Chapter 23: लौटकर आऊँगा फिर
बंगाल में फिर लौटकर आऊँगा — अगले जन्म में भी, किसी न किसी रूप में।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
लौटकर आऊँगा फिर — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | पद्य खंड — अध्याय 11 | प्रकार: कविता (जीवनानंद दास) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): सूर्यास्त में लौटते पक्षी — लौटने की आशा का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

घर लौटे यात्री का स्वागत करता परिवार — एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
यह कविता मातृभूमि के प्रति प्रेम पर आधारित है। कवि एक दिन बंगाल में लौटकर आने की बात करता है — उस बंगाल में, जहाँ धान के खेत हैं, नदी बहती है, और प्रकृति की सुंदरता है। कवि अगले जीवन में क्या-क्या बनने की संभावना व्यक्त करता है — वह हंस बनकर किसी किशोरी के घुँघरू वाले पैरों में तैरता रहना चाहता है, वह धान के खेतों में, नदी के किनारे फिर आना चाहता है।
कवि अगले जन्मों में बंगाल में आने की इच्छा केवल अपनी नहीं मानता — वह मानता है कि यह इच्छा हर बंगाली की है, जो अपनी मातृभूमि से प्रेम करता है। कवि किनके बीच अँधेरे में होने की बात करता है — वह उन लोगों के बीच अँधेरे में होने की बात करता है, जो अपनी मातृभूमि से दूर हैं, जो अँधेरे में भटक रहे हैं।
कविता की चित्रात्मकता यह है कि उसमें बंगाल के चित्र — धान के खेत, नदी, हंस, किशोरी के घुँघरू — सब एक चित्र की तरह उभरते हैं। कवि अगले जन्म में अपने मनुष्य होने में इसलिए संदेह करता है, क्योंकि वह मनुष्य के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के किसी रूप में — हंस, धान, नदी — बंगाल में आना चाहता है।
क्या सीखना है
बंगाल में लौटने की इच्छा, अगले जन्मों की संभावनाएँ, चित्रात्मकता और शीर्षक की सार्थकता को समझें।
मुख्य शब्द
- बंगाल — कवि की मातृभूमि; पूर्वी भारत का प्रदेश।
- हंस — एक पक्षी; यहाँ अगले जन्म का रूप।
- घुँघरू — पैरों में पहने जाने वाले छोटे घुँघरू।
- धान के खेत — बंगाल की पहचान — धान की खेती।
- चित्रात्मकता — चित्रों के माध्यम से भाव व्यक्त करना।
याद रखें
- कवि बंगाल में लौटकर आने की बात करता है।
- अगले जन्म में हंस बनने की संभावना।
- धान के खेत, नदी, हंस — बंगाल के चित्र।
- यह इच्छा केवल कवि की नहीं, हर बंगाली की है।
- कवि मनुष्य होने में संदेह करता है — प्रकृति के रूप में आना चाहता है।
जीवनानंद दास (1899–1954) बांग्ला के प्रसिद्ध कवि थे। उनकी कविताओं में प्रकृति, मातृभूमि और जीवन की गहराई है। 'लौटकर आऊँगा फिर' उनकी प्रसिद्ध कविता है।
कविता की व्याख्या में पंक्तियाँ हूबहू न लिखें — भाव अपने शब्दों में लिखें। 'हंस बनने' और 'धान के खेत' के चित्र अवश्य लिखें।
'कवि अगले जन्म में क्या-क्या बनने की संभावना व्यक्त करता है' और 'मनुष्य होने में संदेह क्यों' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
Chart / Table: कविता के मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मातृभूमि | बंगाल — धान के खेत, नदी |
| अगले जन्म | हंस बनकर, धान के खेतों में, नदी किनारे |
| इच्छा | केवल कवि की नहीं, हर बंगाली की |
| चित्र | धान, नदी, हंस, घुँघरू |
| संदेह | मनुष्य होने में — प्रकृति के रूप में आना |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- कवि किस तरह के बंगाल में एक दिन लौटकर आने की बात करता है?
संकेत: धान के खेत और नदी से सोचें। - कवि अगले जीवन में क्या-क्या बनने की संभावना व्यक्त करता है और क्यों?
संकेत: हंस और प्रकृति से सोचें। - अगले जन्मों में बंगाल में आने की क्या सिर्फ कवि की इच्छा है? स्पष्ट कीजिए।
संकेत: हर बंगाली की इच्छा से सोचें। - कविता की चित्रात्मकता पर प्रकाश डालिए।
संकेत: धान, नदी, हंस के चित्रों से सोचें। - कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
संकेत: लौटने की इच्छा से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव मातृभूमि के प्रति प्रेम है — कवि बंगाल में फिर लौटकर आना चाहता है, अगले जन्म में भी, किसी न किसी रूप में। चाहे वह हंस बने, धान के खेतों में आए, या नदी के किनारे — वह बंगाल में ही आना चाहता है। - कवि किस बंगाल में लौटना चाहता है?
कवि उस बंगाल में लौटना चाहता है, जहाँ धान के खेत हैं, नदी बहती है, और प्रकृति की सुंदरता है — वह बंगाल, जो उसकी मातृभूमि है और जिसके प्रति उसका गहरा प्रेम है। - कवि अगले जन्म में क्या बनना चाहता है?
