Chapter 5: धरती कब तक घूमेगी
पाँच साल से महीने-महीने घर बदलती एक बूढ़ी माँ — और एक सुबह, जब वह चल पड़ती है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Varnika Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
धरती कब तक घूमेगी — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Varnika Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | वर्णिका भाग-2 — अध्याय 5 | प्रकार: कहानी (साँवर दइया) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): हाथों में थामी धरती — प्रकृति के सम्मान का एक सामान्य प्रतीकात्मक चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

ग्लोब के चारों ओर पौधे लगाते बच्चे — एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
कहानी की केंद्रीय पात्र सीता है — एक विधवा बूढ़ी माँ, जो भरे-पूरे, well-fed घर में रहती है, पर फिर भी घुटन महसूस करती है। पाँच साल से वह महीने-महीने अपने बेटों के घरों के बीच घूम रही है — बच्चों का खेल भी उसकी ज़िंदगी का आईना है, जब बच्चे कहते हैं कि माई, यह घर छोड़, दूसरे घर जा।
बहुएँ खाने और हिस्सों को लेकर झगड़ती हैं — रसमलाई के प्रसंग में बिज्जू, पुष्पा, नारायण की पत्नी भँवरी और राधा — सबके बीच हिस्सों को लेकर तनाव है। अंत में बेटे प्रस्ताव रखते हैं कि वे माँ को बारी-बारी रखने के बजाय हर महीने 50 रुपये दे दिया करेंगे — सीता को लगता है कि उसकी ममता की कीमत लगाई जा रही है, जैसे उसकी ममता को मज़दूरी में बदल दिया गया हो।
अगली सुबह सीता भोर से पहले ही अपनी छोटी-सी गठरी लेकर चल पड़ती है — और अब उसकी आँखों के आगे न अँधेरा है, न धरती और आकाश के बीच घुटन है; आकाश अनंत है, धरती विशाल है, सड़क चौड़ी है, चारों ओर खुली हवा है। शीर्षक का भाव यही है कि यह घूमना — महीने-महीने घर बदलना — कब तक चलेगा? वह तब समाप्त होता है, जब सीता खुद चल पड़ती है।
क्या सीखना है
सीता, उसकी घुटन, बेटों की बारी, 50 रुपये का प्रस्ताव और भोर के प्रस्थान को समझें।
मुख्य शब्द
- सीता — कहानी की केंद्रीय पात्र; विधवा बूढ़ी माँ।
- बारी — महीने-महीने बेटों के घरों के बीच घूमने की व्यवस्था।
- रसमलाई — हिस्सों के झगड़े का प्रसंग — मिठाई को लेकर तनाव।
- गठरी — सीता की छोटी-सी पोटली, जिसे लेकर वह चल पड़ती है।
- घुटन — सीता की आंतरिक पीड़ा — भरे घर में भी अकेलापन।
याद रखें
- सीता विधवा बूढ़ी माँ है; पाँच साल से बारी-बारी घूम रही है।
- बहुएँ खाने और हिस्सों को लेकर झगड़ती हैं।
- बेटों का प्रस्ताव: हर महीने 50 रुपये दे देंगे।
- सीता को लगता है कि उसकी ममता की कीमत लगाई जा रही है।
- अगली सुबह वह भोर से पहले गठरी लेकर चल पड़ती है।
साँवर दइया राजस्थानी भाषा के कहानीकार थे। यह कहानी 'समकालीन भारतीय साहित्य' (अप्रैल–जून 1983) से ली गई है; लेखक ने स्वयं इसका राजस्थानी से हिंदी में अनुवाद किया है।
इस कहानी का विषय पर्यावरण या धरती का शोषण नहीं है — इसका केंद्र एक बूढ़ी माँ की घुटन और उसका प्रस्थान है। उत्तर में यही केंद्र लिखें। लेखक का नाम पुस्तक के अनुसार साँवर दइया है।
'सीता घुटन क्यों महसूस करती है' और 'शीर्षक की सार्थकता' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। अंत के खुले आकाश के चित्र को अवश्य लिखें।
Chart / Table: कहानी के मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सीता | विधवा बूढ़ी माँ; भरे घर में घुटन |
| बारी | पाँच साल से महीने-महीने बेटों के घर |
| झगड़े | खाने और हिस्सों को लेकर; रसमलाई प्रसंग |
| प्रस्ताव | हर महीने 50 रुपये दे देंगे |
| प्रस्थान | भोर से पहले गठरी लेकर चल पड़ी |
| अंत | आकाश अनंत, धरती विशाल, सड़क चौड़ी |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- सीता अपने ही घर में घुटन क्यों महसूस करती है?
