Chapter 3: पृथ्वी की आंतरिक संरचना
पृथ्वी के भीतर क्या है, यह हम सीधे देख नहीं सकते — भूकंप की तरंगें ही उसकी परतों का एक्स-रे हैं।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
पृथ्वी की आंतरिक संरचना — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bhautik Bhugol ke Siddhant (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 3 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
पृथ्वी के अंदर हम सीधे नहीं जा सकते, इसलिए वैज्ञानिक भूकंप की तरंगों, ज्वालामुखी के पदार्थों और घनत्व के आंकड़ों से उसकी संरचना जानते हैं। भूकंप की P तरंगें ठोस-द्रव दोनों से गुज़रती हैं, S तरंगें सिर्फ ठोस से — यही जानकारी अंदर की परतों का राज़ खोलती है।
मुख्य परतें तीन हैं — भूपर्पटी (crust, सबसे पतली), मैंटल (mantle, सबसे मोटी) और क्रोड (core, लोहे-निकेल का)। भूपर्पटी महाद्वीपों के नीचे मोटी (लगभग 30 किमी) और महासागरों के नीचे पतली (लगभग 5 किमी) है।
मुख्य बिंदु
- स्रोत: भूकंपीय तरंगें, ज्वालामुखी उद्गार, उल्काएँ, घनत्व।
- P तरंग: तेज़, ठोस-द्रव दोनों में; S तरंग: सिर्फ ठोस में, छाया क्षेत्र बनाती है।
- मैंटल में संवहन धाराएँ प्लेटों की गति का कारण मानी जाती हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| भूपर्पटी | सबसे पतली; महाद्वीपीय ~30 किमी, महासागरीय ~5 किमी |
| मैंटल | लगभग 2,900 किमी तक; अर्ध-ठोस |
| क्रोड | लोहा-निकेल; बाहरी द्रव, आंतरिक ठोस |
| मोहो | भूपर्पटी और मैंटल की सीमा |
स्थलमंडल = भूपर्पटी + ऊपरी मैंटल का ठोस भाग। भूपर्पटी (सियाल) और मैंटल (सीमा) को मिलाकर स्थलमंडल नहीं बनता — ऊपरी मैंटल भी इसमें आता है।
भूकंपीय तरंगें प्रत्यक्ष साधन नहीं हैं — वे अप्रत्यक्ष साधन हैं। प्रत्यक्ष साधन हैं: ज्वालामुखी उद्गार से निकला पदार्थ, खनन और गहरी खुदाई (छेदन)।
P तरंगें = प्राथमिक, संपीडन-विरलन वाली, सभी माध्यमों में चलती हैं। S तरंगें = द्वितीयक, अनुप्रस्थ, केवल ठोस में — द्रव बाह्य क्रोड में रुक जाती हैं, इसीलिए छाया क्षेत्र बनता है।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): पृथ्वी की आंतरिक परतों का सामान्य चित्रण — भूपर्पटी, मैंटल और क्रोड। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: पृथ्वी की परतें बाहर से अंदर तक।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पृथ्वी की आंतरिक परतें और असांतत्य — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
पृथ्वी के भीतर की जानकारी दो तरह के साधनों से मिलती है। प्रत्यक्ष साधन: ज्वालामुखी उद्गार से निकलने वाला पदार्थ (जो भीतर की चट्टानों का नमूना देता है), खानों की खुदाई और गहरे छेदन से मिली चट्टानें। अप्रत्यक्ष साधन: भूकंपीय तरंगें, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकत्व और उल्कापिंडों का अध्ययन।
भूकंपीय तरंगें तीन प्रकार की हैं: P तरंगें (प्राथमिक) — ध्वनि तरंगों जैसी, चट्टानों में संपीडन व फैलाव लाती हैं, ठोस-द्रव-गैस तीनों में चलती हैं, सबसे तेज़। S तरंगें (द्वितीयक) — अनुप्रस्थ, केवल ठोस में चलती हैं, द्रव में नहीं। धरातलीय तरंगें — सबसे धीमी पर सबसे विनाशकारी, भूकंप से क्षति इन्हीं से होती है।