कवि अगले जन्म में हंस बनना चाहता है — किसी किशोरी के घुँघरू वाले पैरों में तैरता रहना चाहता है, धान के खेतों में, नदी के किनारे फिर आना चाहता है। वह प्रकृति के किसी रूप में बंगाल में आना चाहता है। - कवि मनुष्य होने में क्यों संदेह करता है?
क्योंकि वह मनुष्य के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के किसी रूप में — हंस, धान, नदी — बंगाल में आना चाहता है। मनुष्य का जीवन दुख और संघर्ष से भरा है, पर प्रकृति का जीवन सरल और सुंदर है — इसीलिए वह मनुष्य होने में संदेह करता है। - इस कविता से क्या सीख मिलती है?
यही कि मातृभूमि के प्रति प्रेम जन्म-जन्मांतर तक रहता है — मनुष्य चाहे किसी भी रूप में आए, वह अपनी मातृभूमि में ही आना चाहता है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 9 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- कवि किस तरह के बंगाल में एक दिन लौटकर आने की बात करता है?
कवि उस बंगाल में लौटकर आने की बात करता है, जहाँ धान के खेत हैं, नदी बहती है, और प्रकृति की सुंदरता है — वह बंगाल, जो उसकी मातृभूमि है और जिसके प्रति उसका गहरा प्रेम है। - कवि अगले जीवन में क्या-क्या बनने की संभावना व्यक्त करता है और क्यों?
कवि अगले जीवन में हंस बनने की संभावना व्यक्त करता है — किसी किशोरी के घुँघरू वाले पैरों में तैरता रहना चाहता है, धान के खेतों में, नदी के किनारे फिर आना चाहता है। वह ऐसा इसलिए चाहता है, क्योंकि वह प्रकृति के रूप में बंगाल में आना चाहता है — मनुष्य के दुख और संघर्ष से दूर, प्रकृति की सरलता में। - अगले जन्मों में बंगाल में आने की क्या सिर्फ कवि की इच्छा है? स्पष्ट कीजिए।
नहीं, यह सिर्फ कवि की इच्छा नहीं है — यह हर बंगाली की इच्छा है, जो अपनी मातृभूमि से प्रेम करता है। हर व्यक्ति अपनी मातृभूमि में फिर आना चाहता है, चाहे किसी भी रूप में — यही मातृभूमि-प्रेम की सार्वभौमिकता है। - कवि किनके बीच अँधेरे में होने की बात करता है? आशय स्पष्ट कीजिए।
कवि उन लोगों के बीच अँधेरे में होने की बात करता है, जो अपनी मातृभूमि से दूर हैं, जो अँधेरे में भटक रहे हैं। आशय यह है कि मातृभूमि से दूर रहना ही अँधेरा है — और मातृभूमि में लौटना ही प्रकाश है। - कविता की चित्रात्मकता पर प्रकाश डालिए।
कविता की चित्रात्मकता यह है कि उसमें बंगाल के चित्र — धान के खेत, नदी, हंस, किशोरी के घुँघरू — सब एक चित्र की तरह उभरते हैं। पाठक को लगता है कि वह बंगाल को अपनी आँखों से देख रहा है — यही कविता की चित्रात्मकता है। - कविता में आए बिम्बों का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
कविता के बिम्बों का सौंदर्य यह है कि वे प्रकृति के सरल और सुंदर चित्र हैं — धान के खेतों की हरियाली, नदी का बहाव, हंस का तैरना, किशोरी के घुँघरू की आवाज़ — ये सब बिम्ब मिलकर बंगाल की सुंदरता का एक मनोरम चित्र बनाते हैं। - कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि पूरी कविता में कवि के लौटकर आने की इच्छा का वर्णन है — 'लौटकर आऊँगा फिर' ही कविता का केंद्र है। कवि अगले जन्म में भी बंगाल में लौटकर आना चाहता है — इसीलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक है। - कवि अगले जन्म में अपने मनुष्य होने में क्यों संदेह करता है? क्या कारण हो सकता है?
कवि मनुष्य होने में इसलिए संदेह करता है, क्योंकि वह मनुष्य के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के किसी रूप में — हंस, धान, नदी — बंगाल में आना चाहता है। कारण यह हो सकता है कि मनुष्य का जीवन दुख, संघर्ष और अँधेरे से भरा है, पर प्रकृति का जीवन सरल, सुंदर और शांत है — इसीलिए वह प्रकृति के रूप में आना चाहता है। - व्याख्या करें — कविता की पंक्तियों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
इस प्रश्न में कविता की दो पंक्तियों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: कवि कहता है कि वह अगले जन्म में हंस बनकर किसी किशोरी के घुँघरू वाले पैरों में तैरता रहेगा, दिन-दिन भर पानी में, जहाँ घास की गंध भरी होगी — यानी वह प्रकृति के रूप में बंगाल में रहना चाहता है; और जहाँ धान के खेत हैं, बहती नदी के किनारे, वहाँ वह एक दिन फिर लौटकर आएगा — बंगाल में।
- कवि जीवनानंद दास; बांग्ला कवि।
- मातृभूमि बंगाल — धान के खेत, नदी।
- अगले जन्म: हंस, धान, नदी के रूप में।
- इच्छा केवल कवि की नहीं, हर बंगाली की।
- मनुष्य होने में संदेह — प्रकृति के रूप में आना।
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