संकेत: बारी-बारी घूमने और हिस्सों के झगड़े से सोचें। - बारी बदलने पर बच्चे अपनी दादी के खाने से खुश होते हैं, पर उनके माता-पिता नाराज़ होते हैं — इनके कारणों पर विचार कीजिए।
संकेत: बच्चों की सरलता बनाम बड़ों के हिसाब से सोचें। - सीता का चरित्र-चित्रण कीजिए।
संकेत: घुटन, ममता, आत्मसम्मान से सोचें। - कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
संकेत: घूमने के अंत से सोचें। - कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
संकेत: बारी, प्रस्ताव, प्रस्थान से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि एक बूढ़ी माँ, जो भरे-पूरे घर में रहती है, फिर भी घुटन महसूस करती है — क्योंकि उसे महीने-महीने बेटों के घरों के बीच घुमाया जाता है, और अंत में उसकी ममता की कीमत भी लगा दी जाती है। वह भोर से पहले चल पड़ती है, और तभी उसकी घुटन समाप्त होती है। - सीता कौन थी?
सीता एक विधवा बूढ़ी माँ थी, जो भरे-पूरे घर में रहती थी, पर पाँच साल से महीने-महीने अपने बेटों के घरों के बीच घूम रही थी — बच्चों का खेल भी उसकी ज़िंदगी का आईना था। - सीता घुटन क्यों महसूस करती है?
क्योंकि उसे महीने-महीने घर बदलना पड़ता है, बहुएँ खाने और हिस्सों को लेकर झगड़ती हैं, और अंत में बेटे उसे बारी-बारी रखने के बजाय हर महीने 50 रुपये देने का प्रस्ताव रखते हैं — उसे लगता है कि उसकी ममता की कीमत लगाई जा रही है। - कहानी का अंत क्या कहता है?
अंत कहता है कि सीता भोर से पहले अपनी गठरी लेकर चल पड़ती है — और अब उसकी आँखों के आगे न अँधेरा है, न घुटन है; आकाश अनंत है, धरती विशाल है, सड़क चौड़ी है, चारों ओर खुली हवा है। - इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
यही कि बुज़ुर्गों को केवल रोटी और पैसा नहीं चाहिए — उन्हें सम्मान, अपनापन और अपनी जगह चाहिए; और जब सम्मान नहीं मिलता, तो वे अपना रास्ता खुद चुन लेते हैं।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 6 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- सीता अपने ही घर में घुटन क्यों महसूस करती है?
