पद्य खंड — Chapter 12: मातृभूमि
अरुण कमल की कविता — मातृभूमि: माँ और जन्मभूमि की छवियाँ एकाकार, प्रेम का अर्थ ज़िम्मेदारी।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Hindi • Book: Digant Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
मातृभूमि — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Digant Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | पद्य खंड — अध्याय 12 | प्रकार: कविता (अरुण कमल) | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — पाठ का विषय-स्तरीय (theme-level) सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): नदी, खेत और गाँव का सामान्य चित्र — मातृभूमि की पहचान।

गाँव में पेड़ लगाते विद्यार्थी — मातृभूमि के प्रति ज़िम्मेदारी का सामान्य चित्र।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मातृभूमि — अरुण कमल, मिट्टी, देश और माँ की छवि।
इस अध्याय के बारे में
'मातृभूमि' में अरुण कमल जन्मभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। मातृभूमि केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं है; वह हमारी भाषा, स्मृतियाँ, रिश्ते और बचपन की दुनिया है — जो हमें हमारी पहचान देती है।
कवि का कहना है कि मातृभूमि से प्रेम का अर्थ केवल भावुक होना नहीं है; उसका अर्थ है उसके प्रति ज़िम्मेदारी निभाना — उसकी मिट्टी, नदियों, खेतों और लोगों की भलाई के लिए काम करना। देशभक्ति की असली परीक्षा काम में होती है, नारों में नहीं।
इस पाठ की सीख यह है कि अपनी मातृभूमि से प्रेम करना और उसके लिए ज़िम्मेदारी से काम करना एक ही बात है। जो व्यक्ति अपनी धरती के प्रति कृतज्ञ है, वही उसके भविष्य के लिए भी चिंतित रहता है।
क्या सीखना है
मातृभूमि के प्रति प्रेम को ज़िम्मेदारी से जोड़कर समझें — पहचान, कृतज्ञता और काम।
मुख्य शब्द
- मातृभूमि — जन्मभूमि, माँ के समान धरती।
- जन्मभूमि — जहाँ व्यक्ति का जन्म हुआ हो।
- पहचान — किसी व्यक्ति या समाज की अपनी विशेषता।
- कृतज्ञता — आभार की भावना।
- देशभक्ति — अपने देश के प्रति प्रेम और ज़िम्मेदारी।
याद रखें
- मातृभूमि केवल ज़मीन नहीं, पहचान भी है।
- वह भाषा, स्मृतियाँ और रिश्तों से बनी है।
- मातृभूमि से प्रेम का अर्थ ज़िम्मेदारी भी है।
- देशभक्ति की परीक्षा काम में होती है, नारों में नहीं।
परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: केवल 'देश से प्रेम करना चाहिए' लिख देना। परीक्षा में मातृभूमि की पहचान (भाषा, स्मृति, रिश्ते) और ज़िम्मेदारी की बात भी लिखें।
Chart / Table: मातृभूमि — मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| कवि | अरुण कमल |
| विषय | मातृभूमि |
| मातृभूमि क्या है | ज़मीन + भाषा + स्मृतियाँ + रिश्ते |
| प्रेम का अर्थ | कृतज्ञता और ज़िम्मेदारी |
| देशभक्ति की परीक्षा | काम में, नारों में नहीं |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- मातृभूमि केवल ज़मीन का टुकड़ा क्यों नहीं है?
संकेत: भाषा, स्मृतियों और रिश्तों की बात सोचें। - मातृभूमि से प्रेम का अर्थ ज़िम्मेदारी क्यों है?
संकेत: भलाई के लिए काम करने की बात सोचें। - देशभक्ति की असली परीक्षा काम में क्यों होती है?
संकेत: नारों और काम के अंतर की बात सोचें। - अपनी जन्मभूमि की कोई एक स्मृति लिखें जो आपकी पहचान से जुड़ी हो।
संकेत: अपने अनुभव पर ध्यान दें। - अपनी मातृभूमि के लिए किए जा सकने वाले दो काम लिखें।
संकेत: सफाई, पेड़ या मदद जैसे काम सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कविता के कवि कौन हैं?
अरुण कमल। - मातृभूमि से क्या आशय है?
