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Bihar Board • Class 11 • Hindi • Digant Bhag-1

पद्य खंड — Chapter 6: झंकार

मैथिलीशरण गुप्त की कविता — झंकार: कवि की आत्मा की तंत्री, राष्ट्र की गूँज और संगीत की शक्ति।

Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Hindi • Book: Digant Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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झंकार — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में

पुस्तक: Digant Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11)  |  पद्य खंड — अध्याय 6  |  प्रकार: कविता (मैथिलीशरण गुप्त)  |  माध्यम: हिंदी

यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

झंकार के लिए लेबल वाला चित्र

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मंदिर का सामान्य चित्र — झंकार की ध्वनि और भाव का प्रतीक।

झंकार के लिए चित्र

बगीचे में कविता सुनाते विद्यार्थी — कविता के गूँजने का सामान्य चित्र।

झंकार के लिए लेबल वाला चित्र

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): झंकार — गुप्त, तार, संगीत और राष्ट्र की गूँज।

इस अध्याय के बारे में

'झंकार' में मैथिलीशरण गुप्त की कविता की ध्वनि और भाव का सुंदर मेल दिखाई देता है। शीर्षक ही बताता है कि कविता किसी झंकार की तरह है — वह मन में गूँजती है और पाठक को अपने साथ बहा ले जाती है।

गुप्त जी की कविता में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवता के प्रति गहरी आस्था है। वे कठिन शब्दों से नहीं, बल्कि सरल और ओजस्वी भाषा से अपनी बात कहते हैं, इसलिए उनकी कविता साधारण पाठक के लिए भी सहज है।

इस पाठ की सीख यह है कि कविता का प्रभाव उसकी ध्वनि और भाव दोनों से होता है। 'झंकार' हमें यह सिखाती है कि अच्छी कविता पढ़ने के बाद मन में देर तक गूँजती रहती है।

क्या सीखना है

गुप्त जी की कविता की ध्वनि, सरलता और नैतिक मूल्यों के भाव को समझें।

मुख्य शब्द

  • झंकार — ध्वनि की गूँज।
  • ओजस्वी — जोश और तेज से भरी हुई (भाषा)।
  • नैतिक मूल्य — सही-गलत की समझ पर आधारित मूल्य।
  • संस्कृति — किसी समाज की परंपराएँ और जीवन-शैली।
  • राष्ट्रकवि — मैथिलीशरण गुप्त की उपाधि।

याद रखें

  • गुप्त जी को 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है।
  • 'झंकार' में ध्वनि और भाव का मेल है।
  • उनकी भाषा सरल और ओजस्वी है।
  • अच्छी कविता मन में देर तक गूँजती है।

परीक्षा टिप / सामान्य गलती

सामान्य गलती: केवल 'गुप्त जी राष्ट्रकवि थे' लिख देना। परीक्षा में कविता की ध्वनि, सरलता और मूल्यों का उल्लेख भी करें।

Chart / Table: झंकार — मुख्य बिंदु

विषयविवरण
कविमैथिलीशरण गुप्त
उपाधिराष्ट्रकवि
भाषासरल और ओजस्वी
मुख्य भावसंस्कृति, नैतिक मूल्य, मानवता
विशेषताकविता मन में गूँजती है

अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)

  1. 'झंकार' शीर्षक का क्या अर्थ है?
    संकेत: ध्वनि की गूँज की बात सोचें।
  2. गुप्त जी की भाषा सरल और ओजस्वी क्यों कही जाती है?
    संकेत: कठिन शब्दों से बचने और जोश की बात सोचें।
  3. कविता का प्रभाव ध्वनि से कैसे होता है?
    संकेत: लय और गूँज के बारे में सोचें।
  4. कोई कविता पढ़ने के बाद मन में क्यों गूँजती रहती है?
    संकेत: भाव की गहराई पर ध्यान दें।
  5. अपने पसंदीदा मूल्य (जैसे ईमानदारी) पर चार पंक्तियाँ लिखें।
    संकेत: सरल भाषा में लिखें।

प्रश्न और उत्तर

  1. इस कविता के कवि कौन हैं?
    मैथिलीशरण गुप्त, जिन्हें 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है।
  2. 'झंकार' से क्या आशय है?
    ध्वनि की गूँज — कविता मन में गूँजती है।
  3. गुप्त जी की भाषा की क्या विशेषता है?
    वह सरल और ओजस्वी है; कठिन शब्दों से बचकर वे अपनी बात कहते हैं।
  4. गुप्त जी की कविता में कौन-से भाव हैं?
    भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवता के प्रति गहरी आस्था।
  5. इस पाठ की मुख्य सीख क्या है?
    कविता का प्रभाव उसकी ध्वनि और भाव दोनों से होता है; अच्छी कविता मन में देर तक गूँजती है।

विस्तार — पुस्तक के अभ्यास प्रश्न (पाठ के साथ / कविता के साथ)

नीचे पुस्तक के अभ्यास के 'कविता के साथ' प्रश्न (1-9) EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। पुस्तक स्रोत: BSTBPC Digant Bhag-1, अभ्यास पृ. 171।