सीता अपने ही घर में घुटन इसलिए महसूस करती है, क्योंकि पाँच साल से वह महीने-महीने अपने बेटों के घरों के बीच घूम रही है — उसे कहीं भी अपनी जगह नहीं मिलती। बहुएँ खाने और हिस्सों को लेकर झगड़ती हैं, और उसे लगता है कि वह किसी की नहीं है — भरे-पूरे घर में भी वह अकेली है। - बारी बदलने पर बच्चे अपनी दादी के खाने से खुश होते हैं, पर उनके माता-पिता नाराज़ होते हैं — इनके कारणों पर विचार कीजिए।
बच्चे इसलिए खुश होते हैं, क्योंकि वे अपनी दादी से प्यार करते हैं और उसके आने से उन्हें अच्छा खाना और स्नेह मिलता है — बच्चों के लिए दादी का आना खुशी है। माता-पिता इसलिए नाराज़ होते हैं, क्योंकि उन्हें दादी के खाने-पीने और हिस्सों का हिसाब करना पड़ता है — उनके लिए दादी का आना बोझ है। यही बच्चों की सरलता और बड़ों के हिसाब का अंतर है। - संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए — भोर के प्रस्थान के समय सीता की अनुभूति का भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
भोर के प्रस्थान के समय सीता की अनुभूति यह है कि अब उसकी आँखों के आगे न अँधेरा है, न धरती और आकाश के बीच घुटन है। आकाश अनंत है, धरती विशाल है, सड़क चौड़ी है, चारों ओर खुली हवा है — यानी घुटन से मुक्ति के बाद उसे खुलापन और स्वतंत्रता का अनुभव होता है। - सीता का चरित्र-चित्रण कीजिए।
सीता आत्मसम्मानी, ममतामयी और संवेदनशील माँ है। वह पाँच साल तक बारी-बारी घूमने की घुटन सहती है, बहुओं के झगड़ों को सहती है, पर जब उसकी ममता की कीमत 50 रुपये में लगाई जाती है, तो उसका आत्मसम्मान जाग उठता है — और वह भोर से पहले अपनी गठरी लेकर चल पड़ती है। - कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि कहानी में सीता का जीवन एक घूमने — महीने-महीने घर बदलने — की तरह चलता है। प्रश्न यह है कि धरती कब तक घूमेगी — यानी यह घूमना कब तक चलेगा? उत्तर यह है कि जब सीता खुद चल पड़ती है, तब यह घूमना समाप्त हो जाता है — इसीलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक है। - कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
विधवा बूढ़ी माँ सीता पाँच साल से महीने-महीने अपने बेटों के घरों के बीच घूम रही है। बहुएँ खाने और हिस्सों को लेकर झगड़ती हैं। बेटे प्रस्ताव रखते हैं कि वे हर महीने 50 रुपये दे देंगे। सीता को लगता है कि उसकी ममता की कीमत लगाई जा रही है। अगली सुबह वह भोर से पहले अपनी गठरी लेकर चल पड़ती है — और अब उसकी आँखों के आगे न अँधेरा है, न घुटन है; आकाश अनंत है, धरती विशाल है, सड़क चौड़ी है।
विस्तार — ‘धरती कब तक घूमेगी’ को गहराई से समझें
किसी भी पाठ को परीक्षा के लिए तैयार करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उसका केंद्रीय भाव एक वाक्य में अपने शब्दों में कह सकें, फिर उसके सहायक विचारों को क्रम से जोड़ सकें। ‘धरती कब तक घूमेगी’ का अध्ययन भी इसी क्रम से करें। पहले यह समझें कि इस पाठ का मूल प्रश्न क्या है और लेखक अथवा पाठ किस उत्तर की ओर ले जाता है। जब मूल प्रश्न स्पष्ट हो जाता है, तो पाठ के छोटे-छोटे प्रसंग भी उसी उत्तर के प्रमाण या उदाहरण की तरह दिखने लगते हैं, और उन्हें रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
