Chapter 5: रोजगार एवं सेवाएँ
तीन क्षेत्र, सेवा क्षेत्र का विस्तार, संगठित बनाम असंगठित रोज़गार और रोज़गार की गुणवत्ता को जोड़कर समझें।
Original notes — ready Bihar Board — BSEB (Hindi Medium) • Class 10 • Economics • Book: Hamari Arthvyavastha Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
रोजगार एवं सेवाएँ — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
पुस्तक: Hamari Arthvyavastha Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 10) | अध्याय 5 | माध्यम: हिंदी
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चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): खेत, कारखाना और अस्पताल — तीन क्षेत्रों का एक सामान्य चित्र। यह किताब का चित्र नहीं है।

चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): अलग-अलग काम करते लोगों का सामान्य चित्र — किसान, शिक्षक और डॉक्टर।
इस अध्याय के बारे में
रोज़गार और सेवाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं — जैसे तराज़ू के दो पलड़े। सेवा क्षेत्र को ही आर्थिक विकास का तीसरा क्षेत्र कहा जाता है: पहला कृषि, दूसरा उद्योग और तीसरा सेवा। पुस्तक के अनुसार GDP में सेवा क्षेत्र का योगदान 55.1 प्रतिशत है, जबकि कृषि एवं उद्योग में मात्र 44.9 प्रतिशत — यानी आज की अर्थव्यवस्था में सेवाओं का हिस्सा सबसे बड़ा है।
सेवा क्षेत्र दो तरह का है — सरकारी और गैर-सरकारी। सरकारी सेवाओं में सैन्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल, बैंकिंग और दूरसंचार जैसी सेवाएँ आती हैं; गैर-सरकारी में मॉल, स्वरोज़गार, निजी बैंकिंग और यातायात जैसी सेवाएँ। कुछ सेवाएँ ऐसी भी हैं जिनका विकास सरकार और निजी दोनों के सहयोग से हो रहा है — जैसे यातायात, दूरसंचार, बैंकिंग और स्वास्थ्य।
भारत विश्व को सेवा प्रदाता के रूप में जाना जाता है — इसकी वजह है Out Sourcing (बाह्य-स्रोत): जब बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपनी नियमित सेवाएँ किसी बाहरी या विदेशी स्रोत से प्राप्त करती हैं। सेवा क्षेत्र की बुनियादी सुविधाएँ दो तरह की हैं — आर्थिक (वित्त, ऊर्जा, यातायात, संचार) और गैर-आर्थिक (शिक्षा, नागरिक सेवाएँ, स्वास्थ्य)। और मानव पूँजी के पाँच घटक हैं — भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा।
मंदी के दौर में भी भारत का सेवा क्षेत्र मज़बूत रहा — विकसित राष्ट्रों पर मंदी का काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जबकि भारत पर कम। पुस्तक के अनुसार आगे के वर्षों में संपूर्ण भारत में और विशेष रूप से बिहार में सेवा क्षेत्र के विकास की अपार संभावनाएँ हैं, क्योंकि भारत युवाओं का देश है और यहाँ से कुशल श्रमिकों की Out Sourcing संपूर्ण विश्व में होगी।
रोज़गार का मतलब समझना भी ज़रूरी है — रोज़गार से अभिप्राय देश के मानव संसाधन को ऐसे कार्यों में लगाना है जिससे देश की उत्पादकता बढ़ सके और सामान्य जन को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी न्यूनतम आवश्यकताएँ प्राप्त हो सकें। जो व्यक्ति काम करने के लायक हो और जिसे उचित पारिश्रमिक पर काम न मिला हो, उसे बेरोज़गार कहते हैं; जो स्वेच्छा से काम करना ही नहीं चाहता, उसे बेरोज़गार नहीं कहा जाता। भारत में कृषि रोज़गार उपलब्ध कराने का सर्वाधिक बड़ा क्षेत्र है, और सेवा क्षेत्र के विस्तार से बेरोज़गारी में कमी आई है — क्योंकि रोज़गार वृद्धि से सेवा क्षेत्र का भी विस्तार होता है।
क्या सीखना है
तीन क्षेत्र, सेवा क्षेत्र का विस्तार, संगठित बनाम असंगठित रोज़गार और रोज़गार की गुणवत्ता को जोड़कर समझें।
Key Terms — मुख्य शब्द
- रोजगार — वह काम जिससे व्यक्ति को आय मिलती है।
- प्राथमिक क्षेत्र — प्रकृति से सीधे उत्पादन — कृषि, खनन, मत्स्य।
- द्वितीयक क्षेत्र — उद्योग — कच्चे माल से तैयार वस्तु बनाना।
- तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) — सेवाएँ — शिक्षण, स्वास्थ्य, परिवहन, बैंकिंग।
- असंगठित क्षेत्र — बिना नियमित वेतन व सुरक्षा वाला रोज़गार।
- बाह्य-स्रोत (Out Sourcing) — जब कंपनियाँ अपनी नियमित सेवाएँ स्वयं की बजाय किसी बाहरी या विदेशी स्रोत से प्राप्त करें।
- मानव पूँजी — लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल — इसके पाँच घटक: भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा।
- BIMARU — बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश — पिछड़े राज्यों के लिए इस्तेमाल होने वाला संक्षिप्त नाम।
पहला क्षेत्र कृषि, दूसरा उद्योग, तीसरा सेवा। GDP में सेवा क्षेत्र का हिस्सा पुस्तक के अनुसार 55.1 प्रतिशत है — यह आँकड़ा सीधे पूछा जाता है।
BIMARU में बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश आते हैं — कर्नाटक BIMARU राज्य नहीं है। यही पुस्तक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न का उत्तर है।
भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा — पाँचों को एक साथ याद करें; वस्तुनिष्ठ प्रश्न में संख्या (5) ही पूछी जाती है।
Remember — याद रखें
- तीन क्षेत्र: प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (उद्योग), तृतीयक (सेवाएँ)।
- GDP में सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा है; रोज़गार में कृषि सबसे आगे है।
- संगठित रोज़गार में सुरक्षा होती है, असंगठित में नहीं।
- रोज़गार की संख्या के साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है।
Exam Tip / Common Mistake — परीक्षा टिप / सामान्य गलती
परीक्षा टिप / सामान्य गलती सामान्य गलती: GDP में हिस्से और रोज़गार में हिस्से को एक समझ लेना। उत्तर में दोनों अलग-अलग लिखें — GDP में सेवाएँ, रोज़गार में कृषि।
Chart / Table: सेवा क्षेत्र के प्रकार और बुनियादी सुविधाएँ
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सरकारी सेवा क्षेत्र | सैन्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल, बैंकिंग, दूरसंचार, कृषि सेवा। |
| गैर-सरकारी सेवा क्षेत्र | मॉल सेवा, स्वरोज़गार, निजी बैंकिंग, यातायात, दूरसंचार, स्वास्थ्य। |
| दोनों के सहयोग से | यातायात, दूरसंचार, बैंकिंग, स्वास्थ्य — सरकार और निजी दोनों मिलकर। |
| आर्थिक बुनियादी सुविधाएँ | वित्त, ऊर्जा, यातायात, संचार। |
| गैर-आर्थिक बुनियादी सुविधाएँ | शिक्षा, नागरिक सेवाएँ, स्वास्थ्य। |
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र कौन से हैं?
संकेत: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक याद करें। - सेवा क्षेत्र में कौन-कौन से काम आते हैं?
संकेत: शिक्षक, डॉक्टर और ड्राइवर के बारे में सोचें। - GDP और रोज़गार में अंतर क्यों है?
संकेत: सेवाएँ बनाम कृषि की तुलना करें। - संगठित और असंगठित रोज़गार में अंतर बताइए।
संकेत: सुरक्षा के बारे में सोचें। - रोज़गार की गुणवत्ता क्यों ज़रूरी है?
संकेत: मज़दूरों की सुरक्षा के बारे में सोचें।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र कौन से हैं?
प्राथमिक क्षेत्र प्रकृति से सीधे उत्पादन करता है (कृषि, खनन), द्वितीयक क्षेत्र उद्योग है (कच्चे माल से तैयार वस्तु) और तृतीयक क्षेत्र सेवाएँ हैं (शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बैंकिंग)। - भारत में सेवा क्षेत्र क्यों बड़ा हो गया है?
शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बैंकिंग, सूचना-प्रौद्योगिकी जैसी सेवाओं की माँग बढ़ी है। इसीलिए GDP में सेवा क्षेत्र का हिस्सा सबसे अधिक हो गया है। - रोज़गार में कृषि अब भी आगे क्यों है?
क्योंकि भारत की अधिकांश आबादी गाँवों में रहती है और खेती पर निर्भर है। उद्योग और सेवाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं, पर वे अभी उतने लोगों को रोज़गार नहीं दे पाई हैं। - संगठित और असंगठित रोज़गार में क्या अंतर है?