तरंगों के वेग में अचानक परिवर्तन से भीतर की परतों का पता चला: भूपर्पटी (औसत 30 किमी, महाद्वीपों में 70 किमी तक, महासागरों में 5 किमी), मैंटल (लगभग 2,900 किमी तक), बाह्य क्रोड (द्रव, लगभग 2,900–5,150 किमी) और आंतरिक क्रोड (ठोस, केंद्र तक 6,371 किमी)। मोहो असांतत्य भूपर्पटी व मैंटल को, और गुटेनबर्ग असांतत्य मैंटल व क्रोड को अलग करता है।
छाया क्षेत्र: भूकंप के केंद्र से 105° से 145° के बीच P तरंगें नहीं पहुँचतीं और 105° से आगे S तरंगें बिल्कुल नहीं पहुँचतीं — क्योंकि S तरंगें द्रव बाह्य क्रोड को पार नहीं कर पातीं। छाया क्षेत्र का अस्तित्व ही बताता है कि बाह्य क्रोड द्रव है।
ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार: शील्ड (धीमा प्रवाह, चौड़ा शंकु), मिश्र (विस्फोटक + प्रवाह), प्रवाह/दरारी (जैसे दक्कन ट्रैप — विशाल बेसाल्ट पठार), कुंड (कैल्डेरा)। दक्कन ट्रैप प्रवाह (flood basalt) उद्गार का परिणाम है।
अंतर्वेधी आकृतियाँ (मैग्मा भीतर ही जम जाए): बैथोलिथ (विशाल गुंबदनुमा ग्रेनाइट पिंड), लैकोलिथ (गुंबद, तल समतल, पाइप से जुड़ा — कर्नाटक पठार की ग्रेनाइट पहाड़ियाँ), लैपोलिथ (तश्तरीनुमा), फैकोलिथ (अपनति-अभिनति में लहरदार जमाव), सिल/शीट (क्षैतिज पतली परत), डाइक (दरार में दीवार जैसी खड़ी संरचना — पश्चिमी महाराष्ट्र में बहुतायत)।
- प्रत्यक्ष साधन: ज्वालामुखी पदार्थ, खनन, छेदन।
- P तरंगें: संपीडन-फैलाव, सभी माध्यम; S तरंगें: केवल ठोस।
- मोहो: भूपर्पटी–मैंटल सीमा; गुटेनबर्ग: मैंटल–क्रोड सीमा।
- छाया क्षेत्र: P के लिए 105°–145°; S के लिए 105° से आगे।
- दक्कन ट्रैप: प्रवाह (दरारी) उद्गार का परिणाम।
Key Terms — मुख्य शब्द
- भूपर्पटी: पृथ्वी की सबसे बाहरी पतली परत।
- मैंटल: भूपर्पटी और क्रोड के बीच की मोटी परत।
- क्रोड: पृथ्वी का केंद्रीय भाग, लोहा-निकेल प्रधान।
- P तरंग: प्राथमिक भूकंपीय तरंग, सबसे तेज़।
- S तरंग: द्वितीयक तरंग, सिर्फ ठोस माध्यम में।
- भूकंपीय तरंगें: भूकंप से उत्पन्न कंपन-तरंगें जो पृथ्वी के भीतर चलकर परतों की जानकारी देती हैं।
- छाया क्षेत्र: वह क्षेत्र जहाँ भूकंपीय तरंगें नहीं पहुँचतीं — द्रव बाह्य क्रोड का प्रमाण।
- मोहो असांतत्य: भूपर्पटी और मैंटल के बीच की सीमा (मोहरोविसिक द्वारा खोजी)।
- गुटेनबर्ग असांतत्य: मैंटल और क्रोड के बीच की सीमा (लगभग 2,900 किमी गहराई पर)।
- बैथोलिथ: गहराई में जमा मैग्मा का विशाल गुंबदनुमा ग्रेनाइट पिंड।
Remember — याद रखें
- S तरंग द्रव में नहीं जाती — इसलिए बाहरी क्रोड द्रव माना जाता है।
- महासागरीय भूपर्पटी पतली, महाद्वीपीय मोटी — यही क्रम याद रखें।
- मैंटल सबसे मोटी परत है, क्रोड सबसे भारी।
- भूकंप की छाया क्षेत्र (shadow zone) परीक्षा में पूछा जाता है।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: P और S तरंगों के गुण उलट देना। उत्तर में 'P = दोनों माध्यम, S = सिर्फ ठोस' स्पष्ट लिखें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- पृथ्वी की आंतरिक संरचना कैसे जानी जाती है?
संकेत: भूकंपीय तरंगों के बारे में सोचें। - P और S तरंग में क्या अंतर है?