इस पाठ में ‘सीता’ और ‘बारी’ जैसे मुख्य शब्द बार-बार काम आते हैं। इन शब्दों को केवल परिभाषा के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है; यह देखना भी आवश्यक है कि पाठ में ये शब्द किस प्रसंग में आए हैं, इनसे क्या परिणाम निकलता है, और इनके बिना पाठ का तर्क अधूरा क्यों रह जाता है। जो विद्यार्थी शब्दों को प्रसंग के साथ जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में प्रश्न के शब्द बदल जाने पर भी उत्तर बना लेता है, क्योंकि उसके पास केवल परिभाषा नहीं, बल्कि पूरी समझ होती है।
पढ़ते समय एक अच्छी आदत यह है कि प्रत्येक अनुच्छेद के बाद रुककर स्वयं से पूछें — इस अनुच्छेद ने केंद्रीय भाव में क्या जोड़ा है? क्या यह कोई नया तर्क है, कोई उदाहरण है, कोई तुलना है, या किसी भ्रम का निराकरण है? इस प्रश्न का उत्तर देते-देते पाठ की रूपरेखा मन में स्वयं बन जाती है। अंत में पूरी रूपरेखा को बिना पुस्तक देखे, अपने शब्दों में, पाँच-सात वाक्यों में लिखकर देखें। जहाँ अटकें, वहीं दोबारा पढ़ें — यही वह स्थान है जहाँ समझ अभी अधूरी है।
मुख्य शब्दों की विस्तृत व्याख्या
नीचे दिए गए प्रत्येक शब्द को परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — तीनों स्तरों पर समझें। यही तीन स्तर परीक्षा के उत्तर को पूरा बनाते हैं।
- सीता — ‘सीता’ का अर्थ है — कहानी की केंद्रीय पात्र; विधवा बूढ़ी माँ।। ‘धरती कब तक घूमेगी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
- बारी — ‘बारी’ को समझने के लिए पहले इसका शाब्दिक अर्थ देखें — महीने-महीने बेटों के घरों के बीच घूमने की व्यवस्था। — फिर पाठ के प्रसंग में इसका विशेष अर्थ समझें। ‘धरती कब तक घूमेगी’ में यह शब्द पाठक को केंद्रीय भाव की ओर ले जाता है। यदि उत्तर में केवल परिभाषा लिखी जाए, तो वह अधूरा रहता है; परिभाषा के बाद एक वाक्य में यह भी बताएँ कि इस धारणा के होने या न होने से पाठ की स्थिति में क्या अंतर पड़ता है।
- रसमलाई — ‘रसमलाई’ — हिस्सों के झगड़े का प्रसंग — मिठाई को लेकर तनाव।। इस शब्द पर विशेष ध्यान इसलिए दें क्योंकि ‘धरती कब तक घूमेगी’ के प्रश्नों में यह बार-बार किसी न किसी रूप में पूछा जाता है — कभी सीधी परिभाषा के रूप में, कभी उदाहरण के रूप में और कभी तुलना के रूप में। उत्तर लिखते समय शब्द को पाठ के मुख्य संदेश से जोड़ें और यह स्पष्ट करें कि लेखक अथवा पाठ इस धारणा के पक्ष में है या इसके विरुद्ध, और क्यों।
- गठरी — ‘गठरी’ का सामान्य अर्थ है — सीता की छोटी-सी पोटली, जिसे लेकर वह चल पड़ती है।। परंतु ‘धरती कब तक घूमेगी’ में इसका अर्थ केवल शब्दकोश तक सीमित नहीं है; यहाँ यह पाठ के पूरे तर्क की एक कड़ी है। इसे याद करने का सरल तरीका है — शब्द, उसका प्रसंग और उसका परिणाम — तीनों को एक साथ एक वाक्य-समूह में बाँधकर पढ़ें। जब तीनों कड़ियाँ एक साथ याद रहती हैं, तो परीक्षा में उत्तर अपने आप क्रमबद्ध बनता है।
- घुटन — ‘घुटन’ का अर्थ है — सीता की आंतरिक पीड़ा — भरे घर में भी अकेलापन।। ‘धरती कब तक घूमेगी’ में यह शब्द इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पाठ का केंद्रीय तर्क इसी धारणा से जुड़ा है। परीक्षा में इस शब्द की परिभाषा के साथ इसका प्रसंग भी लिखें — अर्थात् पाठ में यह कहाँ और क्यों आता है — और अंत में इसका एक परिणाम या महत्त्व जोड़ें। परिभाषा, प्रसंग और महत्त्व — ये तीन कड़ियाँ मिलकर ही पूरा उत्तर बनाती हैं।
