Chapter 9: हाइड्रोकार्बन
ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन — बनाने की विधियाँ, गुण, अभिक्रियाएँ और बेंज़ीन की विशेष दुनिया।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Rasayan Vigyan Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
हाइड्रोकार्बन — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Rasayan Vigyan Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Chemistry) | Chapter 9 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
ऐल्केन
ऐल्केन केवल एकल आबंध वाले संतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं, सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂। मेथेन सबसे सरल ऐल्केन है।
ऐल्केन की मुख्य अभिक्रिया मुक्त मूलक प्रतिस्थापन है — सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करती है। ऐल्केन दहन पर CO₂ और पानी देते हैं।
ऐल्कीन और ऐल्काइन
ऐल्कीन में एक द्वि आबंध होता है (CₙH₂ₙ) और ऐल्काइन में एक त्रि आबंध होता है (CₙH₂ₙ₋₂)।
द्वि और त्रि आबंध वाली जगह पर योगात्मक अभिक्रिया होती है — जैसे ब्रोमीन जल का रंग उड़ना असंतृप्तता की जाँच है। ऐल्कीन का बहुलकन पॉलिथीन बनाता है।
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन
बेंज़ीन छह कार्बन का वलय है जिसमें तीन द्वि आबंध अनुनाद से बँटे होते हैं। बेंज़ीन की मुख्य अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन है, जैसे नाइट्रीकरण और हैलोजनीकरण।
ऐरोमैटिकता के लिए वलय समतलीय और (4n+2) π इलेक्ट्रॉन होने चाहिए — इसे हकल नियम कहते हैं।
ऐल्केन — बनाने की विधियाँ और गुण
ऐल्केन संतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं (केवल एकल आबंध, सामान्य सूत्र CnH2n+2)। बनाने की विधियाँ: (1) वुर्ट्ज़ अभिक्रिया — शुष्क ईथर में ऐल्किल हैलाइड + सोडियम (2CH3Cl + 2Na → C2H6 + 2NaCl); (2) विकार्बोक्सिलीकरण — सोडालाइम (NaOH + CaO) के साथ कार्बोक्सिलेट गरम करने पर (CH3COONa → CH4); (3) अपचयन — ऐल्किल हैलाइड का Zn/HCl या LiAlH4 से अपचयन; (4) हाइड्रोजनीकरण — ऐल्कीन/ऐल्काइन + H2/Ni। भौतिक गुण: C1–C4 गैस, C5–C17 द्रव, C18 से ऊपर ठोस; क्वथनांक शृंखला लंबी होने पर बढ़ता है, शाखन बढ़ने पर घटता है (पृष्ठीय क्षेत्रफल घटने से)। रासायनिक गुण: मुक्त-मूलक प्रतिस्थापन — सूर्य के प्रकाश में Cl2 के साथ (CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl, आगे चलकर CH2Cl2, CHCl3, CCl4 तक); दहन (पूर्ण दहन → CO2 + H2O; अपूर्ण → CO/कार्बन); ताप-अपघटन (cracking) — उच्च ताप पर बड़ी शृंखला टूटकर छोटी ऐल्कीन/ऐल्केन देती है। संरूपण: एथेन में सांतरित (staggered) संरूपण ग्रसित (eclipsed) से अधिक स्थायी है (मरोड़ी विकृति कम)।
ऐल्कीन और ऐल्काइन
ऐल्कीन (CnH2n) में एक द्वि आबंध होता है; ऐल्काइन (CnH2n−2) में एक त्रि आबंध। बनाने की विधियाँ: ऐल्किल हैलाइड का ऐल्कोहॉली KOH से विहाइड्रोहैलोजनीकरण (Saytzeff नियम — हाइड्रोजन उस कार्बन से निकलता है जिस पर हाइड्रोजन कम हों, अर्थात अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद); डाइहैलाइड से Zn द्वारा विहैलोजनीकरण; ऐल्काइन का आंशिक हाइड्रोजनीकरण (Lindlar उत्प्रेरक से cis-ऐल्कीन)। गुण: योगात्मक अभिक्रियाएँ — H2/Ni, X2 (ब्रोमीन जल का रंग उड़ना असंतृप्तता की जाँच है), HX (मार्कोनीकॉफ़ नियम — H उस कार्बन पर जुड़ता है जिस पर H अधिक हों, अर्थात अधिक स्थायी कार्बधनायन से; परऑक्साइड प्रभाव/खराश प्रभाव में HBr विपरीत क्रम में जुड़ता है — प्रति-मार्कोनीकॉफ़), H2O/H+ (ऐल्कोहॉल), ओज़ोनीकरण (द्वि आबंध टूटकर कार्बोनिल यौगिक — ऐल्कीन की संरचना पहचानने की विधि), बहुलकन (एथीन → पॉलिथीन)। ऐल्काइन के सिरे वाले H अम्लीय होते हैं (HC≡CH + NaNH2 → HC≡CNa + NH3; टॉलेन अभिकर्मक से AgC≡CAg का सफेद अवक्षेप)।
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और बेंज़ीन