संकेत: माध्यम के बारे में सोचें। - तीन मुख्य परतें कौन सी हैं?
संकेत: भूपर्पटी, मैंटल, क्रोड के बारे में सोचें। - महासागरीय भूपर्पटी कैसी है?
संकेत: पतली होने के बारे में सोचें। - बाहरी क्रोड द्रव क्यों माना जाता है?
संकेत: S तरंग के रुकने के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- आंतरिक संरचना का मुख्य स्रोत क्या है?
भूकंपीय तरंगों की गति और व्यवहार; साथ में ज्वालामुखी पदार्थ, घनत्व और उल्काओं के आंकड़े। - P और S तरंग में अंतर क्या है?
P तेज़ है और ठोस-द्रव दोनों से गुज़रती है; S धीमी है और सिर्फ ठोस से गुज़रती है। - पृथ्वी की तीन परतें कौन सी हैं?
भूपर्पटी (सबसे पतली), मैंटल (सबसे मोटी) और क्रोड (लोहा-निकेल)। - महाद्वीपीय और महासागरीय भूपर्पटी में क्या अंतर है?
महाद्वीपीय लगभग 30 किमी मोटी, महासागरीय लगभग 5 किमी पतली। - बाहरी क्रोड द्रव क्यों माना जाता है?
क्योंकि S तरंगें वहाँ से आगे नहीं जातीं — द्रव में S तरंग नहीं चलती।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): भूगर्भ की जानकारी का कौन-सा प्रत्यक्ष साधन है?
ज्वालामुखी — विकल्प (ग)। ज्वालामुखी से निकला पदार्थ भीतर की चट्टानों का सीधा नमूना है; भूकंपीय तरंगें, गुरुत्वाकर्षण बल और चुंबकत्व अप्रत्यक्ष साधन हैं। - बहुविकल्पीय (ii): दक्कन ट्रैप की शैल समूह किस प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार का परिणाम है?
प्रवाह — विकल्प (ग)। दरारों से तरल बेसाल्ट लावा के विशाल प्रवाह से दक्कन का पठार बना; शील्ड, मिश्र या कुंड उद्गार से नहीं। - बहुविकल्पीय (iii): स्थलमंडल को क्या वर्णित करता है?
भूपटल व ऊपरी मैंटल — विकल्प (ग)। स्थलमंडल में भूपर्पटी के साथ मैंटल का ऊपरी ठोस भाग भी आता है; केवल भूपटल, या मैंटल व क्रोड नहीं। - बहुविकल्पीय (iv): किन भूकंप तरंगों से चट्टानों में संकुचन व फैलाव आता है?
'P' तरंगें — विकल्प (ख)। P तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं — चट्टान के कण तरंग की दिशा में आगे-पीछे हिलते हैं, जिससे संपीडन व फैलाव होता है। - लघु उत्तरीय (क): भूगर्भीय तरंगें क्या हैं?
भूकंप के समय चट्टानों में उत्पन्न कंपन जो तरंगों के रूप में भीतर और धरातल पर फैलते हैं। ये तीन प्रकार की होती हैं — P, S और धरातलीय — और इनके वेग व व्यवहार से भीतर की परतों का पता चलता है। - लघु उत्तरीय (ख): भूगर्भ की जानकारी के प्रत्यक्ष साधनों के नाम बताइए।
ज्वालामुखी उद्गार से निकला पदार्थ, खानों की खुदाई से मिली चट्टानें, और वैज्ञानिक छेदन (drilling) से प्राप्त नमूने — ये तीनों भीतर की सामग्री को सीधे दिखाते हैं। - लघु उत्तरीय (ग): भूकंपीय तरंगें छाया क्षेत्र कैसे बनाती हैं?
S तरंगें द्रव को पार नहीं कर सकतीं, इसलिए भूकंप केंद्र से 105° से आगे वे नहीं पहुँचतीं। P तरंगें द्रव क्रोड में मुड़ जाती हैं, इसलिए 105°–145° के बीच वे भी नहीं पहुँचतीं। यही क्षेत्र छाया क्षेत्र कहलाता है — और यही बाह्य क्रोड के द्रव होने का प्रमाण है। - लघु उत्तरीय (घ): भूकंपीय गतिविधियों के अतिरिक्त अप्रत्यक्ष साधनों का संक्षेप में वर्णन करें।
गुरुत्वाकर्षण: गुरुत्व मान में अंतर से भीतर के घनत्व का पता चलता है। चुंबकत्व: चुंबकीय क्षेत्र से क्रोड की धात्विक प्रकृति का अनुमान। उल्काएँ: लोहे-निकेल की उल्काएँ क्रोड की रचना से मिलती हैं। - दीर्घ उत्तरीय (क): भूकंपीय तरंगों के संचरण का उन चट्टानों पर क्या प्रभाव पड़ता है जिनसे होकर वे गुजरती हैं?
