Chapter 6: प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ
संकट प्राकृतिक है, पर आपदा तभी बनता है जब समाज तैयार न हो — तैयारी ही बचाव है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 11 • Geography • Book: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Bharat: Bhautik Paryavaran (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11) | अध्याय 6 | माध्यम: हिंदी
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — अध्याय का विषय-स्तरीय सार, किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है।
अध्याय का सार
संकट (hazard) वह घटना है जो नुकसान पहुँचा सकती है; आपदा (disaster) तब बनती है जब वह घटना जान-माल का बड़ा नुकसान करती है। भारत में मुख्य आपदाएँ हैं — भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन और सुनामी। हिमालयी क्षेत्र भूकंप-प्रवण है, तटीय क्षेत्र चक्रवात-प्रवण है।
आपदा प्रबंधन के तीन चरण हैं — पहले से तैयारी (मानचित्र, चेतावनी, भवन-नियम), आपदा के दौरान बचाव-राहत, और बाद में पुनर्वास। भूकंप से बचने के लिए भवन-निर्माण नियम (जैसे भूकंप-रोधी डिज़ाइन) और बाढ़ के लिए तटबंध व पूर्व चेतावनी महत्त्वपूर्ण हैं।
मुख्य बिंदु
- भूकंप: हिमालयी पट्टी और कच्छ — प्लेट सीमाओं से जुड़ा।
- बाढ़: गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान में मानसून से।
- चक्रवात: बंगाल की खाड़ी तट पर अधिक।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| भूकंप | हिमालय, कच्छ |
| बाढ़ | उत्तरी-पूर्वी मैदान |
| चक्रवात | पूर्वी तट |
| सूखा | कम वर्षा वाले क्षेत्र |
संकट (hazard) और आपदा (disaster) अलग हैं: संकट वह घटना है जो नुकसान पहुँचा सकती है; आपदा तब बनती है जब वह घटना जान-माल का बड़ा नुकसान कर दे। हर संकट आपदा नहीं बनता।
माजौली द्वीप ब्रह्मपुत्र में है, गंगा में नहीं। और मालपा भूस्खलन पिथौरागढ़ ज़िले (उत्तराखण्ड) में हुआ था — ज़िले का नाम सही लिखें।
आपदा प्रबंधन की तीन अवस्थाएँ क्रम से याद रखें: आपदा से पहले (तैयारी), आपदा के समय (बचाव-राहत), आपदा के पश्चात (पुनर्वास)। आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 भी पूछा जाता है।

चित्र 1 (सामान्य चित्रण, किताब का चित्र नहीं): आपदा प्रबंधन का सामान्य चित्रण — सुरक्षित भवन, चेतावनी और बचाव। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र 2 (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): लेबल वाला प्रवाह चित्र: आपदा प्रबंधन के चरण।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): चार प्रमुख संकट और आपदा प्रबंधन की तीन अवस्थाएँ — नया चित्र, लेबल चित्र पर ही छपे हैं।
विस्तृत नोट्स — अध्याय का पूरा सार
संकट वह प्राकृतिक या मानवकृत घटना है जो जान-माल को नुकसान पहुँचा सकती है — भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन, सुनामी। जब किसी संकट से बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि होती है और प्रभावित समुदाय की सहन-क्षमता से बाहर हो जाती है, तब वह आपदा कहलाता है।
भारत भूकंप-प्रवण देश है, विशेषकर हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पूर्व — क्योंकि यहाँ भारतीय प्लेट यूरेशियाई प्लेट से टकरा रही है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने से और प्रभाव मरकेली पैमाने से मापे जाते हैं। भूकंप से बचाव: भूकंप-रोधी भवन, खुले स्थान पर जाना, भारी वस्तुओं से दूर रहना।
बाढ़ के कारण: भारी मानसूनी वर्षा, नदियों में गाद, बाँधों का टूटना, नदी-तल का ऊँचा होना और बाढ़ के मैदानों में बसाव। असम, पश्चिम बंगाल और बिहार सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित राज्यों में हैं; राष्ट्रीय बाढ़ आयोग ने देश में लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर भूमि को बाढ़-प्रवण माना है।