बेंज़ीन (C6H6) छह कार्बन का समतलीय वलय है जिसमें तीन द्वि आबंध अनुनाद से फैले होते हैं — इसकी अनुनाद ऊर्जा लगभग 150 kJ/mol है, इसलिए यह योगात्मक अभिक्रिया के बजाय प्रतिस्थापन पसंद करता है। ऐरोमैटिकता की शर्त (हकल नियम): वलय समतलीय हो, संयुग्मित π तंत्र हो और (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन हों (n = 0, 1, 2… — बेंज़ीन में 6 π इलेक्ट्रॉन, n = 1)। इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन: नाइट्रीकरण (सान्द्र HNO3 + सान्द्र H2SO4 → नाइट्रोबेंज़ीन), हैलोजनीकरण (Cl2/FeCl3 → क्लोरोबेंज़ीन), सल्फोनीकरण (सान्द्र H2SO4 → बेंज़ीन सल्फोनिक अम्ल), फ्रीडल-क्राफ्ट्स ऐल्किलीकरण/ऐसिलीकरण (RCl/RCOCl + निर्जल AlCl3)। निर्देशक प्रभाव: −OH, −NH2, −CH3 ऑर्थो-पैरा निर्देशक और सक्रियक; −NO2, −COOH, −CHO मेटा निर्देशक और निष्क्रियक।
पर्यावरणीय नोट — कैंसरजनीयता
बहुचक्रीय ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (जैसे बेंज़ोपाइरीन — तंबाकू के धुएँ, कोयले के भंजन उत्पादों में) कैंसरजनीय होते हैं। इसलिए हाइड्रोकार्बनों के अपूर्ण दहन और धुएँ से बचना स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है — यह बिंदु बोर्ड की लघु-उत्तरीय प्रश्नों में पूछा जाता है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| हाइड्रोकार्बन | सामान्य सूत्र |
|---|---|
| ऐल्केन | CₙH₂ₙ₊₂ |
| ऐल्कीन | CₙH₂ₙ |
| ऐल्काइन | CₙH₂ₙ₋₂ |
ओज़ोनीकरण के उत्पादों को देखकर ऐल्कीन की संरचना उल्टी निकाली जाती है: उत्पादों के कार्बोनिल कार्बनों को द्वि आबंध से जोड़ दो — मूल ऐल्कीन मिल जाएगी।
परऑक्साइड प्रभाव केवल HBr पर लागू होता है — HCl और HI पर नहीं। HCl का आबंध मज़बूत है और HI में मुक्त-मूलक श्रृंखला आगे नहीं बढ़ती, इसलिए ये सामान्य मार्कोनीकॉफ़ नियम ही मानते हैं।
Saytzeff बनाम मार्कोनीकॉफ़ को एक साथ याद रखो: विलोपन में H कम-H वाले कार्बन से निकलता है (अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन), योग में H अधिक-H वाले कार्बन पर जुड़ता है (अधिक स्थायी कार्बधनायन)।

चित्र 1: चित्र 1 में हाइड्रोकार्बन के चार परिवार क्रम से दिखाए गए हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): हाइड्रोकार्बन परिवार: ऐल्केन CnH2n+2 (एकल आबंध → प्रतिस्थापन), ऐल्कीन CnH2n और ऐल्काइन CnH2n−2 (बहु आबंध → योगात्मक अभिक्रिया), ऐरोमैटिक — बेंज़ीन C6H6 (हकल नियम: समतलीय वलय + (4n+2) π इलेक्ट्रॉन)।
मुख्य शब्द / Key Terms
- ऐल्केन: केवल एकल आबंध वाला संतृप्त हाइड्रोकार्बन।
- ऐल्कीन: एक द्वि आबंध वाला असंतृप्त हाइड्रोकार्बन।
- ऐल्काइन: एक त्रि आबंध वाला असंतृप्त हाइड्रोकार्बन।
- ऐरोमैटिक: विशेष स्थिरता वाली वलय संरचना।
- हकल नियम: (4n+2) π इलेक्ट्रॉन का नियम।
- शृंखलन: कार्बन परमाणुओं की आपस में लंबी शृंखलाएँ बनाने की क्षमता।
- संरूपण: एकल आबंध के चारों ओर घूर्णन से बने त्रिविम रूप; सांतरित सबसे स्थायी।
- मार्कोनीकॉफ़ नियम: HX के योग में H उस कार्बन पर जुड़ता है जिस पर H अधिक हों।
- परऑक्साइड प्रभाव: परऑक्साइड की उपस्थिति में HBr का प्रति-मार्कोनीकॉफ़ योग (केवल HBr पर लागू)।
- निर्देशक प्रभाव: वलय पर पहले से लगे समूह का नए प्रतिस्थापी की स्थिति (o/p या m) तय करना।
याद रखें
- सामान्य सूत्र से वर्ग की पहचान होती है।
- असंतृप्तता की जाँच ब्रोमीन जल से होती है।
- ऐल्केन प्रतिस्थापन देते हैं, ऐल्कीन योगात्मक।
- बेंज़ीन प्रतिस्थापन पसंद करता है, योगात्मक नहीं।
- दहन सभी हाइड्रोकार्बन की सामान्य अभिक्रिया है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: बेंज़ीन को तीन अलग द्वि आबंधों वाला सामान्य ऐल्कीन समझ लेना। बेंज़ीन में इलेक्ट्रॉन अनुनाद से बँटे होते हैं, इसलिए वह योगात्मक अभिक्रिया नहीं देता।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- ऐल्केन का सामान्य सूत्र क्या है? संकेत: CₙH₂ₙ₊₂।
- ऐल्कीन और ऐल्काइन में क्या अंतर है? संकेत: ऐल्कीन में द्वि, ऐल्काइन में त्रि आबंध होता है।
- ब्रोमीन जल की जाँच क्या बताती है? संकेत: असंतृप्तता की उपस्थिति।
- हकल नियम क्या है? संकेत: वलय में (4n+2) π इलेक्ट्रॉन होने चाहिए।
- बेंज़ीन की मुख्य अभिक्रिया कौनसी है? संकेत: इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन।
मुख्य प्रश्नोत्तर — अवधारणा की जाँच
ये Educational Galaxy के अपने प्रश्न हैं, अध्याय की मुख्य अवधारणाओं पर।
- प्रश्न: प्रोपीन पर HBr के योग का मुख्य उत्पाद क्या है? परऑक्साइड की उपस्थिति में क्या बदलेगा?
