-आकलन (order-of-magnitude) भी महत्त्वपूर्ण हैं — वे किसी समस्या की मोटी तस्वीर और सही उत्तर की कोटि पहले ही बता देते हैं, जिससे परिशुद्ध गणना की दिशा तय होती है।
- 2.23 सूर्य का माध्य घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन = 2.0×10³⁰ ÷ (4π/3 × (7.0×10⁸)³) ≈ 1.4×10³ kg m⁻³। क्रोड का ताप 10⁷ K से अधिक है, इसलिए सूर्य ठोस/द्रव नहीं, प्लाज़्मा है; फिर भी गुरुत्वीय संपीड़न के कारण इसका माध्य घनत्व जल की कोटि का है।
- 2.24 बृहस्पति का व्यास = दूरी × कोणीय माप = 824.7×10⁶ km × (35.72 × 4.848×10⁻⁶) ≈ 1.43×10⁵ km।
पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)
ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।
- 2.25 वर्षा में चलते व्यक्ति को छाता ऊर्ध्व से θ कोण पर झुकाना पड़ता है, जहाँ tan θ = (व्यक्ति की चाल) ÷ (वर्षा की चाल)। v → 0 पर tan θ → 0, अतः θ → 0 — खड़े व्यक्ति को छाता सीधा रखना चाहिए।
- 2.26 दो सीज़ियम घड़ियों में 100 वर्ष में केवल 0.02 s का अंतर आ सकता है; भिन्नात्मक यथार्थता = 0.02 ÷ (100 × 365.25 × 24 × 3600) ≈ 6.3×10⁻¹², अर्थात् लगभग 10¹¹ में 1 भाग।
- 2.27 सोडियम परमाणु का माध्य द्रव्यमान घनत्व: परमाणु द्रव्यमान = 23×10⁻³ ÷ 6.023×10²³ ≈ 3.82×10⁻²⁶ kg; आयतन = 4π/3 × (2.5×10⁻¹⁰)³ ≈ 6.54×10⁻²⁹ m³; घनत्व ≈ 5.8×10² kg m⁻³। क्रिस्टलीय घनत्व 970 kg m⁻³ के साथ कोटि समान है — अंतर इसलिए है कि परमाणु गोलों के बीच खाली स्थान रहता है और क्रिस्टल में संकुलन भिन्न होता है।
- 2.28 r = r₀A^{1/3} से आयतन ∝ A और द्रव्यमान ∝ A, अतः नाभिकीय घनत्व सभी नाभिकों के लिए लगभग नियत है। सोडियम नाभिक (A = 23): r = 1.2 × 23^{1/3} fm ≈ 3.41 fm; घनत्व = (23 × 1.67×10⁻²⁷) ÷ (4π/3 × (3.41×10⁻¹⁵)³) ≈ 2.3×10¹⁷ kg m⁻³ — परमाण्विक घनत्व से लगभग 10¹⁴ गुना अधिक; परमाणु लगभग पूरा खाली है।
- 2.29 लेज़र किरण के आने-जाने में 2.56 s लगते हैं, अतः चंद्रमा की दूरी = c × t ÷ 2 = 3×10⁸ × 2.56 ÷ 2 = 3.84×10⁸ m।
- 2.30 SONAR: प्रतिध्वनि में 77.0 s का विलंब; दूरी = 1450 × 77.0 ÷ 2 = 55,825 m ≈ 55.8 km।
- 2.31 क्वासर से प्रकाश को 300 करोड़ वर्ष = 3×10⁹ वर्ष लगते हैं; दूरी = 3×10⁹ × 9.46×10¹⁵ ≈ 2.84×10²⁵ m।
- 2.32 पूर्ण सूर्यग्रहण में चंद्रमा की चक्रिका सूर्य की चक्रिका को ठीक ढक लेती है, अर्थात् दोनों के कोणीय व्यास बराबर हैं। सूर्य के व्यास (1.4×10⁹ m) और दूरी (1.5×10¹¹ m) तथा चंद्रमा की दूरी (3.84×10⁸ m) से चंद्रमा का व्यास ≈ 1.4×10⁹ × 3.84×10⁸ ÷ 1.5×10¹¹ ≈ 3.6×10⁶ m (≈ 3600 km)।
- 2.33 डिराक का प्रेक्षण: मूल नियतांकों (e, mₑ, mₚ, G, c) से बनी, समय की विमा वाली एक बड़ी संख्या का मान विश्व की वर्तमान आयु (~1.5×10¹⁰ वर्ष) की कोटि का निकलता है। यदि यह समानता महत्त्वपूर्ण है, तो इसका अर्थ होगा कि मूल नियतांक समय के साथ बदल रहे हैं (या यह मात्र संयोग है) — यही डिराक की बड़ी-संख्या परिकल्पना का सार है।
- SI के सात मूल मात्रक और उनकी विमाएँ याद रखें — हर सूत्र की विमीय जाँच इसी से शुरू होती है।
- गुणा/भाग में आपेक्षिक (प्रतिशत) त्रुटियाँ जुड़ती हैं; घात में वे घातांक से गुणा हो जाती हैं।
- जोड़/घटाव में उत्तर दशमलव के सबसे कम स्थान तक, गुणा/भाग में सबसे कम सार्थक अंकों तक।
- विमीय जाँच गलत सूत्र पकड़ती है, सही सूत्र की गारंटी नहीं देती — नियतांक विमा से नहीं निकलता।
- 1 पारसेक ≈ 3.08×10¹⁶ m ≈ 3.26 प्रकाश-वर्ष; 1 AU ≈ 1.496×10¹¹ m।
- नाभिकीय घनत्व (~10¹⁷ kg m⁻³) परमाण्विक घनत्व से ~10¹⁴ गुना अधिक है — परमाणु लगभग पूरा खाली है।