संगठित रोज़गार में नियमित वेतन, छुट्टी, भविष्य निधि जैसी सुरक्षा होती है। असंगठित रोज़गार में दैनिक मज़दूरी होती है और कोई सुरक्षा नहीं होती — जैसे रेहड़ी वाले और दैनिक मज़दूर। - रोज़गार की गुणवत्ता क्यों ज़रूरी है?
क्योंकि सिर्फ काम मिलना काफी नहीं है — काम सुरक्षित, नियमित आय वाला और सम्मानजनक भी होना चाहिए। असुरक्षित रोज़गार में व्यक्ति गरीबी से बाहर नहीं निकल पाता।
अभ्यास-विस्तार — पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नों पर आधारित प्रश्न और उत्तर
नीचे दिए गए प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (Exercise) के प्रश्नों पर आधारित हैं; उत्तर EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं, किताब की नकल नहीं।
- आर्थिक विकास का तीसरा क्षेत्र क्या है? (क) कृषि क्षेत्र (ख) विज्ञान क्षेत्र (ग) शिक्षा क्षेत्र (घ) सेवा क्षेत्र
सही उत्तर (घ) सेवा क्षेत्र है — पहला क्षेत्र कृषि, दूसरा उद्योग और तीसरा सेवा क्षेत्र कहलाता है। - मानव पूँजी के प्रमुख घटक कितने हैं? (क) 6 (ख) 4 (ग) 5 (घ) 8
सही उत्तर (ग) 5 है — भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा। - कौन BIMARU राज्य नहीं है? (क) बिहार (ख) मध्य प्रदेश (ग) कर्नाटक (घ) उड़ीसा
सही उत्तर (ग) कर्नाटक है — BIMARU में बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश आते हैं, कर्नाटक नहीं। - कौन-सी सेवा गैर सरकारी है? (क) सैन्य सेवा (ख) वित्त सेवा (ग) मॉल सेवा (घ) रेल सेवा
सही उत्तर (ग) मॉल सेवा है — सैन्य, वित्त और रेल सरकारी सेवाएँ हैं, जबकि मॉल सेवा गैर-सरकारी है। - ऊर्जा के मुख्य स्रोत क्या हैं? (क) कोयला (ख) पेट्रोलियम (ग) विद्युत (घ) इनमें से सभी
सही उत्तर (घ) इनमें से सभी है — कोयला, पेट्रोलियम और विद्युत तीनों ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं। - Out Sourcing किसे कहते हैं?
Out Sourcing (बाह्य-स्रोत) वह व्यवस्था है जिसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ या अन्य कंपनियाँ अपनी संबंधित नियमित सेवाएँ स्वयं अपनी कंपनियों की बजाय किसी बाहरी या विदेशी स्रोत या संस्था या समूह से प्राप्त करती हैं। - सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) से जुड़े पाँच सेवा क्षेत्र बतलाएँ।
सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े सेवा क्षेत्र हैं — सॉफ्टवेयर सेवाएँ, कॉल सेंटर और BPO सेवाएँ, दूरसंचार सेवाएँ, इंटरनेट व कंप्यूटर सेवाएँ, और डेटा प्रबंधन सेवाएँ। इन्हीं के ज़रिए भारत विश्व को सेवा प्रदाता के रूप में जाना जाता है। - सरकारी सेवा किसे कहते हैं?
सरकारी सेवा वह सेवा है जो सरकार द्वारा दी जाती है — जैसे सैन्य सेवा, शिक्षा सेवा, स्वास्थ्य सेवा, रेल सेवा और वित्त सेवा। इनका मकसद मुनाफा नहीं, बल्कि जनता की भलाई होता है। - गैर सरकारी सेवा किसे कहते हैं?
गैर-सरकारी सेवा वह सेवा है जो निजी व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा दी जाती है — जैसे मॉल सेवा, स्वरोज़गार सेवा और निजी बैंकिंग व यातायात सेवाएँ। - आधारभूत संरचना किसे कहते हैं?
आधारभूत संरचना विकास की बुनियाद है — सड़क, बिजली, पानी, संचार, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएँ, जिनके बिना उद्योग, व्यापार और सेवाएँ आगे नहीं बढ़ सकतीं। - 'रोज़गार' और 'सेवा' में क्या संबंध है?
रोज़गार और सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं — जैसे तराज़ू के दो पलड़े। सेवा क्षेत्र बढ़ता है तो रोज़गार बढ़ता है, और रोज़गार बढ़ता है तो लोगों की आय बढ़ती है, जिससे सेवाओं की माँग और बढ़ती है। - आर्थिक संरचनाओं का क्या महत्त्व है?