सूखा केवल वर्षा की कमी नहीं है — यह मौसम-विज्ञानी, जलीय, कृषि और पारिस्थितिक, चार तरह का होता है। पश्चिमी और मध्य भारत (राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के भाग) में सूखे अधिक पड़ते हैं। सुभेद्यता (vulnerability) का अर्थ है — किसी समाज की आपदा से प्रभावित होने की संभावना और उससे निपटने की क्षमता की कमी।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए गर्म समुद्री सतह (27°C से अधिक), आर्द्रता, कम वायुदाब और कोरिऑलिस बल आवश्यक हैं। पूर्वी तट (ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) पश्चिमी तट से अधिक चक्रवात-प्रवण है।
आपदा प्रबंधन की तीन अवस्थाएँ हैं: (i) आपदा से पहले — मानचित्र, सूचना, योजना, तैयारी; (ii) आपदा के समय — बचाव, राहत, आश्रय, भोजन-दवाई; (iii) आपदा के पश्चात — पुनर्वास और क्षमता-निर्माण। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
- संकट ≠ आपदा: आपदा = संकट + बड़ा नुकसान + सहन-क्षमता से बाहर।
- बाढ़-प्रवण भूमि: लगभग 4 करोड़ हेक्टेयर।
- चक्रवात के लिए समुद्री सतह का तापमान: 27°C से अधिक।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम: 2005।
- मालपा भूस्खलन: पिथौरागढ़ (उत्तराखण्ड), 1998।
Key Terms — मुख्य शब्द
- संकट: नुकसान पहुँचा सकने वाली घटना।
- आपदा: बड़ा जान-माल नुकसान करने वाली घटना।
- भूकंप: पृथ्वी की अचानक कंपन।
- सुनामी: समुद्र के नीचे भूकंप से उठी विशाल लहर।
- आपदा प्रबंधन: तैयारी, बचाव और पुनर्वास की व्यवस्था।
- सुभेद्यता: किसी समाज की आपदा से प्रभावित होने की संभावना और उससे निपटने की क्षमता की कमी।
- भूस्खलन: ढाल पर चट्टानों और मलबे का गुरुत्वाकर्षण से तेज़ी से नीचे खिसकना।
- सुनामी: समुद्र के नीचे भूकंप से उठने वाली विशाल लहरें।
- चक्रवात: निम्न दाब के चारों ओर तेज़ी से घूमने वाली पवन-प्रणाली।
- पुनर्वास: आपदा के बाद प्रभावित लोगों को फिर से बसाना और सामान्य जीवन बहाल करना।
Remember — याद रखें
- संकट और आपदा का फर्क (संभावना बनाम वास्तविक नुकसान) लिखें।
- हर आपदा के साथ भारत का प्रभावित क्षेत्र लिखें।
- प्रबंधन के तीन चरण — पहले, दौरान, बाद — क्रम से लिखें।
- भूकंप-रोधी भवन का उदाहरण दें।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
सामान्य गलती: संकट और आपदा को एक मान लेना। उत्तर में परिभाषा के फर्क से शुरू करें।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- संकट और आपदा में क्या अंतर है?
संकेत: संभावना बनाम नुकसान के बारे में सोचें। - भारत में भूकंप-प्रवण क्षेत्र कौन से हैं?
संकेत: हिमालय के बारे में सोचें। - बाढ़ कहाँ अधिक आती है?
संकेत: गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान के बारे में सोचें। - चक्रवात किस तट पर अधिक आते हैं?
संकेत: बंगाल की खाड़ी के बारे में सोचें। - आपदा प्रबंधन के चरण क्या हैं?
संकेत: तैयारी, बचाव, पुनर्वास के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- संकट और आपदा में क्या अंतर है?
संकट वह घटना है जो नुकसान पहुँचा सकती है; जब वह वास्तव में बड़ा जान-माल नुकसान करती है, तब वह आपदा कहलाती है। - भारत में भूकंप कहाँ अधिक आते हैं?
हिमालयी पट्टी और कच्छ में, क्योंकि ये प्लेट सीमाओं के पास हैं। - बाढ़ क्यों आती है?
मानसून की भारी वर्षा से नदियाँ उफनती हैं, खासकर गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान में। - चक्रवात किस तट को अधिक प्रभावित करते हैं?
बंगाल की खाड़ी के तट को, क्योंकि वहाँ की खाड़ी की आकृति और गर्म जल चक्रवात को बढ़ावा देते हैं। - आपदा प्रबंधन कैसे होता है?
पहले से चेतावनी और तैयारी, आपदा के दौरान बचाव-राहत, और बाद में पुनर्वास — तीन चरणों में।
पुस्तक के अभ्यास — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (अभ्यास) के प्रश्नों पर आधारित हैं — प्रश्नों को EG के शब्दों में ढाला गया है, उत्तर मूल रूप से लिखे गए हैं।
- बहुविकल्पीय (i): भारत के किस राज्य में बाढ़ अधिक आती है?