उत्तर: सामान्य योग (मार्कोनीकॉफ़): H उस कार्बन पर जुड़ता है जिस पर H अधिक हों — मुख्य उत्पाद 2-ब्रोमोप्रोपेन (CH3CHBrCH3) है। परऑक्साइड में प्रति-मार्कोनीकॉफ़ योग होता है — मुख्य उत्पाद 1-ब्रोमोप्रोपेन (CH3CH2CH2Br) बनता है। - प्रश्न: एथीन ब्रोमीन जल का रंग क्यों उड़ा देती है, जबकि एथेन नहीं?
उत्तर: एथीन असंतृप्त है — उसका द्वि आबंध Br2 से योगात्मक अभिक्रिया करके रंगहीन 1,2-डाइब्रोमोएथेन बना देता है, इसलिए लाल-भूरा रंग उड़ जाता है। एथेन संतृप्त है, कमरे के ताप पर Br2 से योग नहीं करती, इसलिए रंग बना रहता है। - प्रश्न: वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से एथेन कैसे बनाई जाती है? समीकरण दो।
उत्तर: शुष्क ईथर में मेथिल क्लोराइड पर सोडियम की अभिक्रिया से: 2CH3Cl + 2Na → CH3–CH3 (एथेन) + 2NaCl। - प्रश्न: सोडालाइम विकार्बोक्सिलीकरण से मेथेन कैसे बनती है? समीकरण दो।
उत्तर: सोडियम ऐसीटेट को सोडालाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करने पर: CH3COONa + NaOH → CH4 + Na2CO3 (CaO केवल NaOH को पिघलने से रोकता है)। - प्रश्न: बेंज़ीन योगात्मक अभिक्रिया के बजाय प्रतिस्थापन क्यों पसंद करती है?
उत्तर: क्योंकि योग से वलय की अनुनाद-स्थिरता (लगभग 150 kJ/mol) नष्ट हो जाती है, जबकि प्रतिस्थापन में वलय की ऐरोमैटिकता बनी रहती है। इसलिए बेंज़ीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन करती है, योग नहीं। - प्रश्न: नाइट्रीकरण में वास्तविक इलेक्ट्रॉनस्नेही कौन है और वह कैसे बनता है?
उत्तर: नाइट्रोनियम आयन NO2+। सान्द्र HNO3 + सान्द्र H2SO4 की अभिक्रिया से: HNO3 + 2H2SO4 → NO2+ + H3O+ + 2HSO4−। - प्रश्न: टॉलूईन में −CH3 समूह और नाइट्रोबेंज़ीन में −NO2 समूह नए प्रतिस्थापी को कहाँ निर्देशित करते हैं?
उत्तर: −CH3 ऑर्थो-पैरा निर्देशक और सक्रियक है (वलय को इलेक्ट्रॉन देता है)। −NO2 मेटा निर्देशक और निष्क्रियक है (वलय से इलेक्ट्रॉन खींचता है)। - प्रश्न: एथेन के सांतरित और ग्रसित संरूपण में कौन अधिक स्थायी है और क्यों?
उत्तर: सांतरित (staggered) अधिक स्थायी है — इसमें पड़ोसी कार्बनों के H परमाणु एक-दूसरे से अधिकतम दूर होते हैं, इसलिए मरोड़ी विकृति (torsional strain) न्यूनतम होती है। ग्रसित में H आमने-सामने आकर प्रतिकर्षण बढ़ाते हैं। - प्रश्न: ऐसीटिलीन (HC≡CH) के सिरे वाला हाइड्रोजन अम्लीय क्यों है? एक परीक्षण बताओ।
उत्तर: त्रि आबंध वाले कार्बन sp संकरित है — s-लक्षण अधिक (50%) होने से इलेक्ट्रॉन नाभिक के निकट रहते हैं और C–H आबंध का H आसानी से प्रोटॉन के रूप में निकलता है। परीक्षण: अमोनियामय AgNO3 (टॉलेन) से AgC≡CAg का सफेद अवक्षेप बनता है। - प्रश्न: ओज़ोनीकरण से किसी ऐल्कीन के उत्पाद एथेनैल और प्रोपेनोन मिले हैं। मूल ऐल्कीन क्या थी?
