Chapter 2: विष के दाँत
एक मध्यवर्गीय घर में पलता हुआ विष — और वह विष, जो बच्चों के दाँतों में भी उतर आता है।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Hindi • Book: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
विष के दाँत — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Godhuli Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | गद्य खंड — अध्याय 2 | प्रकार: कहानी (नलिन विलोचन शर्मा) | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): झूठ बनाम सच का प्रतीकात्मक चित्र — कहानी के भाव का एक सामान्य चित्र, किताब का दृश्य नहीं।

ईमानदारी से बात करता बच्चा — एक सामान्य चित्र।
इस अध्याय के बारे में
कहानी सेन परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है — एक मध्यवर्गीय परिवार, जिसमें बच्चों के पालन-पोषण में लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव है। लड़कियाँ कठपुतलियों की तरह पाली जाती हैं, और माता-पिता को इस पर गर्व भी है। खोखा इस भेदभाव में अपवाद है — वह नौकर का बेटा है, पर सेन साहब उसे अपने ढंग से पालना चाहते हैं।
सेन साहब खोखा में बड़ी संभावनाएँ देखते हैं — वे उसे इंजीनियर बनाना चाहते हैं, 'अपने बाप का बेटा' कहकर। पर साथ ही वे कहते हैं कि पढ़ाई-लिखाई फिज़ूल है, वे उसे अपनी तरह बिज़नेसमैन बनाना चाहते हैं, और किंडरगार्टन स्कूल में भेजने की बजाय कारखाने का बढ़ई या मिस्त्री दो-एक घंटे के लिए आकर उसके साथ कुछ ठोक-पीट किया करे, ताकि बच्चे की उँगलियाँ अभी से औज़ारों से वाकिफ़ हो जाएँ। खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने अपने सिद्धांतों को भी बदल लिया था।
कहानी में मदन और काशू का झगड़ा भी आता है — मदन गिरधरलाल का बेटा है, काशू सेन साहब का बेटा है, और खोखा नौकर का बेटा है। मदन गाड़ी को गंदा कर रहा था, ड्राइवर ने मना किया तो वह मारने दौड़ा; सेन साहब ने गिरधर को भाषण दिया कि ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं। रात में गिरधर के क्वार्टर से मदन के चीत्कार आते हैं। दूसरे दिन खोखा बँगले के अहाते की बगलवाली गली में गया, जहाँ मदन पड़ोसियों के आवारागर्द छोकरों के साथ लट्टू नचा रहा था; खोखा हँस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए लालच गया, मदन ने उसे दुत्कारा, काशू तैश में आ गया और उसने मदन को घूँसा मार दिया, मदन भी काशू पर टूट पड़ा। गिरधर, जो रोज़ मदन की पिटाई करता था, मदन द्वारा काशू की पिटाई पर उसे दंडित करने की बजाय छाती से लगा लेता है — यही कहानी का मार्मिक मोड़ है, जो दिखाता है कि महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं।
क्या सीखना है
सेन परिवार, खोखा, मदन-काशू झगड़ा, गिरधर का व्यवहार और कहानी के शीर्षक के भाव को समझें।
मुख्य शब्द
- खोखा — नौकर का बेटा; सेन साहब जिसे अपने ढंग से पालना चाहते हैं।
- काशू — सेन साहब का बेटा।
- मदन — गिरधरलाल का बेटा।
- गिरधर — मदन का पिता; सेन के यहाँ काम करने वाला।
- सेन साहब — मध्यवर्गीय परिवार के मुखिया; खोखा के पालक।
याद रखें
- सेन परिवार में लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पाला जाता है।
- खोखा नौकर का बेटा है; सेन साहब उसे इंजीनियर बनाना चाहते हैं।
- मदन गिरधर का बेटा है; काशू सेन साहब का बेटा है।
- मदन-काशू झगड़ा लट्टू खेलने को लेकर हुआ।
- गिरधर मदन को दंडित करने की बजाय छाती से लगा लेता है।
नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फ़रवरी 1916 को बदरघाट, पटना में हुआ था। उनकी मातृभाषा भोजपुरी थी; वे महामहोपाध्याय रामावतार शर्मा के पुत्र थे। वे 1959 से अपनी मृत्यु (12 सितंबर 1961) तक पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। वे हिंदी कविता में प्रगतिवाद के अग्रदूतों में थे। यह कहानी 'विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ' से ली गई है।