जन्मभूमि — केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी भाषा, स्मृतियाँ, रिश्ते और बचपन की दुनिया। - मातृभूमि हमें क्या देती है?
हमारी पहचान। - मातृभूमि से प्रेम का सही अर्थ क्या है?
केवल भावुक होना नहीं, बल्कि उसके प्रति ज़िम्मेदारी निभाना — उसकी मिट्टी, नदियों, खेतों और लोगों की भलाई के लिए काम करना। - इस पाठ की मुख्य सीख क्या है?
अपनी मातृभूमि से प्रेम करना और उसके लिए ज़िम्मेदारी से काम करना एक ही बात है।
विस्तार — पुस्तक के अभ्यास प्रश्न (पाठ के साथ / कविता के साथ)
नीचे पुस्तक के अभ्यास के 'कविता के साथ' प्रश्नों में से केवल वे दिए गए हैं जो BSTBPC स्कैन में बचे हैं (प्रश्न 5-12)। प्रश्न 1-4 पुस्तक पृ. 205 पर हैं, जो स्कैन में नहीं मिली — इसलिए इस पृष्ठ पर वे नहीं दिए गए हैं। पुस्तक स्रोत: BSTBPC Digant Bhag-1, अभ्यास पृ. 206।
- 'आज जब भीख में मुट्ठी भर अनाज भी दुर्लभ है / तब चारों तरफ क्यों इतनी भाप फैल रही है गर्म रोटी की' — यह कैसी भाप है? इस भाप के इतना फैलने में किस तरह की व्यंजना है?
यह भाप गर्म रोटी की भाप है — भूख और गरीबी के बीच भी रोटी की गंध फैल रही है; इस भाप के इतना फैलने में व्यंजना यह है कि भूखे लोगों के बीच रोटी की आशा और उसकी गंध सबसे अधिक महसूस होती है। - कई दिनों से भूखे-प्यासे कवि को माँ किस रूप में दिखाई पड़ती है? कवि ने किन स्थानों के बच्चों का उल्लेख कविता में किया है, और क्यों?
भूखे-प्यासे कवि को माँ मातृभूमि के रूप में दिखाई पड़ती है — वह माँ जो अपने बच्चों को रोटी देना चाहती है; कवि ने कालाहांडी, पलामू और नरौदा पटिया जैसे स्थानों के बच्चों का उल्लेख किया है, क्योंकि ये स्थान भूख और गरीबी के लिए चर्चित हैं। - 'ये यतीम ये अनाथ ये बंधुआ / इनके माथे पर हाथ फेर दो माँ / इनके भींगे केश सँवार दो अपने श्यामल हाथों से' — इन पंक्तियों का अर्थ लिखें। कवि ने यहाँ 'भींगे केश' क्यों लिखा है? अपनी कल्पना से उत्तर दें।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि कवि माँ से प्रार्थना करता है कि वह यतीम, अनाथ और बंधुआ बच्चों के माथे पर हाथ फेरे और उनके भींगे केश सँवारे; 'भींगे केश' इसलिए लिखा है क्योंकि वे बच्चे बारिश में भींगे हुए हैं, या आँसुओं से भींगे हुए हैं — भींगना उनकी पीड़ा का प्रतीक है। - 'तुम किसकी माँ हो मेरी मातृभूमि' — इस प्रश्न का मूल भाव आपके विचार में क्या है?
इस प्रश्न का मूल भाव यह है कि मातृभूमि किसकी माँ है — क्या वह केवल कुछ लोगों की माँ है, या सभी की? कवि इस प्रश्न से मातृभूमि के प्रेम की व्यापकता पर सवाल उठाता है। - 'और मैं भींज रहा हूँ / नाच रही धरती नाचता आसमान मेरी कील पर नाचता नाचता' — इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट करें।
इन पंक्तियों का आशय है कि कवि स्वयं भींग रहा है — धरती नाच रही है, आसमान नाच रहा है, और कवि भी उसी नृत्य में शामिल है; यह भींगना प्रकृति के साथ एकाकार होने का भाव है। - कविता में कवि ने स्वयं के भींगने को 'भींजना' कहा है जबकि सिंधु घाटी का चौड़े पट्टे वाला साँढ़, बच्चों के केश, नवोढ़ा या कौए के पंखों के लिए 'भींगना'। ऐसा क्यों? क्या इसका कोई भौगोलिक/भाषाई आधार है?