उत्तर: उत्पादों के कार्बोनिल कार्बनों को द्वि आबंध से जोड़ने पर: CH3CH=C(CH3)2 — अर्थात 2-मेथिलब्यूट-2-ईन। जाँच: ओज़ोनीकरण से CH3CHO (एथेनैल) + (CH3)2CO (प्रोपेनोन) ही मिलेंगे।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- मेथेन के क्लोरीनीकरण की क्रियाविधि का नाम क्या है? उत्तर: मुक्त मूलक प्रतिस्थापन।
- एथीन से पॉलिथीन कैसे बनता है? उत्तर: बहुलकन से, द्वि आबंध टूटकर लंबी श्रृंखला बनती है।
- बेंज़ीन योगात्मक अभिक्रिया क्यों नहीं देता? उत्तर: क्योंकि उससे ऐरोमैटिक स्थिरता नष्ट हो जाएगी।
- C₃H₈ किस वर्ग का है? उत्तर: ऐल्केन का, क्योंकि वह CₙH₂ₙ₊₂ का पालन करता है।
- ऐल्काइन की एक योगात्मक अभिक्रिया बताइए। उत्तर: ब्रोमीन से योग — त्रि आबंध पर दो अणु जुड़ सकते हैं।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — प्रश्न-दर-प्रश्न
नीचे पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्न Educational Galaxy के अपने शब्दों में दिए गए हैं, उत्तर सहित। प्रश्नों का क्रम और आशय पुस्तक के अभ्यास के अनुसार है; उत्तर अपने से जाँचकर लिखे गए हैं।
अभ्यास 13 (पुस्तक-अध्याय 13)
- प्रश्न: मेथेन के क्लोरीनीकरण के दौरान ऐथेन कैसे बनती है? आप इसे कैसे समझाएँगे?
उत्तर: मुक्त-मूलक शृंखला अभिक्रिया में दो मेथिल मूलक (·CH₃) आपस में संयोग करके ऐथेन (CH₃–CH₃) बना लेते हैं — यह शृंखला समापन पद है: ·CH₃ + ·CH₃ → C₂H₆। - प्रश्न: निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए — (क) CH₃CH=C(CH₃)₂, (ख) CH₂=CH–C≡C–CH₃, (ग) दो द्वि-आबंध वाली पाँच-कार्बन शृंखला, (घ) बेंज़ीन वलय से जुड़ी –CH₂–CH₂–CH=CH₂ शृंखला, (च) 2-मेथिलफ़ीनॉल (o-क्रीसॉल), (छ) एक शाखित ऐल्केन (दीर्घतम शृंखला 8 कार्बन की), (ज) एक एथिल-शाखित ट्राइईन (दीर्घतम शृंखला 10 कार्बन की)।
उत्तर: (क) 2-मेथिलब्यूट-2-ईन। (ख) पेन्ट-1-ईन-3-आइन। (ग) पेन्टा-1,3-डाइईन। (घ) 4-फ़ेनिलब्यूट-1-ईन (ब्यूट-3-ईन-1-इलबेंज़ीन)। (च) 2-मेथिलफ़ीनॉल। (छ) 4-(2-मेथिलप्रोपिल)ऑक्टेन — दीर्घतम शृंखला 8 कार्बन की है (बायाँ प्रोपिल + मध्य CH + दायाँ ब्यूटिल), जिस पर C4 पर 2-मेथिलप्रोपिल शाखा है। (ज) 4-एथिलडेका-1,5,8-ट्राइईन — 10 कार्बन की शृंखला में द्वि-आबंध 1, 5 और 8 पर तथा एथिल शाखा C4 पर है। - प्रश्न: निम्नलिखित यौगिकों, जिनमें द्विआबंध तथा त्रिआबंध की संख्या दर्शाई गई है, के सभी संभावित स्थिति समावयवों के संरचना-सूत्र एवं IUPAC नाम दीजिए — (क) C₄H₈ (एक द्विआबंध), (ख) C₅H₈ (एक त्रिआबंध)।
उत्तर: (क) C₄H₈: ब्यूट-1-ईन (CH₂=CH–CH₂–CH₃), ब्यूट-2-ईन (CH₃–CH=CH–CH₃, cis और trans), 2-मेथिलप्रोप-1-ईन ((CH₃)₂C=CH₂)। (ख) C₅H₈: पेन्ट-1-आइन (HC≡C–CH₂–CH₂–CH₃), पेन्ट-2-आइन (CH₃–C≡C–CH₂–CH₃), 3-मेथिलब्यूट-1-आइन (HC≡C–CH(CH₃)–CH₃)। - प्रश्न: निम्नलिखित यौगिकों के ओज़ोनी-अपघटन के पश्चात् बनने वाले उत्पादों के नाम लिखिए — (i) पेन्ट-2-ईन, (ii) 3,4-डाइमेथिल-हेप्ट-3-ईन, (iii) 2-एथिलब्यूट-1-ईन, (iv) 1-फ़ेनिलब्यूट-1-ईन।