आर्थिक संरचनाएँ — कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र — अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से उत्पादन होता है, रोज़गार मिलता है और राष्ट्रीय आय बनती है। संरचना जितनी मज़बूत होगी, विकास उतना ही टिकाऊ होगा। - मंदी का असर भारत में क्या पड़ा?
आधुनिक मंदी का विकसित राष्ट्रों पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जबकि भारत पर कम पड़ा — क्योंकि भारतीय पूँजी बाज़ार मज़बूत था, मानवीय श्रम की दक्षता ऊँची थी और विशाल श्रमशक्ति मौजूद थी। - वैश्वीकरण का प्रभाव सेवा क्षेत्र पर क्या पड़ा?
वैश्वीकरण से भारत का सेवा क्षेत्र विश्व से जुड़ गया — Out Sourcing के ज़रिए भारतीय सेवाएँ दुनिया भर में पहुँचीं, विदेशी निवेश आया और सेवा क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर खुले। - सेवा क्षेत्र पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
सेवा क्षेत्र आर्थिक विकास का तीसरा क्षेत्र है और आज GDP में इसका योगदान सबसे बड़ा है (पुस्तक के अनुसार 55.1 प्रतिशत)। इसके दो रूप हैं — सरकारी और गैर-सरकारी। सेवा एवं रोज़गार एक ही तराज़ू के दो पलड़े हैं — सेवा बढ़ती है तो रोज़गार बढ़ता है। भारत विश्व को सेवा प्रदाता के रूप में जाना जाता है, और आगे के वर्षों में, विशेष रूप से बिहार में, सेवा क्षेत्र के विकास की अपार संभावनाएँ हैं। - विश्व के लिए भारत सेवा प्रदाता के रूप में किस तरह जाना जाता है? उदाहरण सहित लिखिए।
भारत Out Sourcing के ज़रिए विश्व का सेवा प्रदाता बना है — बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपनी कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर और डेटा सेवाएँ भारत से प्राप्त करती हैं, क्योंकि यहाँ कुशल और अंग्रेज़ी जानने वाले युवा बड़ी संख्या में हैं। यही वजह है कि भारत को विश्व की "सेवा फैक्ट्री" कहा जाने लगा है। - सेवा क्षेत्र में सरकारी प्रयास के रूप में क्या किए गए हैं? वर्णन करें।
सरकार ने सेवा क्षेत्र में रोज़गार सृजन के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं — काम के बदले अनाज-2004, राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम-1980, ग्रामीण भूमिहीन रोज़गार गारंटी कार्यक्रम-1983, ग्रामीण युवा स्वरोज़गार प्रशिक्षण कार्यक्रम-1980, समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम-1980, जवाहर रोज़गार योजना, स्वयं सहायता समूह और नरेगा। इनसे सरकारी क्षेत्र के सहयोग से रोज़गार का सृजन हुआ है। - गैर सरकारी संस्था किस प्रकार सेवा क्षेत्र के विकास को सहयोग करता है? उदाहरण देकर लिखिए।
गैर-सरकारी संस्थाएँ निजी निवेश, मॉल, निजी अस्पताल, निजी स्कूल और निजी बैंकिंग व यातायात के ज़रिए सेवा क्षेत्र का विकास करती हैं। उदाहरण के तौर पर, निजी दूरसंचार कंपनियों ने मोबाइल और इंटरनेट को गाँव-गाँव तक पहुँचाया है, जिससे सेवा क्षेत्र का दायरा बहुत बढ़ गया है। - वर्तमान आर्थिक मंदी का प्रभाव भारत के सेवा क्षेत्र पर क्या पड़ा? लिखिए।
वर्तमान आर्थिक मंदी का विकसित राष्ट्रों के सेवा क्षेत्र पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जबकि भारत के सेवा क्षेत्र पर कम प्रभाव पड़ा — क्योंकि भारत की घरेलू माँग मज़बूत रही, पूँजी बाज़ार स्थिर रहा और मानवीय श्रम की दक्षता व विशाल श्रमशक्ति ने सेवा क्षेत्र को सँभाले रखा।
- तीन क्षेत्र: प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (उद्योग), तृतीयक (सेवाएँ)।
- GDP में सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा है; रोज़गार में कृषि सबसे आगे है।
- संगठित रोज़गार में सुरक्षा होती है, असंगठित में नहीं।
- रोज़गार की संख्या के साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है।
- तीसरा क्षेत्र = सेवा क्षेत्र; GDP में हिस्सा पुस्तक के अनुसार 55.1 प्रतिशत।
- मानव पूँजी के 5 घटक: भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा।
- Out Sourcing से भारत विश्व का सेवा प्रदाता बना; मंदी का असर भारत पर कम पड़ा।
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