रचना की भाषा और शैली — कैसे पढ़ें
गद्य, पद्य और कथा — तीनों की पढ़ने की विधि अलग होती है। गद्य में तर्क का क्रम पकड़ना सबसे महत्त्वपूर्ण है: लेखक पहले क्या स्थापित करता है, फिर किस उदाहरण या तुलना से उसे पुष्ट करता है, और अंत में किस निष्कर्ष पर पहुँचता है। पद्य में भाव और बिंब पकड़ना महत्त्वपूर्ण है: कवि किस चित्र के माध्यम से अपना भाव व्यक्त करता है, और वह चित्र पाठक के मन में क्या प्रभाव छोड़ता है। कथा में पात्र, घटना और परिणाम का क्रम पकड़ना महत्त्वपूर्ण है: कौन-सा पात्र किस स्थिति में क्या करता है, और उससे क्या सीख निकलती है।
इस पाठ को पढ़ते समय भाषा के उन शब्दों पर भी ध्यान दें जो भाव को विशेष रंग देते हैं — जैसे तुलना, विरोधाभास, प्रश्न और दोहराव। लेखक अथवा कवि जब किसी बात पर बल देना चाहता है, तो वह उसे दोहराता है, किसी परिचित वस्तु से तुलना करता है, या प्रश्न के रूप में प्रस्तुत करता है। इन युक्तियों को पहचान लेने से पाठ का भाव अधिक स्पष्ट होता है और उत्तर में भाषा-संबंधी प्रश्नों का सामना करना आसान हो जाता है।
एक उपयोगी अभ्यास यह है कि पाठ के किसी एक अनुच्छेद या पद्यांश को अपनी भाषा में, बिना मूल शब्दों की नकल किए, दो-तीन वाक्यों में लिखें। फिर मूल से मिलाकर देखें कि केंद्रीय भाव छूटा तो नहीं है। यह अभ्यास न केवल समझ को गहरा करता है, बल्कि परीक्षा में ‘अपने शब्दों में उत्तर दीजिए’ जैसे प्रश्नों के लिए सीधी तैयारी भी है।
परीक्षा में कैसे लिखें — उत्तर-लेखन की कला
‘धरती कब तक घूमेगी’ जैसे पाठों पर प्रश्न प्रायः तीन प्रकार के आते हैं — सीधा तथ्य या परिभाषा पूछने वाले, केंद्रीय भाव या कारण पूछने वाले, और अपने शब्दों में सार या मत पूछने वाले। तीनों के उत्तर की संरचना एक ही है: भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष। भूमिका में एक वाक्य में विषय का परिचय दें — पाठ किस बारे में है। मुख्य भाग में दो से चार बिंदु क्रम से लिखें — प्रत्येक बिंदु एक अलग तर्क, उदाहरण या परिणाम हो। निष्कर्ष में एक वाक्य में पाठ का संदेश या महत्त्व लिखें।
अंकों के अनुसार उत्तर की लंबाई तय करें। एक-दो अंक के प्रश्न में केवल परिभाषा और एक उदाहरण पर्याप्त है। तीन-चार अंक के प्रश्न में परिभाषा के साथ प्रसंग और एक-दो परिणाम जोड़ें। पाँच अंक के लंबे प्रश्न में भूमिका, तीन-चार बिंदु, एक तुलना या उदाहरण, और निष्कर्ष — सब कुछ होना चाहिए। उत्तर को अनुच्छेदों में बाँटें; एक ही लंबे अनुच्छेद में सब कुछ लिख देने से उत्तर भले ही सही हो, परंतु पढ़ने में कठिन लगता है।
उत्तर में पाठ के मुख्य शब्दों का सही प्रयोग करें, परंतु मूल पाठ की पंक्तियों की नकल न करें। परीक्षक यह देखना चाहता है कि आपने समझा है — और समझ अपने शब्दों में ही दिखती है। उत्तर लिखने के बाद उसे एक बार पढ़कर देखें: क्या पहला वाक्य प्रश्न का सीधा उत्तर देता है? क्या बिंदु क्रम में हैं? क्या अंतिम वाक्य निष्कर्ष देता है? यदि तीनों उत्तर ‘हाँ’ हैं, तो उत्तर पूरा है।
- लेखक साँवर दइया; राजस्थानी से हिंदी अनुवाद स्वयं लेखक ने किया।
- सीता: विधवा बूढ़ी माँ; पाँच साल से बारी-बारी।
- झगड़े: खाने और हिस्सों को लेकर; रसमलाई प्रसंग।
- प्रस्ताव: हर महीने 50 रुपये।
- प्रस्थान: भोर से पहले गठरी लेकर; खुला आकाश।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