उत्तर: (i) पेन्ट-2-ईन → ऐथेनैल + प्रोपेनैल। (ii) 3,4-डाइमेथिलहेप्ट-3-ईन → ब्यूटेन-2-ओन + पेन्टेन-2-ओन (द्वि-आबंध के बायें टुकड़े CH₃CH₂C(CH₃)= से ब्यूटेन-2-ओन और दायें टुकड़े =C(CH₃)CH₂CH₂CH₃ से पेन्टेन-2-ओन)。 (iii) 2-एथिलब्यूट-1-ईन → मेथेनैल + पेन्टेन-3-ओन। (iv) 1-फ़ेनिलब्यूट-1-ईन → बेंज़ैल्डिहाइड + प्रोपेनैल। - प्रश्न: एक ऐल्कीन ‘A’ के ओज़ोनी अपघटन से पेन्टेन-3-ओन तथा ऐथेनॉल का मिश्रण प्राप्त होता है। A का IUPAC नाम तथा संरचना दीजिए।
उत्तर: उत्पादों से: पेन्टेन-3-ओन (CH₃CH₂COCH₂CH₃) और ऐथेनैल (CH₃CHO) — द्वि-आबंध के टुकड़े जोड़ने पर: CH₃CH₂C(CH₂CH₃)=CHCH₃ — अर्थात् 3-एथिलपेन्ट-2-ईन। (नोट: पुस्तक में दूसरा उत्पाद 'ऐथेनॉल' छपा है; ओज़ोनी अपघटन से ऐल्कीन के टुकड़े के रूप में बनने वाला यौगिक ऐथेनैल CH₃CHO ही है, इसलिए उत्तर में ऐथेनैल लिया गया है।) - प्रश्न: एक ऐल्केन A में तीन C–C, आठ C–H सिग्मा आबंध तथा एक C–C पाई आबंध हैं। A ओज़ोनी अपघटन से दो अणु ऐल्डिहाइड, जिनका मोलर द्रव्यमान 44 है, देता है। A का आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए।
उत्तर: ऐल्डिहाइड (मोलर द्रव्यमान 44) = ऐथेनैल (CH₃CHO)। दो ऐथेनैल देने वाला ऐल्कीन ब्यूट-2-ईन है (CH₃–CH=CH–CH₃) — इसमें C–C σ आबंध 3, C–H σ आबंध 8, C–C π आबंध 1 है। A = ब्यूट-2-ईन। - प्रश्न: एक ऐल्कीन, जिसके ओज़ोनी अपघटन से प्रोपेनॉल तथा पेन्टेन-3-ओन प्राप्त होते हैं, का संरचनात्मक सूत्र क्या है?
उत्तर: प्रोपेनैल (CH₃CH₂CHO) और पेन्टेन-3-ओन (CH₃CH₂COCH₂CH₃) के टुकड़े जोड़ने पर: CH₃CH₂CH=C(CH₂CH₃)₂ — 3-एथिलहेक्स-3-ईन। (नोट: पुस्तक में पहला उत्पाद 'प्रोपेनॉल' छपा है; यहाँ अभिप्रेत ऐल्डिहाइड प्रोपेनैल है।) - प्रश्न: निम्नलिखित हाइड्रोकार्बनों के दहन की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए — (i) ब्यूटेन, (ii) पेन्टीन, (iii) हेक्साइन, (iv) टॉलुइन।
उत्तर: (i) 2C₄H₁₀ + 13O₂ → 8CO₂ + 10H₂O। (ii) 2C₅H₁₀ + 15O₂ → 10CO₂ + 10H₂O। (iii) 2C₆H₁₀ + 17O₂ → 12CO₂ + 10H₂O। (iv) C₇H₈ + 9O₂ → 7CO₂ + 4H₂O। - प्रश्न: हेक्स-2-ईन की समपक्ष (cis) तथा विपक्ष (trans) संरचनाएँ बनाइए। इनमें से कौन-से समावयव का क्वथनांक उच्च होता है और क्यों?
उत्तर: cis-हेक्स-2-ईन में दोनों ऐल्किल समूह द्वि-आबंध के एक ही ओर होते हैं; trans में विपरीत ओर। cis का क्वथनांक उच्च होता है — cis अधिक ध्रुवीय है (द्विध्रुव आघूर्ण अधिक), इसलिए अंतराआण्विक आकर्षण अधिक होता है। - प्रश्न: बेंज़ीन में तीन द्वि-आबंध होते हैं, फिर भी यह अत्यधिक स्थायी है, क्यों?
उत्तर: अनुनाद के कारण — बेंज़ीन के π इलेक्ट्रॉन वलय में विस्थापित होते हैं; अनुनाद ऊर्जा लगभग 150 kJ mol⁻¹ होती है, जो बेंज़ीन को योगात्मक अभिक्रियाओं के प्रति स्थायी और प्रतिस्थापन के प्रति प्रवृत्त बनाती है। - प्रश्न: किसी निकाय द्वारा ऐरोमैटिकता प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक शर्तें क्या हैं?