पात्रों की पहचान में भ्रम न करें — मदन गिरधर का बेटा है, काशू सेन साहब का बेटा है, खोखा नौकर का बेटा है। उत्तर में यही पहचान लिखें।
'कहानी का नायक कौन है' और 'शीर्षक की सार्थकता' — ये दो प्रश्न सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। नायक के उत्तर में तर्क अवश्य दें।
Chart / Table: कहानी के मुख्य पात्र
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सेन साहब | मध्यवर्गीय मुखिया; खोखा के पालक |
| खोखा | नौकर का बेटा; इंजीनियर बनने का सपना |
| काशू | सेन साहब का बेटा |
| मदन | गिरधर का बेटा |
| गिरधर | मदन का पिता; सेन के यहाँ काम करने वाला |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
संकेत: विष और दाँतों से सोचें। - सेन परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में लिंग-आधारित भेदभाव का वर्णन कीजिए।
संकेत: लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पालने से सोचें। - खोखा किन मामलों में अपवाद था?
संकेत: सेन साहब के सपने और दुर्ललित स्वभाव से सोचें। - सेन साहब और मित्रों की बातचीत में पत्रकार मित्र ने क्या उत्तर दिया?
संकेत: दोस्तों के बीच की बातचीत से सोचें। - कहानी का नायक कौन है? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
संकेत: खोखा, मदन, काशू में से सोचें।
प्रश्न और उत्तर
- इस कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
केंद्रीय भाव यह है कि मध्यवर्गीय समाज में जाति और लिंग के पूर्वाग्रह सम्मान के पीछे छिपे होते हैं — और यही विष बच्चों के मन में भी उतर आता है, जिससे वे आगे चलकर वही विष फैलाते हैं। - सेन परिवार में भेदभाव कैसा था?
सेन परिवार में लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पाला जाता था, और माता-पिता को इस पर गर्व भी था। लड़कों को अलग ढंग से पाला जाता था — यही लिंग-आधारित भेदभाव था। - खोखा कौन था?
खोखा नौकर का बेटा था, पर सेन साहब उसे अपने ढंग से पालना चाहते थे — वे उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे, और उसके दुर्ललित स्वभाव के अनुसार उन्होंने अपने सिद्धांतों को भी बदल लिया था। - मदन-काशू झगड़े का क्या अर्थ है?
मदन-काशू झगड़ा महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई का प्रतीक है — जिसमें अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं। - इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
यही कि बच्चों के पालन-पोषण में भेदभाव और पूर्वाग्रह ही समाज के विष की जड़ है — और उसे दूर किए बिना समाज नहीं बदल सकता।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — बोध और अभ्यास (उत्तर सहित)
इस खंड में पुस्तक के ‘बोध और अभ्यास’ खंड के ‘पाठ के साथ’ / ‘कविता के साथ’ वाले 14 प्रश्नों के उत्तर EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं। ‘पाठ/कविता के आस-पास’ और ‘भाषा की बात’ वाले कार्य कक्षा-कार्य के रूप में हैं — उन्हें अपने शिक्षक के साथ करें।
- कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि कहानी में विष — जाति, लिंग और वर्ग के पूर्वाग्रहों का विष — बच्चों के मन में भी उतर आता है, जैसे विष के दाँत। खोखा, मदन और काशू — तीनों बच्चे इसी विष से प्रभावित होते हैं — इसीलिए शीर्षक 'विष के दाँत' पूरी तरह सार्थक है। - सेन परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में लिंग-आधारित भेदभाव का वर्णन कीजिए।
सेन परिवार में लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पाला जाता था — उन्हें अपनी इच्छा से कुछ करने की स्वतंत्रता नहीं थी, और माता-पिता को इस पर गर्व भी था। लड़कों को अलग ढंग से पाला जाता था — उन्हें अधिक स्वतंत्रता और अवसर मिलते थे। यही लिंग-आधारित भेदभाव था। - खोखा किन मामलों में अपवाद था?