बिहार — विकल्प (क)। उत्तरी बिहार (कोसी, गंडक, बागमती क्षेत्र) प्रतिवर्ष भीषण बाढ़ से प्रभावित होता है; किताब में असम, पश्चिम बंगाल और बिहार को सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित राज्यों में गिना गया है, और अभ्यास का एकल उत्तर बिहार है (कोसी-क्षेत्र की गंभीरता के आधार पर)। - बहुविकल्पीय (ii): उत्तरांचल के किस ज़िले में मालपा भूस्खलन आपदा हुई थी?
पिथौरागढ़ — विकल्प (घ)। 1998 का मालपा भूस्खलन कैलाश-मानसरोवर मार्ग पर हुआ था। - बहुविकल्पीय (iii): किस राज्य में सर्दी के महीनों में बाढ़ आती है?
तमिलनाडु — विकल्प (घ)। उत्तर-पूर्वी मानसून से नवंबर–जनवरी में तमिलनाडु तट पर वर्षा और बाढ़ आती है। - बहुविकल्पीय (iv): माजौली नदीय द्वीप किस नदी में स्थित है?
ब्रह्मपुत्र में — विकल्प (ख)। माजौली विश्व के सबसे बड़े नदीय द्वीपों में गिना जाता है। - बहुविकल्पीय (v): बर्फ़ानी तूफ़ान किस तरह की प्राकृतिक आपदा है?
वायुमंडलीय — विकल्प (क)। यह वायुमंडलीय परिस्थितियों (बर्फ़बारी + तेज़ पवन) से बनता है। - लघु उत्तरीय (i): संकट किस दशा में आपदा बन जाता है?
जब किसी संकट से बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि होती है और वह प्रभावित समुदाय की सहन-क्षमता से बाहर हो जाता है — तब संकट आपदा बन जाता है। यदि नुकसान छोटा हो और समाज उसे सहन कर ले, तो वह आपदा नहीं कहलाता। - लघु उत्तरीय (ii): हिमालय और उत्तर-पूर्वी भारत में अधिक भूकंप क्यों आते हैं?
क्योंकि यहाँ भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसककर यूरेशियाई प्लेट से टकरा रही है। इस टकराव से चट्टानों में तनाव बनता है, जो अचानक छूटकर भूकंप लाता है। हिमालय युवा और सक्रिय पर्वत है, इसलिए यहाँ भूकंप बार-बार आते हैं। - लघु उत्तरीय (iii): उष्णकटिबंधीय तूफ़ान की उत्पत्ति के लिए कौन-सी परिस्थितियाँ अनुकूल हैं?
गर्म समुद्री सतह (27°C से अधिक तापमान), पर्याप्त आर्द्रता, निम्न वायुदाब का केंद्र, और कोरिऑलिस बल (जो पवनों को घुमाता है)। भूमध्य रेखा के बिल्कुल पास कोरिऑलिस बल नगण्य होता है, इसलिए वहाँ चक्रवात नहीं बनते। - लघु उत्तरीय (iv): पूर्वी भारत की बाढ़ पश्चिमी भारत की बाढ़ से कैसे अलग होती है?
पूर्वी भारत (बिहार, बंगाल, असम) की बाढ़ें बड़ी नदियों के विशाल मैदानों में लंबे समय तक फैलती हैं और अधिक विनाशकारी होती हैं। पश्चिमी भारत (गुजरात, राजस्थान) की बाढ़ें अक्सर आकस्मिक (फ़्लैश फ़्लड) होती हैं — कम समय में तेज़ वर्षा से आती हैं और जल्दी उतर भी जाती हैं। - लघु उत्तरीय (v): पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज़्यादा क्यों पड़ते हैं?