उत्तर: हकल नियम: निकाय चक्रीय, समतलीय, पूर्णतः संयुग्मित हो और (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन हों (n = 0, 1, 2…)। - प्रश्न: इनमें से कौन से निकाय ऐरोमैटिक नहीं हैं? कारण स्पष्ट कीजिए — (i) मेथिलीनसाइक्लोहेक्साडाइईन (बाह्य =CH₂ सहित छः-सदस्यीय वलय), (ii) साइक्लोपेन्टाडाइईनिल धनायन (चार π इलेक्ट्रॉन वाली पाँच-सदस्यीय वलय), (iii) साइक्लोऑक्टाटेट्राईन (आठ π इलेक्ट्रॉन वाली आठ-सदस्यीय वलय)।
उत्तर: (i) ऐरोमैटिक नहीं — मेथिलीनसाइक्लोहेक्सा-2,5-डाइईन में वलय के π इलेक्ट्रॉन चक्रीय रूप से संयुग्मित नहीं हैं: एक द्वि-आबंध वलय से बाहर (=CH₂) है, इसलिए वलय-पथ में केवल 4 π इलेक्ट्रॉन का संयुग्मन है और हकल नियम लागू नहीं होता। (ii) ऐरोमैटिक नहीं — 4 π इलेक्ट्रॉन (4n नियम, प्रतिऐरोमैटिक)। (iii) ऐरोमैटिक नहीं — 8 π इलेक्ट्रॉन (4n नियम) और वलय समतलीय भी नहीं है। - प्रश्न: बेंज़ीन को निम्नलिखित में कैसे परिवर्तित करेंगे — (i) p-नाइट्रोब्रोमोबेंज़ीन, (ii) m-नाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन, (iii) p-नाइट्रोटॉलुइन, (iv) ऐसीटोफ़ीनोन।
उत्तर: (i) पहले Br₂/FeBr₃ से ब्रोमोबेंज़ीन, फिर सांद्र HNO₃/H₂SO₄ से नाइट्रीकरण — Br ऑर्थो/पैरा निर्देशक है, पैरा उत्पाद पृथक् करें। (ii) पहले नाइट्रीकरण से नाइट्रोबेंज़ीन, फिर Cl₂/FeCl₃ से क्लोरीनीकरण — NO₂ मेटा निर्देशक है। (iii) पहले CH₃Cl/AlCl₃ से टॉलुइन (फ़्रीडल-क्राफ्ट्स), फिर नाइट्रीकरण — CH₃ ऑर्थो/पैरा निर्देशक, पैरा उत्पाद पृथक् करें। (iv) CH₃COCl/AlCl₃ से फ़्रीडल-क्राफ्ट्स ऐसीटिलीकरण। - प्रश्न: ऐल्केन H₃C–CH₂–C–(CH₃)₂–CH₂–CH(CH₃)₂ में 1°, 2° तथा 3° कार्बन परमाणुओं की पहचान कीजिए तथा प्रत्येक कार्बन से आबंधित कुल हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या भी बताइए।
उत्तर: संरचना: CH₃(1°)–CH₂(2°)–C(4°, कोई H नहीं)–(CH₃)₂(दो 1°)–CH₂(2°)–CH(3°)–(CH₃)₂(दो 1°)। 1° कार्बन: 5 (कुल H = 3+3+3+3+3 = 15); 2° कार्बन: 2 (कुल H = 2+2 = 4); 3° कार्बन: 1 (H = 1); 4° कार्बन: 1 (H = 0)। - प्रश्न: क्वथनांक पर ऐल्केन की शृंखला के शाखन का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: शाखन बढ़ने पर क्वथनांक घटता है — शाखित अणु अधिक गोलाकार होते हैं, पृष्ठ क्षेत्रफल घटता है, वान्डरवाल्स बल दुर्बल होते हैं। - प्रश्न: प्रोपीन पर HBr के संकलन से 2-ब्रोमोप्रोपेन बनता है, जबकि बेंज़ॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में यह अभिक्रिया 1-ब्रोमोप्रोपेन देती है। क्रियाविधि की सहायता से इसका कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सामान्य योग मार्कोनिकॉफ़ नियम से होता है — H⁺ पहले जुड़कर स्थायी द्वितीयक कार्बधनायन बनाता है, फिर Br⁻ जुड़ता है → 2-ब्रोमोप्रोपेन। परॉक्साइड की उपस्थिति में मुक्त-मूलक क्रियाविधि चलती है — Br· पहले जुड़कर स्थायी द्वितीयक मुक्त-मूलक बनाता है, फिर H जुड़ता है → 1-ब्रोमोप्रोपेन (प्रति-मार्कोनिकॉफ़)। - प्रश्न: 1,2-डाइमेथिलबेंज़ीन (o-ज़ाइलीन) के ओज़ोनी अपघटन के फलस्वरूप निर्मित उत्पादों को लिखिए। यह परिणाम बेंज़ीन की केकुले संरचना की पुष्टि किस प्रकार करता है?
उत्तर: o-ज़ाइलीन के ओज़ोनी अपघटन से तीन उत्पाद मिलते हैं: ग्लाइऑक्सल (OHC–CHO), मेथिलग्लाइऑक्सल (CH₃CO–CHO) और डाइमेथिलग्लाइऑक्सल (CH₃CO–COCH₃) — 1 : 1 : 1 अनुपात में। यह तभी संभव है जब बेंज़ीन में दो केकुले रूप (द्वि-आबंधों की दो स्थितियाँ) साम्य में हों — दोनों रूपों के अपघटन से ये तीनों उत्पाद बनते हैं। - प्रश्न: बेंज़ीन, n-हेक्सेन तथा एथाइन को घटते हुए अम्लीय व्यवहार के क्रम में व्यवस्थित कीजिए और इस व्यवहार का कारण बताइए।
उत्तर: एथाइन > बेंज़ीन > n-हेक्सेन। कारण: C–H आबंध का s-लक्षण — sp (50%) > sp² (33%) > sp³ (25%); s-लक्षण अधिक होने पर कार्बन अधिक विद्युत्-ऋणात्मक होता है, C–H आबंध से H⁺ आसानी से निकलता है। - प्रश्न: बेंज़ीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदर्शित करती है, जबकि उसमें नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन होता है?