खोखा इस मामले में अपवाद था कि वह नौकर का बेटा होते हुए भी सेन साहब के घर में पल रहा था, और सेन साहब उसे अपने ढंग से पालना चाहते थे — उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। साथ ही, उसके दुर्ललित स्वभाव के अनुसार सेनों ने अपने सिद्धांतों को भी बदल लिया था — यही उसे अपवाद बनाता है। - सेन दंपति खोखा में कैसी संभावनाएँ देखते थे और कैसी शिक्षा तय की थी?
सेन दंपति खोखा में इंजीनियर बनने की संभावनाएँ देखते थे — वे कहते थे कि उसे तो इंजीनियर होना है, वह अपने बाप का बेटा है। शिक्षा के लिए उन्होंने तय किया था कि किंडरगार्टन स्कूल में भेजने की बजाय कारखाने का बढ़ई या मिस्त्री दो-एक घंटे के लिए आकर उसके साथ कुछ ठोक-पीट किया करे, ताकि बच्चे की उँगलियाँ अभी से औज़ारों से वाकिफ़ हो जाएँ। - सप्रसंग व्याख्या कीजिए — कहानी के चार कथनों के भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
इस प्रश्न में चार कथनों के भाव पूछे गए हैं। इनका भाव अपने शब्दों में इस प्रकार है: पहला — लड़कियाँ कठपुतलियाँ हैं और माता-पिता को इस पर गर्व है, यानी लड़कियों को अपनी इच्छा से जीने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती; दूसरा — खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने अपने सिद्धांतों को भी बदल लिया था, यानी बच्चे के स्वभाव ने बड़ों के सिद्धांतों को भी मोड़ दिया; तीसरा — ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं, यानी सेन साहब का यह मानना है कि बिना अनुशासन के पले बच्चे अपराधी बनते हैं; चौथा — खोखा हँस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए लालच गया, यानी वह मदन के साथियों के साथ खेलने के लालच में उनके बीच चला गया। - सेन साहब और मित्रों की बातचीत में पत्रकार मित्र ने क्या उत्तर दिया?
सेन साहब और मित्रों की बातचीत में जब सेन साहब ने अपने विचार रखे, तो पत्रकार मित्र ने उत्तर दिया कि बच्चों के पालन-पोषण में भेदभाव और पूर्वाग्रह ही समाज की समस्या है — और उसे दूर किए बिना समाज नहीं बदल सकता। - मदन और ड्राइवर के विवाद से कहानीकार क्या बताना चाहता है?
मदन और ड्राइवर के विवाद से कहानीकार यह बताना चाहता है कि बच्चों में भी वर्ग-भेद और अहंकार आ जाता है — मदन गाड़ी को गंदा कर रहा था, ड्राइवर ने मना किया तो वह मारने दौड़ा — यही बताता है कि बच्चों में भी बड़ों का विष उतर आया है। - काशू और मदन के झगड़े का कारण क्या था? लेखक क्या दिखाना चाहता है?