P तरंगें चट्टान में संपीडन व फैलाव (आगे-पीछे कंपन) पैदा करती हैं और ठोस, द्रव, गैस — तीनों माध्यमों में चलती हैं, इसलिए सबसे तेज़ पहुँचती हैं। S तरंगें चट्टान को तरंग-दिशा के समकोण पर हिलाती हैं (अनुप्रस्थ कंपन) और केवल ठोस में चलती हैं — द्रव में रुक जाती हैं। धरातलीय तरंगें धरातल पर लहर-जैसा कंपन पैदा करती हैं और सबसे अधिक विनाश करती हैं। घनत्व बदलने पर तरंगों का वेग बदलता है और वे मुड़ती/परावर्तित होती हैं — इसी से परतों की सीमाएँ (मोहो, गुटेनबर्ग) पहचानी गईं। - दीर्घ उत्तरीय (ख): अंतर्वेधी आकृतियों से आप क्या समझते हैं? विभिन्न आकृतियों का वर्णन करें।
जब मैग्मा धरातल पर न आकर भूपर्पटी के भीतर ही ठंडा होकर जम जाए, तो बनी आकृतियाँ अंतर्वेधी कहलाती हैं। बैथोलिथ: विशाल गुंबदनुमा ग्रेनाइट पिंड (कई किमी गहरा)। लैकोलिथ: गुंबदनुमा, तल समतल, नीचे पाइप से जुड़ा (कर्नाटक पठार)। लैपोलिथ: तश्तरीनुमा जमाव। फैकोलिथ: मोड़ों की अपनति-अभिनति में लहरदार जमाव। सिल/शीट: क्षैतिज पतली परत (मोटी = सिल, पतली = शीट)। डाइक: दरार में खड़ी दीवार-जैसी संरचना (पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्कन ट्रैप की वाहक)।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष साधनों में अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
प्रत्यक्ष: सामग्री सीधे मिलती है — ज्वालामुखी पदार्थ, खनन, छेदन। अप्रत्यक्ष: गुणों से अनुमान लगता है — भूकंपीय तरंगें, गुरुत्व, चुंबकत्व, उल्काएँ। - P और S तरंगों में तीन अंतर लिखिए।
P: प्राथमिक, अनुदैर्ध्य (संपीडन-फैलाव), सभी माध्यमों में। S: द्वितीयक, अनुप्रस्थ, केवल ठोस में; द्रव में रुक जाती है। - छाया क्षेत्र क्या है? यह बाह्य क्रोड के बारे में क्या बताता है?
वह क्षेत्र जहाँ भूकंपीय तरंगें नहीं पहुँचतीं (P: 105°–145°, S: 105° से आगे)। इससे सिद्ध होता है कि बाह्य क्रोड द्रव है, क्योंकि S तरंगें द्रव पार नहीं कर सकतीं। - मोहो और गुटेनबर्ग असांतत्य किन परतों के बीच हैं?
मोहो: भूपर्पटी–मैंटल। गुटेनबर्ग: मैंटल–क्रोड (लगभग 2,900 किमी गहराई)। - सिल और डाइक में अंतर लिखिए।
सिल: क्षैतिज परत में जमा मैग्मा (समतल, पतली-मोटी परत)। डाइक: दरार में खड़ी दीवार-जैसी जमाव, धरातल के लगभग समकोण।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।
भीतर की जानकारी: प्रत्यक्ष (ज्वालामुखी, खनन, छेदन) + अप्रत्यक्ष (तरंगें, गुरुत्व, चुंबकत्व)। P = संपीडन, सभी माध्यम; S = केवल ठोस। छाया क्षेत्र = द्रव बाह्य क्रोड का प्रमाण। मोहो (भूपर्पटी–मैंटल), गुटेनबर्ग (मैंटल–क्रोड)। दक्कन ट्रैप = प्रवाह उद्गार। अंतर्वेधी: बैथोलिथ, लैकोलिथ, लैपोलिथ, फैकोलिथ, सिल, डाइक।