कवि ने स्वयं के भींगने को 'भींजना' और दूसरों के लिए 'भींगना' इसलिए कहा है क्योंकि 'भींजना' गहरा भींगना है — कवि स्वयं पूरी तरह भींगा है, जबकि दूसरों का भींगना सतही है; इसका आधार भाषाई है — 'भींजना' और 'भींगना' में गहराई का अंतर है। - शब्दों के प्रयोग में कवि अपनी पीढ़ी में अतिशय सावधान है। उसके सावधान शब्द प्रयोगों के कुछ उदाहरण कविता से चुन कर उनका अर्थ स्पष्ट करें।
कवि के सावधान शब्द प्रयोगों के उदाहरण हैं — 'भींजना' और 'भींगना' का अंतर, 'माँ' और 'मातृभूमि' का एकाकार, और 'गर्म रोटी की भाप' का बिंब; इन शब्दों से कवि ने भाव की गहराई को सटीकता से कहा है। - इस कविता में 'माँ' और 'मातृभूमि' की छवियाँ एक-दूसरे में घुल-मिलकर एकाकार हो जाती हैं तथा देश और काल के पटल पर माँ की प्रतिमा व्याप्ति और विस्तार पा जाती है। इस दृष्टि से कविता पर विचार करें और एक टिप्पणी लिखें।
इस कविता में माँ और मातृभूमि की छवियाँ एकाकार हो जाती हैं — माँ की प्रतिमा देश और काल के पटल पर व्याप्ति और विस्तार पा जाती है; यही कविता की केंद्रीय दृष्टि है कि मातृभूमि का प्रेम माँ के प्रेम जैसा ही व्यापक और गहरा है।
बोर्ड-पैटर्न अभ्यास (EG के अपने प्रश्न — पिछले वर्ष के प्रश्न नहीं)
ये प्रश्न EG ने बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर बनाए हैं; ये वास्तविक पिछले वर्ष के प्रश्न नहीं हैं।
- इस कविता के कवि कौन हैं?
अरुण कमल। - मातृभूमि से क्या आशय है?
जन्मभूमि — केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी भाषा, स्मृतियाँ, रिश्ते और बचपन की दुनिया। - मातृभूमि हमें क्या देती है?
हमारी पहचान। - मातृभूमि से प्रेम का सही अर्थ क्या है?
केवल भावुक होना नहीं, बल्कि उसके प्रति ज़िम्मेदारी निभाना — उसकी मिट्टी, नदियों, खेतों और लोगों की भलाई के लिए काम करना। - मातृभूमि से प्रेम का अर्थ ज़िम्मेदारी क्यों है? (क) क्योंकि वह ज़मीन है (ख) क्योंकि प्रेम काम में दिखता है, केवल भावना में नहीं (ग) क्योंकि वह माँ है (घ) क्योंकि वह देश है
सही उत्तर: (ख) क्योंकि प्रेम काम में दिखता है, केवल भावना में नहीं।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
विस्तार — ‘मातृभूमि’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘मातृभूमि’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘मातृभूमि’ और ‘जन्मभूमि’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- मातृभूमि — ‘मातृभूमि’ का अर्थ है — जन्मभूमि, माँ के समान धरती।। ‘मातृभूमि’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- जन्मभूमि — ‘जन्मभूमि’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — जहाँ व्यक्ति का जन्म हुआ हो। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘मातृभूमि’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- पहचान — ‘पहचान’ — किसी व्यक्ति या समाज की अपनी विशेषता।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘मातृभूमि’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- कृतज्ञता — ‘कृतज्ञता’ का सामान्य अर्थ है — आभार की भावना।। परंतु ‘मातृभूमि’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- देशभक्ति — ‘देशभक्ति’ का अर्थ है — अपने देश के प्रति प्रेम और ज़िम्मेदारी।। ‘मातृभूमि’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