काशू और मदन के झगड़े का कारण लट्टू खेलना था — खोखा हँस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए लालच गया, मदन ने उसे दुत्कारा, काशू तैश में आ गया और उसने मदन को घूँसा मार दिया। लेखक इससे यह दिखाना चाहता है कि महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में बच्चे भी शामिल हो जाते हैं। - 'महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं' — उदाहरण देकर पुष्ट करें।
इस कथन की पुष्टि मदन-काशू झगड़े से होती है — गिरधर, जो झोपड़ी वाला है, अपने ही बेटे मदन को दंडित करने की बजाय, जब मदन काशू को मारता है, तो उसे छाती से लगा लेता है — यानी झोपड़ी वाला ही महल वाले के खिलाफ अपने ही बेटे का साथ नहीं देता, बल्कि महल वाले के बेटे के खिलाफ अपने बेटे को ही दबाता है। यही महल वालों की जीत का कारण है। - रोज़ मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई पर उसे दंडित करने की बजाय छाती से क्यों लगा लेता है?
क्योंकि गिरधर जानता है कि महल वालों से लड़ना उसके लिए हानिकारक होगा — वह अपने बेटे को दंडित करके महल वालों को खुश करना चाहता है, ताकि उसकी नौकरी और सम्मान बचा रहे। यही उसकी मजबूरी है — वह अपने ही बेटे के खिलाफ महल वालों का साथ देता है। - सेन साहब, मदन, काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण कीजिए।
सेन साहब मध्यवर्गीय, महत्त्वाकांक्षी और पूर्वाग्रहों से भरे व्यक्ति हैं — वे खोखा को अपने ढंग से पालना चाहते हैं, पर उनके मन में जाति और वर्ग के पूर्वाग्रह भी हैं। मदन गिरधर का बेटा है — आवारागर्द, पर अपने साथियों के प्रति वफ़ादार। काशू सेन साहब का बेटा है — तैश में आने वाला, पर अपने मित्र खोखा के प्रति वफ़ादार। गिरधर मजबूर और दबा हुआ व्यक्ति है — जो अपने बेटे को भी महल वालों के सामने दबा देता है। - कहानी का नायक कौन है? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
कहानी का नायक खोखा है — क्योंकि पूरी कहानी उसी के इर्द-गिर्द घूमती है। वह नौकर का बेटा होते हुए भी सेन साहब के घर में पलता है, उसके दुर्ललित स्वभाव ने सेनों के सिद्धांतों को भी बदल दिया, और उसी के माध्यम से कहानीकार मध्यवर्गीय समाज के विष को दिखाता है। - आरंभ से ही कहानीकार का स्वर व्यंग्यपूर्ण है — प्रमाण दीजिए।
कहानीकार का स्वर आरंभ से ही व्यंग्यपूर्ण है — वह सेन परिवार के भेदभाव, माता-पिता के गर्व, और सेन साहब के भाषणों को व्यंग्य के साथ दिखाता है। लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पालने पर गर्व करना, और खोखा के लिए इंजीनियर बनने का सपना देखना — ये सब व्यंग्य के उदाहरण हैं। - कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
सेन परिवार में लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पाला जाता है। नौकर का बेटा खोखा सेन साहब के घर में पलता है, जिसे वे इंजीनियर बनाना चाहते हैं। मदन और ड्राइवर का विवाद, फिर मदन-काशू का झगड़ा होता है। गिरधर अपने बेटे मदन को दंडित करने की बजाय छाती से लगा लेता है — यही महल और झोपड़ी की लड़ाई का चित्र है।
- लेखक नलिन विलोचन शर्मा; कहानी 'विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ' से।
- सेन परिवार: लड़कियों को कठपुतलियों की तरह पालना।
- खोखा: नौकर का बेटा; इंजीनियर बनने का सपना।
- मदन: गिरधर का बेटा; काशू: सेन साहब का बेटा।
- गिरधर: मदन को दंडित करने की बजाय छाती से लगाता है।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, मुख्य शब्द अपने शब्दों में कहें, फिर बिना देखे अभ्यास करें। अंत में प्रश्न और उत्तर से अपनी जाँच करें। अपने शिक्षक या माता-पिता से उत्तर जँचवाएँ।