उत्तर: बेंज़ीन वलय में π इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक है — वह इलेक्ट्रॉनस्नेही को आकर्षित करती है; प्रतिस्थापन के बाद ऐरोमैटिकता पुनः प्राप्त हो जाती है। नाभिकस्नेही के लिए वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बाधा है और निकलने वाला समूह (H⁻) दुर्बल है, इसलिए नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन है। - प्रश्न: आप निम्नलिखित यौगिकों को बेंज़ीन में कैसे परिवर्तित करेंगे? (i) एथाइन, (ii) एथीन, (iii) हेक्सेन।
उत्तर: (i) एथाइन को लाल-तप्त लोहे की नली से 873 K पर प्रवाहित करने पर चक्रीय त्रितयीकरण से बेंज़ीन बनती है। (ii) एथीन → Br₂ योग से 1,2-डाइब्रोमोएथेन → NaNH₂ से विहैलोजनीकरण पर एथाइन → लाल-तप्त लोहे की नली (873 K) में चक्रीय त्रितयीकरण से बेंज़ीन। (iii) n-हेक्सेन का 773 K पर Cr₂O₃/Al₂O₃ उत्प्रेरक से ऐरोमैटिकीकरण (विहाइड्रोजनीकरण + चक्रीकरण) से बेंज़ीन बनती है। - प्रश्न: उन सभी ऐल्कीनों की संरचनाएँ लिखिए, जो हाइड्रोजनीकरण करने पर 2-मेथिलब्यूटेन देती हैं।
उत्तर: 2-मेथिलब्यूटेन (CH₃CH(CH₃)CH₂CH₃) देने वाली ऐल्कीनें: 2-मेथिलब्यूट-1-ईन (CH₂=C(CH₃)CH₂CH₃), 2-मेथिलब्यूट-2-ईन (CH₃C(CH₃)=CHCH₃), 3-मेथिलब्यूट-1-ईन (CH₂=CHCH(CH₃)CH₃)। - प्रश्न: निम्नलिखित यौगिकों को उनकी इलेक्ट्रॉनस्नेही (E⁺) के प्रति घटती आपेक्षिक क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए — (क) क्लोरोबेंज़ीन, 2,4-डाइनाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन, p-नाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन; (ख) टॉलुइन, p-H₃C–C₆H₄–NO₂, p-O₂N–C₆H₄–NO₂।
उत्तर: (क) क्लोरोबेंज़ीन > p-नाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन > 2,4-डाइनाइट्रोक्लोरोबेंज़ीन — NO₂ समूह इलेक्ट्रॉन आकर्षित करके वलय को निष्क्रिय करते हैं; दो NO₂ सबसे अधिक निष्क्रिय करते हैं। (ख) टॉलुइन > p-H₃C–C₆H₄–NO₂ > p-O₂N–C₆H₄–NO₂ — CH₃ सक्रियक है, NO₂ निष्क्रियक है। - प्रश्न: बेंज़ीन, m-डाइनाइट्रोबेंज़ीन तथा टॉलूईन में से किसका नाइट्रीकरण आसानी से होता है और क्यों?
उत्तर: टॉलूईन का — CH₃ समूह इलेक्ट्रॉनदाता (+I, अतिसंयुग्मन) है, वलय को इलेक्ट्रॉनस्नेही नाइट्रीकरण के प्रति सक्रिय करता है। बेंज़ीन उससे कम, और m-डाइनाइट्रोबेंज़ीन सबसे कठिन (दो NO₂ वलय को निष्क्रिय करते हैं)। - प्रश्न: बेंज़ीन के ऐथिलीकरण में निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड के स्थान पर कोई दूसरा लूइस अम्ल सुझाइए।
उत्तर: FeCl₃, BF₃, ZnCl₂ या H₂SO₄/समवर्ती अम्ल — कोई भी लूइस अम्ल जो ऐथिल धनायन (CH₃CH₂⁺) बना सके, जैसे निर्जल FeCl₃। - प्रश्न: क्या कारण है कि वुर्ट्ज़ अभिक्रिया से विषम संख्या कार्बन परमाणु वाले विशुद्ध ऐल्केन बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं की जाती। एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: क्योंकि दो भिन्न ऐल्किल हैलाइडों के मिश्रण से तीन उत्पाद बनते हैं — दो सममित ऐल्केन और एक विषम ऐल्केन — जिन्हें पृथक् करना कठिन है। उदाहरण: CH₃Br + C₂H₅Br + Na से C₂H₆, C₄H₁₀ और C₃H₈ तीनों बनते हैं, शुद्ध प्रोपेन प्राप्त नहीं होता।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर — गहराई से अभ्यास
- ‘ऐल्केन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘हाइड्रोकार्बन’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘ऐल्केन’ का अर्थ है — केवल एकल आबंध वाला संतृप्त हाइड्रोकार्बन।। ‘हाइड्रोकार्बन’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘ऐल्कीन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘हाइड्रोकार्बन’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘ऐल्कीन’ का अर्थ है — एक द्वि आबंध वाला असंतृप्त हाइड्रोकार्बन।। ‘हाइड्रोकार्बन’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘ऐल्काइन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘हाइड्रोकार्बन’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘ऐल्काइन’ का अर्थ है — एक त्रि आबंध वाला असंतृप्त हाइड्रोकार्बन।। ‘हाइड्रोकार्बन’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘ऐरोमैटिक’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘हाइड्रोकार्बन’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘ऐरोमैटिक’ का अर्थ है — विशेष स्थिरता वाली वलय संरचना।। ‘हाइड्रोकार्बन’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘हकल नियम’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘हाइड्रोकार्बन’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘हकल नियम’ का अर्थ है — (4n+2) π इलेक्ट्रॉन का नियम।। ‘हाइड्रोकार्बन’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘शृंखलन’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए और ‘हाइड्रोकार्बन’ में इसका महत्त्व बताइए।
‘शृंखलन’ का अर्थ है — कार्बन परमाणुओं की आपस में लंबी शृंखलाएँ बनाने की क्षमता।। ‘हाइड्रोकार्बन’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इसका उत्तर लिखते समय पहले परिभाषा दें, फिर पाठ का प्रसंग बताएँ कि यह शब्द कहाँ और क्यों आता है, और अंत में एक वाक्य में इसका परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — यही पूर्ण उत्तर की तीन कड़ियाँ हैं। - ‘हाइड्रोकार्बन’ का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
‘हाइड्रोकार्बन’ का केंद्रीय भाव यह है कि पाठ का मुख्य संदेश उसके प्रसंगों और मुख्य शब्दों के आपसी संबंध से बनता है। सार खंड में दिए गए बिंदुओं को क्रम से जोड़कर, बिना मूल पंक्तियों की नकल किए, पाँच-सात वाक्यों में लिखें — पहले विषय का परिचय, फिर दो-तीन मुख्य तर्क या प्रसंग, और अंत में पाठ की सीख। जो उत्तर इस क्रम में लिखा जाता है, वह पूरा और संतुलित लगता है। - ‘हाइड्रोकार्बन’ से क्या सीख मिलती है? अपने जीवन से जोड़कर बताइए।
इस पाठ की सीख केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि दृष्टिकोण के लिए है — पाठ जो मूल्य या सिद्धांत प्रस्तुत करता है, उसे दैनिक जीवन के एक उदाहरण से जोड़कर देखें। उत्तर में पहले पाठ की सीख एक वाक्य में लिखें, फिर अपने जीवन का एक छोटा उदाहरण दें, और अंत में यह बताएँ कि उस सीख को अपनाने से क्या अंतर पड़ेगा। सीख और उदाहरण का यह जोड़ ही अच्छे उत्तर की पहचान है। - ‘हाइड्रोकार्बन’ के अध्ययन में विद्यार्थी सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
सबसे बड़ी गलती है — केवल परिभाषाएँ और सार रट लेना, बिना प्रसंग समझे। ऐसा विद्यार्थी प्रश्न के शब्द बदल जाने पर उत्तर नहीं बना पाता। इससे बचने के लिए प्रत्येक शब्द को प्रसंग सहित पढ़ें, प्रत्येक अनुच्छेद के बाद ‘इसने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा’ पूछें, और अंत में बिना देखे सार लिखकर जाँचें। समझ के साथ पढ़ा गया पाठ ही परीक्षा में काम आता है। - ‘हाइड्रोकार्बन’ पर पाँच अंक का प्रश्न आए, तो उत्तर की रूपरेखा कैसी हो?
रूपरेखा इस प्रकार हो — भूमिका में एक वाक्य का परिचय, मुख्य भाग में तीन-चार बिंदु क्रम से, प्रत्येक बिंदु के साथ एक छोटा उदाहरण या परिणाम, और निष्कर्ष में एक वाक्य का संदेश। बिंदुओं को अलग-अलग पंक्तियों या अनुच्छेदों में लिखें, मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, और मूल पाठ की नकल से बचें। यही रूपरेखा लंबे उत्तर को पूर्ण और पठनीय बनाती है।
- ऐल्केन CnH2n+2: वुर्ट्ज़, विकार्बोक्सिलीकरण; मुख्य अभिक्रिया मुक्त-मूलक प्रतिस्थापन।
- ऐल्कीन CnH2n, ऐल्काइन CnH2n−2: योगात्मक अभिक्रियाएँ; Br2-जल परीक्षण।
- मार्कोनीकॉफ़ (H अधिक-H वाले C पर); परऑक्साइड प्रभाव केवल HBr पर (प्रति-मार्कोनीकॉफ़)।
- Saytzeff: विलोपन में अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद।
- बेंज़ीन: हकल (4n+2) π, अनुनाद-स्थिरता → प्रतिस्थापन; NO2+ नाइट्रीकरण का इलेक्ट्रॉनस्नेही।
- निर्देशक: −OH, −NH2, −CH3 o/p-सक्रियक; −NO2, −COOH m-निष्क्रियक।