क्योंकि यहाँ वर्षा कम और अनियमित है — राजस्थान में मानसून की अरावली के समानांतर दिशा, मध्य भारत में वर्षा की परिवर्तनीयता, और भूजल पर अत्यधिक निर्भरता। सिंचाई की कमी वाले क्षेत्रों में एक भी मानसून की विफलता सूखे में बदल जाती है। - दीर्घ उत्तरीय (i): भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कीजिए और इस आपदा के निवारण के उपाय बताइए।
प्रभावित क्षेत्र: हिमालयी क्षेत्र (उत्तराखण्ड, हिमाचल, उत्तर-पूर्व), पश्चिमी घाट और नीलगिरि। कारण: खड़ी ढाल, कमज़ोर चट्टानें, भारी वर्षा, भूकंप, सड़क-निर्माण और वनों की कटाई। निवारण: ढालों पर वृक्षारोपण, जल-निकासी की व्यवस्था, दीवारों (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण, भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों का मानचित्रण और वहाँ निर्माण पर नियंत्रण, तथा पूर्व-चेतावनी प्रणाली। - दीर्घ उत्तरीय (ii): सुभेद्यता क्या है? सूखे के आधार पर भारत को आपदा-भेद्यता क्षेत्रों में बाँटिए और निवारण के उपाय बताइए।
सुभेद्यता का अर्थ है — किसी समाज की आपदा से प्रभावित होने की संभावना और उससे निपटने की क्षमता की कमी। सूखे के आधार पर: अत्यधिक भेद्य — राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के भाग; मध्यम भेद्य — दक्षिणी पठार के भाग; कम भेद्य — अधिक वर्षा वाले पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र। निवारण: जल-संचय (तालाब, चेक डैम), सूखा-सहिष्णु फसलें, फसल बीमा, भूजल प्रबंधन और रोज़गार-गारंटी जैसे सामाजिक सुरक्षा उपाय। - दीर्घ उत्तरीय (iii): किस स्थिति में विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है?
जब विकास कार्य पर्यावरण की क्षमता को नज़रअंदाज़ करके किया जाए — जैसे भूकंप-प्रवण क्षेत्र में बिना भूकंप-रोधी तकनीक के बहुमंज़िला भवन, नदी के बाढ़-मैदान में बस्तियाँ, पहाड़ों पर बिना योजना के सड़कें और खनन, तथा वनों की अंधाधुंध कटाई। ऐसे कार्य संकट की तीव्रता और समाज की सुभेद्यता, दोनों बढ़ा देते हैं, और सामान्य घटना भी आपदा बन जाती है।
बोर्ड पैटर्न — Board-pattern Q&A
बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित अभ्यास प्रश्न (पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं)।
- संकट और आपदा में अंतर दो उदाहरणों सहित लिखिए।
संकट संभावित हानिकारक घटना है (जैसे समुद्र में चक्रवात); आपदा तब बनती है जब वह तट पर बसे लोगों को भारी नुकसान पहुँचाए। निर्जन द्वीप पर भूकंप संकट है, शहर में वही भूकंप आपदा है। - भारत के भूकंप-प्रवण क्षेत्रों के नाम और कारण लिखिए।
हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व, गुजरात (कच्छ) — कारण: प्लेटों की टक्कर और भ्रंश रेखाएँ। हिमालय में भारतीय प्लेट का यूरेशियाई प्लेट से टकराव निरंतर भूकंप पैदा करता है। - बाढ़ के तीन कारण और दो नियंत्रण उपाय लिखिए।
कारण: भारी मानसूनी वर्षा, नदियों में गाद, बाढ़-मैदान में बसाव। उपाय: तटबंध और बाँध, पूर्व-चेतावनी, वनीकरण, बाढ़-मैदान में निर्माण पर नियंत्रण। - सूखे के चार प्रकारों के नाम लिखिए।
मौसम-विज्ञानी सूखा (वर्षा की कमी), जलीय सूखा (जलाशयों में कमी), कृषि सूखा (फसल के लिए नमी की कमी), पारिस्थितिक सूखा (पारिस्थितिकी पर प्रभाव)। - आपदा प्रबंधन की तीन अवस्थाएँ क्रम सहित लिखिए।
आपदा से पहले (तैयारी: मानचित्र, सूचना, योजना), आपदा के समय (बचाव-राहत: आश्रय, भोजन, दवाई), आपदा के पश्चात (पुनर्वास और क्षमता-निर्माण)।
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संकट संभावित घटना है, आपदा बड़ा नुकसान है। भारत में भूकंप (हिमालय-उत्तर-पूर्व), बाढ़ (असम-बंगाल-बिहार), सूखा (पश्चिमी-मध्य भारत), चक्रवात (पूर्वी तट) और भूस्खलन (हिमालय-पश्चिमी घाट) प्रमुख हैं। बचाव का मंत्र: तैयारी — आपदा से पहले, बचाव-राहत आपदा के समय, पुनर्वास आपदा के बाद; आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005।