रचना की भाषा और शैली — कैसे पढ़ें
गद्य, पद्य और कथा — तीनों की पढ़ने की विधि अलग होती है। गद्य में तर्क का क्रम पकड़ना सबसे महत्त्वपूर्ण है: लेखक पहले क्या स्थापित करता है, फिर किस उदाहरण या तुलना से उसे पुष्ट करता है, और अंत में किस निष्कर्ष पर पहुँचता है। पद्य में भाव और बिंब पकड़ना महत्त्वपूर्ण है: कवि किस चित्र के माध्यम से अपना भाव व्यक्त करता है, और वह चित्र पाठक के मन में क्या प्रभाव छोड़ता है। कथा में पात्र, घटना और परिणाम का क्रम पकड़ना महत्त्वपूर्ण है: कौन-सा पात्र किस स्थिति में क्या करता है, और उससे क्या सीख निकलती है।
इस पाठ को पढ़ते समय भाषा के उन शब्दों पर भी ध्यान दें जो भाव को विशेष रंग देते हैं — जैसे तुलना, विरोधाभास, प्रश्न और दोहराव। लेखक अथवा कवि जब किसी बात पर बल देना चाहता है, तो वह उसे दोहराता है, किसी परिचित वस्तु से तुलना करता है, या प्रश्न के रूप में प्रस्तुत करता है। इन युक्तियों को पहचान लेने से पाठ का भाव अधिक स्पष्ट होता है और उत्तर में भाषा-संबंधी प्रश्नों का सामना करना आसान हो जाता है।
एक उपयोगी अभ्यास यह है कि पाठ के किसी एक अनुच्छेद या पद्यांश को अपनी भाषा में, बिना मूल शब्दों की नकल किए, दो-तीन वाक्यों में लिखें। फिर मूल से मिलाकर देखें कि केंद्रीय भाव छूटा तो नहीं है। यह अभ्यास न केवल समझ को गहरा करता है, बल्कि परीक्षा में ‘अपने शब्दों में उत्तर दीजिए’ जैसे प्रश्नों के लिए सीधी तैयारी भी है।
परीक्षा में कैसे लिखें — उत्तर-लेखन की कला
‘मातृभूमि’ जैसे पाठों पर प्रश्न प्रायः तीन प्रकार के आते हैं — सीधा तथ्य या परिभाषा पूछने वाले, केंद्रीय भाव या कारण पूछने वाले, और अपने शब्दों में सार या मत पूछने वाले। तीनों के उत्तर की संरचना एक ही है: भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष। भूमिका में एक वाक्य में विषय का परिचय दें — पाठ किस बारे में है। मुख्य भाग में दो से चार बिंदु क्रम से लिखें — प्रत्येक बिंदु एक अलग तर्क, उदाहरण या परिणाम हो। निष्कर्ष में एक वाक्य में पाठ का संदेश या महत्त्व लिखें।
अंकों के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें। एक-दो अंक के प्रश्न में केवल परिभाषा और एक उदाहरण पर्याप्त है। तीन-चार अंक के प्रश्न में परिभाषा के साथ प्रसंग और एक-दो परिणाम जोड़ें। पाँच अंक के लंबे प्रश्न में भूमिका, तीन-चार बिंदु, एक तुलना या उदाहरण, और निष्कर्ष — सब कुछ होना चाहिए। उत्तर को अनुच्छेदों में बाँटें; एक ही लंबे अनुच्छेद में सब कुछ लिख देने से उत्तर भले ही सही हो, परंतु पढ़ने में कठिन लगता है।
उत्तर में पाठ के मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, परंतु मूल पाठ की पंक्तियों की नकल न करें। परीक्षक यह देखना चाहता है कि आपने समझा है — और समझ अपने शब्दों में ही दिखती है। उत्तर लिखने के बाद उसे एक बार पढ़कर देखें: क्या पहला वाक्य प्रश्न का सीधा उत्तर देता है? क्या बिंदु क्रम में हैं? क्या अंतिम वाक्य निष्कर्ष देता है? यदि तीनों उत्तर ‘हाँ’ हैं, तो उत्तर पूरा है।
- मातृभूमि केवल ज़मीन नहीं, पहचान भी है।
- वह भाषा, स्मृतियाँ और रिश्तों से बनी है।
- मातृभूमि से प्रेम का अर्थ ज़िम्मेदारी भी है।
- देशभक्ति की परीक्षा काम में होती है, नारों में नहीं।
- परीक्षा में 'माँ = मातृभूमि' का एकाकार और प्रेम = ज़िम्मेदारी — दोनों विचार अवश्य लिखें।