  1. कवि ने अपने शरीर की सकल शिराओं को किस तंत्री के तार के रूप में देखना चाहा है?
    कवि ने अपने शरीर की सकल शिराओं को अपनी आत्मा की तंत्री के तार के रूप में देखना चाहा है — जैसे तंत्री के तार छूने पर झंकार उठती है, वैसे ही उसकी शिराओं से भी राष्ट्र की गूँज उठे।
  2. कवि को आघातों की चिंता क्यों नहीं है?
    कवि को आघातों की चिंता इसलिए नहीं है क्योंकि आघात ही तंत्री के तारों को झंकृत करते हैं — बिना आघात के संगीत नहीं उठता, इसलिए वह आघातों को प्यार मानता है।
  3. कवि ने समूह देश में किस गुंजार के गमक उठने की बात कही है?
    कवि ने समूह देश में राष्ट्र-प्रेम और जागरण की गुंजार के गमक उठने की बात कही है — उसकी तंत्री की झंकार पूरे देश में गूँजे।
  4. 'कर प्रहार, हौ कर प्रहार तू, भार नहीं, यह तो प्यार' — यहाँ किससे प्रहार करने के लिए कहा जा रहा है? भार को प्यार कहा गया है, इसका अर्थ क्या है?
    यहाँ समय/विधाता से प्रहार करने के लिए कहा जा रहा है; भार को प्यार इसलिए कहा गया है क्योंकि कवि के लिए आघात ही संगीत का कारण है — जो भार लगता है, वह वास्तव में प्यार है।
  5. निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या करें — (क) मेरे तार तार से तेरी / तान तान का हो विस्तार / अपनी अँगुली के धक्के से / खोल अखिल श्रुतियों के द्वार। (ख) ताल ताल पर भाल झुका कर / मोहित हों सब बारंबार / लय बँध जाय और क्रम क्रम से / सम में समा जाय संसार।
    (क) कवि चाहता है कि उसके हर तार से तेरी (ईश्वर/राष्ट्र की) तान का विस्तार हो और अँगुली के धक्के से सभी श्रुतियों के द्वार खुल जाएँ। (ख) कवि चाहता है कि हर ताल पर सबके भाल झुक जाएँ, मोहित हो जाएँ, और लय बँधकर संसार सम में समा जाए।
  6. कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
    कविता का केंद्रीय भाव है — कवि की आत्मा की तंत्री से राष्ट्र-प्रेम और संगीत की झंकार उठना; कवि अपने जीवन को संगीत बनाना चाहता है।
  7. कविता में सुरों की चर्चा है — इनके सजीव-साकार होने का क्या अर्थ है?
    सुरों के सजीव-साकार होने का अर्थ है कि सुर केवल ध्वनि नहीं रहें, बल्कि जीवंत रूप धारण करें — वे लोगों के मन में उतरकर उन्हें मोहित करें।
  8. इस कविता का स्वाधीनता आंदोलन से कोई सांकेतिक संबंध दिखाई पड़ता है? यदि हाँ, तो कैसा?
    हाँ, इस कविता का स्वाधीनता आंदोलन से सांकेतिक संबंध है — कवि की तंत्री की झंकार राष्ट्र-जागरण का प्रतीक है; आघातों को प्यार मानना स्वतंत्रता-संग्राम की सहनशक्ति का प्रतीक है।
  9. वर्णनात्मक कविता लिखने के लिए 'द्विवेदी युग' के कवि प्रसिद्ध थे, किंतु इस कविता में छायावादी कवियों जैसी शब्द योजना, भावाभिव्यक्ति एवं चेतना दिखाई पड़ती है — कैसे? इस पर विचार करें।
    द्विवेदी युग के कवि वर्णनात्मक थे, पर इस कविता में छायावादी जैसी शब्द योजना है — तंत्री, तार, झंकार जैसे प्रतीकों से भावाभिव्यक्ति होती है और चेतना आंतरिक है; यही छायावादी प्रभाव है।

बोर्ड-पैटर्न अभ्यास (EG के अपने प्रश्न — पिछले वर्ष के प्रश्न नहीं)

ये प्रश्न EG ने बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर बनाए हैं; ये वास्तविक पिछले वर्ष के प्रश्न नहीं हैं।

  1. इस कविता के कवि कौन हैं?
    मैथिलीशरण गुप्त, जिन्हें 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है।
  2. 'झंकार' से क्या आशय है?
    ध्वनि की गूँज — कविता मन में गूँजती है।
  3. गुप्त जी की भाषा की क्या विशेषता है?
    वह सरल और ओजस्वी है; कठिन शब्दों से बचकर वे अपनी बात कहते हैं।
  4. कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
    कवि की आत्मा की तंत्री से राष्ट्र-प्रेम और संगीत की झंकार उठना।
  5. गुप्त जी को 'राष्ट्रकवि' क्यों कहा जाता है? (क) वे राष्ट्रपति थे (ख) उनकी कविता में भारतीय संस्कृति और राष्ट्र-प्रेम है (ग) वे दिल्ली में रहते थे (घ) वे सरकारी कवि थे
    सही उत्तर: (ख) उनकी कविता में भारतीय संस्कृति और राष्ट्र-प्रेम है।

इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

Recap — दोहराएँ
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